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उन पांच औरतों की कहानी, जिन्होंने तीन तलाक पर बैन लगवा दिया

लोकसभा ने 28 दिसंबर, 2017 को ‘द मुस्लिम विमेन (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन मैरिज) बिल, 2017 पास कर दिया है. इसके तहत एक बार में तीन तलाक देने पर किसी मुस्लिम पति को तीन साल तक की सज़ा हो सकेगी. तलाक चाहे मौखिक रूप से दिया गया हो या फोन, वॉट्सऐप या स्काइप पर, ये कानून सभी मामलों पर लागू होगा. इसके बाद ये बिल राज्य सभा जाएगा जहां इसमें कुछ संशोधन हो सकते हैं. लेकिन ये तय है कि ये कानून जल्द ही लागू हो जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट ने 22 अगस्त, 2017 को फैसला देते हुए तीन तलाक पर छह महीने के लिए रोक लगा दी थी और केंद्र सरकार से कहा था कि वो छह महीनों के अंदर तीन तलाक पर कानून लेकर आए. अब सरकार कानून बनाने जा रही है. हम यहां उन औरतों और संगठनों की कहानी लेकर आए हैं जिन्होंने तीन तलाक के खिलाफ कानून बनवाने के लिए लंबी लड़ाई लड़ी है. आइए इन्हें जानेंः

#1. शायरा बानो

उत्तराखंड के काशीपुर के कैंट इलाके में रहने वाली शायरा बानो इस केस में मुख्य याचिकाकर्ता हैं. उनके पिता सेना में हैं. शायरा ने समाजशास्त्र (सोशियोलॉजी) में एमए किया है. 2002 में शायरा की शादी इलाहाबाद के एक प्रॉपर्टी डीलर रिज़वान अहमद से हुई. शायरा के मुताबिक शादी के बाद से ही उन्हें दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया और उन्हें मारने के इरादे से कई बार अबॉर्शन भी कराया गया.

इस बारे में शायरा ने इंडियन एक्सप्रेस कहा,

‘मैं भूल गई हूं कि मेरा कितनी बार अबॉर्शन हुआ, शायद छह या सात बार…’

एक दफे शायरा बीमारी के चलते अपने मायके आई हुई थीं. उनका कहना है कि तब उनसे झूठ कहकर उन्हें एक डाक भेजी गई. उनके पति ने उन्हें फ़ोन कर कहा कि वो प्रॉपर्टी के कागज़ भेज रहा है. और शायरा को ये डाक रिसीव करनी ही पड़ेगी. शायरा ने जब लिफाफा खोला तो पाया कि उसमें तलाकनामा है. और इस तरह 15 साल की शादी कुछ मिनटों में ख़त्म हो गई. तारीख थी 15 अक्टूबर, 2015.

अहमद फिर शायरा के दोनों बच्चों इरफान और मुस्कान को भी अपने साथ ले गया. इस सब के बाद शायरा नर्वस ब्रेकडाउन की शिकार हो गईं और उन्हें डिप्रेशन की बीमारी हो गई. शायरा को आज भी अबॉर्शन और डिप्रेशन के साइड इफेक्ट्स के चलते दवाएं लेनी पड़ रही हैं.

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शायरा बानो

तलाकनामा भेजने के बाद अहमद ने शायरा के खिलाफ इलाहाबाद के परिवार न्यायालय में केस दायर कर दिया. इल्ज़ाम लगाया कि शायरा अपने माता-पिता के यहां से लौट नहीं रहीं और न ही ज़ेवर लौटा रही हैं. अहमद ने इद्दत के तौर पर 15 हज़ार रुपए का चेक भी भेज दिया.

लेकिन इतना होने तक शायरा और उनके परिवार का मन बन चुका था. उन्होंने इद्दत का चेक नहीं भुनाया और अहमद को कोर्ट में घसीट लिया. 23 फरवरी, 2016 को शायरा ने सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक, हलाला और बहुविवाह की प्रथाओं के खिलाफ याचिका दायर कर दी. इस मामले में केंद्र ने जो हलफनामा सुप्रीम कोर्ट में दायर किया है, उसका आधार शायरा की याचिका ही है.

शायरा को अपनी लड़ाई में काफी दिक्कतों का सामना भी करना पड़ा. मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने शायरा के खिलाफ इस्लाम के नियम तोड़ने के आरोप में केस फाइल कर दिया था. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के सदस्य कमाल फारूकी ने कहा था,

इस्लाम के कानून को एक केस के लिए नहीं तोड़ा जा सकता. आज तलाक़ के कानून में बदलाव मांग रहे हैं. कल कहेंगे कि प्रॉपर्टी के लिए बने कानून बदलो. ये बर्दाश्त नहीं किया जा सकता.

