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ऐशेज़: क्रिकेट के इतिहास की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी दुश्मनी की कहानी

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छार उठाइ लीन्ह एक मूठी । दीन्ह उड़ाइ, पिरथिमी झूठी ॥

मलिक मोहम्मद जायसी ने पद्मावती-नागमती-सती-खंड में लिखा कि अलाउद्दीन की सेना ने आकर चित्तौड़ के किले को घेर लिया था लेकिन वो पद्मावती को को सती होने से रोक नहीं सके. ये ख़बर जब अलाउद्दीन खिलजी को मिली तो उसने ज़मीन से राख उठाई और उसे हवा में उड़ाते हुए कहा कि ये पृथ्वी और इसके सभी पदार्थ मिथ्यामात्र हैं. इसके बाद अलाउद्दीन कहता है – जौ लहि ऊपर छार न परै । तौ लहि यह तिस्ना नहिं मरै ॥ यानी जब तक इंसान अपना जीवन जी कर मिट्टी में नहीं मिल जाता है, उसकी इच्छाओं का अंत नहीं होता. 

क्रिकेट के खेल में राख की बहुत भारी कीमत है. एक चुटकी राख. जिसकी चाहत में दो देश यूं भिड़ते हैं कि एक-दूसरे को पटकने का छोटा सा मौका भी नहीं चूकते. ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड और दुनिया की सबसे पुरानी क्रिकेटीय दुश्मनी जिसे नाम मिला – ऐशेज़.


“In affectionate remembrance of English cricket which died at The Oval, 29th August, 1882. Deeply lamented by a large circle of sorrowing friends and acquaintances, RIP. The body will be cremated and the Ashes taken to Australia.”


साल 1882 के सितम्बर महीने के पहले हफ़्ते में ब्रिटिश अख़बार स्पोर्टिंग टाइम्स ने ये छापा. क्रिकेट के जनाज़े का आइडिया था नए-नए जर्नलिस्ट और क्रिकेट प्रेमी रेजिनल्ड शर्ली ब्रुक्स का. एक दिन पहले ही ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड को द ओवल में 7 रनों से हरा दिया था. इंग्लैंड क्रिकेट का जनक था और ऑस्ट्रेलिया पहली दफ़ा इंग्लैंड की ज़मीन पर खेलने के लिए आई हुई थी. पूरा देश इस हार से दुखी था. दुख इस हद तक फैला हुआ था कि क्रिकेट का फ़ातेहा तक पढ़ दिया गया. क्रिकेट की एक गेंद जलाई गयी जिसकी 11 सेंटीमीटर बड़े कप-नुमा मर्तबान में रखा गया. राख – जिसमें सब कुछ मिल जाने पर ही इंसान की तृष्णा का अंत होता है. लेकिन अंग्रेज़ कप्तान ईवो फ़्रांसिस वॉल्टर ब्लाई की चाहत यही थी कि वो इस राख को अपने कब्ज़े में ही रखेंगे. ऑस्ट्रेलिया से बदला लेंगे. और दिसंबर 1982 में ये ऐलान किया कि इसी 30 दिसंबर को ऑस्ट्रेलिया में शुरू होने वाली सीरीज़ में वो उस राख को वापस लेकर ही आयेंगे. यहां से शुरू हुआ क्रिकेट की सबसे छोटी दिखने वाली मगर सबसे ज़्यादा वजनी ट्रॉफी की कहानी – दी ऐशेज़. इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेली जाने वाली सीरीज़ जो एक चुटकी राख के लिए खेली जाती है.

नीचे पढ़िए इस सीरीज़ के कुछ बेहतरीन किस्से जो इस सीरीज़ से निकले और यादगार इतिहास का हिस्सा बन गए.

