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शर्ट उतारने को लेकर सलमान खान से क्या कहना चाहती थीं जॉय मुखर्जी की पत्नी?

इंडिया में दो परिवार हैं, जो बॉलीवुड के पर्यायवाची हैं. कपूर फैमिली और बच्चन फैमिली. लेकिन आपको मुखर्जी परिवार का फैमिली ट्री भी देखना चाहिए. उसमें काजोल, रानी और मोहनीश बहल जैसे स्टार और सेलिब्रिटीज़ हैं. अजय देवगन (काजोल के पति), आदित्य चोपड़ा (रानी मुखर्जी के पति) और आशुतोष गोवारिकर (देब मुखर्जी के दामाद) भी इस एक्सटेंडेड फैमिली के हिस्सा हैं.

आज बात इसी मुखर्जी फैमिली में एक और स्टार, एक और एक्टर, जॉय मुखर्जी की. आइए, 24 फरवरी, 1939 को जन्मे इस एक्टर के तीन इंट्रेस्टिंग किस्से आपको बताते हैं.

# ‘लव इन बॉम्बे’ के बनने की दास्तां और उससे जुड़े किस्से-

अच्छा, उस फिल्म का नाम बताइए, जिसके ओपनिंग क्रेडिट्स में आपको एक्टर्स के नामों में जॉय मुखर्जी, आशा पारेख और महमूद के अलावा जापान भी दिखाई देता है. जी, ‘लव इन टोक्यो’.

1966 में आई ‘लव इन टोक्यो’ दरअसल जॉय मुखर्जी की ‘लव इन…’ ट्रीलॉजी मूवीज़ की दूसरी मूवी थी. इस ट्रीलॉजी की पहली मूवी थी, ‘लव इन शिमला’, जो 1960 में आई थी. तीसरी मूवी थी, ‘लव इन बॉम्बे’, जो पहली दो फिल्मों के दशकों बाद, 2013 में आई थी. इसमें जॉय के अलावा वहीदा रहमान, किशोर कुमार और अशोक कुमार भी थे.

जॉय मुखर्जी की ‘लव इन बॉम्बे’ रिलीज़ होने से एक साल पहले यानी 2012 में गुज़र गए थे. फिर इस मूवी को उनके बेटे टॉय (मोनजॉय मुखर्जी) ने पूरा किया. पूरा क्या किया, जॉय के सपने को पूरा किया. क्योंकि फिल्म तो लगभग बनकर तैयार थी, लेकिन कानूनी लफड़ों में फंस गई थी.

दिक्कत इस फिल्म से शुरू से जुड़ गई थी. इस फिल्म को बनने में टोटल 40 साल लग गए. ये मूवी 1971 से बनना शुरू हुई थी. ये ‘लव इन…’ ट्रीलॉजी की पहली मूवी थी, जिसे डायरेक्ट और प्रोड्यूस खुद जॉय कर रहे थे. लेकिन ये मूवी बनते-बनते जॉय बहुत ज़्यादा कर्ज़ में आ गए.

'लव इन...' ट्रीलॉजी की तीन मूवीज़ में से तीसरी, 'लव इन बॉम्बे' का पोस्टर.
‘लव इन…’ ट्रीलॉजी की तीन मूवीज़ में से तीसरी, ‘लव इन बॉम्बे’ का पोस्टर.

यूं ‘लव इन बॉम्बे’ जॉय के लिए वही बनती जा रही थी, जो राजकपूर के लिए कभी ‘मेरा नाम जोकर’ बनी थी. फर्क ये था कि कम से कम ‘मेरा नाम जोकर’ रिलीज़ हो तो पाई, इस मूवी के तो रिलीज़ होने के दूर-दूर तक कोई आसार नहीं नज़र आ रहे थे. और कर्ज़ थे कि बढ़ते जा रहे थे.
लेकिन जैसा कि कहा जाता है, ‘बॉबी’ जैसी ‘स्लीपर हिट’ मूवी से राजकपूर ने अपना सारा कर्ज उतार दिया था, वैसा ही कुछ जॉय मुखर्जी के साथ भी हुआ.

