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इन 4 फिल्मी खलनायकों के थे अपने खुद के देश, जैसा अब रेप के आरोपी नित्यानंद का है

रेप आरोपी बाबा नित्यानंद उर्फ़ जनार्दन शर्मा, सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देकर देश छोड़ भाग गया. अब ख़बर आई है कि नित्यानंद ने अपना एक देश बना लिया है. कैलासा. ‘कैलासा’ का अपना पासपोर्ट है. अपना झंडा भी है, जिसपर नित्यानंद की तस्वीर के साथ नंदी बैल दिखता है.

ये नया देश बनाने वाली बात रियल लाइफ में नई और अजब सी लगती हो, लेकिन बॉलीवुड की फिल्मों में ऐसा एक नहीं, कई बार पहले ही किया जा चुका है. और जितना मुझे याद आता है, ऐसा करने वाला हर एक कैरेक्टर, नेगटिव कैरेक्टर ही था. एक खतरनाक विलेन. चलिए फटाफट जानते हैं उन्हीं ढेरों विलेन्स में से 4 चर्चित वाले विलेन-

1) जनरल डॉन्ग –

तहलका का पोस्टर
तहलका का पोस्टर

अनिल शर्मा. ‘ग़दर: एक प्रेम कथा’ से सबकी जुबां पर आ जाने वाले निर्देशक. गदर से बहुत पहले 1992 में एक मूवी बनाई थी. नाम था ‘तहलका’. इसमें विलेन बने थे अमरीश पुरी. उन्होंने इसमें जनरल डॉन्ग का रोल किया था.

जनरल डॉन्ग. जिसका एक अलग देश है. नाम है डॉन्गरिला. जो उसके पाप का अड्डा है. उसके बुरे कामों की लंका. जिसकी लंका लगाते हैं नसीरुद्दीन शाह, आदित्य पंचोली, एकता सोहिनी और जावेद जाफरी के किरदार कैप्टन रणवीर, कैप्टन राकेश, कैप्टन अंजू और कैप्टन जावेद. इस मूवी का एक गीत, या गीत सा कुछ, बड़ा फेमस हुआ था- शोम शोम शोम शामो शा शा… जिसका आज भी लोग रेफरेंस लेकर डायलॉग से लेकर मीम्स तक बनाते आए हैं.

2) शाकाल-

शान का पोस्टर
शान का पोस्टर

कहते हैं शोले फिल्म से जितनी कमाई हुई थी वो मेकर्स (रमेश सिप्पी और जीपी सिप्पी) ने ‘शान’ मूवी बनाने में खर्च कर दी. ‘शान’ फ्लॉप हो गई तो स्कोर इक्वल हो गया. यूं कि, ‘शान’ एक बहुत बड़े बजट की मल्टीस्टारर मूवी थी. इसलिए फ्लॉप भी ‘शान से’ हुई. इसमें विलेन बने थे कुलभूषण खरबंदा. उनके किरदार का नाम था शाकाल.

मगर शाकाल के देश का कोई नाम नहीं था. लेकिन वो देश सरीखा ही एक अलग-थलग पड़ा द्वीप था. फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी थी, इसकी स्टार कास्ट. अमिताभ बच्चन, शत्रुघ्न सिन्हा, शशि कपूर, सुनील दत्त, जॉनी वॉकर, राखी, परवीन बॉबी….

लेकिन ये सब मिलकर भी इस मूवी की नैया पार नहीं कर पाए. हालांकि इसके गीत बड़े हिट रहे थे. ‘यम्मा-यम्मा’, ‘प्यार करने वाले’, ‘जानू मेरी जां’ और ‘दोस्तो से प्यार किया’…

रही बात शाकाल और उसके एंपायर की, तो इन दोनों का वही हुआ जो हैप्पी एंडिंग वाली मूवीज़ में इन सब चीज़ों का होता है. एंडिंग.

