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तस्वीरें देखिए और तय करिए, हमें कैसा पुलिसवाला चाहिए

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कैसा लगता है आपको, जब कोई कहे कि पुलिस आ गई. किसी को पुलिस से नफरत होती है, तो कोई पुलिस के आने पर खुद को सुरक्षित महसूस करता है. लेकिन ज्यादातर लोग पुलिस के रवैये से खौफ ही खाते हैं. कोई नहीं चाहता है कि कभी उनका साबका पुलिस से पड़े. लेकिन जिंदगी है, किसी न किसी मोड़ पर तो उनसे मुलाकात होगी ही. और ये मुलाकात किसी के लिए अच्छी याद बन जाती है तो किसी के दिलों में खौफ पैदा कर देती है.

Police feature up

ये तस्वीर उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले की है. तस्वीर में साफ तौर पर दिख रहा है कि पुलिसवाले एक शख्स को लात-घूसों से पीट रहे हैं और उसे घसीट रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वाकया बस्ती के गौर थाने का है, जहां पुलिसवालों ने 12 नवंबर को इस शख्स की पिटाई करने के बाद 100 मीटर तक घसीटा और थाने ले गए. इस दौरान उस शख्स की पत्नी अपने बच्चे को गोद में लिए हुए पुलिसवालों ने न मारने की गुहार लगाती रही. लेकिन वर्दी के रौब में पुलिसवालों ने महिला की एक नहीं सुनी और उसकी पिटाई करते रहे. किसी ने इस घटना का वीडियो बना लिया जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.

नवजात और उसकी मां की जान बचाने वाले सुदेश तिवारी (दाएं)
नवजात और उसकी मां की जान बचाने वाले सुदेश तिवारी (दाएं)

अब इस दूसरी तस्वीर को देखिए. ये एक नवजात की तस्वीर है, जो भोपाल की है. नवजात की मां का नाम फातिमा है. 11 नवंबर को जब राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भोपाल पहुंचे, तो प्रोटोकॉल के तहत भोपाल के बाणगंगा इलाके में ट्रैफिक रोक दिया गया था. फातिमा और उसके पिता मोहम्मद इकबाल और मां शाहना भी इस ट्रैफिक में फंस गए थे. फातिमा गर्भवती थीं और उन्हें लेबर पेन हो रहा था. उसका अस्पताल पहुंचना जरूरी था. ऐसे में फातिमा की मां शाहना कार से उतरीं और उन्होंने ड्यूटी पर मौजूद हनुमानगंज थाना प्रभारी सुदेश तिवारी को पूरी बात बताई. सुदेश तिवारी बिना देर किए कार के पास आए और खुद उसकी ड्राइविंग सीट पर बैठ गए. उनको देखकर वहां मौजूद और भी पुलिसवाले आ गए और 15 मिनट में गाड़ी को ट्रैफिक से बाहर निकाल दिया. पूरा परिवार अस्पताल पहुंचा, जहां फातिमा ने आधे घंटे के बाद एक बच्ची को जन्म दिया. ये सब संभव हुआ सुदेश तिवारी की वजह से, जिन्होंने मौके की नज़ाकत को समझते हुए मदद की.

बच्ची के जन्म के बाद मोहम्मद इकबाल  के बेटे जीशान ने डीआईजी संतोष कुमार सिंह को ट्वीट किया और थाना प्रभारी सुदेश तिवारी की तारीफ करते हुए शुक्रिया अदा किया.

डीआईजी ने भी सुदेश तिवारी को सम्मानित किया और कहा कि सुदेश तिवारी ने जो किया है, वो सभी पुलिसकर्मियों के लिए प्रेरणा है. प्रेरणा ये है कि मानवता सबसे पहले है, जिससे किसी की ज़िंदगी बचाई जा सके.

अब दोनों तस्वीरों को एक साथ रखकर देखिए. बस्ती का वो शख्स या उसकी पत्नी की नज़र जब भी किसी पुलिसवाले पर पड़ेगी, वो उसकी छाया से भी बचना चाहेंगे. उनकी आंखों में पुलिसवालों के लिए शर्मिंदगी होगी. वहीं मोहम्मद इकबाल या उनके परिवार का कोई भी सदस्य पुलिसवालों को देखेगा, तो उनकी आंखों में एक चमक होगी, जिसमें गर्व महसूस होगा.

इन सबके बीच ये याद रखा जाना चाहिए कि ये वही यूपी पुलिस है, जिसने छह महीने में 15 एनकाउंटर कर बदमाशों के हौसले तोड़ दिए हैं. और ये वही भोपाल पुलिस है, जिसपर एक गैंगरेप के मामले में लीपापोती करने के आरोप लगे हैं और जिसकी वजह से पूरे देश में उसकी बदनामी हो रही है.


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Two difference faces of police, one of them is full of cruelty and one of them is full of humanity

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