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जब डैनी से उनकी गर्लफ्रेंड परवीन बॉबी बोलीं, 'अंदर मत आना, तुम अमिताभ बच्चन के एजेंट हो.'

कुछ दिनों पहले मैं नॉर्थ-ईस्ट घूमने गया. गंगटोक में मेरे कैब ड्राइवर ने दूर, दूसरी पहाड़ी की ओर इशारा करके एक बड़ा-सा कारखाना दिखाया और बताया कि ये डैनी की फैक्ट्री है. वाइन फैक्ट्री. वेरिफाई करने के लिए गूगल वगैरह में सर्च किया, तो पता चला उस कारखाने का नाम ‘युकसोम ब्रीवरीज़’ है.

खैर, गूगल बाबा की यही विशेषता है- One thing lead to another. और यूं डैनी के बारे में एक के बाद एक, कई चीज़ें पता चलती गईं. जैसे,

# पहले वो आर्मी में जाना चाहते थे. सेलेक्शन भी हो गया था, लेकिन फिर मां ने कहा कि आर्ट फील्ड में ट्राय करो, तो FTII में चले गए. मां डरती थीं, कहीं मेरे बेटे को आर्मी में कुछ हो गया तो. हर कोई चाहता है समाज में भगत सिंह हो, लेकिन घर में न हो. हालांकि अपने स्कूल के दौरान एनसीसी जॉइन किया हुआ था डैनी ने. और बेस्ट कैडर का अवॉर्ड भी जीता.

'इंडिया टुडे' मैगजीन के लिए पोज़ देते डैनी. (तस्वीर इंडिया टुडे आर्काइव)
‘इंडिया टुडे’ मैगजीन के लिए पोज़ देते डैनी. (तस्वीर- इंडिया टुडे आर्काइव)

# हमारी इंडस्ट्री में कॉपी करने की होड़ है. ‘शोले’ के बाद डाकुओं वाली मूवी ने फिल्म इंडस्ट्री को ऐसे घेर लिया था, जैसे टिड्डियां फसल को घेर लेती हैं. डैनी बताते हैं कि एक बार वो एक शूटिंग कर रहे थे. वहां एक दूसरा एक्टर, तिवारी, उनके गुर्गे के गेटअप में था. उसके हाथ में लालटेन थी. जब इस शूटिंग के पैकअप के बाद वो दूसरी फिल्म की शूटिंग के सेट पर पहुंचे, तो वो मूवी भी डाकुओं वाली ही थी. उसमें भी तिवारी उनके गुर्गे का रोल कर रहा था. उसमें भी तिवारी के हाथ में लालटेन थी.

डैनी ने सोचा, ये मैं क्या कर रहा हूं. कुछ दिनों के लिए एक्टिंग छोड़ दी. ट्रेकिंग पर निकल गए. वापस आए, तो हाथ में एक बाउंडेड स्क्रिप्ट थी. स्क्रिप्ट एनएन सिप्पी को दिखाई, तो सिप्पी बोले, ‘इसे तुमने लिखा है, तुम ही डायरेक्ट करो.’

एनएन सिप्पी ने ये फिल्म प्रोड्यूस की और डैनी ने डायरेक्ट की. यूं 1980 में रिलीज़ हुई ‘फिर वही रात’. बेशक ये मूवी उस वक्त तो नहीं चली, लेकिन अब इसे भारत की कुछ बेहतरीन हॉरर-सस्पेंस मूवीज़ में से एक माना जाता है.

फिर वही रात का एक पोस्टर (अरुणा ईरानी, राजेश खन्ना और डैनी).
फिर वही रात का एक पोस्टर (अरुणा ईरानी, राजेश खन्ना और डैनी).

# उन्होंने एक नेपाली मूवी भी लिखी है, ‘साइनो’. जिसे उग्येन चोपेल ने डायरेक्ट किया था. 1987 में आई ये फिल्म सुपरहिट रही, तो फिर इसे उग्येन ने ही हिंदी में बनाया. हिंदी में इसका नाम ‘बंधु’ (1992) था. फिर इसी स्टोरी पर बेस्ड एक सीरियल बनाया गया. ‘अजनबी’. डीडी मेट्रो पर आता था. ये सीरियल लोगों ने खूब पसंद किया. 90’s के दर्शकों के लिए इसके टाइटल म्यूज़िक में एक अजब-सा नॉस्टेल्जिया है. इसका एक सूफी गीत ‘बोल मिट्टी दे’ भी उस वक्त काफी पसंद किया गया था. लोग आज भी इसे यूट्यूब पर ढूंढ-ढूंढ कर सुनते हैं.

