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इस्तीफे न देने वाली सरकार में इस्तीफा देने वाले सुरेश प्रभु की वो बातें, जो आप नहीं जानते होंगे

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2017 में दो बड़े रेल हादसों के बाद रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने इसकी नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार की थी. सुरेश प्रभु ने ट्वीट कर कहा था कि वो इन दोनों हादसों की नैतिक तौर पर जिम्मेदारी लेते हैं. बस कुछ ऐसे ही हैं, सुरेश प्रभु.

इस नैतिक जिम्मेदारी के बाद सुरेश ने इस्तीफे की पेशकश की थी. वो दौर ही ऐसा था कि स्मृति ईरानी से भी इस्तीफा मांगा गया था, जिस पर राजनाथ सिंह वर्तमान रक्षा मंत्री ने कहा था-

ये एनडीए सरकार है, यहां इस्तीफे नहीं होते हैं.

खैर, साल 2000 में मैगज़ीन ‘एशिया वीक’ ने कहा था, आने वाले वक़्त में सुरेश प्रभु हिंदुस्तान के तीन बड़े नेताओं में गिने जाएंगे.

उस वक़्त सुरेश प्रभु शिवसेना में थे. 2014 में शिवसेना-बीजेपी क्लेश के बाद वो बीजेपी में आ गए और आते ही उन्हें टीम मोदी में जगह मिल गई. दो साल भी नहीं हुए और प्रभु को ‘मोदी का शेरपा’ कहा जाने लगा. लगातार हो रहे रेल हादसे के बाद भले ही सुरेश प्रभु लोगों के साथ ही विपक्ष के भी निशाने पर आ गए हों, लेकिन उन्हें मोदी सरकार के सबसे काबिल मंत्रियों में से एक माना जाता था. हादसों को अगर एक तरफ रख दें तो वो जनता के बीच पॉपुलर हैं. उनको ट्वीट करो, चलती ट्रेन में बच्चे के लिए दूध पाओ. ट्वीट करो, रेल में खोया सामान वापस लो. ट्वीट करो, गुंडों से लड़ने पुलिस आ जाएगी. प्रभु मतलब रेलवे के बैटमैन. अब ये न समझें कि खाली शो-बाज़ी है: ट्वीट और बतकुचन. अभी जब प्रधानमंत्री ने अपने कैबिनेट में बदलाव किए तो कुछ मंत्रियों के पोर्टफोलियो बदल दिए गए. पर प्रभु के बारे में कोई शंका ही नहीं थी. ये हो सकता था कि उनको एक और मंत्रालय मिल जाता. अगर इन रेल हादसों को एक तरफ रख दिया जाए, तो सुरेश प्रभु की कुछ खास बाते हैं, जो पढ़नी चाहिए.

1. जब हर तरफ कई मंत्रियों पर एक के बाद एक ‘फर्जी सर्टिफिकेट’ छपवाने के आरोप लग रहे हैं, प्रभु एक साथ इकोनॉमिक्स और क्लाइमेट चेंज पर जर्मनी और मुंबई से दो PhD कर रहे हैं.

2. चार्टर्ड एकाउंटेंसी के एग्जाम में प्रभु ऑल इंडिया 11वीं रैंक लाए थे.

3. 1996 में प्रभु जब सारस्वत को-ऑपरेटिव बैंक के चेयरमैन थे तब बाल ठाकरे से उनकी मुलाकात हुई. ठाकरे उनके फैन हो गए थे. खींचकर लाए शिवसेना में.

4. 1998 से 2004 के बीच वाजपेयी सरकार में इंडस्ट्री, एनवायर्नमेंट, केमिकल, पावर, हैवी इंडस्ट्री जैसे विभागों के मंत्री रह चुके हैं.

5. 2003 में इलेक्ट्रिसिटी एक्ट लाने के लिए सुरेश प्रभु का आज तक नाम है. इससे पहले बिजली बिल को लेकर राज्य सरकारों से वसूली ढंग से नहीं हो पाती थी. सब कुछ गज़र-बजर था. इसी एक्ट के बाद प्राइवेट सेक्टर भी बिजली डिस्ट्रीब्यूशन में खुल के आने लगा. प्रभु का पावर सेक्टर का नॉलेज ही उनको रेल मंत्रालय में लेकर आया. रेल मिनिस्टर बनना ‘महज संयोग’ नहीं था.

