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जब अमिताभ बच्चन ने श्रीदेवी को मनाने के लिए गुलाबों से भरा ट्रक भेज दिया

साल 1988 की बात है. अपनी फिल्म ‘विजय’ की रिलीज़ के ठीक बाद ‘दीवार’ फेम डायरेक्टर यश चोपड़ा घर से कहीं जा रहे थे. सड़क से गुज़रते समय उन्हें ढेर सारी फिल्मों के पोस्टर लगे हुए दिखाई दिए. इन सभी पोस्टर्स में एक चीज़ कॉमन थी. कि ये सब एक्शन फिल्मों के पोस्टर थे. बस हर फिल्म में एक्टर और उसके हाथ में पकड़ी हुई बंदूक ही अलग थी. यश चोपड़ा की पिछली पांच फिल्में फ्लॉप हो चुकी थीं. इनमें ‘काला पत्थर’, ‘सिलसिला’, ‘मशाल’ जैसी फिल्मों ने क्रिटिकल एक्लेम पाया था, और बाद में जाकर क्लासिक मूवीज़ गिनी गईं. लेकिन तब बॉक्स ऑफिस पर बहुत कमाल नहीं दिखा पाईं. यश चोपड़ा अपनी अगली मूवी को लेकर उधेड़बुन में थे. वो लगातार सोच रहे थे कि मैं क्या कर रहा हूं. उन दिनों यश चोपड़ा एक हिट फिल्म बनाना चाहते थे. इसी आत्मावलोकन सेशन के दौरान यश के दिमाग में एक आइडिया आया. अब वो हिट फिल्म का मोह छोड़, अपने मन की एक फिल्म बनाना चाहते थे. मारपीट, गोली-बंदूक से दूर. एक मुलायम सी, प्यारी सी, सुहानी फिल्म.

यश चोपड़ा ने तय किया कि जैसे एक्शन फिल्मों में फाइट सीन्स हाइलाइट होते हैं, वो वैसी ही एक रोमैंटिक फिल्म बनाएंगे. उनकी फिल्म में 9 गाने होंगे और वो गाने ही फिल्म की हाइलाइट होंगे. अपने क्राफ्ट और क्रिएटिविटी से समझौता नहीं करने वाले इस फैसले से एक फिल्म का आइडिया जन्मा. नाम था – चांदनी.

‘चांदनी’ सिर्फ यश चोपड़ा के लिए ही नहीं, हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के लिए भी एक नई शुरुआत थी. मेल डॉमिनेटेड हिंदी फिल्म इंडस्ट्री यानी बॉलीवुड में एक बड़े बजट की महिला केंद्रित फिल्म बनने जा रही थी. अपने दौर के दो बड़े हीरो ऋषि कपूर और विनोद खन्ना, फिल्म में साइड रोल्स कर रहे थे. मुख्य भूमिका श्रीदेवी निभा रही थीं.

 फिल्म चांदनी के पोस्टर पर श्रीदेवी और ऋषि कपूर.
फिल्म चांदनी के पोस्टर पर श्रीदेवी और ऋषि कपूर.

14 सितंबर, 1989 को ‘चांदनी’ रिलीज़ हुई और बड़ी हिट साबित हुई. श्रीदेवी को फीमेल अमिताभ बच्चन कहा जाने लगा. क्योंकि उनका फिल्म में होना भर, सफलता की गारंटी बन गया था. दूसरी तरफ श्रीवेदी ने अमिताभ बच्चन के साथ काम करना बंद कर दिया था. जब श्रीदेवी से इसकी वजह पूछी गई, तो उन्होंने कहा-

”जिस फिल्म में अमित जी होते हैं, उसमें किसी और के करने के लिए कहां कुछ होता है.”

अब जब अमिताभ बच्चन और श्रीदेवी का ज़िक्र छिड़ ही गया, तो सबसे पहले उन्हीं का किस्सा सुनिए.