# वो गाते भी हैं. FTII में उनके कोर्स में म्यूज़िक भी एक सब्जेक्ट था. ये ऑप्शनल सब्जेक्ट था, जो उन्होंने खुद चुना था. दरअसल वो बचपन से ही बहुत अच्छी बासुंरी बजा लेते थे, इसलिए ही तो उन्होंने दूसरे विकल्प के तौर पर कोई ऐसा करियर चुना था, जिसका म्यूज़िक भी एक बड़ा हिस्सा हो. उन्होंने किशोर, रफी और आशा- तीनों के साथ गाया है. सुनिए आशा के साथ उनका एक नेपाली गीत, जो मुझे मेरे गंगटोक के ड्राइवर ने सुनाया था-

# ‘शोले’ में  ‘गब्बर’ के रोल के लिए, पहले वो ही पहली पसंद थे. लेकिन उस वक्त वो फ़िरोज़ खान की ‘धर्मात्मा’ कर रहे थे और इसकी शूटिंग के लिए उन्हें अफगानिस्तान जाना था. हालांकि फ़िरोज़ खान और ‘शोले’ के डायरेक्टर रमेश सिप्पी के बीच काफी दिनों तक नेगोसिएशन चलता रहा, लेकिन बात नहीं बनी. रमेश दरअसल ‘शोले’ की शूटिंग जल्द से जल्द शुरू करना चाहते थे. अंत में अमज़द खान इस मूवी में विलेन बने. डैनी कहते हैं कि एक तरह से ये अच्छा ही हुआ.

अव्वल तो एक नए विलेन का उदय हुआ. दूसरा उस वक्त विलेन का रोल करने वालों को काफी कम पैसे मिलते थे. ‘शोले’ के हिट हो जाने के बाद उनका भी मेहनताना बढ़ गया. मेरा और अमज़द खान जैसे एक्टर का.

# इनको ‘खुदा गवाह’ और ‘सनम बेवफा’ के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिल चुका है. दोनों ही मूवीज़ में इनके उर्दू तलफ़्फ़ुज़ की काफी तारीफ़ हुई थी.

# डैनी के बेटे रिंज़िंग जल्द ही फिल्म ‘स्कॉड’ से बॉलीवुड में करियर की शुरुआत करने जा रहे हैं. ‘स्कॉड’ की शूटिंग ज़ोर शोर से चल रही है. ये एक एक्शन पैक्ड मूवी है. हाल ही में खबर आई थी कि इसमें एक हेलिकॉप्टर चेज़ सिक्वेंस भी है.

स्टार किड्स की लिस्ट में एक और नाम जुड़ने को है. डैनी डेन्जोंगपा के बेटे रिंजिंग भी एक एक्शन - थ्रिलर से बॉलीवुड में कदम रखने वाले हैं. जानिए इस फिल्म खास बातें.
स्टार किड्स की लिस्ट में एक और नाम जुड़ने को है. डैनी डेन्जोंगपा के बेटे रिंजिंग एक एक्शन – थ्रिलर से बॉलीवुड में कदम रखने वाले हैं.

उनसे जुड़े ये सब किस्से, ये सब बातें तो आपको गूगल करने से भी मिल जाएंगी. तो चलिए, अब इन सबसे अलहदा, डैनी से जुड़े तीन किस्से और इनकी लाइफ के तीन ज़रूरी लोगों से इनके रिश्ते के बारे में जानते हैं. हालांकि ‘जिन खोजा, तिन पाइयां’ की तर्ज़ पर ये सब भी आपको कहीं न कहीं पढ़ने-सुनने को मिल ही जाता, पर अव्वल तो मुश्किल से मिलता, दूजा ‘Under One Roof’ (एक ही छत के नीचे) नहीं मिलता.

