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वेब सीरीज़ रिव्यू: स्क्विड गेम, ऐसा क्या है इस शो में जो दुनिया इसकी दीवानी हुई जा रही है?

नेटफ्लिक्स पर एक साउथ कोरियन शो आया है. नाम है ‘स्क्विड गेम’. भयानक पॉपुलर हो रहा है. स्क्विड गेम एक तरीके का खेल है. कुछ-कुछ कबड्डी के आसपास का. पूरी सीरीज़ बचपन में खेले जाने वाले खेलों के इर्दगिर्द बुनी गई है. मज़ेदार या बेकार, कैसा है ये ‘स्क्विड गेम’ आइए जानते हैं.

# गेम ऑन बेब

तदबीर से बिगड़ी हुई तकदीर बना ले
अपने पर भरोसा है तो ये दाव लगा ले

कोरियाई भाषा में कुछ ऐसा ही कहकर एक जगह साढ़े चार सौ के करीब लोगों को इक्कठा किया जाता है. अलग-अलग फितरत के इन लोगों में सिर्फ एक चीज़ कॉमन है. पैसों की ज़रूरत. कोई बैंक का कर्ज़दार है, तो कोई माफ़ियाओं का. किसी को अपनी मां के इलाज के लिए पैसे चाहिए, तो किसी को अपने छोटे भाई की परवरिश के लिए. इन खिलाड़ियों में से कुछ में करैक्टर मुख्य हैं, जैसे

खिलाड़ी नंबर 456: सियोंग जी हुन. सियोंग को जुए की लत है. जिसके चलते उसने अपना सारा पैसा गंवा दिया है. तंग आकर बीवी भी छोड़ कर चली गई है.

खिलाड़ी नंबर 218: चो सैंग वू. इंवेस्टमेंट कंपनी का हेड. अपनी यूनिवर्सिटी का टॉपर स्टूडेंट. होनहार, समझदार. लेकिन सैंग पर क्लाइंट्स के पैसों का गबन करने के आरोप हैं और पुलिस उसके पीछे है.

खिलाड़ी नंबर 67: कैंग से ब्योक. किसी पर यकीन ना करने वाली. पलक झपकते ही जेब काटने वाली तेज़तर्रार कैंग यहां अपने भाई के लिए आई है. ताकि उसे अच्छी परवरिश दे सके.

खिलाड़ी नंबर 101: शातिर जैंग डियोक सू. एक खतरनाक गैंगस्टर. ऐसा इंसान, जो अपने मकसद के लिए किसी की भी जान ले ले. जैंग ये खेल जीतने के लिए किसी भी हद से गुज़रने को तैयार रहता है.

खिलाड़ी नंबर 212 : हैन मी नियो. लोमड़ी जैसी चालाक और गिरगिट जैसे रंग बदलने वाली हैन सर्वाइवल के लिए कुछ भी कर सकती है.

खिलाड़ी नंबर 199: अब्दुल अली. कोरिया में बसा पाकिस्तानी. जो अपनी बीवी और छोटे बच्चे की देखभाल के लिए ये खेल खेल रहा है.

खिलाड़ी नंबर 1. ह्वांग जून हो. ब्रेन ट्यूमर से गुज़र रहे 80 साल के बुज़ुर्ग. ये अकेले हैं, जो ये खेल बिना मजबूरी खेल रहे हैं. अपनी मर्ज़ी से.

इन सभी से कहा जाता है कि बचपन में खेले जाने वाले कुछ आसान से खेलों को खेलकर वो अरबों रुपए जीत सकते हैं. इंडियन वे में समझाऊं तो लुक्का-छिपी, स्टेपो, रस्सी खींच जैसे खेल खेलने पर अरबों रुपए. सेम जैसा इस वक़्त आप सोच रहे हैं ‘ये तो हलुआ है’ ऐसे ही वो सब भी सोचते हैं. लेकिन हल्लू-हल्लू ये बच्चों के खेले जाने वाले खेल इतना खतरनाक रूप ले लेते हैं कि इनके आगे ‘बंजी जंपिंग’, ‘स्काई डाइविंग’ जैसे सो कॉल्ड एडवेंचर स्पोर्ट्स भी लूडो, खोखो जैसे लगने लगें. और सबसे बड़ा कैच यहां ये है  कि हारने लगने पर यहां से ‘मेरे ट्यूशन वाले सर आ गए’ कहकर भाग भी नहीं सकते’. पूरा खेल खेलना ही पड़ता है. कौन खिला रहा है ये खेल? क्या है इस पूरे खेल के पीछे का असली खेल? जानने के लिए नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम करें ‘स्क्विड गेम’.

