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जब पस्त वेस्ट-इंडीज़ ने शक्तिशाली ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट का सबसे बड़ा कारनामा कर डाला

चढ़ता सूरज धीरे-धीरे, ढलता है, ढल जाएगा. वेस्ट इंडीज़ का सूरज ढल रहा था और उफान पर थी ऑस्ट्रेलिया. लगातार दो बार की वर्ल्ड चैंपियन टीम. बात 2003 की है. स्टीव वॉ की कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया की टीम थी कैलिप्सो की धरती वेस्ट इंडीज़ में. चार टेस्ट मैचों की सीरीज. पहले तीन मैच में रिकी पॉन्टिंग ने धागा खोल दिया.

पॉन्टिंग ने पहले तीन टेस्ट में दो सेंचुरी और दो हाफ सेंचुरी के दम पर 523 रन कूट दिए. नतीजा, शेन वॉर्न और ग्लेन मैक्ग्रा के बिना खेल रही ऑस्ट्रेलिया सीरीज में 3-0 से आगे हो गई. मैक्ग्रा सीरीज के तीसरे मैच में खेले थे लेकिन 36 ओवर फेंकने के बाद भी विकेट नहीं ले पाए थे. दरअसल उनकी बीवी जेन को कैंसर होने की पुष्टि हो चुकी थी. इसी के चलते वह सीरीज छोड़ घर लौट गए थे. बाद में वापस आए और खेले.

# जिंदा हो गया मुर्दा रबर

सीरीज का चौथा टेस्ट 9 से 13 मार्च तक एंटीगा में होना था. इसका कोई खास मतलब था नहीं. सीरीज पहले ही ऑस्ट्रेलिया के नाम हो चुकी थी. अंग्रेजी में इस टेस्ट को ‘डेड रबर’ लिखा जा रहा था. इस डेड रबर में किसी को इंट्रेस्ट नहीं था. इसी बीच पॉन्टिंग को वायरल हो गया और वह इस मैच से बाहर हो गए. लोगों का रहा-सहा इंट्रेस्ट भी गया. स्टीव वॉ ने टॉस जीता और पहले बैटिंग का फैसला किया.

अरुचि से भरी दुनिया में एक बंदा था, जिसे इस टेस्ट में बहुत इंट्रेस्ट था. जर्मेन लॉसन. इसी सीरीज के तीसरे टेस्ट में हैटट्रिक लेने वाला पेसर. इधर वॉ ने पहले बैटिंग का फैसला किया और उधर लॉसन ने अपना गंडासा पहंट लिया (हमारे यहां किसी धार वाली चीज की धार तेज करने को पहंटना कहते हैं). ऑस्ट्रेलिया की बैटिंग शुरू हुई. मैथ्यू हेडेन, डैरेन लीमन, जस्टिन लैंगर, एंडी बिकेल, ब्रेट ली, जेसन गिलेस्पी और स्टुअर्ट मैक्गिल. उस दिन इन सबमें कॉमन क्या था? सबको लॉसन ने निपटाया. ऑस्ट्रेलिया 240 पर ऑल आउट. यह टोटल उस सीरीज में रिकी पॉन्टिंग के हाईएस्ट स्कोर 206 से सिर्फ 34 रन ज्यादा था.

लेकिन ये दौर था 2003 का और वेस्ट इंडीज़ की टीम ढहने के लिए कुख्यात थी. बैटिंग के लिए आए मेजबानों ने किसी तरह से घिसट-घिसट कर 200 पार किया. निचले क्रम के बल्लेबाजों के दम पर अंततः टीम 240 तक पहुंच गई. इसमें लारा के 68 रन थे. आलम ये था कि विंडीज़ की पूरी टीम ऑस्ट्रेलिया जितने ओवर्स भी नहीं खेल पाई.

इधर एक अलग डेवलपमेंट में ऑस्ट्रेलिया ने लॉसन के एक्शन की शिकायत ICC से कर दी. ICC ने तुरंत प्रभाव से लॉसन को बॉलिंग करने से रोक दिया. मतलब दूसरी पारी में जब लैंगर और हेडेन बैटिंग करने आए तो उन्हें रोकने के लिए लॉसन नहीं थे. बस, फिर क्या था. शुरू हो गई आतिशबाजी. दोनों ने पहले विकेट के लिए 242 रन जोड़ डाले. लैंगर 111 रन बनाकर आउट हुए. हेडेन ने 173 जोड़े और ऑस्ट्रेलिया ने अपनी पारी खत्म की 417 पर.

