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जब इंग्लैंड की दुकान में चोरी करते पकड़ा गया टीम इंडिया का खिलाड़ी!

1932 में क्रिकेट में कदम रखने के बाद से 1960 तक भारतीय टीम कुछ खास प्रदर्शन नहीं कर सकी. 1960 के बाद भारतीय टीम ने जीतना शुरू किया. लेकिन अब भी विदेशों में सीरीज़ जीत एक सपने जैसी ही थी. लेकिन फिर आया 70 का दशक. भारतीय टीम ने 1971 में पहले वेस्टइंडीज़ मात दी और फिर इंग्लैंड को इंग्लैंड में जाकर हराया.

यहां से भारतीय क्रिकेट की एक नई कहानी शुरू होती है. अजित वाडेकर भारतीय क्रिकेट के पहले ऐसे कप्तान, जिन्होंने इंग्लैंड में इंग्लैंड को हराया. इस जीत के बाद भारतीय जब 1974 में इंग्लैंड पहुंची, तो भारतीय फैंस की उम्मीदें बहुत ज़्यादा थी. अब लगने लगा था कि भारतीय टीम विदेशों में भी विरोधियों को धूल चटा सकती है. लेकिन तभी इस सीरीज़ में वो हुआ, जिसने भारतीय फैंस ही नहीं, भारतीय क्रिकेट को भी हिलाकर रख दिया.

जब 1974 में भारत, इंग्लैंड पहुंचा

साल 1974 अप्रैल के महीने में अजित वाडेकर की कप्तानी वाली भारतीय टीम दुनिया की नंबर एक टीम थी. ये पहला मौका था, जब किसी एक कप्तान की कप्तानी में भारतीय टीम दूसरी बार इंग्लैंड गई थी. इंग्लिश समर में वनडे क्रिकेट नाम की नई बला भी भारत के सामने अभी ही आई थी. भारतीय टीम मैनचेस्टर में पहला टेस्ट टक्कर देकर 113 रनों से हार गई. लेकिन मैच के दूसरे टेस्ट में चीज़ें बदतर से भी बदतर होती चली गईं.

Bishan Bedi
बिशन सिंह बेदी. फोटो: ICC

क्योंकि टीम में अंदर ही मनमुटाव शुरू हो गया था. टीम के सीनियर प्लेयर बिशन सिंह बेदी और कप्तान अजित वाडेकर पहले ही उलझे हुए थे. सीरीज़ से पहले अप्रैल-जून के महीनों में इतनी बारिश थी कि भारतीय टीम प्रैक्टिस भी नहीं कर पाई. बारिश की वजह से पिचों से तेज़ गेंदबाज़ों को फायदा मिल रहा था. जबकि भारतीय टीम के पास उस वक्त कोई भी तेज़ गेंदबाज़ नहीं होता था. उस दौरे पर भी टीम के पास चार स्पेशलिस्ट स्पिनर ही मौजूद थे.

इतना ही नहीं, एक भारतीय खिलाड़ी को तो उस समय इंग्लैंड में किसी दुकान से सामान चोरी करते भी पकड़ा गया था. इन सभी चीज़ों का असर खेल पर भी पड़ा.

20 जून, 1974 से लॉर्ड्स के मैदान पर दूसरा टेस्ट

दूसरे टेस्ट के पहले दो दिन में इंग्लैंड की टीम ने विशाल 629 रन बना डाले, जो कि लॉर्ड्स में ही नहीं, बल्कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद टेस्ट में उनका सबसे बड़ा स्कोर था. भारतीय टीम की फेमस स्पिन तिकड़ी बुरी तरह से फ्लॉप हो गई थी.

लेकिन फिर भी भारतीय फैंस को ये उम्मीद थी कि अभी बल्लेबाज़ी में कमाल होगा. क्योंकि टीम के पास गावस्कर, इंजीनियर, वाडेकर, ब्रजेश पटेल, सोलकर, आबिद अली और मदन लाल जैसे खिलाड़ी मौजूद थे. विश्वास 1971 की जीत का भी था. लेकिन टेस्ट के तीसरे दिन भारतीय टीम 302 रनों पर ऑल-आउट हो गई. अब इंग्लैंड की टीम ने पहली पारी के आधार पर 327 रनों की बढ़त ले ली. साथ ही भारतीय टीम को फॉलो-ऑन मिला. तीसरे दिन का खेल खत्म होने पर टीम का स्कोर 2 रन था, बिना कोई विकेट खोए.f

