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क्रिकेट के वो अजीब नियम जिन्हें बनाने वाले ही बोलते होंगे, ये क्या बना दिया!

”मैं ये नहीं समझ पा रहा कि आखिर क्यों अंपायर्स के लिए ‘मुझे नहीं पता’ कहने का अधिकार नहीं है.”

चौथे टी20 मैच के बाद हुई मैच कॉन्फ्रेंस में ये सवाल विराट कोहली का था.

अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम में 18 मार्च 2021 के दिन रात के आठ बजकर 10 मिनट पर भारत के बल्लेबाज सूर्यकुमार यादव ने एक स्वीप शॉट खेला. इस शॉट को बाउंड्री लाइन पर खड़े डेविड मलान ने लपक लिया. अंपायर ने सॉफ्ट सिग्नल देते हुए सूर्या को आउट बताया और तीसरे अंपायर की तरफ आखिरी फैसले का इशारा कर दिया. इस फैसले पर विराट कोहली का कहना है कि क्या मैदानी अंपायर को ये अधिकार नहीं दिया जा सकता है कि वो ये कह सके कि उन्हें नहीं पता है.

ऐसा नहीं है कि क्रिकेट फील्ड पर सिर्फ सॉफ्ट सिग्नल ही क्रिकेट का एक ऐसा नियम है, जिसपर बहस की गुंजाइश हो. क्रिकेट में इसके अलावा भी कई ऐसे नियम हैं, जिन्हें देख जानकर क्रिकेट फैंस यही कहते हैं,

‘यार ये क्यों है?’

आइये जानते हैं ऐसे ही नियमों के बारे में.

सॉफ्ट सिग्नल

सबसे पहले बात उस नियम की जिसकी वजह से ये पूरी बातचीत हो रही है. क्रिकेट के खेल में सॉफ्ट सिग्नल तब आता है जब फील्ड अंपायर करीबी कैच का फैसला लेने के लिए थर्ड अंपायर की सलाह लेता है. उस वक्त फील्ड अंपायर टीवी अंपायर को फैसला लेने के लिए कहने से पहले एक सॉफ्ट सिग्नल भी देता है. फील्ड अंपायर अपना फैसला बताता है और थर्ड अंपायर से अंतिम फैसला करने के लिए कहता है.

Suryakumarf Yadav New
सूर्यकुमार यादव. फोटो: AP

ICC के नियम बताते हैं कि सॉफ्ट सिग्नल को पलटा भी जा सकता है, जब इसके पूरे सबूत हों कि सॉफ्ट सिग्नल गलत है. जैसे सूर्यकुमार के केस में सॉफ्ट सिग्नल आउट था. ऐसे में अगर थर्ड अंपायर पूरी तरह से इस बात से संतुष्ट हो जाते कि गेंद ने ज़मीन को छुआ है तो फिर वो इसे नॉट-आउट दे सकते थे.

सूर्यकुमार यादव के केस में इसी सॉफ्ट सिग्नल पर विवाद हुआ कि आखिर कैसे मैदानी अंपायर लगभग 65 मीटर की दूरी से ज़मीन पर लपकी कैच के बारे में बता सकता है.

अंपायर्स कॉल

क्रिकेट का एक और विवादित नियम है अंपायर्स कॉल. पहले LBW देने का आखिरी फैसला अंपायर तुरंत लेते थे. लेकिन फिर तकनीक की मदद ली जाने लगी, जिसे DRS कहा गया. लेकिन इस DRS में एक फेर आया, अंपायर्स कॉल. यानी अंपायर का निर्णय. अंपायर्स कॉल मैदानी अंपायर को DRS में बैनिफिट ऑफ डाउट देती है.

अंपायर्स कॉल.
अंपायर्स कॉल.

मान लीजिए किसी बल्लेबाज़ को मैदानी अंपायर ने LBW दिया है. वो बल्लेबाज़ इससे संतुष्ट नहीं है और उसके लिए रिव्यू करता है. ऐसे में तीसरा अंपायर देखता है कि आधी गेंद ऑफ या लेग स्टम्प के बाहर तो नहीं है. दूसरे शब्दों में समझें तो गेंद का 50% हिस्सा स्टम्प के किसी भी भाग पर लगना चाहिए. ऐसे में अगर आधी गेंद भी विकेट को छूती हुई जा रही है तो अंपायर्स कॉल दिया जाता है.