1. मैदान में किनारे पड़ी एक बॉल ने ऑस्ट्रेलिया के अटैक को आधा कर दिया

साल 2005. एजबैस्टन टेस्ट. क्रिकेट के इतिहास का सबसे शानदार टेस्ट मैच. पहले टेस्ट मैच में ऑस्ट्रेलिया ने लॉर्ड्स में बोहनी कर ली थी. लॉर्ड्स टेस्ट मैच दो बातों के लिए याद किया जाएगा. मेक्ग्रा की बॉलिंग और पीटरसन का पहला टेस्ट मैच. ग्लेन मैकग्रा ने पहली इनिंग्स में 5 और दूसरी में 4 विकेट्स लिए थे. मैच में कुल 9. अपना पहला टेस्ट मैच खेल रहे केविन पीटरसन दोनों इनिंग्स में इंग्लैंड की तरफ़ से टॉप स्कोरर रहे. पहली इनिंग्स में दोनों टीमें लगभग बराबरी पर थीं लेकिन अपनी दूसरी इनिंग्स में ऑस्ट्रेलिया ने काफ़ी बढ़त ले ली और फिर मेक्ग्रा-वार्न की जोड़ी ने आख़िरी वार किया.

बात दूसरे टेस्ट पर आई. मैच शुरू होने को था. दोनों टीमें मैदान पर थीं, वॉर्म-अप चल रहा था. ऑस्ट्रेलिया अपने टॉप पर थी और ये वो दौर था जब ऑस्ट्रेलियाई बॉलिंग अटैक से बड़ा बुरा सपना किसी भी टीम ने नहीं देखा था. पूरी ऑस्ट्रेलिया की टीम ऐसे जुटती थी जैसे भाग-भाग कर चूर हो चुके हिरन के बच्चे को लकड़बग्घों का झुंड घेर लेता है. घेरा धीरे-धीरे छोटा होता जाता था और फिर अचानक काम तमाम. लेकिन पिक्चर अभी बाक़ी थी. ऑस्ट्रेलिया की टीम रग्बी खेल कर वॉर्म-अप कर रही थी. बाउंड्री के पास. उधर ही क्रिकेट का और भी साज़-ओ-सामान पड़ा हुआ था. इसमें क्रिकेट की गेंदें भी शामिल थीं. ग्लेन मेक्ग्रा रग्बी की गेंद पकड़ने के चक्कर में कुछ ज़्यादा ही किनारे हो गए और वहीं कोने में पड़ी एक गेंद पर उनका पैर पड़ गया. पैर मुड़ गया. और ऐसा मुड़ा कि वो वहीं धड़ाम हो गए. वो अपना सर पकड़े हुए पड़े थे. दर्द असहनीय था. और ये मेक्ग्रा को नहीं बल्कि कप्तान रिकी पोंटिंग को देखकर मालूम पड़ रहा था. मेक्ग्रा के आस-पास भीड़ थी. लेकिन आंखों के कोने से इंग्लैंड की टीम भी देख रही थी. थोड़ी ही देर में देखा गया कि कार्ट पर मेक्ग्रा को सहारा देकर बिठाया जा रहा था. मैच शुरू होने का वक़्त पास आ रहा थ. ऑस्ट्रेलिया के लिए ये वक़्त रेंगता हुआ निकल रहा था. इंग्लैंड के खेमे में खलबली थी. और थोड़ी ही देर में सभी के सामने वो ख़बर थी जो एक के लिए आग और दूसरे के लिए पानी का काम कर रही थी – मेक्ग्रा टेस्ट मैच से बाहर हो चुके थे.

