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क़िस्से उस शराबी 'इंग्लिश' क्रिकेटर के, जिसने ऑस्ट्रेलिया को वर्ल्ड चैंपियन बना दिया

बीता क्रिकेट वर्ल्ड कप इंग्लैंड ने जीता. जीत के हीरो रहे ऑलराउंडर बेन स्टोक्स. लेकिन टूर्नामेंट के बाद स्टोक्स के बारे में जो बात सबसे ज्यादा चर्चित हुई, वह थी उनका जन्म स्थान. स्टोक्स इंग्लैंड में पैदा नहीं हुए थे. उनके मां-बाप आज भी न्यूज़ीलैंड में रहते हैं. इस वर्ल्ड कप से लगभग 16 साल पहले भी ऐसा ही कुछ हुआ था, लेकिन उस वक्त इसकी उतनी चर्चा नहीं हुई था. ये क़िस्सा उसी वर्ल्ड कप का है. 2003 वर्ल्ड कप. भारत के लिए बुरी यादों वाला वर्ल्ड कप.

वर्ल्ड कप रिटेन करने से पहले ऑस्ट्रेलिया के लिए भी यह टूर्नामेंट बहुत अच्छा नहीं था. टूर्नामेंट से ठीक पहले शेन वॉर्न डोपिंग टेस्ट में फेल होकर वापस जा चुके थे. उससे कुछ महीने पहले ऑलराउंडर शेन वाटसन को चोट लग गई थी. वाटसन की चोट इसलिए भी ऑस्ट्रेलिया के लिए बुरी थी, क्योंकि ऑस्ट्रेलियन मैनेजमेंट उन्हें 2003 वर्ल्ड कप के लिए तैयार कर रहा था. इधर माइकल बेवन और डैरेन लीमन भी टीम के साथ नहीं थे.

# क्रिकेटर, मछुआरा और किसान

ऐसे हालात में डिफेंडिंग चैंपियंस ऑस्ट्रेलिया ने इस टूर्नामेंट का अपना पहला मैच 11 फरवरी 2003 को खेला. यह पिछले वर्ल्ड कप फाइनल का रीप्ले था. ऑस्ट्रेलिया के सामने एक बार फिर से पाकिस्तान की टीम थी. वसीम अकरम, वक़ार यूनुस और शोएब अख्तर आग उगल रहे थे. गुलाबी सर्दियों में भी उनकी बोलिंग पसीने छुड़ा रही थी.

तीनों ने मिलकर ऑस्ट्रेलिया की हालत खराब कर दी. ऑस्ट्रेलिया ने सिर्फ 86 रन पर चार विकेट गंवा दिए. अब नंबर छह पर आए एंड्रयू सायमंड्स. वही सायमंड्स जिनका यह मैच तो दूर इस टूर्नामेंट में खेलना भी पक्का नहीं था. सायमंड्स इस वर्ल्ड कप के लिए साउथ अफ्रीका सिर्फ एक आदमी के चलते आ पाए थे- रिकी पॉन्टिंग, जो इस वक्त नॉन स्ट्राइकर एंड पर खड़े थे.

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2003 World Cup के दौरान पाकिस्तानी पेसर Waqar Younis से भिड़े Andrew Symonds को Fishing बहुत पसंद है (तस्वीरें ट्विटर से साभार)

अब वक्त था कि इंग्लैंड में जन्मे सायमंड्स, पॉन्टिंग का कर्ज़ उतारें, भरोसे का कर्ज. लेकिन यह इतना आसान नहीं था. इस मैच से पहले सायमंड्स के नाम वनडे में 23 की एवरेज से कुल 762 रन थे. लेकिन उस दिन सायमंड्स टिक गए. किसी मछुआरे की तरह, बीच समंदर, लंगर डाले. सायमंड्स ने कई दफ़ा कहा है कि अगर वह क्रिकेटर ना होते, तो निश्चित तौर पर मछुआरे या किसान होते. उस दिन सायमंड्स ने 22 गज़ की पिच पर अपने तीनों शौक पूरे किए.

मछुआरे की तरह जाल फेंक मछलियों का इंतजार किया और सधे हुए किसान की तरह फसल पकते ही उसे स्टोरेज में डंप कर दिया. और क्रिकेट तो वह खेल ही रहे थे. उस दिन सायमंड्स ने सिर्फ 125 बॉल पर 143 रन की नॉटआउट पारी खेल डाली. ऑस्ट्रेलिया ने 50 ओवर्स में 310 रन बनाए और अंत में आसानी से मैच जीत लिया.

