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लड़की का रेप हुआ, जली लाश मिली, पर लोग हिंदू-मुस्लिम से ऊपर नहीं उठ पा रहे

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 ”रचना (बदला हुआ नाम) की गलती बस इतनी सी थी कि उसकी स्कूटी मुस्लिम बाहुल्य इलाके में पंचर हुई. काश भारत सिर्फ हिंदुओं का देश होता.”
 ”नेताओं ने हैदराबाद में मुसलमानों द्वारा रचना (बदला हुआ नाम) की नृशंस हत्या और बलात्कार पर कुछ बोला क्या? ”
 ”हैदराबाद के गुनाहगार का नाम मोहम्मद पाशा. एक बार फिर से मोहम्मद ही निकला दुनिया को बता दो. ”

 ”अब किसी सेकुलर को डर नहीं लग रहा है. बुद्धिजीवियों की सदा जली रहने वाली मोमबत्तियां रचना(बदला हुआ नाम) के नाम पर बुझ चुकी हैं. डर क्या है और हिंदू महिलाओं को किस-किस तरीके का डर है ये हम आपको बताएंगे. ट्विटर से लेकर फेसबुक तक रचना (बदला हुआ नाम) की मौत पर गुस्सा है. लेकिन सवाल ये है कि इस तरह की वारदातों को अंजाम देने वालों में किसी का डर क्यों नहीं है? ये हर जगह हैं. नए-नए चेहरों में हैं. लेकिन हर मुखौटे के पीछे के एक जिहादी चेहरा है. ”

सोशल मीडिया पर इस तरह के खूब पोस्ट वायरल हैं. हमने इन्हें हूबहू छापा है. केवल पीड़िता का नाम बदला है. असल में इन्हें पोस्ट नहीं कहा जा सकता. समाज में नफरत फैलाने के लिए इस्तेमाल होने वाला बारूद कहना चाहिए. डिजिटल बारूद. जिसका इस्तेमाल समाज में ज़हर बोने के लिए किया जा रहा है, एक दिल दहलाने वाली घटना को आधार बनाकर एक धर्म को निशाना बनाया जा रहा है. आधार है घटनास्थल का कथित रूप से मुस्लिम बाहुल्य होना और एक आरोपी के नाम के आगे मोहम्मद लगा होना.

Veterinary Doctor Death 1
ब्रिज के नीचे पहुंची पुलिस. हम शव की हालत आपको नहीं दिखा सकते.

क्या है मामला?
हैदराबाद. 28 नवंबर की सुबह एक लड़की की जली हुई लाश मिली. पुलिस को शक है कि हत्या से पहले उसके साथ रेप भी हुआ. रचना (बदला हुआ नाम) वेटनरी डॉक्टर थी. 26 साल की थी. कोल्लुरू गांव में नौकरी करती थी.

27 नवंबर की रात करीब 9 बजकर 22 मिनट पर रचना ने अपनी छोटी बहन को फोन किया. उसने बताया कि उसकी स्कूटी का टायर पंक्चर हो गया है. उसने बताया कि दो अजनबियों ने उसे मदद भी ऑफर की थी. लेकिन टायर रिपेयर नहीं हो सका. ये भी बताया कि वो एक ऐसी जगह पर है जहां कई सारे ट्रक ड्राइवर्स हैं और वो डरी हुई है. उसकी बहन ने उससे कहा कि वो तुरंत ही पास के टोल प्लाजा पर पहुंच जाए, वहां वो सुरक्षित रहेगी. इसके बाद रचना की बात किसी से नहीं हुई. 28 नवंबर की सुबह रचना की लाश मिली. जली हुई लाश.

पुलिस ने घटना की जांच शुरू की. सीसीटीवी फुटेज निकलवाए. ट्रक ड्राइवर्स और क्लीनर्स से पूछताछ की. और चार संदिग्ध लोगों को हिरासत में ले लिया. दो ट्रक ड्राइवर और दो क्लीनर. नाम सामने आए. मोहम्मद आरिफ, नवीन, चिंताकुता और शिवा. लेकिन लोगों ने एक नाम पकड़ लिया. पूरी घटना को एक अलग ही दिशा में मोड़ दिया. हिंदू-मुसलमान किया जाने लगा. जैसे ही ये खबर आई हर किसी ने इस घटना की निंदा की. समाज के लिए इसे अस्वीकार्य बताया. वीभत्स बताया. हर कोई आरोपियों के लिए कड़ी से कड़ी सजा की मांग कर रहा है. दूसरी तरफ पुलिस अपना काम कर रही है. और इसी समाज में हमारे आपके बीच रहने वाले कुछ लोगों ने इसे धार्मिक रंग देना शुरू कर दिया. अपनी दिमागी गंदगी सोशल मीडिया पर फैलानी शुरू कर दी.

लेकिन कुछ लोग हैं जो अपनी आदत से बाज नहीं आते. हर चीज को जाति और मजहब में बांटने लग जाते हैं. इन खलिहर लोगों ने यही इस केस में भी किया. सोशल मीडिया पर भी जहर बोना शुरू कर दिया. कौन उन्हें समझाए कि कानून के लिए अपराधी हिंदू या मुसलमान नहीं होता. जो भी अपराधी है. चाहे वो जिस भी जाति का हो, जिस भी धर्म का हो. जो भी भाषा बोलता हो, जिस भी क्षेत्र का रहने वाला हो. उसे सजा मिलनी चाहिए. कड़ी से कड़ी सजा.

हकीकत ये है कि इस घटना के लिए जितना जिम्मेदार मो. आरिफ है उतना ही नवीन, शिवा और केशावुलु भी है. सबको बराबर सजा मिलनी चाहिए. ऐसी सजा की अपराधी कांपें. पर इन नफरत के सौदागरों का क्या. दो ही तरीके हैं. एक तो हम और आप ऐसे लोगों का बहिष्कार करें. दूसरी प्रार्थना करें कि ईश्वर इन्हें सद्बुद्धि दे.


वीडियो: वेटनरी डॉक्टर फोन पर बहन से बोली डर लग रहा है, 9 घंटे बाद हाईवे पर मिली जली हुई लाश

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