उन्होंने एक मूवी डायरेक्ट की ‘छैला बाबू’. इसे प्रोड्यूस उनके ही भाई ने किया था. शोमू मुखर्जी ने. राजेश खन्ना, ज़ीनत अमान, असरानी इस मूवी के लीड एक्टर्स में से थे. 1977 में आई ये मूवी सुपरहिट रही. ‘छैला बाबू’ के बारे में एक बात और कही जाती है. वो ये कि इस फिल्म ने न सिर्फ जॉय मुखर्जी को, बल्कि राजेश खन्ना के करियर को भी एक बूस्ट दिया, क्योंकि उस दौरान वो काफी फ्लॉप दे चुके थे.

खैर, ‘लव इन बॉम्बे’, जॉय का ड्रीम प्रोजेक्ट होते हुए भी उनके जीते-जी सिनेमाघरों का मुंह नहीं देख पाई.

‘लव इन बॉम्बे’ से जुड़ा एक और किस्सा बताते हैं. लेकिन उससे पहले जॉय का एक सिग्नेचर सॉन्ग-

तो किस्सा यूं है कि ‘लव इन बॉम्बे’ मूवी के एक गीत की लिरिक्स मराठी में हैं. ‘माझं नाव आहे गणपतराव’. मतलब, ‘मेरा नाम है, गणपतराव’. नीलम बताती हैं कि इस गीत की शूटिंग के दौरान बाल ठाकरे भी सेट पर मौज़ूद थे-

बालासाहेब इस गीत को सुनकर खूब हंसे और कहा कि ये गीत सुपरहिट होगा. उन्होंने गीत के स्टेप्स को लेकर भी काफी सजेशन दिए, जिन्हें गीत में रखा भी गया.

नीलम कौन? जॉय की पत्नी. पूरा नाम, नीलम सोढ़ी. एक आर्मी फैमिली से आती थीं.

# ‘हम हिंदुस्तानी’ और जॉय का शर्टलेस गीत-

‘हम हिंदुस्तानी’. एक ऐसी मूवी, जिसके बारे में हेलन कहती हैं कि अगर वो ये मूवी न करतीं, तो डांसर के तौर पर इस कदर टाइपकास्ट न हुई होतीं.

‘हम हिंदुस्तानी’, एक ऐसी मूवी, जिसने सामंतवाद और नेहरूवाद की बहस को और मुखर कर दिया था. खासतौर पर मुकेश के गाए गीत, ‘छोड़ो कल की बातें’ ने.

‘हम हिंदुस्तानी’, जिसे दो भाई बना रहे थे. डायरेक्टर थे राम और प्रोड्यूसर शशिधर. एक जॉय ताऊ, दूसरे उनके पिता. जॉय मुखर्जी के पिता शशिधर मुखर्जी, फिल्मिस्तान स्टूडियो के फाउंडर थे.

‘हम हिंदुस्तानी’. जॉय मुखर्जी की पहली मूवी, जो उन्होंने अनमने ढंग से की. अनिच्छा से. वो तो दरअसल एक टेनिस प्लेयर बनना चाहते थे. लेकिन एक दिन उनके पिताजी शशिधर ने उनके सामने ‘हम हिंदुस्तानी’ का कॉन्ट्रैक्ट रख दिया और पूछा-

तुम ज़िंदगी में क्या करना चाहते हो?

ये सवाल कम और ताना ज़्यादा था. ठीक वैसा, जैसा कोई चिंतित पिता अपने पुत्र को देता है. जॉय मुखर्जी ने भी अपने पिता से क्रांति करने की बजाय मेहनताने की बात की और यूं वो इस मूवी, ‘हम हिंदुस्तानी’ का हिस्सा बन गए. लेकिन जब मूवी पूरी बन गई और इसका प्रीमियर शो रखा गया, तो वो इस शो के बीच से भाग आए. सिल्वर स्क्रीन पर उन्हें अपना लुक पसंद नहीं आया था.

