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फिल्म 'लव सेक्स और धोखा' के किस्से, जो वायरल एमएमएस से प्रेरित होकर बनी थी

2004 में एक एमएमएस वायरल हुआ. बताया गया कि ये क्लिप डीपीएस (Delhi Public School) आर.के पुरम ब्रांच के दो स्टुडेंट्स का है. खूब खबरें बनी. नई तरह की बहस छिड़ी. कहा गया कि सेक्स करते समय रिकॉर्डिंग करने का नया और सनकी ट्रेंड शुरू हो गया है. एक फिल्ममेककर हैं दिबाकर बैनर्जी. 2006 में ‘खोसला का घोसला’ से सनसनीखेज डेब्यू करने के बाद ‘ओए लक्की, लक्की ओए’ जैसी प्रॉमिसिंग फिल्म बना चुके थे. दिबाकर ने कई एमएमएस देखे, जिसमें लोग बड़े अजीबोगरीब तरीके से सेक्स करते हुए उसे रिकॉर्ड भी कर रहे थे. उन्हें कुछ-कुछ समझ आया लेकिन बहुत कुछ समझ नहीं आया. बैठे और दो पन्ने की एक कहानी लिखी. इस कहानी के दो सेग्मेंट थे, जिनका एक सिरा दूसरे से जुड़ा हुआ था. थोड़ा और ब्रेनस्टॉर्मिंग करने के चक्कर में ये कहानियां दो से तीन हो गईं.

फिल्म 'लव सेक्स और धोखा' का पोस्टर.
फिल्म ‘लव सेक्स और धोखा’ का पोस्टर.

इकोनॉमिक टाइम्स को दिए इंटरव्यू में दिबाकर ने बताया कि वो उस एमएमस में दिख रहे लोगों की कहानी जानना चाहते थे. उनकी ये जानने में दिलचस्पी थी कि इस वीडियो के बनने से पहले और बनने के बाद उन लोगों के साथ क्या हुआ होगा. बकौल दिबाकर वो बेसिकली उस सेक्स को एक कॉन्टेक्स्ट देना चाहते थे. इस पर एक फिल्म बनी. नाम रखा गया ‘लव सेक्स और धोखा’ शॉर्ट में एलएसडी (LSD). फैमिली ऑडियंस ने तो नाम सुनकर ही फिल्म से तौबा कर लिया. कहा गया बहुत बोल्ड फिल्म है. फिल्म थी भी बोल्ड. फिल्ममेकिंग स्टाइल के लिहाज़ से. जिन लोगों ने देखा उनकी हवा खिसक गई. क्रिटिक्स ने कहा क्या बवाल चीज़ बना दी है भाई. ग्राउंड ब्रेकिंग, ब्रेक थ्रू जैसे अंग्रेज़ी विशेषण इस्तेमाल किए गए. लेकिन ये फिल्म अपने आइडिया से लेकर उसके एग्ज़ीक्यूशन तक में स्पेशल और अलग थी. कैसे?

ये 'लव सेक्स और धोखा' के ओपनिंग सीक्वेंस से ठीक पहले आने वाला डिस्क्लेमर है.
ये ‘लव सेक्स और धोखा’ के ओपनिंग सीक्वेंस से ठीक पहले आने वाला डिस्क्लेमर है.

पहली फिल्म जिसे पूरी तरह डिजिटल तरीके से शूट किया गया

इस पूरी फिल्म का कॉन्सेप्ट दिबाकर के दिमाग में कैमरे को लेकर था. उनका मानना था कि जो कैमरा उस कपल के अंतरंग पलों को कैद कर रहे हैं. उसने  वो पल भी रिकॉर्ड किया होगा, जब उस कपल ने पहली बार एक-दूसरे का हाथ पकड़ा होगा. मतलब कैमरा जो है, वो सिर्फ कैमरा नहीं है. किरदार है. उसका होना आपको फिल्म जैसा नहीं बल्कि ऐसा फील दे, जैसे आप भी उस कहानी का हिस्सा हैं और कैमरे के नज़रिए से सबकुछ देख रहे हैं. इसलिए इस फिल्म को शूट करने के लिए प्रोफेशनल फिल्मी कैमरा इस्तेमाल नहीं किया गया. इसे हैंडिकैम से लेकर, नाइट विज़न कैमरा, सीसीटीवी कैमरा, स्पाई कैमरा और पानी के अंदर भी काम करने वाले कैमरों से शूट किया गया. इससे एक तो फिल्म का माहौल बदल गया. सबकुछ रियल जैसा लगने लगा. आम से अलग था. और फिल्म कम पैसे में बन भी गई. ये एक प्रयोग था, जिसे काफी सफल माना गया. आगे राम गोपाल वर्मा की ‘नॉट अ लव स्टोरी’ और अमोल गुप्ते की ‘स्टैनली का डब्बा’ भी इसी तरह के फॉर्मेट में शूट की गईं.

