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NDTV के मालिक पर छापे से जो CBI को नहीं मिला, वो किसी ने वॉट्सऐप पर लीक कर दिया

सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने बैंक से धोखाधड़ी के मामले में प्रणॉय रॉय के घर छापा मारा. प्रणॉय न्यूज चैनल NDTV के को-फाउंडर और एग्जिक्यूटिव को-चेयरपर्सन हैं. उनकी पत्नी राधिका रॉय भी चैनल की को-फाउंडर हैं. चैनल की तरफ से आए बयान में इसे बदले की भावना से लिया गया एक्शन और मीडिया पर हमला बताया गया.


एक न्यूज चैनल के मालिक के खिलाफ मामला है और CBI ने रेड मारी है. मामला किसी के भी खिलाफ हो, देश की जांच एजेंसियां अपना काम करेंगी. लेकिन दिक्कत ये है कि बाजार में फैसला हो चुका है. चौराहों पर प्रणॉय दोषी ठहराए जा चुके हैं और उनका चैनल NDTV गद्दार.

भीड़तंत्र के इस माहौल में किसी के लिए भी सबसे मुश्किल है प्रणॉय के बारे में लिखना. अगर कोई मीडिया हाउस प्रणॉय पर संदेह जताता है, तो उस पर प्रतिद्वंदी होने के चलते स्वाभाविक विरोध का आरोप लगेगा. अगर कोई तर्कों के जरिए प्रणॉय को निर्दोष बताए, तो वो भी देशद्रोही और गद्दार ठहरा दिया जाएगा. झुंड हर व्यक्तिगत कुंठा को हिंसा में तब्दील कर देता है.

‘देशद्रोही’ और ‘गद्दार’ जैसे बेहद सख्त और क्रूर शब्दों के इस्तेमाल के पीछे वजह ये है कि वॉट्सऐप और बाकी सोशल मीडिया पर बदनामी वाला खेल शुरू हो चुका है.

इस खेल में एक्सपर्ट ट्रोल आर्मी गल्ले पर बैठ गई है और एजेंडा फैलाने के लिए जानबूझकर गलत जानकारी देने वाले की-बोर्ड की धूल झाड़ चुके हैं. ये फोटो देखिए:

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एक वॉट्सऐप मैसेज का ये स्क्रीनशॉट फेसबुक से ट्विटर और वॉट्सऐप तक घूम रहा है. बहुत तेजी से. ये इतना शेयर हो रहा है कि लोग इसमें से अपने हिस्से की चीजें ढूंढकर उन्हें हाईलाइट करके शेयर कर रहे हैं. जैसे ये:

highlight

चाहें, तो एक बार फिर ध्यान से पढ़ लीजिए कि मैसेज में क्या लिखा है. फिर आइए, एक-एक करके बात करते हैं.


#1. ‘कल CBI ने NDTV के मालिक प्रणव रॉय के यहां रेड मारी और गुप्त सूचनाएं निकाली. प्रणव रॉय का जन्म प्रमाण पत्र भी मिला, जिसमे उसका नाम परवेज राजा है और जन्मस्थान कराची.’

भइया सुनो पहले: 2 जून को FIR दर्ज करने के बाद CBI ने जब 5 जून को प्रणॉय के दिल्ली, देहरादून और मसूरी वाले घर पर छापा मारा, तो कहा, ‘केस से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज सीज कर दिए गए हैं.’ जब मामला ICICI बैंक, कर्ज और धोखाधड़ी से जुड़ा है, तो यकीनन दस्तावेज बैंक संबंधी होंगे. एक मिनट रुकिए. प्रणॉय रॉय का जन्म प्रमाण पत्र? 1949 में पैदा हुए शख्स का जन्म प्रमाण पत्र? सच्ची!

प्रणॉय रॉय
प्रणॉय रॉय

मैसेज में बताया गया कि प्रणॉय की पैदाइश कराची की है. ये गलत है. प्रणॉय 1949 में कोलकाता में पैदा हुए थे. उनके बंगाली पिता एक ब्रिटिश कंपनी की भारतीय यूनिट में चीफ एग्जिक्यूटिव थे और आयरिश मां टीचर थीं. प्रणॉय की पढ़ाई देहरादून के दून स्कूल, लंदन की क्वीन्स मेरी यूनिवर्सिटी और दिल्ली यूनिवर्सिटी में हुई है. प्रणॉय ने अपने नाम में कभी कोई बदलाव नहीं किया. यहां तक कि उन्होंने कभी अपना नाम ‘प्रणव रॉय’ भी नहीं लिखा, परवेज राजा का तो सवाल ही नहीं उठता.

