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2021 में स्पोर्ट्स पर बनी 13 कमाल की फिल्में, जिन्हें देख भीतर का एथलीट जाग जाएगा

26 मार्च, 2021 को एक बायोपिक रिलीज़ हुई, ‘साइना’. परिणीति चोपड़ा ने फिल्म में साइना नेहवाल का रोल पोर्ट्रे किया. फिल्म आई, और आई-गई हो गई. फिर आई ‘तूफान’, जिसे पॉज़िटिव के अलावा हर किस्म के रिव्यू मिले. ‘साइना’ और ‘तूफान’ की थीम बिल्कुल अलग थी, बस एक धागे ने उन्हें बांध रखा था, कि दोनों ही स्पोर्ट्स पर बनी फिल्में थीं. इन दोनों फिल्मों के बाद एक सवाल जायज़ है, कि क्या हम अच्छी स्पोर्ट्स फिल्में डिज़र्व नहीं करते, ऐसी फिल्में जहां हीरो की दुनिया से बाहर निकलना मुश्किल हो जाए, या फिर हर बार रेफरेंस पॉइंट के लिए ‘लगान’ के पास जाना पड़ेगा.

अगर आपको लग रहा है कि 2021 में कमाल की स्पोर्ट्स फिल्में नहीं बनी हैं, तो एक ही बात कहेंगे, रुको ज़रा, सब्र करो, और पढ़ डालो ये लिस्ट. जहां आपको पता चलेगा 2021 में स्पोर्ट्स पर बनी 13 उम्दा फिल्मों और डाक्युमेंट्रीज़ के बारे में.

#1. सारपट्टा परमबरै (तमिल)

डायरेक्टर: पा रंजीत

राइटर: पा रंजीत, तमिल प्रभा

Sarpatta Parambarai 1
‘सारपट्टा परमबरै’ से एक स्टिल.

कहानी: सेवेंटीज़ मद्रास के बॉक्सिंग कल्चर पर बेस्ड कहानी. कबीलन कोई ट्रेन्ड बॉक्सर नहीं, लेकिन जब उसके सारपट्टा समुदाय के मान की बात आती है तो उसे बॉक्सिंग रिंग में उतरना पड़ता है. बॉक्सिंग रिंग में जो कुछ घटता है, वो ऐसे फिल्माया गया है मानो आप असली मैच देख रहे हों. सिर्फ हीरो और विलेन ने ही नहीं, बल्कि बाकी किरदारों ने भी अपनी बॉक्सिंग स्किल्स पर मेहनत की है.

कहां देखें: अमेज़न प्राइम वीडियो


#2. 83 (हिंदी)

डायरेक्टर: कबीर खान

राइटर: कबीर खान, संजय पूरण सिंह चौहान, वासन बाला

Kapil Dev 83 Movie
नटराज पोज़ में कपिल देव बने रणवीर सिंह.

कहानी: मैं इस फिल्म के लिए इसलिए उत्साहित था क्योंकि इंडिया और जिम्बाब्वे का वो मैच देखना चाहता था, जहां कपिल देव ने वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ा, वो मैच जो कभी रिकॉर्ड नहीं हुआ. लेकिन ये फिल्म सिर्फ उस मैच के साथ ही नहीं, बल्कि खिलाड़ियों की पूरी वर्ल्ड कप जर्नी के साथ इंसाफ करने में कामयाब साबित होती है. आपको पता है कि अगली बॉल पर क्या होना है, लेकिन फिर भी जानने की जिज्ञासा बनी रहती है.


#3. रश्मि रॉकेट (हिंदी)

डायरेक्टर: आकर्ष खुराना

राइटर: कनिका ढिल्लों, आकर्ष खुराना, लिशा बजाज, अनिरुद्ध गुहा

Rashmi Rocket Taapsee Pannu
लीड रोल में हैं तापसी पन्नू.

कहानी: रश्मि रॉकेट सिर्फ एक एथलीट के रेस ट्रैक पर पसीना बहाने की कहानी नहीं. ट्रैक के बाहर उसे क्या कुछ झेलना पड़ता है, फिल्म उस पर बात करती है. एक कंट्रोवर्शियल जेंडर टेस्ट की वजह से रश्मि की दुनिया नर्क हो जाती है, सारी इज़्ज़त, ईनाम हवा हो जाते हैं. वो अपने और उन सभी एथलीट्स के लिए लड़ती है जिनके साथ जेंडर टेस्ट के नाम पर भेदभाव हुआ. वो कैसे लड़ती है यही फिल्म की कहानी है.