फिल्म के तीसरे सेगमेंट 'बदनाम शोहरत' में स्पाई कैमरे से मशहूर म्यूज़िशियन का स्टिंग बनाने की कोशिश करती उसके हाथों परेशान मॉडल. फिल्म में हेरी टांगड़ी ने लोकी लोकल नाम के म्यूज़िशियन और आर्या बैनर्जी ने मॉडल नैना का रोल किया था. आगे हेरी 'एम.एस. धोनी- द अनटोल्ड स्टोरी' फिल्म में क्रिकेटर युवराज सिंह के रोल में दिखाई दिए.
फिल्म के तीसरे सेगमेंट ‘बदनाम शोहरत’ में स्पाई कैमरे से मशहूर म्यूज़िशियन का स्टिंग बनाने की कोशिश करती उसके हाथों परेशान मॉडल. फिल्म में हेरी टांगड़ी ने लोकी लोकल नाम के म्यूज़िशियन और आर्या बैनर्जी ने मॉडल नैना का रोल किया था. आगे हेरी ‘एम.एस. धोनी- द अनटोल्ड स्टोरी’ फिल्म में क्रिकेटर युवराज सिंह के रोल में दिखाई दिए.

कुल्हाड़ी से बदन के टुकड़े होते रहे और हीरोइन चीखती रही

हदसने की ज़रूरत नहीं है. वो किसी इंसान की बॉडी नहीं थी. एक पुतला था, जिसे फिल्म में नुसरत (किरदार का नाम श्रुति) की बॉडी की तरह दिखाया गया. उस बॉडी को बहुत सारे लोग मिलकर कुल्हाड़ी से काट रहे हैं. ये फिल्म के पहले सेगमेंट यानी ‘सुपरहिट प्यार’ का क्लाइमैक्स वाला सीक्वेंस था, जिसमें ऑनर किलिंग की बात हो रही थी. बहरहाल, इस सीन को शूट करने में बड़ी दिक्कत थी. एक तो इसे वास्तविकता के करीब रखना था. ऐसे में अगर दिन में या अच्छे कैमरे से इसे शूट किया जाता, तो पुतला पब्लिक को दिख जाता. ऐसे में तय किया गया कि इसे रात के अंधेरे में नाइट विज़न कैमरे से शूट किया जाएगा. फिल्म की कास्ट और क्रू फिल्मसिटी (मुंबई) पहुंच गई. इस सीन में कटना पुतले को था लेकिन दर्दभरी चीख निकालनी थी नुसरत को. दिबाकर ने नुसरत को मोटिवेट करते हुए कहा कि तुम टेंशन मत लो इस सीन को दो टेक में शूट कर लिया जाएगा. उन्होंने नुसरत को अपनी सारी एनर्जी चीखने-चिल्लाने में लगाने को कहा. शूटिंग शुरू हुई और दिबाकर ने सेट पर मौजूद दूसरे लोगों से नुसरत का मुंह बंद करने को कहने लगे. पहले तो लोग सकुचाए लेकिन फिर जबरदस्ती उनका मुंह दबाने लगे. इसी हाथापाई में नुसरत की नाक पर एक मुक्का लग गया और वो गुस्से में जोर-जोर चिल्लाने लगीं. सनद रहे ये सब ऑफ-कैमरा हो रहा था क्योंकि कैमरे पर तो नुसरत की लाश के टुकड़े हो रहे थे.

फिल्म के उस सीन की तस्वीरें, जिसकी बात ऊपर हो रही थी. अपनी बहन को कुल्हाड़ी से काटता भाई.
फिल्म के उस सीन की तस्वीर, जिसकी बात ऊपर हो रही थी. अपनी बहन को कुल्हाड़ी से काटता भाई.

