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श्रीदेवी के वो 11 गाने, जो उन्हें हमेशा ज़िंदा रखेंगे

श्रीदेवी चली गईं. महज़ 54 साल की उम्र में. पूरा भारत इस ख़बर से इंकार करना चाहता है. हम नहीं मानते. नहीं मानना चाहते. हम सदमे में हैं. हम भौंचक्के हैं. हम गुस्से में हैं. गुस्सा कुदरत के उस निजाम से है, जहां एक न एक दिन सांसे थमने का रिवाज है. रिवाज भले ही हो, कोई सिस्टम तो हो यार! 54 साल की उम्र कोई जाने की उम्र होती है? अभी कुछ महीने भी नहीं हुए जब बड़े परदे पर श्रीदेवी को देखकर आए थे. इस उम्र में भी जो ग्रेस, जो कशिश उनके वजूद का हिस्सा थी, उसकी तारीफ़ कर रहे थे. आज उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं. उनकी फ़िल्में याद कर रहे हैं. उनके गाने गुनगुना रहे हैं. अगर यही निजाम है, तो बड़ा वाहियात निजाम है.

sridevi

श्रीदेवी के गानों की लिस्ट देखी, तो अचानक से पता चला कि वहां तो उन्होंने खज़ाना छोड़ रखा है. जब गाने चुनने लगे तो समझ नहीं आ रहा था क्या रखें और क्या छोड़े. अपनी मौजूदगी भर से श्रीदेवी इन गानों में ज़िंदगी छोड़ गई हैं. यूट्यूब पर उनके गाने लगातार बज रहे हैं सुबह से और खुद को यकीन दिलाया जा रहा है कि वो अभी यहीं हैं.

आइए देखते हैं आज के बाद श्रीदेवी से हम कहां-कहां मुलाक़ात कर पाएंगे.


#1. न जाने कहां से आई है (चालबाज़ – 1989)
सिंगर – कविता कृष्णमूर्ति

सफ़ेद रेनकोट में सर से पैर तक ढंकी हुई और बारिश में स्ट्रीट म्यूजिशियंस के साथ उन्मुक्त होकर नाचती श्रीदेवी. उस दौर में जब लड़कियों को छेड़ने वाले गानों का चलन था, ‘किसी के हाथ न आने का’ ऐलान करने वाली इस बेख़ौफ़ लड़की को सबने सर आंखों पर बिठाया. आज जब फिर से गाना देखा, श्रीदेवी की पहली ही लाइन ने दहला दिया

“बड़ी छोटी है मुलाक़ात
बड़े अफ़सोस की है बात”

इस गाने के बारे में एक ख़ास बात ये कि इसको शूट करते वक़्त श्रीदेवी को 103 बुखार था. बावजूद इसके उन्होंने बारिश में भीगने वाले सीन किए.


#2. मैं तेरी दुश्मन (नगीना – 1986)
सिंगर – लता मंगेशकर

ये वो गाना है जिसकी वजह से श्रीदेवी से इश्क़ हो गया था. परदे पर नागिन का भेस कई अभिनेत्रियों ने धरा है लेकिन जो बात श्रीदेवी में थी, वो कहीं नहीं थी. उनसे बेहतर नागिन हिंदी सिनेमा के परदे पर न पहले कभी हुई है, न होगी. अमरीश पुरी की बीन पर कभी बेबस तो कभी आंदोलित होती श्रीदेवी को देखना अद्भुत सिनेमाई एक्सपीरियंस था.


#3. मेरे हाथों में (चांदनी – 1989)
सिंगर – लता मंगेशकर

90 के दशक के हिंदी भाषी प्रदेशों में ऐसी कोई शादी नहीं रही होगी, जहां ये गाना न बजा हो. लडकियां इसपर हफ़्तों रिहर्सल करके डांस प्रिपेयर किया करती थीं. न जाने कितनी लड़कियों श्रीदेवी कि अदाओं को कॉपी करते हुए कहा होगा,

“ले जा वापस तू अपनी बारात मुंडेया
मैं नहीं जाना, नहीं जाना तेरे साथ मुंडेया”


#4. आज राधा को शाम याद आ गया (चांद का टुकड़ा – 1994)
सिंगर – लता मंगेशकर

‘मेरे हाथों में’ अगर शादियों में बजता था तो ये वाला हर गरबे में. इसे भी बेतहाशा बजाया गया है. श्रीदेवी जितनी अच्छी डांसर थीं, उतने ही शानदार उनके एक्सप्रेशंस हुआ करते थे. इस गाने में वो सब बहुतायत में था. डांडिया की ताल पर ढेर सारी डांसर्स के साथ थिरकती हुई श्रीदेवी. यादों में पैबस्त है ये गाना.