हालांकि कोई भी टीम अंपायर्स कॉल के लिए अपना रिव्यू नहीं गवांती है.

DRS डेड बॉल

सॉफ्ट सिग्नल जैसा ही एक और नियम है जो खेल का मज़ा और रोमांच खराब कर सकता है. ये नियम है DRS डेड बॉल का. इस नियम को आप ऐसे समझ सकते हैं कि मैच की आखिरी गेंद पर बल्लेबाज़ी टीम को जीतने के लिए एक रन चाहिए. लेकिन गेंद आकर बैट्समेन के पैड पर लगे और बल्लेबाज़ रन के लिए दौड़ पड़े. दूसरी तरफ गेंदबाज़ी टीम अपील करे और अंपायर उसे आउट दे दे.

ऐसे में बल्लेबाज़ DRS मांग ले और उसे थर्ड अंपायर नॉट-आउट दे दे. इस केस में बल्लेबाज़ तो आउट होने से बच गया, लेकिन उसका दौड़ा हुआ वो रन काउंट नहीं किया जाएगा. सिर्फ पैड ही नहीं अगर गेंद बल्ले का किनारा भी ले लेती है तब भी वो रन नहीं गिना जाएगा. क्योंकि इस गेंद को डीम्ड डेड यानी DRS डेड बॉल दिया जाता है.

फाइल फोटो.
फाइल फोटो.

इस फैसले का शिकार हाल में ही UAE में खेले गए IPL में मुंबई की टीम हुई थी, जब पोलार्ड की खेली गेंद पर एक रन नहीं माना गया. लोगों ने कहा कि ICC को इस फैसले पर विचार करना चाहिए क्योंकि ये फैसला कभी क्रिकेट के बड़े मंच पर भारी पड़ सकता है.

कनकशन सब्स्टिट्यूट

ICC के नए नियमों के मुताबिक, अगर कोई खिलाड़ी मैच के दौरान कनकशन का शिकार यानी सिर पर चोट लगवा बैठता है. तो जारी मैच में उस खिलाड़ी को उसके जैसे ही किसी खिलाड़ी से बदला जा सकता है. यानी अगर वो बल्लेबाज़ है तो उसकी जगह कोई बल्लेबाज़ और अगर गेंदबाज़ है तो उसकी जगह कोई गेंदबाज़ ले सकता है. अगर वो खिलाड़ी विकेटकीपर है तो विकेटकीपर, और ऑल-राउंडर है तो उसकी जगह ऑल-राउंडर प्लेयर का इस्तेमाल किया जा सकता है.

मैच में कनकशन की वजह से उसकी जगह उसके जैसे ही दूसरे खिलाड़ी को चुने जाने की ज़िम्मेदारी मैच रेफरी पर होती है.

Jadeja Bcci Twitter
इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज़ में जडेजा. फोटो: BCCI Twitter

हाल में ही भारत-ऑस्ट्रेलिया टी20 सीरीज़ में रविन्द्र जडेजा को सिर में गेंद लगी. जडेजा ने गेंद लगने के बाद पूरी बल्लेबाज़ी की. लेकिन इनिंग्स ब्रेक में भारत के खेमे से खबर आई कि जडेजा पूरी तरह फिट नहीं है, इसलिए भारत उनकी जगह उनका कनकशन प्लेयर इस्तेमाल कर रहा है. गेंदबाज़ी के वक्त भारत ने जडेजा की जगह युजवेन्द्र चहल का इस्तेमाल किया गया. यानी जडेजा ने बैटिंग की और चहल ने गेंदबाज़ी.

लेकिन ICC के इस नियम में बिल्कुल उस प्लेयर जैसा ही प्लेयर चुनने पर विवाद बना रहता है.


किसने सोचा था मोटेरा में इंग्लैंड वाले ऐसी हरकत कर देंगे! 

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