परदे पर एक्टर की मौत देखकर लोग उल्टी कर रहे थे

ये फिल्म इसलिए भी सुपरखास है क्योंकि जिस ‘सैराट’ का क्लाइमैक्स देखकर मराठी जनता सन्नाटे में चली गई थी, उसे दिबाकर बैनर्जी ने ‘एलएसडी’ में यानी ‘सैराट’ से 8 साल पहले ही परदे पर दिखा दिया था. खैर, ‘सुपरहिट प्यार’ वाले सेग्मेंट में नुसरत भरुचा के साथ अंशुमन झा ने काम किया था. अब जब ऑनर किलिंग के नाम पर परिवार वाले अपनी बेटी को मार सकते हैं, तो सो-कॉल्ड दामाद कैसे बच जाएगा. तो इस सीन में अंशुमन (किरदार का नाम राहुल) को भी कटना था. अपने साले और उसके गैंग के हाथों. ये सीन इतना हार्ड-हिटिंग और वॉयलेंट बन पड़ा कि इसे देखते वक्त दिल्ली के थिएटर में एक महिला ने उल्टी कर दी. उस दिन प्रमोशन के लिए फिल्म की टीम भी थिएटर में मौजूद थी. इंटरवल हुआ और जैसे ही अंशुमन स्टेज पर चढ़े, वो महिला दौड़ते हुए उनके पास आई और कहा – ‘मैं बहुत खुश हूं कि आप ज़िंदा हैं’. अंशुमन पिछले साल आई संजय मिश्रा की फिल्म ‘अंग्रेज़ी में कहते हैं’ में देखे गए थे.

फिल्म के ऑनर किलिंग वाले सीन में नाइट विज़न कैमरे की नज़र में अंशुमन झा.
फिल्म के ऑनर किलिंग वाले सीन में नाइट विज़न कैमरे की नज़र में अंशुमन झा.

अच्छा जब एक्टर्स की बात हो रही है, तो एक क्विक ट्रिविया और जान लीजिए. कहा जाता है कि इस फिल्म से राजकुमार राव (तब राजकुमार यादव) ने अपना डेब्यू किया था. लेकिन मज़ेदार बात ये है कि राजकुमार ‘लव सेक्स और धोखा’ से पहले राम गोपाल वर्मा की अमिताभ बच्चन स्टारर फिल्म ‘रण’ (2010) में काम कर चुके थे. फिल्म में उनका रोल एक न्यूज़रीडर का था. बताया जाता है कि इस चंद सेकंड वाले रोल के लिए राजकुमार को 3000 रुपए मिले थे. ‘रण’ की रिलीज़ के दो महीने बाद आई ‘लव सेक्स और धोखा’ और इसमें राजकुमार राव अपने सेग्मेंट (पाप की दुकान) के लीड एक्टर थे.

फिल्म के एक सीन में अपने दोस्त की दुकान का सीसीटीवी कैमरा एडजस्ट करता आदर्श, जो एक लड़की का एमएमएस बनाकर उधारी चुकाना चाहता है. फिल्म में आदर्श का रोल राजकुमार राव ने किया था. और जिस लड़की का वो एमएमएस बनने वाला था, उसे किरदार को निभाया था नेहा चौहान ने.
फिल्म के एक सीन में अपने दोस्त की दुकान का सीसीटीवी कैमरा एडजस्ट करता आदर्श, जो एक लड़की का एमएमएस बनाकर उधारी चुकाना चाहता है. फिल्म में आदर्श का रोल राजकुमार राव ने किया था. और जिस लड़की का वो एमएमएस बनने वाला था, उस किरदार को निभाया था नेहा चौहान ने.

