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उस सीरीज का किस्सा, जिसने ऑस्ट्रेलिया में टीम इंडिया का 71 साल का सूखा खत्म किया

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1932 का साल. इंडिया ने पहली टेस्ट सीरीज खेली. इंग्लैंड के खिलाफ. 1947 में आज़ाद होने तक भारत ने चार टेस्ट सीरीज खेली थी. चारों इंग्लैंड के खिलाफ. इंग्लैंड डिफॉल्ट टीम हुआ करती थी. आज़ादी के बाद टीम इंडिया इंग्लैंड इफ़ैक्ट से बाहर निकली. नवंबर, 1947 में टीम ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर गई. और 0-4 से सीरीज हार कर लौट आई. ये इंग्लैंड से इतर क्रिकेट का पहला अनुभव था. पहला ऑस्ट्रेलिया दौरा और क्लीन स्वीप का स्वाद.

ये स्वाद 71 सालों तक बरकरार रहा. या यूं कहें कि वक्त के साथ और भी कड़वा होता गया. इंडिया ने 11 टेस्ट सीरीज हारीं. फिर साल आया 2018. महीना नवंबर का. टीम इंडिया तीन महीने लंबे टूर पर ऑस्ट्रेलिया पहुंची. इतिहास का सिक्का पलटने के लिए.

सीरीज शुरू होने से पहले ट्रॉफी के साथ टिम पेन और विराट कोहली.
सीरीज शुरू होने से पहले ट्रॉफी के साथ टिम पेन और विराट कोहली.

दो देश, दो प्रोमो और एक चैलेंज

टीम इंडिया के ऑस्ट्रेलिया दौरे से ठीक पहले वेस्टइंडीज की टीम भारत के दौरे पर आई थी. दो टेस्ट, पांच वनडे और तीन टी-20 खेलने के लिए. क्रिकेट के जानकार वेस्टइंडीज दौरे को दूध-भात मानकर चल रहे थे. इस दौरे के लिए कोई उत्साह नहीं था. ऐसा ही हुआ भी. पूरी सीरीज में वेस्टइंडीज ने सिर्फ एक वनडे जीता. क्रिकेट के दीवाने रोमांच कहीं दूर तलाश रहे थे. नवंबर में शुरू हो रहे ऑस्ट्रेलिया दौरे से उन्हें उम्मीद थी.

इस रोमांच को हवा दी दो प्रोमो ने. पहला प्रोमो 25 अक्टूबर 2018 को आया था. सोनी स्पोर्ट्स पर. प्रोमो क्या था, नॉस्टैल्जिया का ओवरडोज था. गली क्रिकेट में होने वाली बतकही थी. और अंत में चुनौती थी. बकौल टैगलाइन, छोड़ना मत.

ये दोनों देशों के बीच क्रिकेट के मैदान पर होने वाली जंग का तापमान था. जो लगातार बढ़ने वाला था.

12 नवंबर, 2018. ऑस्ट्रेलिया सीरीज शुरू होने से 9 दिन पहले. दूसरा प्रोमो नज़र आया. इस बार फ़ॉक्स स्पोर्ट्स की तरफ से. फ़ॉक्स स्पोर्ट्स ऑस्ट्रेलिया की ब्रॉडकास्टिंग कंपनी है.

ये प्रोमो एक मोनोलॉग था. किंग कोहली का. एक चुनौती के साथ. चुनौती क्या थी? क्या विराट कोहली ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज जीतने वाले पहले इंडियन कैप्टन बन पाएंगे?

कोहली के रस्ते टीम इंडिया को चैलेंज दिया जा रहा था. पूछा जा रहा था,

क्या टीम इंडिया में दमखम है?

जुबां के तीखे तीर

ऑस्ट्रेलिया और स्लेजिंग, दोनों एक-दूजे के साथ गुंथे हुए हैं. तीखी नोंक-झोंक कंगारुओं की पहचान है. मैदान के अंदर भी और मैदान के बाहर भी. वो मैदान के बाहर विपक्षी टीम की हिम्मत तोड़ देने के लिए मशहूर हैं. लेकिन इस बार ऐसा नहीं था. सीरीज के पहले कोई बड़बोलापन नहीं दिखा.

