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इस भारी-भरकम मशीन को महाराष्ट्र से केरल लाने में ट्रक को एक साल लग गया!

अंतरिक्ष की दुनिया. स्पेस. इससे जुड़े काम की एक भारी-भरकम मशीन. वज़न 70 टन. इसे लेकर एक ट्रक महाराष्ट्र से केरल पहुंचा है. ये नॉर्मल बात है. लेकिन करीब एक साल में पहुंचा है. हां, अब थोड़ा मामला बना. 74 पहियों वाला वोल्वो का एक ट्रक (कैरियर समेत) इसे लेकर सड़क पर चलता रहा. 1700 किलोमीटर चलने के बाद अब ये तिरुवनंतपुरम में विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (VSSC) पहुंचा है.

सड़कों की मरम्मत हुई, पेड़ कटे

एयरोस्पेस हॉरिजंटल ऑटोक्लेव मशीन लेकर ये ट्रक चार राज्यों से गुजरा. इस दौरान पुलिस ने इसे एस्कॉर्ट किया. ट्रक में 32 स्टाफ इसके साथ रहे. एएनआई से बातचीत में स्टाफ ने कहा, ”हम जुलाई, 2019 में महाराष्ट्र से चले थे.” ये मशीन एक दिन में 5 किलोमीटर का सफर तय करती थी. रिपोर्ट के मुताबिक, इस खास ट्रक के लिए रास्ता बनाने के लिए कई जगहों पर गड्ढे वाली सड़कों की मरम्मत की गई. चौड़ाई के लिए पेड़ काटे गए और बिजली के खंभों को भी हटाया गया.

सोशल मीडिया पर चर्चा

सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें देखकर लोगों ने चर्चा शुरू की. कई लोगों ने कहा कि इसे एयरलिफ्ट क्यों नहीं किया गया या पानी के जहाज से क्यों नहीं लाया गया. स्टाफ के एक सदस्य ने बताया कि मशीन की ऊंचाई ज्यादा होने की वजह से इसे शिप से लाने में दिक्कत थी इसलिए सड़क का रास्ता चुना. कोरोना वायरस के चलते लगे लॉकडाउन की वजह से भी मशीन को लाने में दिक्कत हुई. आंध्र प्रदेश में एक महीने तक ट्रक रुका रहा.

पुर्जे अलग-अलग नहीं लाए जा सकते थे

ये मशीन नासिक में बनी है. इसका इस्तेमाल स्पेरोस्पेस मटीरियल बनाने में होता है. इसकी ऊंचाई 7.5 मीटर है और चौड़ाई 7 मीटर है. विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर के एक अधिकारी का कहना है कि इस मशीन को अलग-अलग नहीं किया जा सकता. ऑटोक्लेव का इस्तेमाल कई बड़े एयरोस्पेस प्रोडक्ट बनाने में होगा और उम्मीद है कि इसे जुलाई में ही कुछ बदलावों के साथ इस्तेमाल में लाया जाएगा.


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