#5. हवा हवाई (मिस्टर इंडिया – 1987)
सिंगर – कविता कृष्णमूर्ति

जब 2011 की ‘शैतान’ और 2017 की ‘तुम्हारी सुलू’ में ये गाना इस्तेमाल हुआ, तो बहुत बुरा लगा था. जबकि ये वर्जन इतने भी बुरे नहीं थे. लेकिन फिर वही बात है. आपको ताजमहल देखना हो, तो आप आगरा ही जाओगे न कि औरंगाबाद. इस गाने पर ज़्यादा क्या ही लिखें! हमारे साथी ने सिर्फ एक गाने पर पूरा आर्टिकल लिखा हुआ है. इसे कायदे से पढ़ा जाना चाहिए.

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#6. नैनों में सपना (हिम्मतवाला – 1983)
सिंगर – लता मंगेशकर

किसी समंदर के किनारे ढेर सारे मटके रखे हुए हैं. रंगबिरंगे मटके, जिनके पिरामिड रचे गए हैं. उन मटकों के बीच ट्रेडिशनल डांसर की पोशाक में, गहनों से लदी हुई श्रीदेवी दिल खोल के नाच रही है. इतने दिलकश तरीके से कि जंपिंग जैक जीतेंद्र के बेतुके पीटी स्टेप्स की तरफ ध्यान ही नहीं जाता.


#7. तू न जा मेरे बादशाह (ख़ुदा गवाह – 1992)
सिंगर – अलका याग्निक

वतन छोड़कर दूर जा रहे बादशाह ख़ान की जुदाई से सहमी हुई बेनज़ीर. वो डर, वो पीड़ा, वो घबराहट श्रीदेवी के रोम-रोम से झलकती है. बरसों तलक ये गीत उन लोगों की पीड़ा का इज़हार बना रहा, जो अपनों से बिछड़ने के लिए अभिशप्त हैं.


#8. मेरी बिंदिया, तेरी निंदिया (लम्हे – 1991)
सिंगर – लता मंगेशकर

लम्हे’ श्रीदेवी के बेहतरीन कामों में से एक है. ये अपने समय से काफी आगे की फिल्म थी. यश चोपड़ा का सबसे प्यारा बच्चा रही है फिल्म. मां-बेटी के डबल रोल में श्रीदेवी ने बेहद ज़िम्मेदार अभिनय किया था. गाने की शुरुआत में अपनी मां की तस्वीर में उनकी बिंदिया निहारती श्रीदेवी इतनी मासूम लगती है कि आप चाहते हैं उस फ्रेम को रोक लें. तमाम गाने में वो अपनी मां के कपड़े, ज़ेवर पहनकर उनकी नक़ल करने की कोशिश करती रहती है.


#9. चांदनी, ओ मेरी चांदनी (चांदनी – 1989)

क्या आप इस फिल्म की कल्पना श्रीदेवी के बिना कर सकते हैं? स्विट्ज़रलैंड की वादियों में ऋषि कपूर से शिकवा-शिकायत करती श्रीदेवी को कौन भुला सकता है? वो याद से याद दिलाती है कि, ‘अपनी महबूबा से मिलने, ख़ाली हाथ नहीं आते’. इस गाने में उनके लिए खुद उनकी ही आवाज़ ही इस्तेमाल हुई थी. खुरदरी सी आवाज़ में गाती श्री कितनी भली लगती थी.


#10. तेरी बंजारन (बंजारन – 1991)
सिंगर – अलका याग्निक

इंतज़ार की व्यथा को ज़ुबान देता गीत. एक कबीलाई लड़की के भेस में पहाड़ों पर नाचती-गाती श्रीदेवी का सवाल कितना मौजूं था,

“दूर बहुत क्या देस है तेरा
पहुंचा नहीं संदेस जो मेरा”

साथ ही वो आशंकित भी है,

“ऐसा न हो कि तू न आए
डोली और कोई ले जाए”

कुल मिलाकर अपने सपनों के राजकुमार का इंतज़ार करती तमाम लड़कियों के एहसासात की तर्जुमानी था ये गीत.


#11 ऐ ज़िंदगी गले लगा ले (सदमा – 1983)

ये गाना जितना सुरेश वाडकर, इलैयाराजा, गुलज़ार और कमल हासन का है, उतना ही श्रीदेवी का भी. जबकि इस गीत में वो सिर्फ मौजूद भर हैं. ये उनका मौजूद होना ही इसे गीत को एक विजुअल ट्रीट बना देता है. मानसिक रूप से कमज़ोर लड़की जिसे कमल हासन तरह-तरह से खुश रखने की कोशिश में मुब्तिला हैं. पोंछा लगे फर्श पर पैर रखने की शरारत करती श्रीदेवी, कमल की पीठ पर सवार श्रीदेवी, पटरी पर झुके कमल के ऊपर झुककर गाड़ी आने की आहट सुनती श्रीदेवी. कितने पावरफुल दृश्य थे ये.

श्रीदेवी के अप्रतिम गानों की लिस्ट बहुत लंबी है. क्या-क्या याद रखें. बल्कि उनके साथ तो ये भी है कि आप यूट्यूब खोलकर सिर्फ उनका नाम टाइप कर दें. जो भी सामने आए देखते चलें. यकीन दिलाते हैं कि आप अधूरा नहीं छोड़ेंगे.


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