# बास्केटबॉल स्टार लेरॉय

ऑस्ट्रेलिया बाद में लगातार दूसरी बार वर्ल्ड चैंपियन बना. सायमंड्स कंगारुओं के लिए सबसे ज्यादा रन बनाने वाले प्लेयर्स में शामिल रहे. लेकिन उनकी कहानी इतनी ही नहीं थी. सायमंड्स की कहानी शुरू हुई थी 9 जून 1975 को. इंग्लैंड के बर्मिंघम शहर में पैदा हुए सायमंड्स के पेरेंट्स के बारे में बेहद कम जानकारी है. कहा जाता है कि उनके पेरेंट्स में से एक वेस्ट इंडियन मूल का, जबकि दूसरा डेनमार्क या स्वीडन से था. सायमंड्स को सिर्फ तीन महीने की उम्र में गोद लेने के बाद उनके नए पेरेंट्स केन और बारबरा ऑस्ट्रेलिया शिफ्ट हो गए. बचपन में सायमंड्स टेबल टेनिस और क्रिकेट दोनों जमकर खेलते थे.

काफी छोटी उम्र में ही सायमंड्स ने अपने हमउम्र बच्चों को बुरी तरह पछाड़ना शुरू कर दिया. ऐसे में उनके पिता केन ने उन्हें हर शनिवार टाउंसविल स्थित वांडरर्स क्रिकेट क्लब ले जाना शुरू किया. तीन घंटे की यह राउंड ट्रिप पांच साल तक चली. इसके बाद सायमंड्स का परिवार गोल्ड कोस्ट शिफ्ट हो गया. उनके माता-पिता जिस स्कूल में काम करते थे सायमंड्स की पढ़ाई वहीं हुई.

सायमंड्स का एक निकनेम रॉय भी है. कहते हैं कि बचपन में उनके एक कोच को लगता था कि वह बास्केटबॉल स्टार लेरॉय लॉगिंस जैसे दिखते हैं. इसलिए उसने सायमंड्स को रॉय बुलाना शुरू कर दिया. सायमंड्स ने 1994 के अंडर-19 वर्ल्ड कप के साथ ऑस्ट्रेलिया के लिए अपना डेब्यू किया. अगले ही साल वह इंग्लिश काउंटी क्रिकेट में ग्लूस्टरशर के लिए खेल रहे थे. ग्लूस्टरशर के लिए उन्होंने एक फर्स्ट क्लास मैच में 254 रन की पारी खेली, इस पारी में सायमंड्स ने वर्ल्ड रिकॉर्ड 16 छक्के मारे. अगली पारी में उन्होंन चार और छक्के मार इस मैच में अपने कुल छक्कों की संख्या 20 कर ली. यह भी एक वर्ल्ड रिकॉर्ड था.

# Sorry England

उनका यह तूफानी खेल देखने के बाद इंग्लैंड ने उन्हें अपनी A टीम के साथ पाकिस्तान टूर पर भेजने की तैयारी कर ली. लेकिन सायमंड्स का दिल तो ऑस्ट्रेलिया में लगा था, उन्होंने मना कर दिया. इस बारे में सायमंड्स ने बाद में सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड से कहा था,

‘अगर मैंने अपना भविष्य इंग्लैंड के साथ देखने का फैसला कर लिया होता, तो इसका अर्थ होता कि मुझे अपना परिवार, गर्लफ्रेंड और ऑस्ट्रेलिया के सारे दोस्त छोड़ने पड़ते.’

इस घटना के तीन साल बाद, 1998 में सायमंड्स ने ऑस्ट्रेलिया के साथ अपना वनडे डेब्यू किया. हालांकि, सिर्फ 23 साल में डेब्यू करने के बावजूद वह टीम में अपनी जगह फिक्स नहीं कर पाए. हालात यहां तक आ गए थे कि साल 2002 में सायमंड्स ने क्रिकेट छोड़ने का फैसला कर लिया. वह रग्बी में करियर बनाना चाहते थे. लेकिन तभी 2003 की वर्ल्ड कप टीम में उन्हें जगह मिल गई और काम जम गया. क्रिकेट करियर भले ही सही दिशा में जा रहा था लेकिन सायमंड्स के दिमाग के बारे में यह नहीं कहा जा सकता था.