# जया और डैनी की दोस्ती

जया बच्चन. तब जया भादुड़ी. FTII (फिल्म एंड टेलीविज़न इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया) में फिल्म मेकिंग के गुर सीख रही थीं. वहीं उनका शुरुआती दिनों में ही एक दोस्त बन गया. शेरिंग फिंटसो डेन्जोंगपा.

तो, FTII में इन दोनों के शुरुआती दिन थे. सीनियर्स, नए स्टूडेंट्स का इंट्रो वगैरह ले रहे थे. हमेशा की तरह उस दिन भी क्लास और इंट्रो वगैरह के बीच में जया और शेरिंग फुर्सत में बैठे थे. आज शेरिंग उदास दिख रहे थे. जया ने कारण पूछा. शेरिंग ने बता दिया. दरअसल नॉर्थ-ईस्ट का ये लड़का अपने नाम से लेकर एक्सेंट और हेयर स्टाइल तक के लिए ट्रोल होता, बुली होता आ रहा था.

जया ने शेरिंग की पूरी बात सुनी, उसके बाद कुछ बढ़िया नुस्खे दिए. एक्सेंट सुधारने को कहा, हेयरस्टाइल को लेकर भी कुछ टिप्स दिए. साथ में बताया कि अपना नाम बदल लो, पुकारने में मुश्किल होती है. इसे ‘डैनी’ कर लो. डैनी डेन्जोंगपा.

शेरिंग ने ऐसा ही किया. साथ में उर्दू वगैरह भी सीखी. तलफ़्फ़ुज़ सुधारा. अब उन्हें सब डैनी डेन्जोंगपा कहने लगे. और तलफ़्फ़ुज़ तो गोया ऐसा कर डाला कि सालों बाद ‘खुदा गवाह’ और ‘सनम बेवफा’ जैसी मूवीज़ में न सिर्फ उन्हें रोल मिले, बल्कि इन मूवीज़ के लिए उन्होंने फ़िल्मफेयर अवॉर्ड्स भी जीत लिए. फ़िल्मफेयर को दिए एक इंटरव्यू में डैनी बताते हैं-

जया FTII में मेरी क्लासमेट थीं. इंट्रो वाले दिनों में, नए स्टूडेंट्स सीनियर्स से मिलते हैं. उस दौरान जब मैंने बताया कि मेरा नाम शेरिंग फिंटसो डेन्जोंगपा है, तो सीनियर स्टूडेंट्स नहीं समझ पाए और, ‘दोबारा बोलो? दोबारा बोलो?’ कहते रहे. ये एक मजाक सरीखा बन गया. मेरे कलीग भी ‘शशश शशशश…’ कहते थे, गोया मैं एक पिल्ला होऊं. फिर जया ने मुझे सुझाव दिया कि मैं इसे थोड़ा आसान कर लूं और उन्होंने मुझे डैनी नाम दिया. एक इंसान के तौर पर जया काफी ईमानदार हैं और खरी-खरी कहती हैं. वैसे कई मायने में वो मेरी तरह ही हैं. यहां तक कि जब मैं इंडस्ट्री में भी एक न्यूकमर था, तो जया मेरा साथ देने के लिए दौड़ी चली आती थी.

बहरहाल, कुछ सालों बाद जया FTII से पासआउट कर गईं. गोल्ड मेडलिस्ट बनकर. उधर डैनी डेन्जोंगपा पास तो हुए, मगर आउट नहीं. वहीं FTII में योग सिखाने लगे. दोनों की दोस्ती ज़ारी रही. जया को ‘गुड्डी’ में लीड रोल मिल गया. डेन्जोंगपा भी कुछ दिनों बाद एक फिल्म पा लिए. ‘ज़रूरत’.

‘गुड्डी’ के डायरेक्टर थे हृषिकेश मुखर्जी. गुलज़ार के साथ मिलकर इस फिल्म की स्क्रिप्ट भी उन्होंने ही लिखी. ‘गुड्डी’ की शूट के दौरान गुलज़ार और जया के बीच अच्छी जान-पहचान हो गई. ये वो दिन थे, जब गुलज़ार अपनी मूवी ‘मेरे अपने’ की कास्टिंग में खर्च हो रहे थे. जया ने अपने FTII के दोस्त शेरिंग फिंटसो डेन्जोंगपा का नाम सजेस्ट किया. सॉरी, शेरिंग फिंटसो डेन्जोंगपा का नाम नहीं, डैनी डेन्जोंगपा का नाम.