mcgrath injury 2005 ashes test edgebaston test

इसका असर टेस्ट मैच पर भी दिखाई दिया. असल में इसका सबसे बड़ा असर पोंटिंग पर दिखाई दिया जिन्होंने अपने करियर का सबसे घटिया फ़ैसला लिया – टॉस जीतकर पहले बॉलिंग करने का फ़ैसला. टॉस के वक़्त पोंटिंग के मुंह से ये सुनते ही इंग्लैंड के कप्तान माइकल वॉन का चेहरा देखने लायक था. वो अपनी ख़ुशी छिपाने की कोशिश कर रहे थे. मैच को इंग्लैंड ने जीता. पहली इनिंग्स में ट्रेस्कोथिक, पीटरसन और फ़्लिंटॉफ़ की इनिंग्स ने बता दिया कि इंग्लैंड किस पॉज़िटिव इंटेंट के साथ उतरा था. फ़्लिंटॉफ़ का स्ट्राइक रेट 100 के ऊपर था. आख़िरी इनिंग्स में ऑस्ट्रेलिया के आख़िरी 2 विकेट्स ने जीतने की भरपूर कोशिश की और मैच को 3 रनों के अंतर पर ले आये लेकिन फिर स्टीव हार्मिसन की गेंद पर माइकल कैस्प्रोविच के कैच ने सीरीज़ को 1-1 कर दिया और यहीं से क्रिकेट को एक ऐतिहासिक तस्वीर मिली जिसमें मैच के हीरो फ़्लिंटॉफ़ जाकर हताशा में ज़मीन पर बैठे ब्रेट-ली को सांत्वना दे रहे थे.

flintoff brett lee ashes 2005 edgebaston test


2. बॉथम की बीवी और पागल बच्चे – क्रिकेट इतिहास की सबसे करारी स्लेजिंग

साल 1986. इंग्लैंड वेस्ट इंडीज़ में बबुरा परफॉर्म कर के आई थी. लेकिन फिर ऐशेज़ में उसने खुद को नया जन्म दिया और अच्छा परफॉर्म करने लगी. सीरीज़ ऑस्ट्रेलिया में हो रही थी. पहले ही मैच में इंग्लैंड ने जीत कर सभी को चौंका सा दिया था जबकि ऑस्ट्रेलिया को ये पूरी तरह से बता दिया गया था कि उनकी टीम अभी यंग थी और उसमें अनुभव की ख़ासी कमी थी. इस सीरीज़ से पहले ऑस्ट्रेलिया 10 टेस्ट मैचों से जीत नहीं सकी थी. इंग्लैंड ने ये सीरीज़ 2-1 से जीती. पहले मैच के बाद दूसरा और तीसरा टेस्ट मैच ड्रॉ रहा जबकि चौथा मैच इंग्लैंड ने जीतकर सीरीज़ अपने नाम कर ली. आखिरी मैच में ऑस्ट्रेलिया 55 रन से जीत मिली.

 मार्व ह्यूज़ की आख़िरी मैच में अच्छी गेंदबाज़ी (बाकी सभी मैचों में वो काफ़ी औसत बॉलर साबित हुए थे और ये नॉर्मल नहीं था), पीटर टेलर और मार्क टेलर के नाम में हुए कन्फ्यूज़न, क्रिस ब्रॉड (इंग्लैंड के बॉलर स्टुअर्ट ब्रॉड के पापा) की शानदार सेंचुरियों के बीच ये सीरीज़ एक बात के लिए जानी जायेगी – सबसे मज़ेदार स्लेजिंग.  वो स्लेजिंग जिसमें बेचारे स्लेज होने वाले खिलाड़ी के साथी भी उसी पर हंस रहे थे. बॉथम और मार्श की स्लेजिंग.