1. अमिताभ ने जब श्रीदेवी को मनाने के लिए गुलाबों से भरा ट्रक भेजा

1991 में मुकुल आनंद, अमिताभ बच्चन के पास फिल्म ‘खुदा गवाह’ की स्क्रिप्ट लेकर पहुंचे. बच्चन ने कहानी सुनते ही कहा कि इस फिल्म की हीरोइन श्रीदेवी होंगी. इससे पहले अमिताभ और श्रीदेवी ‘इंक़लाब’ और ‘आखिरी रास्ता’ जैसी फिल्मों में साथ काम कर चुके थे. पर ये अमिताभ को भी पता था कि श्रीदेवी उनके साथ काम नहीं करेंगी. उन्होंने इसका एक तोड़ निकाला. सरोज खान के साथ श्रीदेवी एक गाने की शूटिंग कर रही थीं. अमिताभ ने उस लोकेशन पर गुलाब के फूलों से भरा एक ट्रक भेजा. श्रीदेवी को पास बुलाकर ट्रक खाली कर दिया गया. श्रीदेवी को बच्चन का ये जेस्चर बड़ा स्वीट लगा. वो ‘खुदा गवाह’ में काम करने को तैयार हो गईं. लेकिन उनकी एक शर्त थी. शर्त ये कि वो इस फिल्म में डबल रोल करेंगी. श्रीदेवी इसमें मां और बेटी दोनों का किरदार निभाना चाहती थीं. सनद रहे कि हम 80-90 के दशक की बात कर रहे हैं. अमिताभ बच्चन की फिल्म में पहली बार कोई हीरोइन डबल रोल करने का सोच रही थी. श्रीदेवी की शर्त मान ली गई. तब जाकर ‘खुदा गवाह’ बनी. मगर आज अपन ‘चांदनी’ के बनने की कहानी बता रहे हैं. यही वो फिल्म थी, जिसने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को उसकी नई फीमेल सुपरस्टार दी.

अमिताभ श्रीदेवी के साथ फिल्म खुदा गवाह में काम करना चाहते थे. मगर श्रीदेवी ने अमिताभ के साथ काम करना बंद कर दिया था.
अमिताभ श्रीदेवी के साथ फिल्म खुदा गवाह में काम करना चाहते थे. मगर श्रीदेवी ने अमिताभ के साथ काम करना बंद कर दिया था.

2. क्या अनिल कपूर ने अकड़ में यश चोपड़ा की फिल्म ठुकरा दी?

अपनी नई फिल्म बनाने के लिए यश चोपड़ा हीरोज़ के बदले हीरोइन्स की शरण में पहुंचे. यश चोपड़ा की ‘दाग’ में राखी, ‘सिलसिला’ में रेखा और ‘फासले’ में फराह, चांदनी नाम के किरदार निभा चुकी थीं. प्लान ये था कि इस नई फिल्म में ‘रेखा’ चांदनी का टाइटल कैरेक्टर प्ले करेंगी. रोहित के किरदार के लिए अनिल कपूर को अप्रोच किया गया. अनिल कपूर यश चोपड़ा के साथ ‘मशाल’ और ‘विजय’ जैसी फिल्मों में काम कर चुके थे. मगर इस फिल्म के लिए उन्होंने यश चोपड़ा को मना कर दिया. वजह क्या थी? अनिल ने कहा कि वो पूरी फिल्म में व्हील चेयर पर नहीं बैठ सकते. जिन्होंने भी उनकी ये वजह सुनी, उनके मुताबिक ये अनिल का बड़बोलापन था. स्टार्स वाले नखरे थे. कुछ समय पहले अनिल कपूर ने अपने एक इंटरव्यू में ‘चांदनी’ में काम नहीं करने की असली वजह बताई. इंडिया टुडे से बात करते हुए अनिल ने बताया –

