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वॉर मूवी के हमारे रिव्यू से नाराज़ दर्शकों के लिए एक छोटा सा जवाब

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यूट्यूब पर हमारे रिव्यू पर आए कमेंट्स और सवाल के जवाब में एक त्वरित उत्तर ♥

रिव्यू कभी नेगेटिव या पॉज़िटिव नहीं होता. ये कमर्शियल सिनेमा बनाने वालों के यूज़ का शब्द है. कि रिव्यू नेगेटिव आ रहे हैं या पॉज़िटिव आ रहे हैं. हम रिव्यू करते समय ये नहीं सोचते कि इसे नेगेटिव देना है या पॉज़िटिव देना है. हम सिर्फ फ़िल्म देखकर अपना रिएक्शन दे रहे होते हैं अपनी फ़िल्मी समझ के हिसाब से.

जो भी फ़िल्म रिव्यूअर फ़िल्म देखने जाता है वो अपने लिहाज़ से बताता है कि उसे कैसी लगी.

ये समीक्षा फ़िल्म के कमर्शियल पहलू के हिसाब से नहीं होती कि कमर्शियली फ़िल्म कैसी है.

इस लिहाज़ से भी नहीं होती कि फ़िल्म सुपरहिट है कि फ्लॉप है.

हम अपनी कलात्मक उम्मीदों, सिनेमाई समझ और फ़िल्म की अपने जॉनर में श्रेष्ठता के हिसाब से बात करते हैं.

फ़िल्म किस दर्शक को कैसी लगेगी कोई नहीं कह सकता. सबकी रुचि अलग होती है, पसंद अलग होती है. कभी कभी हम एक साथी दर्शक की तरह ज़रूर रेकमेंड करते हैं, कि हमारा अनुभव कैसा रहा, आप देख लें उस पर कितना भरोसा करना चाहते हैं. करें तो आपकी इच्छा, न करें तो कोई बात नहीं.

आज जो दर्शक कमेंट्स में इस बात पर गुस्सा हो रहे हैं कि फ़िल्म बहुत अच्छी है तुम लोगों को पता नहीं. कोई गारंटी नहीं कि ज्यादा सिनेमा देखने के बाद उनकी राय इस फिल्म को लेकर यही रह जाएगी. हो सकता है कुछ बरस बाद, कम सिनेमा से एक्सपोज़ हुए दर्शक, किसी चर्चे वाली या कमर्शियल सजावट वाली फिल्म को लेकर आपकी टिप्पणी से बहुत ख़फ़ा हो जाएं और बोल दें कि तुम्हे फिल्म देखनी नहीं आती.

आपने कितना सिनेमा देखा है और आपने कितनी अच्छी अच्छी फ़िल्में देखी हैं, आप उसी संदर्भ में वॉर या नरसिम्हा रेड्डी जैसी फ़िल्में देख रहे होते हैं. हो सकता है समीक्षक ने विश्व सिनेमा से ऐसी फ़िल्में देखी हैं जो वॉर से ज्यादा जटिल, महीन और बांधकर रखने वाले स्क्रीनप्ले के साथ बनी हैं, ऐसे में उसे वॉर की कमियां उभर उभर कर दिखेंगी.

लेकिन जो दर्शक ऐसी करारी फ़िल्मों या सिनेमा से एक्सपोज़ नहीं हुए हैं उन्हें वॉर बहुत जबरदस्त लगेगी.

इसीलिए जो भी समीक्षक फ़िल्म देखकर आया है ये उसकी रुचि, उसके फिल्मी दायरे और उसकी निर्मम आलोचना पर निर्भर करता है कि वो क्या टिप्पणी देता है.

ये अपेक्षा ग़ैर-वाजिब है कि जो फ़िल्म आपको बहुत अच्छी लगी हो वो सबको पसंद करनी ही पड़े. इसकी कोई ज़रूरत नहीं. क्योंकि समीक्षक आपसे ये नहीं कह रहा कि वॉर को पसंद कैसे कर सकते हो या ये फ़िल्म तुम्हे अच्छी कैसे लग सकती है. ये एकदम सहज और सामान्य है कि वॉर आपको बहुत अच्छी लगेगी और आप उसे चार-पांच बार थियेटर में जाकर देखेंगे. लेकिन समीक्षक हो सकता है एक बार भी देखकर कुछ तृप्त महसूस न करे.

Video: War Review in Hindi । Hrithik Roshan । Tiger Shroff । Vaani Kapoor । YRF Movie

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