ध्यान देने वाली बात ये है कि शायरा इस्लाम के कानून को तोड़ने की बात नहीं कर रही थीं. इस पर भी ध्यान दिया जाए कि शायरा तुरंत तीन तलाक के खिलाफ थीं, न कि 90 दिनों में समान अंतर पर तीन बार तलाक कहने के. उनकी याचिका में यूनिफॉर्म सिविल कोड या मुस्लिम पर्सनल लॉ के कोडिफिकेशन का ज़िक्र नहीं है. शायरा ने संविधान में दिए मौलिक अधिकारों के तहत कानून के समक्ष समानता और धर्म तथा लिंग के आधार पर भेदभाव से सुरक्षा चाही थी. इस तरह शायरा की याचिका तीन तलाक के खिलाफ दायर अपनी तरह की पहली याचिका बन गई थी.

#2. आफरीन रहमान

आफरीन रहमान
आफरीन रहमान

आफरीन रहमान जयपुर से हैं. इंदौर में रहने वाले सैयद अशार अली वारसी से इनकी शादी एक मैट्रिमोनियल पोर्टल के ज़रिए अगस्त 2014 में हुई थी. आफरीन का कहना है कि उन्हें शादी के दो महीने बाद से ही दहेज के लिए प्रताड़ित किया जा रहा था. 27 जनवरी, 2017 को वारसी ने आफरीन को स्पीड पोस्ट से तलाकनामा भेज दिया था.

#3. इशरत जहां

इशरत के पति ने उन्हें फोन पर तीन बार तलाक कह कर छोड़ दिया था. इशरत के चार बच्चों को भी उनका पति अपने साथ ले गया था. इसके बाद से वो हावड़ा में अपने परिवार के साथ रह रही हैं. इंडियन एक्सप्रेस में छपे उनके वकील के बयान के मुताबिक इशरत ने अपने पति की दूसरी शादी रुकवाने के लिए काफी संघर्ष किया. उन पर हमला भी हुआ था, जिसके बाद उन्हें कलकत्ता मेडिकल कॉलेज में इलाज कराना पड़ा था. अपनी याचिका में इशरत ने मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरियत) एप्लिकेशन एक्ट, 1937 के सेक्शन – 2 को चुनौती दी थी.

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मुस्लिम महिलाएं तीन तलाक पर रोक लगाने की मांग लंबे समय से करती रही हैं.

#4. गुलशन परवीन

उत्तर प्रदेश के रामपुर में रहने वाली गुलशन परवीन की शादी 2013 में हुई थी. जब वो अपने माता-पिता के यहां आई हुई थीं, उनके पति ने उन्हें 10 रुपए के स्टैम्प पेपर पर तलाकनामा लिख कर भेज दिया था. जब उन्होंने तलाकनामा स्वीकार करने से इनकार कर दिया, तो उनके पति ने अपने भेजे तलाकनामे के आधार पर रामपुर परिवार न्यायालय में तलाक की अर्ज़ी लगा दी. गुलशन का दो साल का एक बेटा रिदान भी है, जो उनके साथ ही रहता है.

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#5. अतिया साबरी

आतिया साबरी हरिद्वार ज़िले के सुल्तानपुर की रहने वाली हैं. 2012 में उनकी शादी वाजिद अली के साथ हुआ था. आतिया के ससुराल वालों ने शादी के बाद से ही उन्हें दहेज के लिए प्रताड़ित करना शुरू कर दिया था. पहली दो औलादें लड़की पैदा होने के बाद ससुराल में उनकी दिक्कतें बढ़ गईं. उन्हें मार-पीट कर मायके भेज दिया गया था. आतिया के पति ने कागज़ पर तीन बार तलाक लिख कर तलाक का ऐलान कर दिया था. स्थानीय मीडिया के मुताबिक इस तलाक को देवबंद स्थित मदरसा दारूल उलूम ने भी जायज़ ठहराया था.

आतिया ने अपने ससुराल वालों के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का मामला भी दर्ज कराया था जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी भी हुई थी.

अतिया साबरी (फोटो क्रेडिटः लाइव हिंदुस्तान)
अतिया साबरी (फोटो क्रेडिटः लाइव हिंदुस्तान)

#6. भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन (BMMA)

इन पांच औरतों के अलावा भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन ने भी ‘मुस्लिम वीमेन्स क्वेस्ट फॉर इक्वैलिटी’ के शीर्षक से एक याचिका लगाई है. BMMA ने कोर्ट में कहा था कि अल्लाह ने औरत और मर्द को बराबर माना है. इनकी याचिका में संविधान में बराबरी के हक और तीन तलाक की सही विधि को लागू कराने की बात कही गई है.



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