ian botham and rod marsh
इयान बॉथम और कीपर रॉड मार्श

मौका था इंग्लैंड की बैटिंग का. ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ी हमेशा से ही अपने बड़बोलेपन और शातिर खेल की खातिर जाने जाते हैं. और ये सिलसिला डेनिस लिली के वक़्त से चला आ रहा था और समय बढ़ते-बढ़ते मज़बूत होता रहा. इंग्लैंड के नए बल्लेबाज़ मैदान में आ रहे थे. नाम था इयान बॉथम. इंग्लैंड के शानदार ऑल राउंडर. वो जैसे-जैसे क्रीज़ की तरफ़ बढ़ रहे थे, विकेट कीपिंग कर रहे रॉड मार्श अग्रेसिव हो रहे थे. बॉथम के क्रीज़ पर आते ही मार्श ने उनका स्वागत किया. पूछा, “हेय बॉथम! तुम्हारी बीवी और मेरे बच्चे कैसे हैं?” ये एक बेहद संगीन सवाल था. इसपर कोई भी बिफर पड़ता. ऐसी बातें गली-मोहल्लों में लाठी-गोली चलवा देती हैं. मार्श ने औचक सवाल पूछा था. आस-पास खड़े सभी ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी समझ चुके थे कि हुकुम का इक्का फेंका जा चुका था. लेकिन इयान बॉथम ब्रिटिश थे. वो जगह जहां दुनिया के सबसे क्रूर मज़ाक होते हैं. उन्होंने बिना एक भी सेकंड गंवाए ट्रंप कार्ड फेंका और इक्के को निरस्त करते हुए बोले, “बीवी तो ठीक है. बच्चे पागल हैं.” इस वक़्त क्रिकेट का मैदान दो भागों में बंट गया. एक हिस्से में विकेट कीपिंग की पोज़ीशन थी और दूसरे में स्लिप में खड़े फील्डर और साथ में इयान बॉथम. कीपिंग वाले हिस्से में सन्नाटा छाया हुआ था और बाकी आस-पास खड़े खिलाड़ी हंस रहे थे. रॉड मार्श पर उनके साथी ही हंस रहे थे लेकिन किसी ने भी एक दूसरे से नज़र नहीं मिलाई. बताया ये भी जाता है कि बाक़ी के पूरे टेस्ट मैच में रॉड मार्श ने बॉथम से एक शब्द भी नहीं कहा.


3. एक सेलेक्शन मीटिंग जिसमें लात-घूंसे चल गए

ऐसा बताया जाता है कि सेलेक्शन मीटिंग्स काफ़ी इन्टेंस मीटिंग्स हो जाती हैं. ऐसे ऐसे लफड़े होते हैं कि जीवन भर के लिए कहानियां बन जाती हैं. 2001 में कोलकाता टेस्ट के पहले सौरव गांगुली सेलेक्शन कमिटी के सामने धरने की स्थिति में पहुंच गए थे. उन्होंने कहा था कि उन्हें जब तक हरभजन सिंह उनकी टीम में नहीं मिलेगा, वो कमरे से बाहर नहीं जायेंगे. उन्हें हरभजन सिंह मिला और भज्जी ने ऑस्ट्रेलिया की बखिया उधेड़ दी. हरभजन को न केवल हैट्रिक मिली बल्कि इंडिया ने वो टेस्ट शानदार तरीके से जीता.

लेकिन यहां कहानी है साल 1912 की. ऑस्ट्रेलिया की टीम को ऐशेज़ के लिए इंग्लैंड जाना था. टीम के मैनेजर को चुना जाना था. टीम के खिलाड़ियों ने आपसी रजामंदी से एक नाम सोच रखा था. लेकिन क्रिकेट बोर्ड के ज़हन में दूसरा ही नाम था. टीम मैनेजर खिलाड़ियों का मॉनिटर टाइप होता है. मॉनिटर जितना आपके पक्ष में रहे, ब्लैक-बोर्ड पर आपका नाम आने के चांसेज़ उतने ही कम होते हैं. इसी क्रम में खिलाड़ियों को जो मैनेजर दिया जा रहा था, उन्हें पसंद नहीं था. ये हज़रात थे पीटर मैकेलिस्टर. 3 साल पहले बतौर चीफ़ सेलेक्टर इन्होंने खुद को टीम का वाइस कैप्टन भी चुन लिया था. जी, ये समय वो था जब टीम में होने वाला खिलाड़ी ही चीफ़ सेलेक्टर भी होता था. उस टूर पर इन्होंने कई खिलाड़ियों से बदसलूकी की थी. इसमें से एक खिलाड़ी था क्लेम हिल. यही क्लेम हिल 1912 आते-आते टीम का कप्तान बन चुका था.