6. प्रभु के मोदी सरकार में मंत्री बनने का भी रोचक किस्सा है. अगस्त 2002 में प्रभु ने वाजपेयी सरकार की पावर ‘मिनिस्टरी’ से इस्तीफ़ा दे दिया. कहा जाता है कि पावर सेक्रेटरी के अपॉइंटमेंट को लेकर प्रभु की अपने मेंटर बाल ठाकरे से बहस हो गई. प्रभु की नज़र में ये ‘अनैतिक’ था. ठाकरे ने प्रभु को वापस बुला लिया. शिवसेना के अनंत गीते को पावर मिनिस्टर बनाकर भेजा गया.

7. उस वक़्त बाल ठाकरे ने पब्लिकली प्रभु को ‘ऐलिस इन वंडरलैंड’ कहा था. कहने वाले ये भी कहते हैं कि प्रभु को ‘मिस्टर क्लीन’ बनने के लिए पार्टी में चिढ़ाया भी जाता था. कहा जाता था कि ईमानदारी का ढोल पीट रहे हैं.

8. 2014 में शिवसेना और बीजेपी में रार हो गई. अनंत गीते शिवसेना की तरफ से मोदी सरकार में मंत्री थे. उन्हें वापस बुला लिया गया. उस वक़्त की खबरों के मुताबिक शिवसेना में प्रभु की हैसियत ‘आइडिया देने वाले’ की हो गई थी. कोई बड़ा फैसला उनसे पूछकर नहीं लिया जाता था. उस वक़्त प्रभु को पार्टी से निकालने की भी बात हो रही थी. जब तक बात पूरी होती तब तक शिवसेना को चेकमेट दे दिया गया. कहा जाता है कि प्रभु ने अपने मुंबई वाले कॉरपोरेट दोस्तों के जरिये मोदी से संपर्क साधा. प्रभु को उनकी काबिलियत के आधार पर मोदी ने मंत्री बना दिया. प्रभु पर शिवसेना ने ‘मौकापरस्त’ होने के आरोप लगाए. पर फिर प्रभु ने किसी को शिकायत का मौका नहीं दिया.

अमय प्रभू और उमा प्रभू
अमय प्रभु और उमा प्रभु

9. अगर प्रधानमंत्री मोदी को लगता है कि अकेले वही घूमते हैं तो वो गलत हैं. प्रभु भी अब तक 80 देशों की यात्राएं कर चुके हैं.

10. उनकी पत्नी उमा प्रभु एक पत्रकार हैं जो Zee Media से जुड़ी हैं. कहा जाता है कि ट्रेनों में ‘ट्वीट से हेल्प’ का आइडिया प्रभु के बेटे अमेय प्रभु का था. मतलब पूरा परिवार ही तेज-तर्रार है.

11. प्रभु कोंकण क्षेत्र से 1996 से लगातार चार बार लोकसभा सांसद रहे. 1999 में वो नारायण राणे के बेटे नीलेश से हार गए. वहीं से शिवसेना में उनकी स्थिति कमजोर होने लगी. तुरंत कह दिया गया कि वो ‘जनाधार’ वाले नेता नहीं हैं. मराठी-मानुस और शिवसेना की आइडियोलॉजी को आगे नहीं बढ़ा पाएंगे. जो भी हो, अभी वो राज्यसभा में हैं.

12. भारत सरकार के सबसे बड़े और सबसे बखेड़ा वाले प्लान ‘इंटरलिंकिंग ऑफ़ रिवर्स’ पर बने टास्क फोर्स के चेयरमैन सुरेश प्रभु ही हैं.

13. सुरेश प्रभु अभी तक एकमात्र रेल मंत्री हैं जिसने अपने बजट में एक भी नई रेल नहीं निकाली. ये कारनामा उन्होंने 2015 के बजट में किया था. इंडिया में ये करना आसान नहीं है. बहुत कलेजा चाहिए इसके लिए. सबके गुस्से को नजरअंदाज करना बड़ी बात होती है.

14. एक और ढंग की चीज हुई. IRCTC एक मिनट में एक लाख टिकट बुक करने लगा. हालांकि मक्खन की स्पीड जैसा मामला तो नहीं है, लेकिन इंटरनेट फास्ट हो तो हालात बेहतर हो गए हैं.

15. सब कुछ मीठा-मीठा ही नहीं रहा है. बच्चों के हाफ-टिकट पर अलग सीट खत्म करने और दिल्ली में झुग्गी डेमोलिशन ड्राइव के दौरान एक बच्ची की मौत पर आलोचना भी हुई थी.

लल्लनटॉप के लिए ये स्टोरी ऋषभ ने की है.


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