मैदान के बाहर तो स्लेजिंग नहीं हुई, लेकिन अंदर हुई और जमकर हुई. लेकिन इस बार पाला कोहली से था. कोहली दोनों तरह की जंग के मूड में थे. एडिलेड में पहला टेस्ट जीतकर टीम इंडिया के हौसले बुलंद थे.

दूसरा मैच पर्थ में था. इस मैच में स्लेजिंग का नया रूप देखने को मिला. टिम पेन नए-नए कप्तान बने थे.

टिम पेन ने उलझने की कोशिश की, और कोहली ने झाड़ दिया.

अगर एक और गलती की, तो स्कोर 2-0 हो जाएगा.

पेन ने पलट कर कह दिया,

उसके लिए बैटिंग करने की जरूरत होती है, महान इंसान!

अंपायरों को बीच में दखल देना पड़ा. ये टेस्ट ऑस्ट्रेलिया ने 146 रनों से मैच जीता. कोहली की खूब आलोचना हुई. कहा गया कि इंडियन कैप्टन बदतमीज़ हो चुके हैं. कंगारू कोच जस्टिन लेंगर तो और आगे निकल गए. बोले, अगर कोहली ऑस्ट्रेलिया की टीम में होते तो कब के बाहर कर दिए गए होते.

कोहली ने बता दिया था कि टीम इंडिया हर तरह से माकूल जवाब देने के लिए तैयार हो चुकी है.
कोहली ने बता दिया था कि टीम इंडिया हर तरह से माकूल जवाब देने के लिए तैयार हो चुकी है.

लेकिन दौर बदल चुका था. ऑस्ट्रेलिया को करारा जवाब मिलने लगा था. उनकी ही भाषा में.

तीसरा टेस्ट मेलबर्न में था. यहां फिरकी ली गई रिषभ पंत के साथ.

पंत बैटिंग करने आए तो पेन ने कहा,

तुम्हें पता है कि बड़े एमएस (धोनी) वनडे टीम में वापस आ चुके हैं. इस लड़के को होबार्ट हरिकेन्स को देना चाहिए. उनको एक बल्लेबाज की जरूरत है.

इतने से मन नहीं भरा. उन्होंने पंत से पूछा,

तुम बच्चों की देखभाल कर लेते हो? मैं अपनी पत्नी को सिनेमा दिखाने ले जाऊंगा, अगर तुम बच्चों की देखभाल कर लोगे.

बदले में पंत ने भी फिरकी ली. पेन को टेंपररी कप्तान कहकर ट्रोल कर दिया. मेलबर्न टेस्ट टीम इंडिया ने 137 रन के अंतर से अपने नाम किया.

रिषभ पंत टिम पेन की पत्नी और बच्चों के साथ.
रिषभ पंत टिम पेन की पत्नी और बच्चों के साथ.

2019 में नए साल में सोशल मीडिया पर एक फोटो आई. टिम पेन की पत्नी के अकाउंट से. टिम पेन का एक बच्चा रिषभ पंत की गोद में था. मैदान की नोंक-झोंक मैदान के बाहर अलग ही मोड़ पर खत्म हुई थी. एक खूबसूरत मोड़ पर.

गावस्कर का अल्टीमेटम

दूसरा टेस्ट ऑस्ट्रेलिया ने 146 रनों से जीता था. स्टीव स्मिथ, डेविड वॉर्नर और कैमरन बैंकरॉफ्ट के बिना. ये तीनों ऑस्ट्रेलियाई टेस्ट टीम की जान हुआ करते थे. बॉल टेंपरिंग की वजह से बैन झेल रहे थे.

एलन बोर्डर और सुनील गावस्कर, जिनके नाम पर इंडिया-ऑस्ट्रेलिया की टेस्ट सीरीज खेली जाती है.
एलन बोर्डर और सुनील गावस्कर, जिनके नाम पर इंडिया-ऑस्ट्रेलिया की टेस्ट सीरीज खेली जाती है.

महान एलन बोर्डर और महान सुनील गावस्कर. दोनों ने टेस्ट क्रिकेट में अपनी टीमों के लिए कई झंडे गाड़े. 1996 के बाद से दोनों देशों के बीच होने वाली टेस्ट सीरीज को इन दोनों क्रिकेटरों का नाम दे दिया गया था.

