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इस 'तिरंगा' से आज़ादी कब मिलेगी सरकार?

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आजादी का त्योहार आ गया है. बहुत सेंटीमेंटल मामला है. भैया अपने घर से किसको प्यार नहीं होता? बाप चाहे चार लातें पिछवाड़े पर जमा के भगाए, शाम होते ही अपना घर याद आता है. धूल में लिपटे पैर घसीटते वापस आ जाते हैं. देश अपना घर ही है. उनसे पूछो जो देश के बाहर पड़े हैं. और इसकी आजादी से हमको प्यार है. लेकिन आजाद भारत में आजादी के त्योहार पर हर साल कुछ चिरकुटपना हो जाता है. और हम चाहते हैं कि साल दर साल चलने वाली ये बेवकूफी बंद हो, इससे हमको आजादी मिले.

1. लड्डू के लालच से आजादी

यो तो टोरचर है घणा रे यो तो टोरचर है घणा. हमने अपनी मासूम आंखों से वो नजारा देखा है. जब सुबह साढ़े सात बजे नहा धोकर पहुंच जाते थे. स्कूल में बाहर मैदान में बिठा दिया जाता था. फिर पहले एक एक करके बच्चे अपनी परफारमेंस देते थे. उनका सेशन खतम होने के बाद टीचर्स के अंदर का मोदी जागता था. वो स्पीच ठेलना शुरू करते थे. वो कई घंटों का काम होता था. उसके बाद स्कूल वालों को जिनसे चंदा लेना होता था वो मुख्य अतिथ लोग घंटों ‘दो शब्द’ बोलते थे. अगर कोई लोकल नेता आने वाला होता तब तो टाइम लिमिट ही नहीं रहती थी. बच्चे भूखे प्यासे बैठे रहते थे. मिलना रहता था एक या दो लड्डू. सूसू भी आए तो घुड़क के बिठा दिया जाता था. ये सारा टॉर्चर सिर्फ लड्डुओं या बताशों का लालच देकर किया जाता था. ये प्रथा गांवों- कस्बों में बदस्तूर जारी है. इससे आजादी चाहिए.

Image: Reuters
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2. तिरंगा, क्रांतिवीर, हकीकत से आजादी

तिरंगे से नहीं चाहिए, राजकुमार वाली तिरंगा से चाहिए. फिल्म बहुत शानदार थी. 1992 के हिसाब से. लेकिन टीवी वालों की प्लेलिस्ट में पड़कर बरबाद हो गई. शहीद, क्रांतिवीर, क्रांति, अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों आदि का हाल भी वही हुआ है. पूरे दिन पकाते हैं. इतना कि आदमी कि देशभक्ति के कीड़े मर जाएं. इनसे आजादी दिला दो बस.

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3. इंडिया पाकिस्तान जोक्स से आजादी

हमारे स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले से व्हाट्सऐप जोक्स की बाढ़ आ जाती है. जिसमें पाकिस्तान को अपना लौंडा बताने की कोशिश की जाती है. भैये उसको उसके हाल पर छोड़ दो. वो खुद ही मर जाएगा. तुम अपना देश संभालो यार. यहां ऑक्सीजन की कमी से बच्चे मर जाते हैं. स्वास्थ्य मंत्री कहता है कि अगस्त में तो बच्चे मरते हैं. रूलिंग पार्टी का अध्यक्ष कहता है कि इतने बड़े देश में ऐसे हादसे होते रहते हैं. चले हो दूसरों पर जोक बनाने.

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4. ऑनलाइन देशभक्तों से आजादी

ये वाले लोग सिर्फ देशभक्ति जगाने का काम करते हैं वो भी दूसरों के अंदर. खुद तो पाखाने में बीड़ी और मोबाइल लेकर बैठते हैं और वहीं से इंडियन आर्मी के जवानों की, तिरंगे की फोटो शेयर करते रहते हैं. काश लैटरीन में बैठकर तिरंगे की फोटो शेयर करना भी अपराध होता.

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5. इंडेपेंस डे के नाम से ब्लैकमेल करने वालों से आजादी

जैसे ही आजादी का पावन त्योहार आता है, तमाम सेल्समैन सक्रिय हो जाते हैं. जैसे चाटू फिल्म को स्वतंत्रता से जोड़कर परोसने वाले. ऑनलाइन डिस्काउंट देने वाले. ये लोग शॉपिंग में ऐसे लालच दे देते हैं कि पब्लिक बेमतलब की चीजें खरीद डालती है. जैसे मैंने पांच ठो टुच्ची LED लाइट खरीद ली 300 रुपए की. किसी काम की नहीं. डिब्बा खोल के देखा तो 300 रुपए पानी में तैर गए थे. इनसे छुट्टी मिलनी चइये.

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इन चीजों से आजादी मिल जाए तो स्वतंत्रता दिवस मनाने में मजा आए. नारा लगाने वालों से भी आजादी मिलनी चाहिए मितरों.


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