”तब मैं उस मानसिक स्थिति में नहीं था कि पूरी फिल्म में व्हील चेयर पर बैठा रह सकूं. ‘चांदनी’ ऑफर किए जाने से कुछ ही दिन पहले मेरा एक एक्सीडेंट हो गया था. मैं ढाई महीने तक बिस्तर पर पड़ा रहा. अपने पांव को किसी भी हालत में ठीक करने की कोशिश करता रहा. मगर ये समय मेरे करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ. मैंने सोचा कि मैं बहुत तेज दौड़ रहा हूं पर कहीं पहुंच नहीं रहा. मैं फिल्मों में काम करना चाहता था. इसलिए एक के बाद एक बिना कुछ सोचे-समझे फिल्में किए जा रहा था. ये अहसास मुझे उन ढाई महीनों में हुआ. यही वजह रही कि जब मुझे ‘चांदनी’ के लिए अप्रोच किया गया, तो मैंने मना कर दिया. क्योंकि मैं पूरी फिल्म व्हील चेयर में नहीं बैठ सकता था. मैं वो पहला शख्स था, जिसने ‘चांदनी’ की कहानी सुनने के बाद यश जी को फोन किया और कहा कि ये पिक्चर हिट है.”

अनिल कपूर यश चोपड़ा की पिछली फिल्म विजय पर भी साथ काम किया था. और उनका एक्सीडेंट भी हो गया था. इसी वजह से उन्होंने चांदनी में काम करने से मना कर दिया. मिस्टर इंडिया के बाद वो सुपरस्टार बन चुके थे.
अनिल कपूर यश चोपड़ा की पिछली फिल्म विजय पर भी साथ काम किया था. और उनका एक्सीडेंट भी हो गया था. इसी वजह से उन्होंने चांदनी में काम करने से मना कर दिया. 

अनिल के मना करने के बाद यश चोपड़ा ऋषि कपूर के पास पहुंचे. ऋषि फिल्म में काम करने को तैयार हो गए. मगर यश को लगने लगा कि ऋषि और रेखा की जोड़ी परदे पर जमेगी नहीं. रेखा को ड्रॉप कर दिया गया. ऋषि कपूर के साथ श्रीदेवी की जोड़ी बनाई गई. इससे पहले श्रीदेवी और ऋषि कपूर डायरेक्टर हरमेश मल्होत्रा की ‘नगीना’ में काम कर चुके थे, जो कि हिट रही थी. देविका के किरदार के लिए माधुरी दीक्षित, मीनाक्षी शेषाद्री और माधवी जैसी हीरोइन्स को कास्ट करने की बात चली. मगर इन सभी लोगों ने इस रोल को छोटा बताते हुए फिल्म में काम करने से इन्कार कर दिया. फाइनली यश ने जूही चावला से बात की. ‘क़यामत से क़यामत तक’ की रिलीज़ के बाद जूही स्टार बन चुकी थीं. मगर वो श्रीदेवी की बहुत बड़ी फैन थीं. इस वजह से वो फिल्म में गेस्ट रोल करने को तैयार हो गईं. ये चीज़ जूही के फेवर में काम कर गई. 1993 में जब यश चोपड़ा ने ‘डर’ बनाई, तो उसमें जूही को लीड रोल दिया गया. इस तरह से ‘चांदनी’ की फाइनल स्टारकास्ट थी- श्रीदेवी, ऋषि कपूर, विनोद खन्ना और जूही चावला.

3. श्रीदेवी ने क्यों बोला – ‘मुझे शाहरुख वाला रोल मिलता तो फिल्म करती’

यश चोपड़ा ने ‘चांदनी’ और ‘लम्हे’ जैसी फिल्मों में श्रीदेवी के साथ काम करने के बाद उन्हें अपनी अगली फिल्म ऑफर की. इस फिल्म की कहानी यश चोपड़ा ने ‘आशिकी’ फेम राहुल रॉय को ध्यान में रखकर लिखी थी. मगर राहुल दूसरी फिल्मों में व्यस्त होने के कारण यश चोपड़ा की पिक्चर नहीं कर पाए. राहुल के मना करने के बाद ये फिल्म शाहरुख खान के खाते में चली गई. शाहरुख के साथ इस फिल्म में श्रीदेवी को लेने की बात चली.  मगर श्रीदेवी ने ये फिल्म करने से मना कर दिया. वो फिल्म थी ‘डर’. इसके बाद यश चोपड़ा ने फिल्म के लिए जूही चावला को साइन कर लिया. और वो फिल्म जूही के करियर की सबसे सफल फिल्मों में से एक साबित हुई. जब श्रीदेवी से ‘डर’ में काम नहीं करने की वजह पूछी गई, तो मूवी नाम की मशहूर फिल्म मैगज़ीन को दिए एक इंटरव्यू में श्रीदेवी ने कहा-