Peter McAlister and Clem Hill
कलम हिल (लेफ़्ट) और पीटर मैकेलिस्टर

सिडनी में न्यू साउथ वेल्स क्रिकेट असोसिएशन के दफ़्तर में मीटिंग शुरू हुई. इस मीटिंग से कुछ वक़्त पहले की बातें ऐसी थीं कि पीटर मैकेलिस्टर को अक्सर लोगों के बीच या प्रेस के बीच क्लेम हिल की बुराई करते सुने जा रहे थे. हिल को इसकी पूरी ख़बर थी. मीटिंग शुरू हुई और पीटर ने हिल के बारे में ऐसी बातें कहनी शुरू कीं जो कि हिल को रास नहीं आईं. पीटर ने हिल को अपनी याद्दाश्त में शामिल सबसे बकवास कप्तान तक कह दिया. हिल कुछ देर में खड़े हुए और पीटर से बोले, “तुम बहुत देर से पीटना चाह रहे हो. मैं तुम्हारी ये चाहत पूरी कर दूंगा.” इसके बाद बहुत सी कहानियां हैं. लेकिन सभी के अंत में यही आता है कि 20 मिनट के बाद कमरे से हिल बेहद गुस्से में बाहर निकले. अंदर खून से सने पीटर मैकेलिस्टर चिल्ला रहे थे, “वापस आओ और मुझसे मुक़ाबला करो.”

क्लेम हिल अपने होटल चले गए. थोड़ी देर में मीटिंग फिर शुरू हुई और सभी को हैरत इस बात पर हुई कि हिल को टीम में भी रखा गया और कप्तानी भी उन्हीं के हाथों में रही.


4. डेविड बून और बियर के कैन

ऑस्ट्रेलिया के एक महारथी हुए थे – डेविड बून. हालिया दिनों में मैच रेफ़री का काम संभालते हैं. अपने टाइम के बवाल बल्लेबाज़ और शानदार फ़ील्डर डेविड बून. इनके बारे में एक बात फ़ेमस है. ये क्लोज़ फ़ील्डिंग के लिए जाने जाते थे. खासकर शॉर्ट लेग पर. ये कहते हैं कि इन्होंने शॉर्ट लेग पर फ़ील्डिंग करनी इसलिए शुरू की क्यूंकि ये आलसी थे. उस पोज़ीशन पर फ़ील्डिंग करने से इन्हें ज़्यादा दौड़ना नहीं पड़ता था. बून अपनी मूछों के लिए भी जाने जाते थे.

साल 1989. क्वान्टास एयरलाइन्स कि फ्लाइट  हीथ्रो हवाई अड्डे पर उतरी. ये फ्लाइट सिंगापुर से आ रही थी जहां कुछ देर के लिए रुकी थी. इसने सिडनी से उड़ान भरी थी. प्लेन की सवारी नीचे उतरने लगीं तो देखा गया कि बैग रखने वाली ट्रॉली को दो लोग खींच रहे हैं और ट्रॉली में बैग नहीं बल्कि एक तीसरा आदमी बैठा हुआ था. ऐसा लग रहा था जैसे बेहोश हो गया हो. मालूम पड़ा कि ये ऑस्ट्रेलिया की टीम थी जो कि ऐशेज़ खेलने के लिए इंग्लैंड आई हुई थी. ट्रॉली को डेनिस लिली और ग्रीम वुड खींच रहे थे. ट्रॉली में जो बेहोशी की हालत में बैठा हुआ था वो था रॉड मार्श. ऑस्ट्रेलिया का विकेटकीपर. और वो बेहोश नहीं था बल्कि नशे में चूर था. इतना कि उसे अपने आस-पास की गतिविधियों के बारे में कोई आइडिया ही नहीं था. इस ‘बेहोशी’ की वजह थी फ्लाइट में पी गई बियर. मार्श ने 25 घंटे से ज़्यादा लम्बी फ्लाइट के दौरान 45 कैन बियर पी डाली थी. ये एक रिकॉर्ड था. अगर ऐसा कोई कहे तो  उसकी बात कतई मत मानियेगा. क्यूंकि फ्लाइट में सबसे ज़्यादा बियर पीने का रिकॉर्ड किसी और ने बनाया था. उसी फ्लाइट पर. मार्श के ही साथी ने. डेविड बून ने.

