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ओ ताकी ओ ताकी करते जब हीरो बजाने लगे बाजा

हम स्कूल में थे. सफ़ेद टी-शर्ट पर बटन खोल चेक वाली शर्ट पहनकर स्कूल जाना चाहते थे.सबसे बाहर वाले गेट पर बैठकर गिटार बजाना चाहहते थे गिटार बजाने वालों से लड़कियां इम्प्रेस होती हैं. बहुत जल्दी होती हैं. ऐसा फिल्मों में देखा था. ये तो था फिल्मों का असर. हीरो आमतौर पर बैंड बजाता है,गुंडों की,जालिम जमाने की. पर कभी-कभी वो बाजा भी बजाता है. हीरोइन दोनों में खुश हो जाती है. हम भी हीरो बनना चाहते थे. इनकी तरह बाजा बजाना चाहते थे.

देवआनंद

‘ज्वेलथीफ’ का एक गाना. वैजयंतीमाला नाच रही हैं. होंठों में ऐसी बात मैं छुपा के चली आई. खुल जाए वही बात तो दुहाई हो दुहाई. समझ नही आता नाच रही हैं या धमकी दे रही हैं . बैकग्राउंड में डरावने मुखौटे पहन नाच रहे जूनियर कलाकारों से नजरें हटाइए. वैजयंतीमाला और पंचम दा के पापा के म्यूजिक को भी बिसारिए और देवसाहब के हाथ में देखिए क्या है? पहचाने? नहीं पहचाने! भाई साब, इसे दारबुका कहते हैं. मिडिल ईस्ट से आया है, इसी का एक अफ्रीकन भाई भी होता है जेम्बे. वो भी इतना ही फेमस है.

वीडियो देखिए और पहचानिए. यही है. कोई पूछे तो बता दीजिएगा. हम बताए थे.

जितेन्द्र

फिल्म ‘मेरे हमसफ़र’. जितेंद्र बने थे राजू. घर-गांव छोड़कर भाग रहे थे. जा भी कहां रहे थे बम्बई! पर कोई लिफ्ट नहीं दे रहा था. जा छिपे एक ट्रक में. ट्रक में भी चैन कहां. वहां सैफ की मम्मी पहले से ही घुसी पड़ीं थीं. दोनों पहले तो लुका-दबे गए लेकिन जब ट्रक वाले ने उन्हें फैलने को जगह दी तो लगे गान-तान करने. जितेंद्र ने निकाली बांसुरी और बन गए हरिप्रसाद चौरसिया. दोनों ने डुएट में गाया ये गाना. आप भी सुनें और देखें जितेंद्र को चैन की बंसी बजाते हुए.

राजकपूर 

फिल्म संगम. राजकपूर ने बड़ा मन लगाकर बनाई थी. और गानों के मामले और भी दिल लगाया था. आपको जानकर ताज्जुब होगा तीन गानों में तो खुद राजकपूर इंस्ट्रुमेंट बजाते नजर आए थे. हर दिल जो प्यार करेगा में ‘एकॉर्डियन’, दोस्त-दोस्त न रहा में ‘पियानो’ और बोल राधा बोल में ‘बैगपाइप’. तीनों गाने देख-सुन भी लीजिए.

ऋषि कपूर 

‘बोल राधा बोल’ से याद आया. संगम के 28 साल बाद. राज कपूर के बेटे ऋषि कपूर ने इस नाम की फिल्म की थी. उसमें भी ‘बोल राधा बोल’ के बोलों वाला एक गाना था. संगम में राज कपूर बैग पाइपर बजाते नजर आए थे जबकि ऋषि कपूर डफली बजाते दिख रहे थे.

राजेश खन्ना 

साल भर पहले आराधना आ चुकी थी. राजेश खन्ना बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार घोषित हो चुके थे. 1970 में आई कटी पतंग. इस बार आशा पारेख उनके अपोजिट थीं. राजेश खन्ना ने इस फिल्म के गाने के लिए पियानो बजाया था. गाना फेमस है आपने भी सुना है.एक बार फिर देखिए.

जैकी श्रॉफ 

फिर वो गाना जो आजतक मोबाइल की रिंगटोंस में बजने के लिए ही आया था. जैकी श्रॉफ,बांसुरी बजा रहे थे. बिखरे बालों के बीच सिर पर लाल रुमाल बांधे. दूरदर्शन पर जैकी को इस फिल्म में बांसुरी बजाते देखा तो लगा पत्थर पर दूब उग आई है.

सलमान खान

कौन सोच सकता था कि फटी जींस भी पहनने की चीज हो सकती है? पर भाई ने पहनी,भाई होंडा को समुद्रतट से दौड़ा सीधे स्टेज पर ले आए. और गिटार बजाकर जो पलटे तो इतिहास बन गया. गिटार अनिवार्य हो गया.लड़के लाल ब्लेजर पहने स्कूल के बाद म्यूजिक क्लास में नजर आने लगे. होंडा नही थी,हम हीरो रेंजर से स्कूल जाता. हम जिंदगी भर साइकल से स्कूल जा सकते थे. लेकिन बिना गिटार बजाए नही रह सकता था.

शाहरुख़ खान 

शाहरुख़ गुरुकुल के सामने वायलिन बजा रहे हैं. लड़के भाग-भाग उनको देखने आ रहे थे. गिटार में खबीसपना था. गिटार सीख भी नही सके थे. तो इस बार वायलिन तय रहा. बस कमी ये रह गई कि मन तो बहुत किया पर न गिटार सीख पाए. न वायलिन.

रणबीर कपूर 

स्कूल सालों पीछे छूट चुका था. और टी-शर्ट पर चेक शर्ट पहनने का ख़्वाब भी. फिर एक दिन रणबीर कपूर नजर आए. वो जिनके दादा एकोर्डियन बजा चुके हैं,जिनके पापा डफली बजा चुके हैं. वही रणबीर गिटार बजा रहे थे. पर इस बार गिटार बजाने का दिल न किया. हम बड़े भी हो गए थे,और सोचे रणबीर को क्या मिला था गिटार बजाकर? अंत में अकेला ही रह गया न! और ऐसे ही हमारे स्कूल के बाहर गिटार बजाने का सपना भी अधूरा रह गया.

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