”चांदनी और लम्हे जैसी फिल्मों के बाद मुझे लगता है कि डर वाला किरदार मेरे लिए काफी साधारण है. अगर उस फिल्म में मुझे शाहरुख वाला किरदार निभाने को मिलता, तो ज़ाहिर तौर पर मैं उसमें ज़रूर काम करती.  जो कैरेक्टर जूही ने निभाया, वो उसके लिए नया था, इसलिए वो उसके लिए ज़्यादा बेहतर था. लेकिन मेरे लिए वो एक ऐसा किरदार था, जो मैं पहले कई दफा निभा चुकी हूं.”

उस मैग्ज़ीन की कवर फोटो पर श्रीदेवी, जिसमें उन्होंने शाहरुख और अपने रोल्स की अदला-बदली की बात कही थी.
उस मैग्ज़ीन की कवर फोटो पर श्रीदेवी, जिसमें उन्होंने शाहरुख और अपने रोल्स की अदला-बदली की बात कही थी.

हालांकि आगे श्रीदेवी और शाहरुख खान ने मुकुल आनंद के प्रोडक्शन में बनी फिल्म ‘आर्मी’ में साथ काम किया. 1996 में आई इस फिल्म में शाहरुख का किरदार गेस्ट अपीयरेंस से ज़्यादा लंबा नहीं था. ये बदले की कहानी थी, जिसमें श्रीदेवी ने उनके पति का रोल करने वाले शाहरुख की मौत का बदला लिया था. इस फिल्म के एक साल बाद श्रीदेवी ने फिल्मों से 15 साल का ब्रेक ले लिया. इंट्रेस्टिंग बात ये कि श्रीदेवी ने अपने करियर की आखिरी फिल्म शाहरुख खान के साथ की. 2018 में रिलीज़ हुई आनंद एल. राय डायरेक्टेड फिल्म ‘ज़ीरो’ में श्रीदेवी ने एक गेस्ट रोल किया था.

फिल्म ज़ीरो के सेट पर करिश्मा, आलिया और शाहरुख के साथ श्रीदेवी.
फिल्म ज़ीरो के सेट पर करिश्मा, आलिया और शाहरुख के साथ श्रीदेवी.

4. विनोद खन्ना का आग वाला एक्शन सीन फिल्म से हटा दिया गया

‘चांदनी’ की कहानी लिखी थी मशहूर राइटर कामना चंद्रा ने. कामना, फिल्म क्रिटिक अनुपमा चोपड़ा, ‘सेक्रेड गेम्स’ के राइटर विक्रम चंद्रा और ‘संघर्ष’ फेम फिल्ममेकर तनुजा चंद्रा की मां हैं. श्रीदेवी को याद करते हुए लिखे अपने एक राइट अप में अनुपमा चोपड़ा ‘चांदनी’ से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा बताती हैं. अनुपमा बताती हैं कि उनकी मां की लिखी इस कहानी में चांदनी और रोहित की शादी हो जाती है. उनका बच्चा होता है. मगर रोहित के एक्सीडेंट के बाद चांदनी को उसके ससुराल वाले परेशान करने लगते हैं. इस वजह से वो रोहित और अपने बेटे को छोड़कर चली जाती है. कामना ने फिल्म का जो आखिरी सीन लिखा था, उसमें चांदनी की दोबारा शादी हो रही है. इस शादी में उसका बेटा फूल लेकर मां को बधाई देने पहुंचा है. क्योंकि वो मां के इस किए के पीछे की वजह समझ रहा है और उसके साथ खड़ा है. यश चोपड़ा को ये कहानी बड़ी पसंद आई. साथ ही उन्हें ये भी लगने लगा कि ये फिल्म अपने समय से आगे की बात कह रही है. फिर फिल्म पर काम शुरू हो गया.

