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जब प्रणब मुखर्जी से बोले अटल, आज हमारे रक्षा मंत्री को बख्श दो

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अटल के बारे में कहा जाता था कि वो आदमी तो अच्छे हैं, मगर गलत पार्टी में हैं. ये एक लाइन ये बताने के लिए काफी है उनसे लोगों के वैचारिक मतभेद जरूर रहे होंगे, मगर मनभेद नहीं. हर पार्टी में उनके दोस्त थे. जहां दोस्त नहीं थे, वहां कमसेकम दुश्मन तो नहीं थे. इस दोस्ती का सबसे बड़ा कारण था संवाद. अटल हर पार्टी के सांसदों, नेताओं से खुलकर बात करते थे. तभी तो उन्हें किसी से कोई बात कहने में कोई हिचक नहीं थी. ऐसा ही एक किस्सा है अटल और प्रणब मुखर्जी का. ये किस्सा खुद प्रणब मुखर्जी ने सुनाया था जब वो राष्ट्रपति थे.

प्रणब ने अटल को नेहरुवियन बताते हुए कहा था कि अटल एक काबिल राजनेता थे, जिनके मन में विपक्ष के नेताओं के लिए सम्मान था. वो जब भी हमसे मिलते तो उनका व्यवहार आत्मीयता से भरा होता. अपने इसी व्यवहार के कारण ही वो एनडीए जैसे इतने बड़े गठबंधन को 6 साल तक चला सके. जबकि उनके साथ हर तरह की विचारधारा के लोग थे. मुखर्जी ने एक और किस्सा सुनाया जब अटल प्रधानमंत्री थे और वो विपक्ष में थे. तब प्रणब को रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस के खिलाफ बोलना था. अटल को ये बात मालूम थी सो वो खुद प्रणब के पास पहुंचे और बोले- प्रणब आज जॉर्ज पर ज्यादा सख्त न होना, उनकी तबीयत ठीक नहीं है. वो और बीमार हो जाएंगे.

प्रणब मुखर्जी ने बताया था कि कैसे अटल उनके पास आकर बोले- जॉर्ज पर आज कम गुस्साना.
प्रणब मुखर्जी ने बताया था कि कैसे अटल उनके पास आकर बोले- जॉर्ज पर आज कम गुस्साना.

प्रणब बोले- मैं चौंक के रह गया. मैंने उनसे कहा कि पीएम साहब, आप ये बात किसी और को भेजकर भी मुझ तक पहुंचा सकते थे. या मैं ही आपके पास आ जाता. अटल जी ने जवाब दिया- अरे ये छोटी सी बात है. हम सब साथी ही तो हैं, इसमें क्या बड़ी बात है. उन्होंने फिर कहा कि जॉर्ज की आलोचना करते वक्त आज ज्यादा क्रूर मत होना. जॉर्ज वैसे तो मजबूत हैं मगर इस वक्त उनकी तबीयत कुछ ज्यादा खराब है. सख्त आलोचना उनकी तबीयत और बिगाड़ सकती है. प्रणब बताते हैं कि उन्हें पीएम का ये व्यवहार बहुत अच्छा लगा. कैसे उन्हें अपने एक साथी कि चिंता है. मैंने भी अटल जी की बात का मान रखा और जॉर्ज पर हमला नहीं किया.


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