#2. ‘एक अन्य दस्तावेज से खुलासा हुआ है कि NDTV का पूरा नाम नवाजु दीन तौफीक वेंचर है जो कि उसके पिता का नाम है.’

भइया फिर से सुनिए: NDTV का पूरा नाम न्यू डेल्ही टेलीविजन (New Delhi Television) है. 1988 में बने इस चैनल पर मालिकाना हक रखने वाली कंपनी Urban Brew Studios दक्षिण अफ्रीका की कंपनी है. प्रणॉय के पिता का नाम नवाजु दीन तौफीक (जो असल में नवाजुद्दीन होता है) नहीं, बल्कि हरीकेन रॉय था.

urban

#3. ‘उसकी पत्नी राधिका का असली नाम भी राहिला है, राहिला के दादा बाबर की सेना में रसोइये थे.’

आइए भइया बताएं आपको: प्रणॉय की पत्नी राधिका NDTV की को-फाउंडर हैं. प्रिंट-जर्नलिज्म में 10 साल के करियर के बाद वो 1987 में चैनल में आई थीं और 1988 में NDTV बना था. इससे पहले राधिका दि इंडियन एक्सप्रेस और इंडिया टुडे जैसे मीडिया हाउस में काम कर चुकी थीं. उनकी बहन वृंदा करात CPI(M) की नेता और राज्यसभा सांसद हैं, जिनका जन्म कोलकाता में ही हुआ था. राधिका भी कोलकाता में ही पैदा हुईं.

पति प्रणॉय के साथ राधिका रॉय
पति प्रणॉय के साथ राधिका रॉय

राधिका और वृंदा के पिता का नाम सूरज लाल दास था. सूरज लाल की तीन बेटियां और एक बेटा था और बच्चों के शुरुआती दिनों में सभी कोलकाता में ही रहते थे. मेसेज में बताया जा रहा है कि राधिका के दादा बाबर की सेना में रसोइए थे. मेसेज लिखने वाले ने यहां ब्लंडर कर दिया. 1483 में पैदा हुए बाबर का 1530 में देहांत हो गया था. अगर राधिका के दादा बाबर की सेना में रसोइए थे, तो जरूर 400 साल से ज्यादा जिए होंगे, वरना राधिका 1949 में कैसे पैदा होतीं.

#4. ‘इनके बेडरूम से एक डार्ट गेम भी बरामद हुई है, जिसमें ये मोदी जी की फ़ोटो को टारगेट बनाकर खेलते थे.’

अच्छा इसका सुनिए भइया: इस तरह के मेसेज लिखने वाली जो प्रजाति है, उसे सबके बेडरूम्स में बड़ा इंट्रेस्ट होता है. आदमी क्या देखता है, कितना देखता है, कितनी देर कर पाता है (अभिजीत का 2 घंटे वाला ट्वीट भी इसी प्रजाति का था), कितने कॉन्डम यूज करता है (बीजेपी विधायक ज्ञानदेव आहूजा ने JNU में कॉन्डम गिनवाए थे)… सब जानना होता है इन लोगों को. हम बस ये जानना चाहते हैं कि इतनी गुप्त जानकारी लीक होकर इन तक कैसे पहुंची.

प्रणॉय रॉय का घर, जहां छापा मारा गया
प्रणॉय रॉय का घर, जहां छापा मारा गया

#5. ‘हिंदू भाइयो इन दोहरे चरित्रों को पहचानो और जागो. जो ये मेसेज 10 ग्रुप में न फॉरवर्ड करे समझो उसकी रगों में भी बाबर का खून है.’

ये आखिरी है भइया: ‘हिंदू भाइयों’ को जगा रहा मेसेज लिखने वाला शख्स इस मैसेज को 10 ग्रुप में फॉरवर्ड करने के लिए कह रहा है. एक बात तो तय है कि ये बेरोजगार है और दूसरों को भी बेरोजगार समझ रहा है. 10 ग्रुप तो यार उनके वॉट्सऐप में नहीं होते, जो ऑफिस ग्रुप, फैमिली ग्रुप और अश्लील ग्रुप, सब एक साथ संभालते हैं. रगों में बाबर का खून नहीं है, ये साबित करने के लिए आदमी दिनभर वॉट्सऐप पर ही बैठा रहे!


