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थैंक्यू सुप्रीम कोर्ट, एक आप ने ही तो कॉल ड्रॉप की इंपॉर्टेंस समझी है

एक दोस्त बता रहा था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अब अगर कॉल ड्रॉप हुई तो अधूरी रह गई कॉल के बदले हमें जो पैसे मिलने वाले थे, नहीं मिलेंगे. दुखी होने वाली बात थी. मैंने दोस्त को कहा अगर पैसे मिला करते तो मैं दो महीने बाद खुद कोई फोन कंपनी खरीद लेने की कंडीशन में आ जाता. इतने तो कॉल कटते हैं. पर अफ़सोस. इस बात का नहीं कि पैसे न मिलेंगे. अफ़सोस इस बात का कि मेरे ये कहते तक में फोन कट चुका था. दोस्त मेरी बात नहीं सुन पाया. मैं सोच रहा था डोकोमो न भी खरीद पाता तो एक डोमिनोज तो आ ही जाता.

लेकिन मैं ज्यादा देर दुखी नहीं रह सका. मैं समझता हूं कॉल ड्रॉप जरूरी है. ऊपर वाला और ऊपर वाली कोर्ट जो करती है, हमारे भले के लिए करती है.  वैसे कॉल ड्रॉप भी न, सही चीज है, बीच में फोन कट जाए तो आदमी बचपन में पहुंच जाता है. वो दिन याद आ जाते हैं. जब सिक्के वाले फोन में सिक्का डालना भूल जाओ तो फोन कट जाता था. मनुष्य एक नॉस्टैल्जिक प्राणी है, और नॉस्टेलिया जिलाए रखने के लिए कॉल ड्रॉप जरुरी.

कॉल ड्रॉप का एक फायदा ये भी है कि आदमी स्वस्थ रहा आता है, होती कॉल ड्रॉप है और हमें लगता है नेटवर्क नहीं आ रहा इस चक्कर में हर बार फोन आने पर लेकर छत की ओर भागते हैं, वर्जिश हो जाती है. आदमी थोड़ी देर खुली हवा में सांस भी ले पाता है, और दो दिन से छत पर सूख रही बड़ियां भी नीचे लेता आता है.

एक अच्छी बात और होती है, आदमी अपनी औकात में रहता है, फ़र्ज़ कीजिए बॉस या फिर क्लाइंट फोन पर है. उधर से लंबी चौड़ी हांकी जा रही है, और अचानक उसे पता चले कि उसकी ओर से कॉल ड्रॉप हो गई है, ऐसे मौकों पर वो लजा के कॉल करता है और गिनकर तीन बार सॉरी बोलता है, इस फेर में उसकी हेकड़ी भी गायब हो जाती है. सबसे अच्छा तो यही है, कि इससे हर कोई पीड़ित है, वायरल वाले बुखार के बाद कॉल ड्रॉप ही है तो है जो किसी में किसी भी तरह का भेदभाव नहीं करती, आईफोन एसई में भी कॉल ड्रॉप वैसे ही होगी जैसे सैमसंग गुरु में.

आदमी जिंदगी में कितना भी ऊपर पहुंच  जाए, कॉल ड्रॉप उसे याद दिलाते रहते हैं, उनके भी ऊपर कोई हर वक़्त उनका काटने को तैयार बैठा है.

कॉल ड्रॉप खत्म हो जाए तो आप सोच भी नहीं सकते जिंदगी कितनी मुश्किल हो जाएगी, आप कब तक फोन पर ‘और बताओ’ ‘और बताओ’ करेंगे? रिलेशनशिप में जो हैं, उनसे पूछिए, उनको तो नहाने से लेकर नींद पूरी करने का मौक़ा भी बस दो कॉल ड्रॉप के अंतराल में मिल पाता है.

कॉल ड्रॉप उनके लिए भगवान के वरदान की तरह हैं, जिन्हें रिश्तेदारों को झेलना है, झल्लाकर फोन काटना पड़े और बाद में कॉल ड्रॉप का बहाना ना हो तो कोई सर्वाइव कैसे कर पाएगा? ठीक ऐसा ही उन दोस्तों के साथ भी है जो बात करने के लिए मिस कॉल करेंगे और चर्चा इतनी लंबी खींच देंगे मानो गोलमेज सम्मलेन यहीं निपटाना हो. ऐसे मौकों पर समय और अकाउंट में पैसे बचाने के काम कॉल ड्रॉप ही आता है.

कभी-कभी कॉल ड्रॉप अप्रत्याशित खुशियां भी दे जाते हैं, किसी ने उधार मांगने के लिए फोन किया हो या किसी से बात करते-करते ऐसे पॉइंट पर बात पहुंच जाए और जब आपके पास कुछ कहने को ही न बचे, ऐसे में कॉल ड्रॉप हो जाए तो लगता है अभी जाकर सात पत्थर पूज आएं.

सुप्रीम कोर्ट को थैंक्यू.  कॉल ड्रॉप हमसे मत छीनिए, मत देखिए कि हमारी कॉल्स कितनी कट रही हैं (‘जेब’ भी पढ़ें!) मत सोचिए कि हमारी कितनी जरूरी बातें अधूरी रह जाएंगी, कौन सा हम बराक ओबामा से विश्व शांति पर आखिरी फैसला लेने को टेलीकांफ्रेंस कर रहे होते हैं, हम आम लोग हैं, हमारी जिंदगी में ऐसे मौके नहीं आते कि दुनिया पर एस्टेरॉयड गिरने को है, मिसाइल दागने को तीन सेकेंड बचे हैं. कोई हमें फोन पर चार डिजिट का पासवर्ड बता रहा है और कॉल ड्रॉप होने पर दुनिया नष्ट हो जाएगी.

हमें ऑफिस के कैब वालों की ही कॉल आएगी, जो दो मिनट में आने को कहकर पच्चीस मिनट बाद मुंह दिखाते हैं, हमें कॉल घर से ही आएगी और हमें पता होता है कि फोन पर आज फिर लौकी ही मंगाई जाएगी, कॉल ड्रॉप पर फोन कटना बंद हो जाएं तब भी हमारे झोले से लौकी कहीं न जाएगी. हमें उन बॉसों के ही फोन आएंगे, जिनकी आवाज सुनकर हीमोग्लोबिन का परसेंट ड्रॉप हो जाता है, कहो ऐसा थोड़े होगा कि कॉल ड्रॉप बंद हो जाए तो बॉस संडे को भी काम करने की बजाय अप्रेजल में 75% बढ़ने की खुशखबरी देने के लिए कॉल करेंगे. कहो ऐसा थोड़े होगा कि भदोही वाले फूफा का फोन आएगा और डेढ़ घंटे तक अपने बड़े बेटे की तारीफ़ करने के बाद एसबीआई में क्लर्क का फॉर्म भरने को न कहेंगे.

हम तो कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं. कॉल ड्रॉप को ऐसे ही बढ़ावा मिलना चाहिए. आदमी की सहूलियत उसी में तो है. भले ये बात उसे समझ आए या नहीं.


इस खुशी में एक गाना भी सुनते जाइए.

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