डेविड बून. मूंछों वाले.
डेविड बून. मूंछों वाले.

डेविड बून ने फ्लाइट के दौरान 52 कैन बियर पी थी. सारी बियर स्ट्रांग थी. फ्लाइट के दौरान डीन जोन्स, मार्व ह्यूज़, और मार्क टेलर भी बियर पी रहे थे. ये सभी एक साथ कैन खोलते और एक साथ बियर ख़तम कर रहे थे. लेकिन बकौल डीन जोन्स फ्लाइट के सिंगापुर से निकलने तक सभी 22-22 कैन बियर पी चुके थे. थोड़ी देर में उन्हें नींद आ गयी और उनकी नींद काफ़ी देर बाद पैसेंजर्स की  तालियों से खुली. असल में फ्लाइट के कप्तान ने पब्लिक अनाउन्समेंट सिस्टम पर सभी को ये बताया था कि बून ने 44 कैन बियर पी डाली थी जो कि फ्लाइट का रिकॉर्ड था. इसके बाद बाकी बैठे यात्रियों ने खूब शोर मचाया.

इसी फ्लाइट में कप्तान ऐलेन बॉर्डर भी थे और ऑस्ट्रेलिया के सेलेक्टर्स के चेयरमैन भी थे. ये सारा काम इन दोनों की नज़रों से दूर हो रहा था. असल में बॉर्डर अपनी टीम को फ़िट रखने की पूरी कोशिश कर रहे थे और (बकौल स्टीव वॉ) खिलाड़ियों को समझाते थे कि हैमबर्गर में पत्ता गोभी होती है सिर्फ़ इसलिए उसे हेल्दी कहा जाए ऐसा सही नहीं है. लेकिन इस अनाउन्समेंट के बाद उनके कान खड़े हो गए पर अब वो कुछ नहीं कर सकते थे. हीथ्रो पर जब फ्लाइट उतरी तो फ्लाइट अटेंडेंट्स ने बताया कि बून ने 52 कैन धकेल लिए थे.

लंडन पहुंचकर टीम प्रेस कांफ्रेंस के लिए गयी जहां बून से एक भी सवाल नहीं पूछा गया. लेकिन इसके ठीक बाद बून एक पार्टी में गए जो कि सीरीज़ के स्पांसर ने रखी थी. सीरीज़ की स्पांसर थी बियर बनाने वाली कंपनी XXXX. ज़ाहिर है कि बून ने यहां भी बियर पी.

इसके बाद बून डेढ़ दिन सोये और उन्होंने दो दिनों तक प्रैक्टिस सेशन में हिस्सा ही नहीं लिया.


 5. जब स्टीव वॉ ने बगल वाले कमरे में एक सुसाइड कर रहे आदमी की जान बचाई

4 जुलाई, 2001. बर्मिंघम. ऐशेज़ शुरू होने में कुछ 24 घंटों का वक़्त ही बाक़ी था. ऑस्ट्रेलिया के कप्तान को बुलाया गया और उन्हें वो गदा दी गयी जो इस बात का सूचक थी कि ऑस्ट्रेलिया टेस्ट मैचों में नंबर एक टीम थी. ये एक अच्छा पल था लेकिन ऑस्ट्रेलिया के कप्तान का दिमाग अगले दिन में ज़्यादा लगा हुआ था. उस रोज़ प्रैक्टिस करना ऑप्शनल था. पूरे दिन स्टीव वॉ अपने दिमाग में प्लानिंग कर रहे थे. वो खिलाड़ियों से बात कर रहे थे. सीनियर प्लेयर्स पर खासी ज़िम्मेदारी थी.