2 जून को हिंदुस्तान टाइम्स में अपने आर्टिकल में नसीरुद्दीन शाह ने लिखा था, ‘हम ‘आक्रमणकारियों के वंशजों’ की रगों में बहुत सारा खून इस मुल्क का भी है.’ नसीरुद्दीन उन्हीं लोगों से बात कर रहे थे, जो हर मुस्लिम को बाबर का वंशज मानकर या तो मार देना चाहता है या देश से निकाल देना चाहता है. अगर किसी की रगों में बाबर का खून है, तो उसकी रगों में इस मुल्क का भी खून है और इसमें कुछ भी अपमानजनक नहीं है.

Naseer

ये मैसेज एक बानगी है. एक नमूना, जो बताता है कि हम कितने बीमार हो चुके हैं और किस राह पर हैं. NDTV की एंकर निधि ने अपने एक शो से बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा को बाहर कर दिया था. सोशल मीडिया पर एक बड़ा वर्ग यही मान रहा है कि संबित को बाहर करने की वजह से NDTV के खिलाफ ऐसा एक्शन लिया गया. हालांकि, CBI ने इस पर कुछ नहीं कहा है.

NDTV के शो में निधि राजदान के साथ बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा, जहां उन्हें बाहर कर दिया गया था
NDTV के शो में निधि राजदान के साथ बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा, जहां उन्हें बाहर कर दिया गया था

और प्रणॉय के बर्थ-सर्टिफिकेट पर कराची लिखा भी होता, तो क्या किसी को क्यों तकलीफ है? हम पाकिस्तान से सेंधा नमक मंगाकर व्रत में खाते हैं, वहां से कपास आता है, सरकार ने उसे मोस्ट-फेवर्ड नेशन का दर्जा दे रहा था, अच्छा-खासा धंधा चल रहा है उसके साथ… और आपको किसी के कराची में पैदा होने से तकलीफ है. भगत सिंह, लालकृष्ण आडवाणी और गुलजार भी पाकिस्तान में पैदा हुए थे. विजय माल्या तो यहीं की पैदाइश हैं. बर्मिंघम में बैठकर मैच देखते हैं. तो क्या बर्मिंघम में पैदा होना भी अपराध घोषित कर दिया जाएगा.

हम उस दौर में जी रहे हैं, जहां सिर्फ एजेंडा ठेला जा रहा है. मीडिया जमात में बरखा दत्त, रवीश कुमार और राजदीप सरदेसाई न जाने कब से ट्रोलिंग झेलते आ रहे हैं. उनके बारे में भी ऐसी ही भ्रामक अफवाहें फैलाई जाती हैं. वॉट्सऐप पर मैसेज देखने में किसी का कुछ नहीं जाता है, लेकिन गूगल पर उसे क्रॉस-चेक करने में सबके प्राण सूख जाते हैं.

कश्मीर पर अलग राय रखने पर अरुंधति रॉय का इस तरह विरोध किया गया
कश्मीर पर अलग राय रखने पर अरुंधति रॉय का इस तरह विरोध किया गया

पिछली सरकार में CBI की साख संदेह के घेरे में थी, लेकिन इस सरकार ने फिर से एजेंसी पर भरोसा कायम कराया है. है न! पूरे देश को CBI पर पूरा भरोसा है. प्रणॉय ने बैंक को धोखा दिया होगा, तो उन्हें जरूर सजा मिलेगी. आप क्यों खामखां किसी को दूसरे मुल्क का घोषित करने पर तुले हुए हैं. इससे सजा थोड़े न मिलेगी. हम तो कनाडा के नागरिक अक्षय कुमार को भी भारत-भक्ति दिखाने का पूरा मौका देते हैं.

जिस देश की इंटरनेट लिटरेसी उसकी एजुकेशन लिटरेसी से ज्यादा हो, वहां ऐसे मैसेजेस के अलावा किसी और चीज की उम्मीद की भी नहीं जा सकती. ये मेसेज लिखने वाला कहीं मिल जाए, तो इसे डिजिटल इंडिया का ब्रांड एंबेस्डर बना देना चाहिए.


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