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जब किरमानी ने कपिल से कहा- कप्तान, हमको मार के मरना है!

टीम इंडिया के 1983 वर्ल्ड कप कैम्पेन में कपिल देव का महत्वपूर्ण रोल था. करो या मरो के मैच में उन्होंने ज़िम्बाब्वे के खिलाफ 175 रन की बेहतरीन पारी खेली. और इस पारी के बाद टीम इंडिया ने मुड़कर नहीं देखा. साल 1983 वर्ल्ड कप विजय का हिस्सा रहे लगभग सभी प्लेयर्स का मानना है कि उस पारी के चलते ही भारत 83 का वर्ल्ड कप जीत पाया.

83 वर्ल्ड कप जीत के 38 साल पूरे होने पर आजतक के विक्रांत गुप्ता से बात करते हुए कपिल ने कहा,

‘सेल्फ बिलीफ बढ़ता जा रहा था. जैसे-जैसे मैच हो रहे थे. पहला मैच ही बहुत महत्वपूर्ण था. वेस्ट इंडीज़ पहली बार इंग्लैंड में किसी टीम से हारी थी. बड़ी बात थी. तो सेल्फ बिलीफ जब टीम में बढ़ जाता है तो सोचने का तरीका बदलता है और फिर आपकी पूरी गेम बदल जाती है.

चेम्सफर्ड (ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दूसरा ग्रुप मैच) का मैच भी बहुत महत्वपूर्ण था. जैसा जिमी ने बोला, सेमीफाइनल बहुत महत्वपूर्ण था. हम स्टेप बाय स्टेप जा रहे थे. दिमाग में ये भी था कि हमारी टीम के पास इतना अनुभव नहीं था वनडे का. आज हम कुछ भी बोलें लेकिन उस वक्त तो हमारे पास अनुभव नहीं ही था. लेकिन हमारी टीम में एबिलिटी थी कि हम किसी को भी हरा सकते थे. इतना जरूर था’

कपिल की इस पारी को सिर्फ मैदान में बैठे लोग ही देख पाए थे. BBC की हड़ताल के चलते इसका आज भी कोई वीडियो नहीं है. इस पारी को मिस करने वालों की लिस्ट में दिग्गज दिलीप वेंगसरकर भी शामिल थे. इस मैच के वक्त चोटिल दिलीप हॉस्पिटल में थे. इस पारी से जुड़ा अपना अनुभव साझा करते हुए दिलीप ने कहा,

‘मैं सोचता हूं कि 18-5 के बाद इन्होंने जो पारी खेली वह वनडे की सर्वश्रेष्ठ पारियों में से एक है. दुर्भाग्यपूर्ण था कि मैं वहीं नहीं था. चोट के चलते मैं हॉस्पिटल में था. लेकिन सभी लोग उस पारी के बारे में बात करते हैं. बहुत ही अच्छी पारी खेली थी.’

कपिल ने अपनी 175 की पारी के दौरान सैयद किरमानी और रोजर बिन्नी के साथ महत्वपूर्ण साझेदारियां की थीं. इवेंट में यह दोनों भी मौजूद थे. कपिल की इस पारी के बारे में बात करते हुए किरमानी ने कहा,

‘जब मैं कपिल को सपोर्ट देने अंदर गया. तो मैंने वहां जाकर इनसे कहा कि कप्तान, हम करो या मरो की हालत में हैं. और हमें मरना नहीं है. हमको मार के मरना है. मैं एक गेंद खेलूंगा आप पांच खेलेंगे. मैं सिंगल लेकर स्ट्राइक दूंगा. आप हमारी टीम के बेस्ट हिटर हैं. और आप पांचों गेंदों को हिट करेंगे.

वहां से जिस तरह कपिल ने खेला. 175 मारे. आज तक किसी के बल्ले से ऐसी पारी नहीं देखी. उस हालात में. उन परिस्थितियों में बोलर्स को समझ ही नहीं आ रहा था कि गेंद कहां पटकें. कपिल देव को सलाम.’

इस पारी में कपिल के साथ अच्छी साझेदारी करने वाले बिन्नी अपनी यादें साझा करते हुए बोले,

‘इस पारी की मेरे जहन में जो यादें हैं, मेरे पास सोचने का बहुत मौका नहीं था. सब बेहद तेजी से हुआ. मैं जब तक पैड पहनता पहले काफी विकेट गिर चुके थे. मैं वहां गया तो कपिल खड़े थे, मेरा इंतजार कर रहे थे. और उन्होंने मुझसे कहा, स्कोरबोर्ड देखो. खेलने के लिए 55 ओवर बचे हैं. बहुत सारी गेंदें हैं, कुछ अलग ट्राई मत करो.

सिंगल्स लेंगे. जितने सिंगल ले सकें उतना बेहतर. और हमने वही किया. मैंने कपिल को वैसे खेलते नहीं देखा था. आमतौर पर वह काफी अटैकिंग खेलते थे. लेकिन उस हाल में मुझे नहीं लगता कि मेरे क्रीज पर रहते हुए उन्होंने कोई बाउंड्री मारी. हम सिंगल-डबल ही ले रहे थे. हमने बस पैटर्न फॉलो किया. लेकिन कपिल और किरमानी की पारी एकदम अलग थी. आखिरी के 10 ओवर्स में कपिल ने खूब कुटाई की और किरमानी उन्हें स्ट्राइक दे रहे थे.’

बता दें कि कपिल की 175 रन की यह पारी वनडे में भारत के लिए पहली सेंचुरी थी. कपिल ने इसी वर्ल्ड कप में भारत के लिए वनडे का पहला 5 विकेट हॉल भी निकाला था.


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