# ठीक ‘नहीं’ है

17 जून 2005. ऑस्ट्रेलिया को अगले दिन बांग्लादेश के खिलाफ अहम मैच खेलना था. सायमंड्स नाश्ते के वक्त पर टीम होटल के डाइनिंग एरिया में मौजूद थे. देखने में सायमंड्स सचेत लग रहे थे, लेकिन बाज़ जैसी नज़र वाले कैप्टन पॉन्टिंग को समझ आ गया कि सब सही नहीं है. दरअसल सायमंड्स अब भी उन्हीं कपड़ों में थे, जिन कपड़ों में पॉन्टिंग ने उन्हें बीती रात देखा था. कैप्टन का शक़ देख सायमंड्स के करीबी दोस्त माइकल क्लार्क उन्हें वहां से हटाकर ले गए और नहलाया. इसके बाद टीम ट्रेनिंग के लिए सोफिया गार्डन्स में इकट्ठा हुई. वहां फिर सायमंड्स ने कुछ ऐसा किया जिससे पॉन्टिंग गुस्सा हो गए. इस बारे में पॉन्टिंग ने कहा था,

‘वह बाकी प्लेयर्स से अलग-थलग था. उसने मैदान के कोने में पड़ी एक पहिए वाली बिन का सहारा लेकर खड़े होने की कोशिश की और गिर गया.’

गुस्साए पॉन्टिंग सायमंड्स के पास गए और कहा कि तुम इस मैच में नहीं खेलोगे. जवाब में सायमंड्स ने एकदम हल्के अंदाज में सीधे कहा,

‘ठीक है’

पॉन्टिंग ने इस बारे में आगे कहा,

‘मुझे इस बात पर बहुत तेज गुस्सा आया कि एक प्लेयर अपने, अपने साथियों, अपने विपक्षियों और अपने देश के प्रति इतना अशिष्ट हो सकता है कि एक गेम खेलने के लिए इस हालत में पहुंचे? और मेरा गुस्सा फूट निकला. मैंने कोच जॉन बुकानन के पास जाने से पहले एडम गिलक्रिस्ट से कहा- यह घर जा सकता है.’

बुकानन को उम्मीद थी कि सायमंड्स माफी मांग लेंगे, लेकिन सायमंड्स ने कोच से कहा,

‘मैं खेल सकता हूं. मैं इस हालत में पहले भी खेल चुका हूं.’

यह जवाब सुन ऑस्ट्रेलियन टीम मैनेजमेंट भन्ना गया. उन्होंने सायमंड्स को तुरंत प्रभाव से ऑस्ट्रेलिया वापस भेज दिया. बाद में बांग्लादेश ने यह मैच जीत लिया. यह ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उनकी पहली जीत थी.

# क्रिकेट पर भारी शराब

इस ग़लती के बाद भी सायमंड्स नहीं सुधरे. मार्च 2006 में साउथ अफ्रीका टूर के दौरान वह एक बार में एक रग्बी प्लेयर के साथ भिड़ गए. 2007 के वनडे वर्ल्ड कप के दौरान भी एक नाइटक्लब से निकलने के बाद उनकी एक आदमी के साथ लड़ाई हो गई थी. जनवरी 2008 में सिडनी टेस्ट के दौरान उनके और हरभजन सिंह के बीच हुई लड़ाई सबने देखी.

भज्जी के साथ हुए ‘मंकीगेट’ विवाद के बाद सायमंड्स का करियर संभल नहीं पाया. इस घटना के बाद उनकी शराबखोरी और बढ़ गई. अंत में 2009 T20 वर्ल्ड कप शुरू होने से पहले शराबखोरी के चक्कर में ही सायमंड्स का इंटरनेशनल क्रिकेट करियर भी खत्म हो गया. टूर्नामेंट शुरू होने से ठीक पहले एक रात सायमंड्स ने टीम के साथ डिनर किया. उस वक्त तक वह बिल्कुल ठीक थे. लेकिन उसी रात के खत्म होने से पहले, अलसुबह वह एक रग्बी मैच देखने निकल गए और वहां जमकर शराब पी.