19 दिसंबर, 2018. सुनील गावस्कर ने आज तक से बात की. वे खफा थे. टीम की परफॉर्मेंस से. अनुभवी खिलाड़ियों के बिना खेल रही ऑस्ट्रेलिया बीस साबित हुई थी. ये पचने वाली बात नहीं थी. दो मैच खत्म हो चुके थे. सीरीज 1-1 से बराबरी पर थी. गावस्कर ने कहा,

अभी दो टेस्ट बचे हैं. अगर टीम इस बार ऑस्ट्रेलिया में सीरीज नहीं जीत पाती है तो भगवान ही मालिक है.

गावस्कर ने टीम सलेक्टर्स को भी नसीहत दी थी. गावस्कर का गुस्सा काम आया. टीम इंडिया ने मेलबर्न में तीसरा टेस्ट 137 रनों से जीता. सीरीज में 2-1 की लीड ले ली.

जसप्रीत बुमराह, यू आर ब्रिलियंट

2018 में ऑस्ट्रेलिया सीरीज के वक्त जसप्रीत बुमराह टीम में अपनी जगह मजबूत करने में लगे थे. मेलबर्न टेस्ट की पहली पारी में शॉन मार्श को फेंकी गई उनकी गेंद की कहानी भी यादगार है.

बुमराह की शॉन मार्श की फेंकी वो गेंद पूरी सीरीज की हाईलाइट थी.
बुमराह की शॉन मार्श की फेंकी वो गेंद पूरी सीरीज की हाईलाइट थी.

इंडिया ने पहली पारी में 443 रन बनाए थे. जवाब में ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी शुरुआत में ही फिसलने लगी थी. तीसरा विकेट 53 पर गिर चुका था. शॉन मार्श और ट्रेविस हेड ने मिलकर पारी संभाल ली थी. 33वें ओवर की आखिरी गेंद. बुमराह के हाथ से गेंद छूटी. मार्श समझ ही नहीं पाए. गेंद धीमी फेंकी गई थी.

140 किमी प्रतिघंटे की औसत स्पीड वाले बुमराह की वो गेंद 113 की रफ्तार से मार्श के पास पहुंची थी. गेंद ने मार्श के पैड को छुआ और अंपायर की ऊंगली उठ गई. ये संकेत था. पहली फुरसत में मैदान छोड़कर निकलने का. शॉन मार्श के चेहरे पर बेशुमार बेचारगी पसरी हुई थी. बुमराह की कातिलाना धीमी गेंदों की पहली झलक. उस गेंद को सदी की सबसे बेहतरीन गेंदों में गिना गया.

कमेंटेटर चिल्ला रहे थे,

Jaspreet Bumrah! You are Brilliant.

जसप्रीत बुमराह ने मैच में 9 विकेट लिए. पूरी सीरीज में सबसे ज्यादा 21 विकेट.

सिडनी में चौथा टेस्ट था. 7 जनवरी, 2019 को अंतिम दिन बारिश हुई. ऑस्ट्रेलिया हार के कगार पर थी. 3-1 का अंतर हो सकता था, लेकिन 2-1 पर सीमित रहा. ऑस्ट्रेलिया में टीम इंडिया की पहली टेस्ट सीरीज विजय ऐतिहासिक थी. इंडियन क्रिकेट का एक सुनहरा पड़ाव, जिसके किस्से बरसों तक सुनाए जाते रहेंगे.

इस किस्से को समेटते हुए वीवीएस लक्ष्मण का कहा याद आता है. कलाई के जादूगर. लक्ष्मण ने दिसंबर, 2019 में कहा था,

बतौर टेस्ट क्रिकेटर, ऑस्ट्रेलिया को ऑस्ट्रेलिया में हराना मेरा सपना था, लेकिन मैं अपने करियर में वो हासिल नहीं कर सका. 

मैं बहुत खुश हूं कि विराट की कप्तानी में इंडियन टीम ने पहली बार ऑस्ट्रेलिया को उनके घर में शिकस्त दी. 2019 में इंडियन क्रिकेट का मेरा सबसे पसंदीदा पल.


वीडियो : सिडनी टेस्ट में स्टीव स्मिथ ने वो किया जो द्रविड़ ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ इसी मैदान पर 2008 में कर चुके थे

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