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'बरसात' से सेंसेशन बनीं निम्मी को जब सेलिब्रेटी ने किस करना चाहा, तो विदेशी मीडिया ने क्या छापा?

मधुबाला. 14 फरवरी, 1933 को दिल्ली में जन्मीं. उसके ठीक 4 दिन बाद, लगभग 250 किलोमीटर दूर एक और लड़की पैदा हुई. आगरा में. 18 फरवरी, 1933 को. लड़की का नाम नवाब बानो. जिन्हें बाद में निम्मी नाम से पहचाना जाने वाला था. कौन थीं ये निम्मी?

चलिए ऐसा करते हैं, आपको उनके चार किस्से बताते हैं. इससे आप उनको नज़दीक से जान भी लेंगे. और अगर जान लेंगे, तो शर्तिया मुतासिर हुए बिना भी न रह पाएंगे.

# 1) हर कोई एक्टर चाहेगा कि स्ट्रगल हो तो निम्मी सा-

निम्मी के पिता मेरठ में मिलट्री कॉन्ट्रैक्टर थे. निम्मी की मां वाहिदान भी एक एक्ट्रेस थीं. उस वक्त के दिग्गज डायरेक्टर महबूब खान से भी वाहिदान की अच्छी जान पहचान थी. बचपन में निम्मी अपनी अम्मी के साथ ही रहती थीं. लेकिन जब निम्मी सिर्फ ग्यारह साल की थीं, वाहिदान का इंतकाल हो गया. निम्मी अब अपनी नानी के साथ एबटाबाद रहने लगीं. पार्टिशन हुआ तो एबटाबाद पाकिस्तान में चला गया. नानी मुंबई आ गईं. अब निम्मी और उनकी नानी, निम्मी की मौसी, के साथ रहने लगीं. ज्योति था उनकी मौसी का नाम. उनके मौसा का नाम ग़ुलाम मुहम्मद दुर्रानी. उस वक्त के फेमस गायक और म्यूज़िक डायरेक्टर.

महबूब खान का स्टूडियो सेंट्रल स्टूडियो जीएम दुर्रानी के घर के नज़दीक ही था. निम्मी एक दिन वहां शूटिंग देखने गईं. तब महबूब खान अपनी मूवी ‘अंदाज़’ की शूटिंग कर रहे थे. ‘अंदाज़’ में मुख्य कलाकार थे, दिलीप कुमार, राजकपूर और नर्गिस.

शूटिंग देखने के लिए भी महबूब ने अपने स्टूडियो में एक बालकॉनी बनाई हुई थी. निम्मी वहीं पर खड़ी होकर शूटिंग देख रहीं थीं. कुर्सियां खाली थीं, लेकिन संकोच के चलते वो बैठी नहीं. वहीं पर जद्दनबाई भी बैठीं थीं. नर्गिस की मां. उन्होंने इस संकोची लड़की को देखा तो बोलीं-

बिटिया खड़ी क्यूं हो? बैठ जाओ.

लड़की जद्दनबाई के बगल में ही बैठ गई.

इन दिनों राजकपूर अपनी आने वाली फिल्म ‘बरसात’ को लेकर काफी परेशान चल रहे थे. उन्हें ‘बरसात’ के लीड एक्ट्रेस के रोल में तो नर्गिस मिल चुकी थीं लेकिन सेकेंड लीड एक्ट्रेस के लिए एक नए चेहरे की तलाश थी. कोई शर्मीली लड़की. काफी ऑडिशन्स किए जा चुके थे लेकिन कोई एक्ट्रेस नहीं जम पाई.

खैर, राजकपूर जद्दनबाई की काफी इज्ज़त करते थे, इसलिए जब शूट खत्म हुआ तो वो जद्दनबाई को दुआ सलाम करने आए. वहां उन्होंने निम्मी को देखा और जद्दनबाई से पूछा-

ये लड़की कौन है?

इसके एक हफ्ते बाद निम्मी के घर में एक कार आकर रुकी, और उसमें बैठा ऑफिस बॉय निम्मी को अपने साथ ले गया. बोला-

महबूब सा’ब ने बुलाया है.

निम्मी की चार बेहतरीन फिल्मों के पोस्टर्स. ('दाग़', 'उड़न खटोला', 'कुंदन' और 'दीदार')
निम्मी की चार बेहतरीन फिल्मों के पोस्टर्स. (‘दाग़’, ‘उड़न खटोला’, ‘कुंदन’ और ‘दीदार’)

निम्मी महबूब खान के ऑफिस पहुंची तो वहां महबूब ने उन्हें राजकपूर से मिलवाया-

ये राजकपूर हैं. ये पृथ्वीराज कपूर के बेटे हैं. ये तुम्हें अपनी पिक्चर में लेना चाहते हैं.