यह शराब उनके करियर पर भारी पड़ गई. दरअसल क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने सायमंड्स के कॉन्ट्रैक्ट में एक क्लॉज डाला था कि वह सार्वजनिक स्थानों पर शराब नहीं पियेंगे. उन्हें शराब पीनी होगी तो वह अपने साथियों के साथ ड्रेसिंग रूम या फिर टीम होटल में पियेंगे. लेकिन सायमंड्स ने बिना शराब कभी रग्बी देखी ही नहीं थी. बस इधर क्लॉज टूटा और उधर सायमंड्स का इंटरनेशनल करियर पटरी से उतर गया. क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने उनका कॉन्ट्रैक्ट रद कर दिया और उनकी डोमेस्टिक टीम क्वींसलैंड ने तो उन्हें कॉन्ट्रैक्ट ऑफर ही नहीं किया था.

हालांकि वह IPL में खेलते रहे. अंत में सायमंड्स साल 2012 में हर तरह की क्रिकेट से रिटायर हो गए. उन्होंने अपने करियर में ऑस्ट्रेलिया के लिए 26 टेस्ट, 198 वनडे और 14 T20 मैच खेले.

सायमंड्स के बचपन के एक कोच टूट बायरॉन ने एक बार कहा था,

‘मुझे उसकी बैटिंग देखने से नफरत थी. उसे अपने शॉट सेलेक्शन पर कोई कंट्रोल ही नहीं था. वह एक ओवर में 24 मार सकता था और फिर उसी ओवर की आखिरी बॉल पर आउट भी हो सकता था.’

शायद बायरॉन को नहीं पता था कि अपने शॉट्स के साथ ही सायमंड्स अपने पीने की आदत को भी कंट्रोल नहीं कर पाते थे. तभी तो उनके बेहतरीन करियर के क़िस्सों से ज्यादा उनकी शराबखोरी की कहानियां हैं. बैटिंग, बोलिंग के साथ सायमंड्स गज़ब के फील्डर भी थे. लेकिन उनकी अपनी ग़लतियों के चलते लोग आज उन्हें एक अच्छे क्रिकेटर से पहले एक शराबी कहते हैं.

# ट्रिविया

# 2008 के वेस्टइंडीज़ टूर के दौरान एक सुबह सायमंड्स वक्त रहते टीम बस में नहीं आ पाए. बस छूट गई. वह टैक्सी करके वक्त पर मैदान में तो पहुंच गए, लेकिन इस अनुशासनहीनता के लिए उन पर 3000 डॉलर का फाइन लगा. बाद में उन्होंने सफाई दी कि वह सो गए थे.

#इसी साल अगस्त में बांग्लादेश के खिलाफ एक अहम मैच से पहले की टीम मीटिंग छोड़ सायमंड्स मछली मारने चले गए. इसकी सजा के तौर पर उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया. इसके चलते सायमंड्स इंडिया टूर पर भी नहीं आ पाए.

# इसी साल सायमंड्स ने न्यूज़ीलैंड के खिलाफ गाबा टेस्ट से वापसी की. ऑस्ट्रेलिया ने टेस्ट 149 रन से जीता और उसी रात सायमंड्स एक पब में लड़ बैठे. ऑस्ट्रेलिया की रग्बी टीम के साथ बैठकर जीत का जश्न मना रहे सायमंड्स को एक आदमी ने पीट दिया.

# साल 1999 में सायमंड्स अपने दोस्त मैथ्यू हेडेन के साथ मछली मारने गए थे. क्वींसलैंड के नॉर्थ स्ट्रैडब्रोक आइलैंड के पास उनकी बोट डूब गई. दोनों प्लेयर्स शार्क से भरे एरिया में कई घंटे तैरकर किसी तरह एक टापू पर पहुंचे और फिर वहां से वापस लाए गए.

# साल 2009 में सायमंड्स ने एक रेडियो प्रोग्राम के दौरान न्यूज़ीलैंड के बल्लेबाज ब्रेंडन मैकलम को ‘गोबर का ढेर’ कहा था. बाद में उन्होंने माफी भी मांगी लेकिन क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने उन पर चार हजार ऑस्ट्रेलियन डॉलर का जुर्माना ठोंक दिया.


किस्सा अंबर रॉय का, जिन्होंने 15 साल की उम्र में फर्स्ट क्लास डेब्यू किया था

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