# वॉ बनाम लारा

यह सब जल्दी-जल्दी हुआ. इतना जल्दी हुआ कि तीसरे ही दिन वेस्ट इंडीज़ की दूसरी पारी शुरू हो गई. वक्त तो खूब था, लेकिन रन इतने बनाने थे जितने चौथी पारी में कभी नहीं बने. इसीलिए क्रिस गेल और डेवोन स्मिथ ने बहुत संभलकर खेलना शुरू किया. दोनों ने साथ मिलकर लगभग 25 ओवर निकाल ही दिए थे. लेकिन तभी 25वें ओवर की पांचवीं बॉल पर गेल, वॉ को कैच थमा बैठे. 48 के टोटल पर गेल आउट हुए और 50 पर स्मिथ. स्कोर अभी 74 रन था कि डैरेन गंगा भी वापस हो लिए. अब एक बार फिर से जिम्मेदारी ब्रायन लारा पर आ गई. लारा ने रामनरेश सरवन के साथ मिलकर 91 रन जोड़े.

लारा ने क्रीज पर जितना वक्त बिताया उसमें उनके बल्ले और ज़ुबां, दोनों ही ने ऑस्ट्रेलिया को तकलीफ दी. उनकी बैटिंग के दौरान वॉ शॉर्ट कवर पर फील्डिंग कर रहे थे. ऑस्ट्रेलिया ने कॉट बिहाइंड की अपील की. अंपायर नहीं माना और लारा क्रीज में खड़े रहे. इस पर वॉ ने कहा,

‘मैं पहले ही कह रहा था, तुम तभी वॉक (अंपायर के फैसले का इंतजार किए बिना वापस चले जाना) करते हो जब तुम्हें सूट करता है.’

गुस्साए लारा ने कहा,

‘SHUT UP!’

इसके बाद अगले कुछ सेकेंड तक दोनों प्लेयर्स में जमकर कहासुनी हुई. लारा खूंखार तरीके से आगे बढ़कर वॉ के पास तक चले गए. इस पर अंपायर डेविड शेफर्ड बीच में आए और मामला शांत कराया. इसके कुछ देर बाद जब स्कोर 165 हुआ, लारा का ध्यान टूटा और मैक्गिल ने उन्हें बोल्ड कर दिया. उन्होंने 60 रन बनाए.

# मैक्ग्रा वर्सेज सरवन

अब सरवन का साथ देने आए शिवनारायण चंद्रपॉल. दोनों ने मिलकर पारी आगे बढ़ानी शुरू की. सरवन जहां तेजी से रन बना रहे थे वहीं चंद्रपॉल ने एंकर बनना तय किया. वॉ ने विकेट की तलाश में मैक्ग्रा को बोलिंग पर बुलाया. लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ. मैक्ग्रा को विकेट तो नहीं मिला, हां उन्होंने सरवन से लड़ाई जरूर कर ली.

मैक्ग्रा और सरवन के इस विवाद को क्रिकेट की सबसे गंदी लड़ाइयों में से एक माना जाता है. दोनों के बीच हुआ झगड़ा इस कदर बढ़ था कि मैक्ग्रा ने मैदान पर ही सरवन का गला चीरने की धमकी दे दी थी. उसका अलग किस्सा है.

ख़ैर मैच आगे बढ़ा. चंद्रपॉल और सरवन ने अपनी सेंचुरी पूरी की. 105 के निजी स्कोर पर सरवन ब्रेट ली की बॉल पर उन्हें ही कैच थमा बैठे. उनकी जगह आए विकेटकीपर रिडली जैकब्स खाता खोले बिना लौट गए. लेकिन चंद्रपॉल टिके रहे. दिन का खेल खत्म होने पर वेस्ट इंडीज़ 371 रन बना चुका था. चंद्रपॉल 103 और ओमारी बैंक्स 28 रन बनाकर नाबाद लौटे. अब मैच के आखिरी दिन विंडीज़ को जीत के लिए 47 रन बनाने थे. जबकि कंगारुओं को चाहिए थे चार विकेट.

पांचवे दिन, 13 मई 2003, की शुरुआत में ही ब्रेट ली ने चंद्रपॉल को विकेटकीपर एडम गिलक्रिस्ट के हाथों लपकवा दिया. स्कोर में सिर्फ एक रन जुड़ा था और अब ऑस्ट्रेलिया को जीत दिखने लगी थी. लेकिन इसके बाद क्रीज़ पर आए वासबर्ट ड्रेक ने जल्दी ही उनकी ये उम्मीद भी तोड़ दी. ड्रेक ने बैंक्स के साथ मिलकर जीत के लिए जरूरी 46 रन बना लिए. बैंक्स 47 तो ड्रेक्स 27 पर नाबाद लौटे. इतिहास बन चुका था. विंडीज़ ने वह कर दिखाया जो अब तक 1644 टेस्ट मैचों में नहीं हुआ था.

इस हार से सीरीज के रिजल्ट पर भले कोई फर्क नहीं पड़ा लेकिन इतिहास तो बदल ही गया. वेस्ट इंडीज़ टेस्ट क्रिकेट की चौथी पारी में सबसे ज्यादा रन बनाकर मैच जीतने वाली टीम बन गई. यह रिकॉर्ड आज भी कायम है.


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