रोहित के एक्सीडेंट के बाद
चांदनी के एक सीन में एक्सीडेंट के बाद व्हील-चेयर पर बैठा रोहित. इन्हीं सीन्स की वजह से अनिल कपूर ने ये फिल्म नहीं की थी. 

1988 नवंबर. मुंबई के होटल सेंटौर में फिल्म का मुहूरत शॉट लिया गया. फिल्म में रोहित का किरदार दिल्ली का रहने वाला दिखाया गया. इसलिए जनवरी में दो दिन की शूटिंग के लिए ‘चांदनी’ की टीम दिल्ली पहुंची. वहां शूटिंग पूरी कर मिक्सिंग का काम चल रहा था. यश चोपड़ा को ये सब कुछ ठीक नहीं लग रहा था. उन्हें ये आर्ट फिल्म वाला फील दे रहा था. उनका माथा ठनका और उन्होंने तय कर लिया कि वो इस फिल्म की कहानी चेंज करेंगे. यश चोपड़ा ने देर रात तक बैठकर फिल्म की कहानी दोबारा लिखी. श्रीदेवी को फोन कर उन्हें बदलाव बताए और वो यश के तर्क से सहमत हो गईं.

विनोद खन्ना उन दिनों टॉप एक्शन हीरो माने जाते थे. उनका किसी भी फिल्म में होने के मतलब था कि बढ़िया एक्शन देखने को मिलेगा. ‘चांदनी’ में भी उनका एक सीन था, जहां वो आग में कूदकर श्रीदेवी को बचाते हैं. यश ने उस सीन को फिल्म से निकाल बाहर कर दिया. जब इस बात की खबर फिल्म के डिस्ट्रिब्यूटर्स तक पहुंची, तो उनकी हालत खराब हो गई. उन्हें लगा विनोद खन्ना की फिल्म और एक भी एक्शन सीन नहीं. जनता इस चीज़ को कैसे स्वीकार करेगी! इसी डर से एक डिस्ट्रिब्यूटर इस फिल्म से अलग हो गया. क्योंकि वो रिस्क नहीं लेना चाहता था. अजीब बात ये कि इस तरह की चीज़ों का विनोद खन्ना पर कोई फर्क नहीं पड़ा. वो बिना एक्शन वाली फिल्म करने को भी तैयार हो गए. विनोद खन्ना की इसी खासियत की वजह से यश चोपड़ा ने उन्हें ‘चांदनी’ के लिए साइन किया था. यश को पता था कि विनोद काफी समझदार और सुलझे हुए आदमी हैं. ललित के किरदार में उन्हें इसी तरह के गुण चाहिए थे, जो चांदनी को न सिर्फ प्यार करे, बल्कि समझे भी.

फिल्म चांदनी के सेट पर श्रीदेवी और विनोद खन्ना के साथ यश चोपड़ा. अपने दौर के टॉप एक्शन हीरो रहे विनोद खन्ना को यश ने अपनी रोमैंटिक फिल्म में उनकी समझदारी और उनकी सुलझी हुई बुद्धि की वजह से कास्ट किया था. इसलिए फिल्म से इकलौता एक्शन सीन हटा देने पर विनोद बिफरे नहीं.
फिल्म चांदनी के सेट पर श्रीदेवी और विनोद खन्ना के साथ यश चोपड़ा. अपने दौर के टॉप एक्शन हीरो रहे विनोद खन्ना को यश ने अपनी रोमैंटिक फिल्म में उनकी समझदारी और उनकी सुलझी हुई बुद्धि की वजह से कास्ट किया था. इसलिए फिल्म से इकलौता एक्शन सीन हटा देने पर विनोद बिफरे नहीं.

