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बॉलीवुड के सपोर्टिंग एक्टर्स लॉकडाउन में किन परेशानियों से गुज़र रहे हैं?

आयुष्मान खुराना की फिल्म ‘ड्रीमगर्ल’. इसमें अनु कपूर और आयुष्मान के साथ एक छोटे से सीन में एक एक्टर दिखा था. कुछ ही सेकंड्स का रोल था, शायद इसलिए तब उस पर किसी का ध्यान नहीं गया. लेकिन अब सबका जा रहा है. क्योंकि वो एक्टर इन दिनों दिल्ली की कॉलोनियों में फल बेच रहा है. नाम है सोलंकी दिवाकर. उम्र 38 बरस.

ऐसा नहीं है कि सोलंकी ने लॉकडाउन की वजह से ये काम शुरू किया, वो 10 साल से फल बेचते आ रहे हैं. लेकिन बीते दिनों उन्हें फिल्मों में काम मिल रहे थे. ड्रीमगर्ल, सोनचिरइया, हल्का, कड़वी हवा जैैसी फिल्मों में उन्होंने छोटे-मोटे रोल किए. इसलिए उन्होंने फल बेचना बंद कर दिया था. फिर आ गया कोरोना वायरस और लॉकडाउन हो गया. परिवार में पत्नी और दो बच्चे हैं, ज़ाहिर सी बात है उन्हें पालने के लिए पैसे ज़रूरी हैं. इसलिए सोलंकी ने फिर से फल बेचना शुरू कर दिया.

Dream Girl
‘ड्रीमगर्ल’ फिल्म में अनु कपूर और आयुष्मान खुराना के साथ सोलंकी. फोटो- फिल्म का स्क्रीनशॉट)

‘आज तक’ को सोलंकी ने बताया कि वो रोज़ सुबह दिल्ली की ओखला मंडी जाते हैं. फल लेने के लिए चार से पांच घंटे लंबी लाइन में खड़े होते हैं. जैसे ही फल मिलते हैं, वो उन्हें लेकर मालवीय नगर और आस-पास के इलाकों में चले जाते हैं. वक्त मुश्किल है, फिर भी सोलंकी की आंखों में उम्मीद है. इस बात की, कि एक दिन फिर सब ठीक हो जाएगा. मुश्किल वक्त चला जाएगा. उन्हें दुख इस बात का है कि वो ऋषि कपूर की फिल्म ‘शर्माजी नमकीन’ में उनके साथ काम करने वाले थे, लेकिन अब ऋषि के साथ काम का मौका नहीं मिलेगा.

जब कोई एक्टर जब दूसरा कुछ काम करता दिखे, या फिर जब पता चले कि उसके पास पैसे नहीं है, वो अपने कमरे का भाड़ा भी नहीं दे पा रहा या फिर अस्पताल में भर्ती है और इलाज के लिए पैसे नहीं है, तो हैरानी होती है. क्योंकि फिल्मों और टीवी की चमचमाती दुनिया को देखकर ऐसा लगता है कि हर कोई एकदम ऐशो आराम की ज़िंदगी ही जीता है, लेकिन ये सच नहीं है. बहुत से सपोर्टिंग एक्टर्स और एक्ट्रेस हैं, जो कई साल से अपने पैर इस इंडस्ट्री में जमाने की कोशिश में लगे हुए हैं. इस स्ट्रगल के दौरान उन्हें इक्का-दुक्का काम मिल जाता है. हम उन्हें स्क्रीन पर देख लेते हैं. लगता है कि इनकी तो लाइफ सेट हो गई. लेकिन सच्चाई इससे काफी अलग होती है.

‘ससुराल सिमर का’ एक्टर के पास इलाज के पैसे नहीं

‘ससुराल सिमर का’, इस नाम का एक सीरियल आता था. इसमें एक्टर आशीष रॉय भी अच्छे-खासे रोल में थे. इस वक्त वो बीमार हैं. ICU में भर्ती है. उनके पास इलाज के लिए पैसे नहीं है. इसलिए उन्होंने फेसबुक के ज़रिए लोगों से मदद मांगी. 17 मई को उन्होंने पोस्ट डाला, ‘मैं ICU में हूं. बहुत बीमार हूं’. कुछ ही देर बाद दूसरा पोस्ट डाला, ‘पैसों की बहुत जरूरत है, डायलिसिस के लिए.’

इस पोस्ट के बाद फिल्ममेकर हंसल मेहता ने ट्विटर पर बताया कि वो उनकी मदद कर रहे हैं. साथ ही फिल्म एसोसिएशन्स से भी मदद की मांग की.