निम्मी किसी को नहीं जानती थीं. एक बार मुलाकात हो जाने के बावज़ूद, राजकपूर को भी नहीं. इस मुलाकात के बाद निम्मी फिर घर वापस आ गईं. एक हफ्ते बाद कार और ऑफिस बॉय फिर से निम्मी के घर आए, अबकी बार उनको राजकपूर के ऑफिस ले जाने के लिए. निम्मी को कहीं अकेले जाने की इजाज़त नहीं थीं. अपने एक दूर के भाई के साथ वो राजकपूर के ऑफिस चल दीं. वहां उनको पता चला कि उनका ऑडिशन लिया जाएगा. तैयार वो थीं नहीं. अपनी लाइनें तो याद कर लीं, उर्दू का तलफ्फुज़ भी अच्छा था, लेकिन ऑडिशन के वक्त घबरा गईं. आंखों से आंसू आने लगे. देखने वालों को लगा, आंसू इंटेंस एक्टिंग के चलते आए हैं. निम्मी को स्टैंडिंग ओवेशन मिला. और फिर ‘बरसात’ के लिए रोल भी.

‘बरसात’ सुपरहिट रही. उस वक्त तक की सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन गई. नर्गिस और राजकपूर जैसे एक्टर्स के बावज़ूद एक सेकेंड लीड रातों-रात सेंसेशन बन गई. सेंसेशन का नाम निम्मी. निम्मी इस पूरे वाकये को याद करते हुए बताती हैं-

कुदरत को जब कुछ मंज़ूर होता है तो हालात वैसे ही हो जाते हैं. अगर राजकपूर, जद्दनबाई के पैर छूने नहीं आते तो मुझे देखते भी नहीं.

# 2) जब डिस्ट्रीब्यूटर्स निम्मी के रोल को देखकर गुस्सा हो गए-

‘आन’. इंडिया की पहली फुल लेंथ कलर मूवी. इस मूवी और निम्मी से जुड़े कई किस्से हैं. शॉर्ट में दो बताते हैं.

‘आन’ एक बहुत बड़े बजट की फिल्म थी. लेकिन जब डिस्ट्रीब्यूटर्स ने इसे देखा तो इसे खरीदने से इंकार कर दिया. वजह थी निम्मी के किरदार का ज़ल्दी मर जाना. हालांकि निम्मी ने तब तक सेकेंड लीड रोल ही किए थे, लेकिन सारे इतने दमदार थे कि हर रोल निम्मी की शोहरत के लिए सीढ़ी बनते गए. यूं डिस्ट्रीब्यूटर्स का मानना था कि अगर निम्मी के किरदार मंगला को ज़ल्दी मार देंगे तो दर्शकों का आधा इंट्रेस्ट चला जाएगा. फिल्म के प्रोड्यूसर-डायरेक्टर महबूब खान ने डिस्ट्रीब्यूटर्स की नाराज़गी को सीरियसली लिया और फिल्म पूरी बन जाने के बाद मंगला का एक ड्रीम सिक्वेंस मूवी में डाला, जिससे उनके रोल और मूवी दोनों की लंबाई और बढ़ गई.

# 3) जब विदेशी अख़बारों में निम्मी के लिए छपा, ’अनकिस्ड गर्ल ऑफ़ इंडिया.’-

‘आन’ एक बहुत बड़े बजट की फिल्म थी. इसके हर सीन की शूटिंग पहले कलर कैमरे से फिर ब्लैक एंड वाइट कैमरे से होती. ये ‘प्लान बी’ था. कि अगर दर्शकों को कलर्ड वर्ज़न पसंद नहीं आया तो ब्लैक एंड वाइट वर्ज़न तो है ही.

‘आन’ को केवल बनाया ही बड़े बजट से नहीं गया था, बल्कि इसकी रिलीज़ भी बड़े ग्रैंड तरीके से हुई. लंडन में इसका प्रीमियर रखा गया. वहां के आलिशान ‘रिआल्टो थियेटर’ में.

अंग्रेज़ी दर्शकों के लिए इस मूवी को ‘आन’ नहीं, ‘सेवेज प्रिंसेस’ के नाम से रिलीज़ किया जाना था. लंदन वाले प्रीमियर में महबूब खान के साथ उनकी पत्नी और निम्मी भी आईं थीं. प्रीमियर में लंदन ही नहीं कई देशों के कई सेलिब्रिटीज़ और फ़िल्मी कलाकार आए थे. इनमें से एक थे एरल लेज़ली थॉमसन फ्लिन. हॉलीवुड के उस वक्त के बेहतरीन एक्टर्स में से एक. और जैसा कि वेस्टर्न वर्ल्ड में रिवाज़ है वो निम्मी के सम्मान में उनका हाथ चूमने के लिए आगे बढ़े. निम्मी ने अपना हाथ पीछे कर लिया और बोलीं-

मैं एक हिंदुस्तानी लड़की हूं, आप मेरे साथ ये सब नहीं कर सकते.