गुलज़ार ने ये सजेशन सीरियसली लिया. ऑडिशन हुए और डैनी डेन्जोंगपा को ‘मेरे अपने’ फिल्म मिल गई. उतना बड़ा रोल तो खैर ये भी नहीं था, लेकिन स्ट्रगल फेज़ को छोटा करने के लिए ये काफी था. ‘मेरे अपने’ में उन्होंने एक कठपुतली नचाने वाले का रोल किया था. डैनी बताते हैं-

मैं अपने इस रोल की तैयारी के लिए मुंबई के सांता क्रूज़ में एक कठपुतली नचाने वाले से मिलने गया. वहां पर आस-पास रहने वाले बच्चे मुझे घेर कर खड़े हो गए. उन्होंने उस इलाके में पहले कभी चिंकी आंखों वाला लकड़ा नहीं देखा था.

# परवीन बॉबी और डैनी का प्रेम

परवीन बॉबी भारत की पहली एक्ट्रेस थीं, जिन्हें ‘टाइम’ मैगजीन के कवर में जगह मिली. अपने दौर की हाएस्ट पेड एक्ट्रेस परवीन बॉबी और डैनी डेन्जोंगपा के बीच लव रिलेशन था, ये जानने के लिए आपको उस दौर की कोई ‘गॉसिप मैगज़ीन’ पढ़ने की ज़रूरत नहीं. दोनों ने ही अपने इस प्रेम को कभी नहीं छुपाया. डैनी आज भी परवीन बॉबी को ‘एक बेहतरीन इंसान’ बताते हैं. दोनों एक-दूसरे के साथ चार साल तक रिलेशनशिप में रहे.

एक दिन डैनी ने यूं ही, मस्ती में परवीन के घर पर रखा हुआ शंख बजा दिया. परवीन असामान्य रूप से घबरा गईं. तब डैनी को अहसास हुआ कि कुछ तो गड़बड़ है. वर्ना उससे पहले उनको परवीन की मेडिकल कंडिशन का कोई आइडिया नहीं था.

वो इसकी गहराई में जाते, उससे पहले ही चीज़ें और खराब होना शुरू हो गईं. परवीन बॉबी ने एक मैगजीन में अमिताभ का इंटरव्यू पढ़ा, जिसमें अमिताभ ने बताया था कि उनके सबसे अच्छे दोस्तों में से डैनी भी एक हैं. इससे परवीन शॉक में आ गईं.

असल में अमिताभ और परवीन ने एक सात कई फ़िल्में की थीं. ‘दीवार’, ‘मज़बूर’, ‘नमक हलाल’, ‘अमर अकबर एंथनी’, ‘काला पत्थर’ वगैरह… और इस दौरान दोनों के बीच रिलेशन के गॉसिप भी अख़बारों और फ़िल्मी मैगजीन पर छपने लगे. लेकिन फिर परवीन बॉबी अमिताभ पर खुलेआम आरोप लगाने लगीं कि वो उन्हें मार डालेंगे. उनको अमिताभ से डर लगने लगा.

अमिताभ और परवीन की केमिस्ट्री पर्दे पर देखते ही बनती थी.
अमिताभ और परवीन की केमिस्ट्री पर्दे पर देखते ही बनती थी.

तो जब डैनी घर आए और दरवाज़े की घंटी बजाई, तो परवीन ने दरवाज़ा नहीं खोला. चिल्लाकर बोलीं-

अंदर मत आना, तुम अमिताभ बच्चन के एजेंट हो.

इसके बाद परवीन बॉबी ने डैनी से किनारा करना शुरू कर दिया. वक़्त के साथ-साथ डैनी अपनी गर्लफ्रेंड किम और परवीन बॉबी, कबीर बेदी की तरफ बढ़ गईं. हालांकि इन सब के बावजूद परवीन बॉबी, डैनी के घर पर जब-तब जाती रहतीं और बैडरूम में बैठ वीसीआर देखतीं. कई बार डैनी को महसूस होता वो ये सब किम को जलाने की मंशा से कर रही हैं. वो परवीन को रोकने की कोशिश भी करते, लेकिन वो उन्हें ये कह कर टाल देतीं, ‘हम दोनों तो अच्छे दोस्त हैं ना.’

