Submit your post

Follow Us

किस बस पर चढ़ना चाहोगे दद्दा?

देश में पहली बस 15 जुलाई 1926 को दौड़ी. वो ट्रक की चेसिस पर बनी थी. 1934 में बस जैसी बस चलनी शुरू हुई. तब से अब तक सिर्फ किराए में नहीं, बसों की क्वालिटी में भी विकास हुआ है. लेकिन इस डेवेलपमेंट की आंधी में भी नहीं उड़े हमारी बसों के कुछ फैक्ट्स. अपने इंडिया में मिलती हैं ये बसें. इनमें से किसी न किसी बस की सवारी सबने की होगी.

1. जलकुकड़ी बस

हम सड़क पर खड़े बस का इंतजार कर रहे हैं. उधर को जाती एक भी बस नहीं दिखेगी जिधर अपने को जाना है. दूसरी साइड जाने के लिए बसें एक के ऊपर एक चढ़ी बैठी रहती है.

2. बिना सीट वाली बस

बस में चढ़ते ही बड़ी शिद्दत से अपन सीट खोजते हैं. देखते हैं कि हमाए सिवा सबको सीट मिल चुकी है. अपन अकेले खड़े हैं. इंसानियत से भरोसा उठ जाता है कसम से. बस भर की सवारियां अपनी दुश्मन नजर आने लगती है.

3. फुल टू फटाक बस

पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर की बस में फर्क क्षमता का हैये नहीं. फर्क है कंडक्टर की नैतिकता और बड़प्पन का. इस मामले में प्राइवेट सेक्टर की बस भारी पड़ेगी लिख के रख लो. 60 सीट की क्षमता का राग अलापो कहीं और जाकर. इसमें 240 से नीचे एक सवारी न चढ़ेगी.

4. बेपरदा बस

बसों में दरवाजे किसलिए होते हैं? गुड कोच्चन. बसों के दरवाजे बंद करने के लिए नहीं होते बालक. बल्कि पकड़ के खड़े होने के लिए और ‘दरवाजे पर न खड़े हों’ लिखने के लिए होते हैं.

5. सोती सुंदरी बस

जिस दिन कहीं पहुंचने की बहुत जल्दी हो. बस की सांसे उखड़ जाती हैं. रेंगती है जैसे कछुआ. अइसा लगता है कि बस में बैठे बैठे बाल पक जाएंगे. स्किन लटक जाएगी. बुढ़ापा आ जाएगा.

6. यमराज बस

दुनिया की बसें लोगों को मंजिल तक पहुंचाती हैं. दिल्ली में एक होती थीं ब्लू लाइन बसें. भाईसाब आतंक था उनका. आदमी को अंजाम तक पहुंचाती थीं. मने आखिरी मंजिल तक. उसको यमराज का भैंसा भी कह सकते हो. यमराज बुरा नहीं मानेंगे.

7. ड्रीम बस

बसें लोगों को मंजिल या आखिरी मंजिल तक पहुंचाती हैं. फिल्मी बसें सपनों की दुनिया दिखाती हैं. बॉम्बे टू गोवा और गोविंदा की चल चला चल याद है. अच्छा सेट मैक्स और सूर्यवंशम का होल स्क्वायर? जिसमें बसों के सहारे हीरा ठाकुर करोड़पति बन जाता है. हॉलीवुड वालों ने तो कियानू रीव्स को बस में डाल कर पूरी ‘स्पीड’ फिल्म बना ली.

8. म्यूजिकले आजम बस

और बसों पर गाने. गोविंदा की फिल्म ‘हद कर दी आपने’ में हद कर दी थी. बस को टारगेट करते हुए गाया ‘बस कर बस में बेबस बस जाएं, न बस नैनों में नैना. बात शुरू हुई बस से और खतम हुई टाटा नैनो पर.

9. हमाए देहात का बस

लम्बी दूरी पर जा रहे हो? बस में? उत्तर प्रदेश के हाइवे पर. ईंटा लेकर अपनी पीठ ठोंक लो एक बार. भैया अब टाइगर बचे कित्ते हैं. उनमें से एक आप हैं.

10. एहसान फरामोश बस

लास्ट में सबसे खतरनाक वाली बस. जिस बस से अभी आदमी उतरा है. वही बस उसे कुचल कर आगे बढ़ जाए.

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

पोस्टमॉर्टम हाउस

इललीगल- जस्टिस आउट ऑफ़ ऑर्डर: वेब सीरीज़ रिव्यू

कहानी का छोटे से छोटा किरदार भी इतनी ख़ूबसूरती से गढ़ा गया है कि बेवजह नहीं लगता.

बेताल: नेटफ्लिक्स वेब सीरीज़ रिव्यू

ये सीरीज़ अपने बारे में सबसे बड़ा स्पॉयलर देने से पहले स्पॉयलर अलर्ट भी नहीं लिखती.

पाताल लोक: वेब सीरीज़ रिव्यू

'वैसे तो ये शास्त्रों में लिखा हुआ है लेकिन मैंने वॉट्सऐप पे पढ़ा था.‘

इरफ़ान के ये विचार आपको ज़िंदगी के बारे में सोचने पर मजबूर कर देंगे

उनकी टीचर ने नीले आसमान का ऐसा सच बताया कि उनके पैरों की ज़मीन खिसक गई.

'पैरासाइट' को बोरिंग बताने वाले बाहुबली फेम राजामौली क्या विदेशी फिल्मों की नकल करते हैं?

ऐसा क्यों लगता है कि आरोप सही हैं.

रामायण में 'त्रिजटा' का रोल आयुष्मान खुराना की सास ने किया था?

रामायण की सीता, दीपिका चिखालिया ने किए 'त्रिजटा' से जुड़े भयानक खुलासे.

क्या दूरदर्शन ने 'रामायण' मामले में वाकई दर्शकों के साथ धोखा किया है?

क्योंकि प्रसार भारती के सीईओ ने जो कहा, वो पूरी तरह सही नहीं है. आपको टीवी पर जो सीन्स नहीं दिखे, वो यहां हैं.

शी- नेटफ्लिक्स वेब सीरीज़ रिव्यू

किसी महिला को संबोधित करने के लिए जिस सर्वनाम का इस्तेमाल किया जाता है, उसी के ऊपर इस सीरीज़ का नाम रखा गया है 'शी'.

असुर: वेब सीरीज़ रिव्यू

वो गुमनाम-सी वेब सीरीज़, जो अब इंडिया की सबसे बेहतरीन वेब सीरीज़ कही जा रही है.

फिल्म रिव्यू- अंग्रेज़ी मीडियम

ये फिल्म आपको ठठाकर हंसने का भी मौका देती है मुस्कुराते रहने का भी.