चूंकि ये सब एक मूवी के प्रीमियर के दौरान हो रहा था, तो ज़ाहिर तौर पर वहां पर पत्रकार भी मौज़ूद थे. अगले दिन निम्मी के बारे में छपा, ’अनकिस्ड गर्ल ऑफ़ इंडिया.’ यानी, भारत की एक ऐसी लड़की जिसको चूमा न जा सका.

'आन' के दो पोस्टर (लेफ्ट वाला 'आन' का फ्रेंच वर्ज़न है और राईट वाला इस मूवी के रिलीज़ से बहुत पहले का पोस्टर है. इसमें नर्गिस का नाम भी लिखा हुआ है. जबकि बाद में नर्गिस वाला रोल नादिरा ने प्ले किया था.)
‘आन’ के दो पोस्टर (लेफ्ट वाला ‘आन’ का फ्रेंच वर्ज़न है और राइट वाला इस मूवी के रिलीज़ से बहुत पहले का पोस्टर है. इसमें नर्गिस का नाम भी लिखा हुआ है. जबकि बाद में नर्गिस वाला रोल नादिरा ने प्ले किया था.)

# 4) तबस्सुम रोतीं नहीं तो निम्मी को ‘निम्मी’ नाम नहीं मिलता-

निम्मी को निम्मी नाम तो राजकपूर ने दिया था. वरना उनका असली नाम नवाब बानो था. इस बारे में तबस्सुम बड़ी इंट्रेस्टिंग स्टोरी बताती हैं. उनको, यानी तबस्सुम को प्रेम से सब किन्नी पुकारा करते थे. ये किन्नी नाम उन्हें राजकपूर ने ही दिया था. राजकपूर हमेशा तबस्सुम के मम्मी पापा से कहते थे कि उन्होंने अपनी बेटी का इतना मुश्किल नाम क्यूं रखा. इससे अच्छा तो इसका नाम किन्नी रखना था. ये तब की बात है जब तबस्सुम बहुत छोटी थीं. खैर बात आई गई हो गई. लेकिन तबस्सुम को भी अपना ये नाम बहुत अच्छा लगा.

इसके बाद राजकपूर एक बार फिर तबस्सुम के घर आए और तबस्सुम के पापा से बोले-

मैं अपनी मूवी ‘बरसात’ में एक नई लड़की लॉन्च कर रहा हूं. जिसका नाम नवाब बानो है. लेकिन नवाब बानो, बहुत मुश्किल लगता है बोलने में, इसलिए मैं उसका नाम किन्नी रख रहा हूं.

बस ये सुनना था कि बेबी तबस्सुम ने दहाड़ मार-मार के रोना शुरू कर दिया और सारा घर अपने सर पर उठा लिया. तो तय हुआ कि किन्नी नाम तबस्सुम के लिए रहने देते हैं और नवाब बानो को निम्मी नाम से पुकारते हैं. बस तबसे नवाब बानो नाम पीछे छूट गया और निम्मी नाम रह गया.

तो निम्मी के 4 किस्से पढ़कर आपको काफी हद तक अंदाज़ा हो गया होगा, कि ये एक्ट्रेस 50-60 के दशक में कितना बड़ा नाम थीं. लेकिन इनका करियर बहुत छोटा रहा. 1965 में इन्होंने डायरेक्टर महबूब खान के महबूब राइटर एस. अली रज़ा से शादी कर ली. उसके बाद इन्होंने कोई नई फिल्म साइन नहीं की. हालांकि इनकी लास्ट मूवी 1986 में रिलीज़ हुई. नाम था ‘लव ऑफ़ गॉड’. ये ‘मुग़ल-ए-आज़म’ फेम डायरेक्टर के. आसिफ़ की मूवी थी. इसमें लीड रोल में गुरुदत्त को साइन किया गया था. पहले ये लेट हुई गुरदत्त की असमय मृत्यु के चलते. और गुरुदत्त वाला रोल दिया गया संजीव कुमार को.

फिर 1971 में सिर्फ 48 साल में के. आसिफ़ भी गुज़र गए और ये फिल्म आधी ही रह गई. बाद में के. आसिफ की पत्नी ने डायरेक्टर के. सी. बोकाड़िया के साथ मिलकर जैसे-तैसे ‘लव ऑफ़ गॉड’ को पूरा किया और 1986 में इसे रिलीज़ कर दिया. मूवी के अंत में इस बात का ज़िक्र भी है. निम्मी भी इस मूवी के बारे में कहती हैं-

के. आसिफ़ इस मूवी के लिए कितना कुछ करना चाहते थे.

नवाब बानो की 87 साल की उम्र में 25 मार्च 2020 को दुनिया छोड़ गईं.


वीडियो देखें:

गली बॉय और अनन्या पांडे को फिल्म फेयर अवॉर्ड मिलने के बाद सलमान खान का वीडियो वायरल हो रहा है-

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