5. श्रीदेवी की पॉपुलैरिटी देखकर जब अमिताभ बच्चन भी हैरान रह गए

‘चांदनी’ की शूटिंग शुरू हुई. फिल्म में दिखाया गया है कि एक शादी में चांदनी को देखते ही रोहित उसके प्यार में पड़ जाता है. उसका पूरा कमरा चांदनी की तस्वीरों से भरा पड़ा है. इस सीन को तैयार करने की ज़िम्मेदारी मशहूर सेलेब्रिटी फोटोग्राफर राकेश श्रेष्ठ को दी गई. राकेश को श्रीदेवी के साथ एक लंबा-चौड़ा फोटोशूट करना था. ताकि उन तस्वीरों से रोहित यानी ऋषि कपूर का कमरा सजाया जा सके. श्रीदेवी उन दिनों बहुत बड़ी स्टार थीं. छोटी से लेकर बड़ी, हर मैगज़ीन के कवर पर श्रीदेवी की फोटो होती थी. उस दौर में वो एक फिल्म के लिए 10 से 14 लाख रुपए लेती थीं. ये बात हमें यूं पता चली कि प्रोड्यूसर बोनी कपूर श्रीदेवी को अपनी फिल्म ‘मिस्टर इंडिया’ में साइन करने के लिए उनके घर पहुंचे थे. फिल्म संबंधी बातचीत के बाद मामला फीस तक पहुंचा. श्रीदेवी की मां ने कहा श्री इसके लिए 10 लाख रुपए लेगी. बोनी ने कहा मैं 11 लाख दूंगा. 1987 में ये किसी भी हिंदी फिल्म हीरोइन की सबसे बड़ी फीस थी.

इसी सीन की शूटिंग के लिए राकेश श्रेष्ठ को श्रीदेवी के साथ लंबा-चौड़ा फोटोशूट करना था.
इसी सीन की शूटिंग के लिए राकेश श्रेष्ठ को श्रीदेवी के साथ लंबा-चौड़ा फोटोशूट करना था. इस सीन में ऋषि कपूर का पूरा कमरा श्रीदेवी की तस्वीरों से पटा दिखाना था. 

बहरहाल, उन दिनों राकेश का फोटो स्टूडियो भी श्रीदेवी की तस्वीरों से ही भरा हुआ करता था. एक दिन किसी काम से अमिताभ बच्चन राकेश के स्टूडियो पहुंचे. राकेश अपने एक इंटरव्यू में बताते हैं कि अमिताभ ने उनके स्टूडियो को अच्छे से देखा. फिर उनके पास आकर पूछा-

”तुम्हारे स्टूडियो की दीवार पर मेरी एक भी तस्वीर नहीं है!”

जब देश का सबसे बड़ा सुपरस्टार आपसे ये सवाल पूछे, तो थोड़ी घबराहट तो हो ही जाती है. ऐसे में राकेश कुछ कह नहीं पाए. इस किस्से की सबसे खास बात ये कि तब तक राकेश ने ‘चांदनी’ के लिए श्रीदेवी का फोटोशूट शुरू ही नहीं किया था.

फिल्म चांदनी के पोस्टर पर श्रीदेवी.
फिल्म चांदनी के ऑफिशियल पोस्टर पर श्रीदेवी.

1989 में श्रीदेवी की दो फिल्में रिलीज़ हुईं. ‘चांदनी’ और ‘चालबाज़’. ये वही साल था, जब सलमान खान की पहली फिल्म ‘मैंने प्यार किया’, सुभाष घई की ब्लॉकबस्टर ‘राम लखन’ और राजीव राय की मल्टी-स्टारर ‘त्रिदेव’ रिलीज़ हुई थी. साल के आखिर में जब सबसे कमाऊ फिल्मों का लेखा-जोखा किया गया, तो श्रीदेवी की दोनों फिल्में टॉप 5 में शामिल थीं. 10 साल से एक बॉक्स ऑफिस हिट फिल्म का इंतजार कर रहे यश चोपड़ा फिर से फलने फूलने लगे. ‘चांदनी’ के बाद उन्होंने अपने करियर में कभी कोई एक्शन फिल्म नहीं बनाई. श्रीदेवी के नाम के आगे ‘ग्रेटेस्ट एवर’ लिखा जाने लगा और ऋषि कपूर बन गए अल्टीमेट रोमैंटिक स्टार ऑफ हिंदी सिनेमा. आज इन तीनों में से कोई भी हमारे साथ नहीं है.


वीडियो देखें: कैसे श्रीदेवी ने ‘चालबाज़’ में रजनीकांत और सनी देओल को खिलौना बनाकर छोड़ दिया!

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