आशीष रॉय कोई छोटे कलाकार नहीं हैं. कई फिल्मों और सीरियल्स में काम कर चुके हैं, लोग उन्हें ‘बॉन्ड’ पुकारते हैं. लेकिन फिर भी आज वो मुसीबत में हैं. फिर सोचिए उन कलाकारों का क्या होता होगा, जिन्हें तीन या चार महीनों में कोई छोटा काम मिलता हो. फिर अभी तो लॉकडाउन चल रहा है. ये छोटा-मोटा काम भी उन्हें नहीं मिल रहा.

क्या दिक्कत होती है सपोर्टिंग कलाकारों को?

कैसे कट रहे हैं इन कलाकारों के दिन, ये जानने के लिए ‘दी लल्लनटॉप’ ने स्ट्रगलिंग एक्टर गौरव गुप्ता से बात की. सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविज़न के सीरियल ‘लेडीज़ स्पेशल’, ‘मेरे साईं’ समेत कुछ और सीरियल्स और विज्ञापनों में दिखे हैं. थियेटर भी करते हैं. 12 साल से मुंबई में रह रहे हैं. इस वक्त अपने एक दोस्त के साथ एक कमरे में रहते हैं. गौरव बताते हैं शुरुआत में काम मिलना बहुत ही ज्यादा मुश्किल था. कई ऑडिशन दिए, तब जाकर थोड़ा-बहुत काम मिला. अभी भी तीन या चार महीनों में किसी सीरियल में छोटा-मोटा रोल मिलता है, उसमें भी संशय बना रहता है. गौरव कहते हैं,

‘हमें नहीं पता होता कि काम कब मिलेगा. कैसा मिलेगा. कई बार तो तीन-चार महीनों तक काम नहीं रहता. तब पैसे भी नहीं आते. काम मिलता है, हम करते हैं, फिर तीन महीने बाद पैसे मिलते हैं. कुछ भी निश्चित नहीं होता. कई बार ऐसा होता है कि महीने के दो दिन काम मिला, फिर अगले 28 दिन हम खाली बैठे रहे. फिर भी मेरे जैसे कई कलाकार एक उम्मीद के दम पर यहां रह रहे हैं. एक्टिंग के सिवा कुछ काम कभी किया नहीं, ऐसे में खाली वक्त में थोड़े बहुत पैसे ही आ जाएं, इसलिए छोटी-मोटी एक्टिंग क्लास ले लेता हूं. बच्चे अपने मन से जितना पैसा दे दें, ले लेता हूं.’

Mere Sai
‘मेरे साईं’ सीरियल का एक सीन. बाईं तरफ दिख रहे कलाकार गौरव हैं.

गौरव बताते हैं कि बड़े एक्टर-एक्ट्रेस बड़ी-बड़ी गाड़ियों में अपने सेट पहुंचते हैं, लेकिन सपोर्टिंग कलाकार पब्लिक ट्रांसपोर्ट से धक्के खाकर पहुंचते हैं. छोटे से कमरे में, ढेर सारे किराए के साथ दो-तीन लोग रहते हैं. उनका कहना है कि स्ट्रगलिंग और सपोर्टिंग आर्टिस्ट की हालत किसी दुकान में काम करने वाले कर्मचारी से भी खराब होती है. क्योंकि उस कर्मचारी को महीने के आखिरी में पैसे मिलते हैं, फिर चाहे जितने भी मिलें, लेकिन स्ट्रगलिंग आर्टिस्ट के साथ ऐसा नहीं है. काम नहीं तो पैसा भी नहीं.

लॉकडाउन से क्या नुकसान हुआ?

गौरव बताते हैं कि जो एक उम्मीद रहती थी न कि काम मिल जाएगा, वो भी कम हो गई है. उन्होंने बताया,

‘मेरे जैसे कई स्ट्रगलिंग आर्टिस्ट मुंबई के अपने कमरे खाली करके घर चले गए. क्योंकि उनके पास किराए के पैसे नहीं थे. उनके मकान मालिक भी सरकार के मना करने के बावजूद किराया मांग रहे थे. मेरे पास भी कई दोस्तों के फोन आते हैं. पैसों के लिए. क्योंकि उनके पास सारी सेविंग भी खत्म हो चुकी है और घर से भी पैसे नहीं मांग सकते. लॉकडाउन बहुत निराश कर रहा है. लेकिन हम हिम्मत बांधे हुए हैं. ये सोचकर कि जल्द ही सब ठीक होगा, फिर पहले की तरह होगा.’

Gaurav
‘लेडीज़ स्पेशल’ में गौरव.

हर सपोर्टिंग कलाकार को उम्मीद है कि लॉकडाउन जल्दी खुलेगा, फिर से काम मिलेगा. उनके हालात उन बड़े एक्टर-एक्ट्रेस से अलग हैं, जिनके लिए लॉकडाउन परिवार के साथ बिताने वाला वक्त बन चुका है.


वीडियो देखें: लॉकडाउन 4.0 में ऑफिस तो खुल गए हैं, पर दफ्तर जाने के क्या नियम हैं?

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