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वो नेता जिसने पी चिदंबरम से कई साल पहले जेल में अंग्रेजी टॉयलेट की मांग की थी

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खाना एक सकर्मक क्रिया है. रोटी खाई. पैसा खाया.

पाखाना एक अकर्मक क्रिया है. इसमें किसी ऑबजेक्ट की जरूरत नहीं क्रिया के लिए.

पर किसी किसी के लिए ये सकर्मक क्रिया होती है. उन्हें कमोड की जरूरत होती है.

जैसे पी चिदंबरम. वकील. नेता. पूर्व गृह और वित्त मंत्री. हाल पता- तिहाड़ जेल. दिल्ली.

ये पता कैसे चला. गुरुवार को. आईएनएक्स मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू सीबीआई कोर्ट के फैसले से. चिदंबरम को कोर्ट ने 19 सितंबर तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया. आदेश के बाद चिदंबरम ने मांगी. रिहाई नहीं. वो यहां मिलनी भी नहीं थी. कुछ सहूलियतें. उसमें एक था. कमोड.

ये सुन एक मोड़ याद आ गया. इतिहास का. मोदी का. गुजरात वाले. नरेंद्र नहीं. पीलू.

पीलू मोदी सांसद थे. गुजरात की गोधरा लोकसभा से. इंदिरा के धुर विरोधी. राजनीतिक रूप से. व्यक्तिगत रूप से मित्र.

इंदिरा गांधी के पॉलिटिकल विरोधी मगर पर्सनल फ्रेंड.
इंदिरा गांधी के पॉलिटिकल विरोधी मगर पर्सनल फ्रेंड.

इमरजेंसी लागू होने पर उन्हें भी मीसा ( मेंटिनेंस ऑफ इंटरनल सेक्योरिटी एक्ट) के तहत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया. दिल्ली के करीब रोहतक जेल में रखे गए पीलू. कुछ रोज बाद उन्हें इंदिरा की एक चिट्ठी मिली. मजमून ये था, कि कोई दिक्कत तो नहीं पीलू.

पीलू ने कहा. बाकी सब खैरियत, बस संडास संत्रास देता है.

इंदिरा ने फौरन जेल अथॉरिटी को हुकुम दिया. इंतजाम करो.

जेल वालों की अलग मुसीबत. रोहतक में उन दिनों कमोड नहीं मिलते थे. मैडम प्राइम मिनिस्टर का मामला था, इसलिए अमल भी फौरन होना था. तब जेलर ने एक युक्ति निकाली. शाम के वक्त राजमिस्त्री को बुलाया. एक जगह बैठे पीलू को दिखाया. और कहा, इनके लिए संडास बनाना है. कमोड वाला.

मिस्त्री, होशियार. उसने रात भर में तामीर कर दिया. सीमेंट और रोड़ी से कमोड जैसे आकार का संडास बना दिया. जहां इत्मिनान से बैठकर पाखाना किया जा सके.

शरीर से भारी-भरकम थे पीलू, इसलिए ऐसी जरूरत आ पड़ी थी.
शरीर से भारी-भरकम थे पीलू, इसलिए ऐसी जरूरत आ पड़ी थी.

कोई पूछे तो पूछ सकता है. इतने नेता बंद. मगर एक पीलू मोदी की ही ये मांग क्यों. वो शरीर से भारीभरकम थे. इसलिए.

कोई पूछे तो पूछ सकता है. चिदंबरम क्यों बंद. और वहीं, जहां सपूत कार्ति बंद थे. कोर्ट ने कहा है. इसलिए.

जाते जाते दो मुहावरे आपकी नजर. चिदंबरम के नहीं. खाना और पाखाना के. जहां से बात शुरू हुई.

खाना खराब- सब कुछ बर्बाद होना.

पाखाना खता होना- बहुत डरा होना.


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