रेड लाइट. ग्रीन लाइट.
रेड लाइट. ग्रीन लाइट.

# कितना दम है गेम में?

जब पहली बार ‘स्क्विड गेम’ का पोस्टर देखा तो हमें लगा किसी चालू पुत्तर ने ‘मनी हाइस्ट’ की कॉपी बनाने की कोशिश की है. फ़िर ट्रेलर देखा. मामला थोड़ा रोचक लगा. विशलिस्ट पर डाल दिया. डिले होते-होते आज फाइनली पूरा सीज़न मॉर्निंग टू इवनिंग में समेट ही दिया. जब शुरुआत में एपिसोड्स और उनकी एकसे सवा घंटे की ड्यूरेशन देखी थी, तो एक बार तो हमें भी अपनी बिंजनात्मक शक्तियों पर संदेह हो गया था. लगा बोगस हुआ तो अप्पा की होऊ. लेकिन डियर लल्लनटॉपर्स बाय गॉड की कसम खा के कह रहे हैं पता ही नहीं चला, कब सुबह से शाम हो गई. जैसे ‘लेज़’ का पैकेट खोलने के बाद खत्म किए बिना रुका नहीं जाता, वैसे ही एक के बाद एक एपिसोड खत्म होते चले गए. पूरा खत्म कर दिया है. लेकिन सच्ची बोल रहे हैं, अभी सेकंड सीज़न आ जाए तो हाल ही निबटा दें. भले ड्रिप से कॉफी चढ़वानी पड़ जाए. ‘स्क्विड गेम’ बहुत गदर शो है भाई. आखिरी बार एकदम चुंबक की तरह चिपक कर इतना थ्रिलिंग सर्वाइवल ड्रामा कब देखा था याद नहीं. बतौर दर्शक हमें सबसे अच्छी लगी इस शो की अनप्रेडिक्टिबलिटी. बीच-बीच में कई ऐसे मोड़ आए, जब लगा ये शो क्लीशे रास्ता पकड़ने वाला है लेकिन हर बार हमारी प्रेडिक्शन को गलत साबित करते हुए शो ने एकदम एक्साइटिंग टर्न लेकर गुड़ीमुड़ी कर दिया.

अगर देखा जाए तो शो का कांसेप्ट बहुत पुराना है. इस तरीके के सर्वाइवल ड्रामा जॉनर की फिल्मों और शोज़ से स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स भरे पड़े हैं. लेकिन ‘स्क्विड गेम’ का एग्जीक्यूशन काफ़ी फ्रेश है. स्क्रीन प्ले बहुत ही शार्प और एजी है. इस शार्प एजी स्क्रीन प्ले को सटीक कास्टिंग के चलते एक्टर्स ने अपनी धारदार एक्टिंग से और पैना किया है.

स्पेशल मेंशन यहां शो के प्रोडक्शन डिज़ाइनर का. बेमिसाल प्रोडक्शन डिजाइनिंग की है. एक-एक प्रॉप में डीटेल्स का ख्याल रखा गया है. लेकिन यहां ज़्यादा नहीं लेकिन चुटकी भर आलोचना कॉस्ट्यूम डिज़ाइनर की करनी पड़ेगी. ‘मनी हाइस्ट’ के आने के बाद वो कुछ अलग कॉस्ट्यूम के साथ आते तो सोने पर सुहागा होता. लेकिन चलो सह लेंगे थोड़ा.

जूइऊओ
मिस्टर स्क्वायर.

# एक्टिंग-राइटिंग-डायरेक्शन कैसे रहे?

‘स्क्विड गेम’ के क्रिएटर-राइटर-डायरेक्टर हैं ह्वांग डोंग ह्युक. वन मैन आर्मी ह्वांग डोंग ने एक जगह बताया था कि उन्होंने इस शो का कॉन्सेप्ट  2008 में लिखना शुरू किया था. लेकिन बाद में उन्हें लगा कि ये शो मौजूदा वक्त के हिसाब से पब्लिक को बहुत अजीब लग सकता है. लेकिन वक़्त के साथ बदलते सिनेमा को देख ह्वांग ने ‘स्क्विड गेम्स’ को पर्दे पर उतार ही दिया.