# अमिताभ बच्चन और डैनी

तो ऊपर के दो किस्सों से आपको पता चल गया होगा कि अमिताभ और डैनी आपस में कैसा रिलेशन शेयर करते होंगे. लेकिन चलिए, इस रिलेशन के बारे में खुलकर बात कर ली जाए.

दरअसल डैनी और बच्चन की दोस्ती बहुत पक्की टाइप और बहुत लंबी है. लेकिन डैनी 18 साल तक अमिताभ के साथ काम करने से कतराते रहे. कारण ये था कि डैनी को लगता था कि अमित इतने बड़े एक्टर हैं कि अगर वो मूवी या फ्रेम में होंगे, तो मुझ पर कौन ध्यान देगा. शायद डैनी ने उर्दू शायर बशीर बद्र का वो शे’र पढ़ या सुन रखा था-

बड़े लोगों से मिलने में हमेशा फ़ासला रखना,
जहां दरिया समुंदर से मिला, दरिया नहीं रहता.

ये दूरी लंबी तो रही, फॉरेवर नहीं. 18 साल में पहली बार अमिताभ बच्चन और डैनी एकसाथ आए. मुकुल एस. आनंद की मूवी ‘अग्निपथ’ में. इस मूवी की स्क्रिप्ट पढ़कर डैनी को यकीन हो गया था कि ‘कांचा चीना’ के रोल पर दर्शकों का ध्यान न जाए, ये संभव ही नहीं.

वैसे डैनी अमिताभ को बहुत पसंद करते हैं. उन्हें अमिताभ का अपने माता-पिता के लिए केयरिंग होना बहुत पसंद है. उन्हें अमिताभ का ‘कूल एटीट्यूड’ भी बहुत पसंद है. उन्हें याद है कि कैसे ABCL के चलते वो अर्श से फर्श पर आ गए थे और तब भी उन्होंने अपना कूल नहीं खोया. ‘अग्निपथ’ और ‘खुदा गवाह’ की शूटिंग के दौरान के दो किस्से हैं, अमिताभ के ‘कूलत्व’ और डैनी की गर्मी के-

# ‘अग्निपथ’ की शूटिंग शुरू ही होने वाली थी. सारी कास्ट और क्रू मॉरिशस पहुंच चुकी थी. सुबह शूटिंग शुरू ही होने वाली थी, लेकिन डैनी को अभी तक अपने डायलॉग की शीट नहीं दी गई थी. वो अपने असिस्टेंट पर बिफर पड़े. अमित दूर थे, लेकिन डैनी के चिल्लाने की आवाज़ उन तक भी पहुंच गई. वो डैनी के पास आए और बोले-

मुझे अभी–अभी अपनी शीट मिली है. चलो साथ में रिहर्सल करते हैं.

# नेपाल की बात है. ‘खुदा गवाह’ की शूटिंग के दौरान अमित और डैनी एक कार में बैठे थे. कार में एसी नहीं था. इस कार को वहां के लोकल लोगों ने घेर लिया था. ये लोग कार हिलाने लगे. डैनी अपना आपा खोने ही वाले थे कि अमिताभ ने समझाया-

बाहर जाकर हीरो बनने की कोई ज़रूरत नहीं. चुपचाप अंदर बैठे रहो और गर्मी को थोड़ी देर सहन करो. अगर बाहर जाओगे, तो हालात और बुरे हो जाएंगे.

डैनी और रणबीर कपूर. (तस्वीर इंडिया टुडे आर्काइव)
डैनी और रणबीर कपूर. (तस्वीर- इंडिया टुडे आर्काइव)

25 जनवरी, 1948 को जन्मे ये एक्टर, शेरिंग फिंटसो डेन्जोंगपा 72 वर्ष के हो चुके हैं. कभी ‘कात्या’, तो कभी ‘कांचा चीना’ नाम से फेमस, डैनी डेन्जोंगपा को दी लल्लनटॉप की तरफ से हैप्पी वाला बड्डे.


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उधार मांगकर ऑडिशन दिया था और अब इंडियन आइडल 11 का विनर बन गया-

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