3) मोगैंबो-

मिस्टर इंडिया का पोस्टर
मिस्टर इंडिया का पोस्टर

1987 की ब्लॉकबस्टर मूवी ‘मिस्टर इंडिया’. उसमें मिस्टर इंडिया का किरदार जितना हिट हुआ, उतना ही हिट हुआ पत्रकार सीमा साहनी का बच्चों से चिढ़ने वाला किरदार, उतना ही हिट हुआ उसका विलेन मोगैंबो. क्रमशः अनिल कपूर, श्रीदेवी और अमरीश पुरी. एक तरफ श्रीदेवी का गीत ‘हवा हवाई’ बड़ों-बड़ों के ज़ेहन में चढ़ गया. दूसरी तरफ अमरीश पुरी का डायलॉग (तकिया कलाम) ,‘मोगैंबो खुश हुआ’ बच्चे-बच्चे की ज़बान पर.

मोगैंबो. रिटायर्ड आर्मी मैन. जो एक गुप्त द्वीप में रहता था. उसे कोई फर्क नहीं पड़ता कि उसके द्वीप का नाम क्या है, क्या नहीं. न ही स्क्रिप्ट राइटर और डायरेक्टर को. लेकिन जिस हिसाब से उसकी दहशत का आलम था ये उसी का देश था. उसकी दहशत सिर्फ इस आइलैंड तक ही नहीं थी वो रायते की तरह दूर देश भारत के शहर मुंबई तक फ़ैल चुकी थी. इसी रायते को समेटने का अहद किया अरुण वर्मा ने. जो एक गायब कर देने वाले गैजेट को पाकर मिस्टर इंडिया बन जाता है. बच्चों को ये मूवी बड़ी पसंद आई थी. इसमें आफ़ताब शिवदसानी भी थे. अनिल कपूर की कस्टडी में रह रहे अनाथ बच्चों में से एक.

4) राजा जयचंद-

फरिश्ते का पोस्टर
फरिश्ते का पोस्टर

जयचंद एक गांव का राजा है. गांव हालांकि भारत के अंदर ही बसा है, लेकिन जयचंद भारत की सरकार को नहीं मानता. वो इस गांव को अपना देश मानता है और यूं वो वहां का तानाशाह है. ये तानशाह राजा जयचंद, वीरू और धीरू की मुंहबोली बहन के पति का कत्ल कर देता है. अब वीरू और धीरू उसके काल बन जाते हैं. और कहानी की एंडिंग उसके साम्राज्य में तिंरगा फहराकर करते हैं.

ये है ‘फरिश्ते’ मूवी की स्टोरी. इसमें राजा जयचंद बने हैं सदाशिव अमरापुरकर, वीरू और धीरू बने हैं धर्मेन्द्र और विनोद खन्ना. गायत्री, यानी वीरू और धीरू की मुंह बोली बहन बनी हैं स्वप्ना. और स्वप्ना के पति, यानी पुलिस इंस्पेक्टर अर्जुन थंगे हैं रजनीकांत. इसके अलावा फिल्म में श्रीदेवी और जयाप्रदा भी हैं.

इस मूवी को भी ‘तहलका’ और ‘गदर’ के डायरेक्टर अनिल शर्मा ने डायरेक्ट किया था. और चूंकि इसे बनाने के दौरान वो कई अन्य प्रोजेक्ट्स में भी बिज़ी थे इसलिए इस फिल्म को पूरी होने में 4 साल से ज़्यादा लग गए थे.


गुलाल फिल्म में एक जगह ‘डुकी बना’ (के के मेनन) का कैरेक्टर कहता है- सारे के सारे अपने-अपने घरों को अपना-अपना मुल्क बनाकर बैठे हुए हैं. और वैसे देखा जाए तो हर दूसरी फिल्म में प्रेमी युगल अपनी अलग दुनिया बसा ही लेते हैं. लेकिन ये सब कल्पना या लक्षणा तक ही सीमित है. सच में अगर किसी ने अलग देश बनाया है तो वो विलेन ही हैं. हम फिल्मों की बात कर रहे हैं. रीयल लाइफ के उदाहरण आप सोचिए.


वीडियो देखें:

थलैवी: तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के बायोपिक की 5 खास बातें-

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