तीन दिन के खेल के बाद आया रेस्ट डे. रविवार के दिन भारतीय दर्शकों को ये उम्मीद थी कि अगला सवेरा भारतीय टीम के पक्ष में होगा. क्योंकि विकेट बल्लेबाज़ी के लिए शानदार था, साथ ही भारत का बल्लेबाज़ी लाइनअप भी कमाल था. इससे भी ज़्यादा विश्वास इस बात का था कि आर्नॉल्ड, ओल्ड, ग्रेग, हेन्ड्रिक और अंडरवुड के नाम वाला इंग्लैंड बॉलिंग लाइनअप बहुत ज़्यादा शक्तिशाली नहीं है.

24 जून 1974 की तारीख

24 जून 1974 के दिन क्रिकेट के मैदान पर वो हुआ, जो न उस दिन से 42 साल पहले (1932 से) हुआ था और न ही 46 साल(2020 तक) बाद. यानी भारतीय बल्लेबाज़ी का सबसे बड़ा कोलेप्स.

Sunil Gavaskar Walking 800
Out होकर पैवेलियन की तरफ जाते Sunil Gavaskar (गेटी, फाइल)

सुनील गावस्कर, फारूक इंजीनियर के साथ पारी शुरू करने उतरे, जबकि इंग्लैंड के लिए आर्नॉल्ड और ओल्ड ने गेंदबाज़ी की शुरुआत की. लेकिन खेल शुरू होने के सिर्फ 30 मिनट के अंदर-अंदर लोगों के ट्रांसिज़टर्स पर इंग्लैंड से शोर की आवाज़े आने लगीं. इंग्लैंड दर्शक खुशी से झूम रहे थे. और खबर थी-

”भारतीय टीम ने सिर्फ 25 के स्कोर तक अपने पांच विकेट गंवा दिए हैं.”

लेकिन ये सब कैसे हुआ. गावस्कर, इंजीनियर, वाडेकर, विश्वनाथ, पटेल जैसे दिग्गज बल्लेबाज़ 30 मिनट में आउट कैसे हो गए? लेकिन ऐसा हुआ था. आर्नॉल्ड की गेंदों पर उस दिन न तो गावस्कर (5 रन) का बल्ला चला और ना ही इंजीनियर (0 रन) कोई इंजीनियरिंग कर पाए. विश्वनाथ(5 रन), पटेल(1 रन), वाडेकर(3 रन) सब आते-जाते रहे.

इसके बाद ओल्ड ने भी औपचारिकता पूरी करते हुए भारतीय बल्लेबाज़ी को तहस नहस कर दिया. 28 के स्कोर पर आबिद अली (3 रन) आउट. उसी ओवर में मदन लाल (2 रन) भी पवेलियन लौट गए. अब तक स्कोर 30 रन पर सात विकेट हो चुका था. हालांकि एकनाथ सोल्कर एक छोर पर खड़े रहे. लेकिन फिर भी वो अकेले कुछ नहीं कर सकते थे.

लेकिन फिर प्रसन्ना (5 रन) और बेदी (0 रन) एक ही ओवर में आउट होकर चले गए. इसके बाद तो स्कोर 42 पर आठ, 42 पर नौ और फिर चंद्रशेखर तो बल्लेबाज़ी के लिए आ भी नहीं सके. हालांकि उनकी बल्लेबाज़ी का अब कोई मतलब बचा भी नहीं था.

उस दिन भारतीय टीम सिर्फ 77 मिनट के फेर में 17 ओवरों में ढेर हो गई. सोलकर 18 रन बनाकर नॉट-आउट रहे और टीम इंडिया सिर्फ 42 रन ही बना सकी. ये भारतीय टीम का लॉर्ड्स और क्रिकेट के किसी भी मैदान पर सबसे कम स्कोर है. इंग्लैंड ने उस मुकाबले को पारी और 285 रनों से जीता. चौथे दिन की सुबह ही मैच इंग्लैंड ने अपने कब्ज़े में कर लिया.

दूसरे टेस्ट की हार के साथ ही भारत ने सीरीज़ गंवा दी, जबकि तीसरे टेस्ट में भी टीम इंडिया को हार मिली. भारतीय क्रिकेट में ये टेस्ट सबसे खराब प्रदर्शन के लिए याद किया जाता है.


जब 1983 वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में कपिल देव के सामने कूदे भारतीय फैन्स कूदे और इंग्लैंड कंफ्यूज हो गई

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