रात करीब साढ़े 9 बजे स्टीव वॉ अपने कमरे में थे जब उन्हें एक अजीब सी आवाज़ आती सुनाई दी. पहले पहल उन्हें लगा कि होटल में किसी गेस्ट का बच्चा चिल्ला रहा है. लेकिन फिर भी उन्होंने अपने कमरे की टीवी की आवाज़ धीमी की. कमरे में उनके साथ उनकी पत्नी लायनेट भी थीं. दोनों ने तुरंत ही दूसरे कमरे में सो रहे अपने बच्चों को चेक किया. वो दोनों सो रहे थे. अब स्टीव अपने कमरे से बाहर निकले. आवाज़ लगातार आ रही थी. अब धीरे-धीरे लग रहा था कि ये किसी बच्चे की नहीं बल्कि अच्छे-भले आदमी की है. ऐसा आदमी जो फ़िलहाल कतई अच्छा-भला नहीं जान पड़ रहा था.

Steve Waugh ashes diary 2001
स्टीव वॉ और उनकी ऐशेज़ डायरी 2001

कमरे के बाहर निकलते ही गैलरी में कुछ आगे चलने पर स्टीव को एक इंसानी शरीर दिखाई पड़ा. ज़मीन पर गिरा हुआ. हिल रहा था. वो तेज़ी से उसकी ओर बढ़े. आवाज़ उसी शरीर से आ रही थी. अब उसकी चिला कर कही जा रही बात समझ में आ रही थी. वो मदद मांग रहा था. स्टीव जैसे ही उसके सामने पहुंचे तो उन्हें सांप सूंघ गया. उनके सामने एक आदमी पड़ा हुआ था जिसके शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं था. पहले पहल तो स्टीव को ऐसा लगा जैसे नींद में चलता हुआ वो आदमी कहीं का कहीं पहुंच गया था और दोबारा सो गया था. लेकिन फिर जब उन्होंने उसके शरीर पर नज़र डाली तो ऐसा लग रहा था जैसे उसका शरीर रंग छोड़ चुका था. उसकी सांस लगभग उखड़ी हुई थी. साथ ही उसके बाथरूम से एक अजीब सी बू आ रही थी. उसका शरीर आधा कमरे में था और आधा बाहर गैलरी में. स्टीव को समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर वो करें क्या. और अगर उन्हें कुछ करना भी था तो कहां से शुरू करें.

इतने में वहां ऐशेज़ सीरीज़ कवर करने के लिए आया हुआ एक कैमरामैन पहुंचा. उसने तुरंत स्टीव को पहचाना और फिर दोनों ने मिलकर उस आदमी को उठाया. स्टीव अंदर बातरूम में पहुंचे जहां हर तरफ़ उस आदमी की उल्टी पड़ी हुई थी. बाथरूम में एस्पिरिन की खाली शीशी, शराब की एक बोतल फूटी हुई पड़ी थी और साथ ही एक बड़ा चाकू भी रखा हुआ था. पैरामेडिक्स की टीम आई और उसे होश में लाया गया. ये साफ़ था कि उसने ख़ुदकुशी की कोशिश की थी. वो होश में आते ही ‘मैं मरना चाहता हूं! मुझे मरने दो.’ चिल्ला रहा था. उसके शरीर पर कुछ ऐसे निशान भी थे जो इस बात का सबूत थे कि उसने कई बार ख़ुदकुशी की कोशिश की थी.

स्टीव वॉ को रात भर नींद नहीं आई. वो पूरी रात इस घटना के बारे में सोचते रहे. स्टीव ने ऐशेज़ डायरी में लिखा – ‘मैं पूरी रात यही सोचता रहा कि क्या उस शख्स का कोई परिवार था? क्या उसकी कोई केयर करता था या उसका भविष्य कैसा होगा? सिर्फ़ मैं और लायनेट को ही उस शख्स की आवाज़ क्यूं सुनाई दी? चाहे कुछ भी हो, मैं यही चाह रहा था कि वो इंसान जीवित रहे और कैसे भी बेहतर हो जाए.’

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