फिल्म के ट्रेलर को तीन बार एडिट किया गया

फिल्म की शूटिंग पूरी कर पोस्ट-प्रोडक्शन का काम शुरू हुआ. तय हुआ कि ‘लव सेक्स और धोखा’ का ट्रेलर आमिर खान की फिल्म ‘3 इडियट्स’ के साथ अटैच करके थिएटर्स में रिलीज़ किया जाएगा. फिल्म का 90 सेकंड लंबा ट्रेलर काटा गया. लेकिन उस ट्रेलर को देखने के बाद कहा गया कि इसे थिएटर्स में नहीं रिलीज़ किया जा सकता. कम से कम ‘3 इडियट्स’ के साथ तो बिलकुल नहीं. ‘एलएसडी’ का दूसरा ट्रेलर कटा. लेकिन फिर से वही कहानी, थिएटर्स में नहीं दिखा सकते. फाइनली तीसरी बार में जो ट्रेलर कटा उसे ‘3 इडियट्स’ के साथ अटैच किया गया और आमिर की फिल्म के शुरू होने से पहले पब्लिक को दिखाया गया. इतनी सारी एडिटिंग के बाद इस ट्रेलर को 290 मल्टीप्लेक्स स्क्रीन्स पर दिखाया जा सका. जिस फिल्म का ट्रेलर थिएटर्स में दिखाए जाने लायक नहीं माना गया, सोचिए उस फिल्म का क्या हुआ होगा. फिल्म का ट्रेलर यहां देखिए:

‘एलएसडी’ के लिए सेंसर बोर्ड कैंची की धार तेज किए बैठा था

‘लव सेक्स और धोखा’ की रिलीज़ से पहले फिल्म से एक फोटो रिलीज़ की गई. वो फोटो एक लव मेकिंग सीन का था. इसमें एक महिला की पीठ नज़र आ रही थी और वो एक पुरुष के ऊपर बैठी हुई थी. हड़कंप मच गई. उस बैठी महिला को देखकर सेंसर बोर्ड के कान खड़े हो गए. कहा गया कि ये तो अपनी जनता को दिखा ही नहीं सकते. अगर पिक्चर रिलीज़ करनी है, तो इस सीन को ब्लर करना पड़ेगा. दिबाकर को बुरा लगा लेकिन उन्होंने अपने ज़रूरी कॉन्टेंट को ध्यान में रखते हुए ये मीम याद किया और चुप हो गए.

दिक्कत तब बढ़ गई जब सीबीएफसी (CBFC- Central Board Of Film Certification) ने दिबाकर के कॉन्टेंट को छेड़ना शुरू कर दिया. फिल्म में जाति व्यवस्था का भी एक रेफरेंस था. ‘सुपरहिट प्यार’ सेगमेंट में एक नीची जाति के लड़के (राहुल) को ऊंची जाति की लड़की (श्रुति) से प्रेम हो जाता. इसीलिए ये कहानी ऑनर किलिंग की वजह दोनों किरदारों की मौत के साथ खत्म होती है. सेंसर बोर्ड ने कहा कि फिल्म से ये वाला हिस्सा भी हटाइए. क्योंकि इससे लोगों की भावनाएं आहत हो सकती है. लोगों का तो नहीं पता लेकिन इस चीज़ ने दिबाकर को बहुत आहत कर दिया. उन्होंने इस बाबत बात करते हुए एक इंटरव्यू में बताया कि ये दिखने में भले छोटा बदलाव लग रहा हो लेकिन इससे उनकी पूरी फिल्म का मकसद खराब हो गया. जहां ये फिल्म कास्ट जैसी जटिल समस्या की बात करने वाली थी, वहीं अब ये एक अमीर लड़की और गरीब लड़के की प्रेम कहानी बनकर रह गई. जो कि हिंदी फिल्मों का सबसे घिसा-पिटा फॉर्म्यूला है. काट-छांट यही नहीं रुकी. फिल्म में एक गाना था, जिसके बोल थे ‘तू नंगी अच्छी लगती है’. ये फिल्म के कॉन्टेक्स्ट के साथ बड़े आराम से जा रहा था. लेकिन उसे बदलवाकर ‘तू गंदी अच्छी लगती है’ करवा दिया गया. कमाल की बात ये कि इतने सारे कट्स, सीन्स को ब्लर करने और तमाम बदलाओं के बावजूद फिल्म को ‘ए’ यानी एडल्ट सर्टिफिकेट दिया गया, जिसे सिर्फ 18 साल से अधिक उम्र के लोग ही देख सकते थे. भले दिबाकर बैनर्जी ने अपनी फिल्म में ‘लव-सेक्स’ दिखाया हो लेकिन ‘धोखा’ तो उन्हीं के साथ हुआ था. यहां देखिए ‘तू गंदी अच्छी लगती है’:


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