इस शो के उम्दा होने का एक मुख्य कारण ये भी है कि शो को लिखा और डायरेक्ट दोनों ह्वांग ने किया है. वरना कई बार ऐसा होता है राइटर के विजन को डायरेक्टर पकड़ नही पाता. इस खराब तालमेल के चलते कई अच्छी फिल्में और शोज़ बढ़िया कहानी होने के बावजूद विफ़ल हो जाते हैं. लेकिन ह्वांग डोंग ह्युक बिकुल भी विफ़ल नहीं हुए हैं. क्रिएशन, डायरेक्शन और खासतौर से राइटिंग के लिए उनकी झोला भर के तारीफ़. जिस तरीके से उन्होंने इस सर्वाइवल टेल के साथ सोशल मुद्दों, जेंडर इनइक्वेलिटी जैसे मुद्दों को बिना प्रीची हुए पेश किया है वो सराहनीय है.

अच्छी स्क्रिप्ट और अच्छे डायरेक्टर को कमाल के एक्टर्स मिल जाएं, तो इससे बढ़िया कुछ भी नहीं. फॉर्च्युनेटली ‘स्क्विड गेम’ में एक-दो ने नहीं हर एक एक्टर ने शानदार परफॉरमेंस दी है. लेकिन तारीफों की शुरुआत करनी बनती है एक्टर ओ- यीओंग-सू से इन्होंने शो में एक बुज़ुर्ग खिलाड़ी का रोल किया है. जो शरीर से भले कमज़ोर है लेकिन उनका अनुभव उन्हें बाकियों से कई गुना बलशाली बनाता है. यीओंग सू इस रोल में शो स्टीलर साबित होते हैं. ली-जंग-जे नाम के एक्टर हैं जिन्होंने सियोंग जी हुन का रोल किया है. ये किरदार शो का केंद्र है. नाकामी से हर दिन दो-चार होता जुआरी. ली ने बहुत ही उम्दा तरीके से ये भूमिका निभाई है. इस करैक्टर का सफ़र आपको हंसाने-रुलाने दोनों का माद्दा रखता है. अगली बात ‘ब्रेन ऑफ द टीम’ चो सैंग वू की भूमिका निभाने वाले पार्क-हे-सू की. सैंग वू एक बहुत ही संजीदा किरदार है. एक्टर पार्क ने एकदम ही सही नब्ज़ पकड़ कर इस करैक्टर को प्ले किया है. ये किरदार किसी भी सिचुएशन में ज़्यादा एक्सप्रेसिव नहीं होता. बहुत ही बैलेंस्ड चित्रण के लिए पार्क सराहना के हकदार हैं.

हियो-संग-टे ने जैंग डियोक सू का किरदार निभाया है. ये एक ऐसा करैक्टर है जिसे देखते ही नाक तोड़ने का मन करने लगता है. बतौर दर्शक किसी किरादार के प्रति घृणा जागृत होना, असल में उस किरदार को निभा रहे अभिनेता के लिए सबसे बड़ी सराहना है. हियो ने बहुत ही कनिंग गैंगस्टर का ये करैक्टर बाखूबी निभाया है. ‘स्क्विड गेम’ देखते वक़्त अचानक से हमें लगा,

‘आएं! ये ईशान खट्टर कहां से आ गया यहां’

बाद में मालूम चला ईशान नहीं बल्कि ये साउथ कोरियाई एक्टर अनुपम त्रिपाठी हैं. अनुपम ने शो में अब्दुल अली का किरदार निभाया है. एक सिंपल सोबर व्यक्ति जिसे बार-बार कुछ लोग अहसास दिलाते रहते हैं वो इस देश का नहीं है. इस व्यवहार से अली पर जो गुज़रता है, उसे अनुपम ने अच्छे से पोट्रे किया है. लास्ट बट डेफिनेटली नॉट द लिस्ट बात हैन मी का रोल करने वाली किम जू रयंग की. एक कतई इरिटेट कर देने वली हैन को किम ने हर संभव मुख मुद्रा के साथ पर्दे पर उतारा है. उनकी हरकतें इरिटेट करने के साथ-साथ गुदागुदाती भी हैं.

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सियोंग जी हुन.

# देखें या नहीं?

रिव्यू पढ़ते-देखते अगर आप यहां तक आ ही गए हैं तो अब तक तो समझ ही गए होंगे कि क्या फाइनल वर्डिक्ट है. और हम भी कोई अब्बास-मस्तान नहीं हैं कि इतनी सराहना करके अचानक से रिव्यू में ट्विस्ट लाकर वक़्त, हालात, जज़्बात बदल देंगे. देखना है भई, सबको देखना है. खुद भी देखो. दूसरों को भी दिखवाओ. ऐसे शोज़ बड़ी मुश्किल से नसीब होते हैं.


वीडियो: आर्यन खान के ड्रग्स केस में बॉलीवुड एक्टर सुनील शेट्टी ने मीडिया से क्या कहा?

 

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