आगे की बात इस गीत के बाद-

बहरहाल, ‘हम हिंदुस्तानी’ मूवी हिट रही. मूवी में हेलन और जॉय के अलावा सुनील दत्त, आशा पारेख और लीला चिटनिस भी थीं. उधर जॉय का टेनिस में करियर परवान न चढ़ सका, तो बॉलीवुड की ओर ही फुल टाइम ध्यान देने लगे. फिर इतने चाहे गए कि ‘हार्ट थ्रोब (heart throb)’ कहलाने लगे. यानी दिलों की धड़कन. ‘लव इन शिमला’, ‘एक मुसाफिर एक हसीना’, ‘फिर वही दिल लाया हूं’, ‘आओ प्यार करें’, ‘लव इन टोक्यो’ और ‘शागिर्द’ जैसी एक के बाद एक हिट, सुपरहिट देने लगे. ज़्यादातर म्यूज़िक हिट्स. इसलिए ही तो आपको स्टोरी के बीच-बीच में बिना रेफरेंस के गीत भी सुना रहे हैं. हैं ही इतने प्यारे-

 

‘हम हिंदुस्तानी’ से जुड़ा एक और इंट्रेस्टिंग किस्सा है. छोटा-सा. नीलम का वो इंटरव्यू, जिसमें उन्होंने ‘माझं नाव आहे गणपतराव’ के बारे में बताया था, उसी में उन्होंने बताया था-

जब मैं सलमान खान से मिलूंगी, तो उन्हें बताऊंगी कि तुम पहले एक्टर नहीं थे शर्ट उतराने वाले.

नीलम दरअसल, जॉय मुखर्जी के गीत, ‘रात निखरी हुई…’ की बात कर रही थीं. 1960 में आई मूवी ‘हम हिंदुस्तानी’ के इस गीत में आप जॉय मुखर्जी को शर्टलेस देख सकते हैं.

# दुनिया पागल है या फिर मैं दीवाना

‘लव इन टोक्यो’ की शूटिंग के लिए जॉय मुखर्जी को टोक्यो जाना था. कनेक्टिंग फ्लाइट हॉन्ग-कॉन्ग से थी. हॉन्ग-कॉन्ग में अपने छोटे से स्टे के दौरान वो एक नाइट क्लब में गए.

यहां पर एक डांसर जबरदस्त एनर्जी से बड़ा यूनिक डांस कर रही थी. जॉय उसके डांस को देख कर इतना प्रभावित हुए कि चीयर करते-करते उस डांसर तक ही पहुंच गए. जॉय ने उस डांसर के सामने खुद को एक फैन की तरह इंट्रोड्यूस किया और आग्रह किया कि वो डांसर उसे भी यही डांस स्टेप्स सिखाए. वो डांसर बहुत खुश हुई. तभी के तभी जॉय को सारे स्टेप्स सिखाए.

इस रात का नशा जॉय पर इस कदर हावी था कि बाद में ‘शागिर्द’ के एक गीत में जॉय ने हू-ब-हू एनर्जी के साथ वही सीखे हुए डांस स्टेप परफॉर्म कर डाले. लोग पहले ही उन्हें दूसरा शम्मी कपूर कहते थे, अब तो इस पर मुहर ही लग गई. आप खुद ही देख लीजिए, क्या ज़बरदस्त एनर्जी दिखाई है जॉय ने. एनर्जी, जो उस वक़्त में सिर्फ शम्मी कपूर से एक्सपेक्ट की जाती थी.

अपनी म्यूज़िकल हिट्स से जितनी तेज़ी से जॉय मुखर्जी ऊपर चढ़े, उतनी ही तेज़ी से गायब भी हो गए. वो 1977 तक तो पूरी तरह एक्टिंग में एक्टिव रहे. लेकिन उसके बाद आठ साल तक गायब हो गए.  1985 में दो फ़िल्में आईं और फिर मृत्यु के बाद यानी 2013 में ‘लव इन बॉम्बे’. सायरा बानो बताती हैं-

मुझे लगता है, शशिधर सा’ब की मृत्यु (1990) के बाद जॉय ने ‘गिव अप’ कर दिया था. उन्होंने इस हद तक अपनी दुर्गति कर डाली थी कि उनकी पत्नी नीलम का भी उनकी डाइट पर कंट्रोल न था.

73 साल की उम्र में लंबी बीमारी के बाद 9 मार्च, 2012 को उनका देहांत हो गया. मृत्यु से तीन-चार दिन पहले तक उनकी हालत क्रिटिकल थी.


वीडियो देखें:

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