कहां देखें: ज़ी5


#4. शूमाकर (अंग्रेज़ी)

डायरेक्टर – राइटर: हैन्स ब्रूनो कैमेरटन्स, वैनेसा नॉकर, माइकल वेच

कहानी: मैंने कभी फॉर्मूला वन रेसिंग फॉलो नहीं की, फिर भी बचपन से माइकल शूमाकर का नाम सुना है, वो लैजेंड जो सात बार फॉर्मूला रेसिंग के वर्ल्ड चैंपियन बने. उन पर बनी ये डॉक्यूमेंट्री सिर्फ शूमाकर द ड्राइवर नहीं, बल्कि शूमाकर द ह्यूमन की कहानी भी दर्शाती है. अब तक शूमाकर को लेकर एक तरफा पर्सपेक्टिव देखने को मिला है, क्योंकि वो और उनका परिवार रेसिंग ट्रैक से बाहर की दुनिया को प्राइवेट रखते थे. लेकिन यहां उनका वो मानवीय पक्ष देखने को मिलता है, जो उन्हें औरों से अलग करता है, एक खिलाड़ी के नाते भी और एक इंसान के नाते भी. 2013 के एक स्कीइंग हादसे ने उन्हें क्रिटिकल स्टेज में पहुंचा दिया, जिससे वो आज तक उभर नहीं पाए हैं.

कहां देखें: नेटफ्लिक्स


#5. गोलोंदाज (बांग्ला)

डायरेक्टर- राइटर: ध्रुबो बैनर्जी

Golondaaj
फुटबॉल का ‘लगान’ वर्ज़न.

कहानी: ये फिल्म फुटबॉल की दुनिया की ‘लगान’ है, यानी यहां भी एक भारतीय अंग्रेज़ो को विदेशी खेल में हराने की कोशिश करता है. बस फर्क इतना है कि ‘लगान’ एक काल्पनिक कहानी थी, और ये वास्तविक घटना पर आधारित है. कहानी के मुख्य किरदार हैं नागेंद्र प्रसाद सर्वाधिकारी, जिन्हें फादर ऑफ इंडियन फुटबॉल की उपमा दी गई है. जातिभेद और अंग्रेजो के अत्याचार से ऊपर उठकर नागेंद्र उनके खिलाफ फुटबॉल के मैदान पर आमने-सामने होते हैं, ये फिल्म का प्लॉट है.

कहां देखें: अमेज़न प्राइम वीडियो


#6. खो खो (मलयालम)

डायरेक्टर – राइटर: राहुल रिजी नायर

कहानी: फिल्म के डायरेक्टर राहुल रिजी नायर इस बात से वाकिफ थे कि क्रिकेट और फुटबॉल प्रेमी देश में खो खो जैसे खेल के प्रति रुचि जगाना आसान नहीं होगा. उनकी फिल्म देखकर आप झट से खो खो फैन नहीं बन जाएंगे, लेकिन फिल्म में दिखाया गेम आपको एंगेज कर के रखेगा. मारिया एक फिजिकल एजुकेशन की टीचर है, जिसे अपने अतीत से जूझते हुए स्कूल के बच्चों के भविष्य पर काम करना है. बच्चों को सिखाते हुए, उनसे सीखते हुए, उसकी जर्नी क्या मोड़ लेती है, ये आप फिल्म देखकर जानिए.

कहां देखें: अमेज़न प्राइम वीडियो


#7. ज़ैटोपैक (चेक, अंग्रेज़ी)

डायरेक्टर: डेविड ऑनड्रिक

राइटर: डेविड ऑनड्रिक, एलिस नेलिस

Zapotek Olympics
1952 ओलंपिक गेम से ज़ैटोपैक की रियल फोटो.

कहानी: साल 1952 का ओलंपिक गेम, जहां 29 साल के एमिल ज़ैटोपैक ने कुछ नामुमकिन हासिल कर लिया. 5,000 मीटर, 10,000 मीटर और मैराथन रेस में अपने नाम तीन गोल्ड मेडल किए, ऐसी हैट्रिक जिसे आज तक कोई दूसरा दोहरा नहीं पाया है. ज़ैटोपैक एक ऐसे इंसान की कहानी है, जिसके लिए जीतना सब कुछ नहीं था. फिल्म भले ही ज़ैटोपैक के रेसिंग ट्रैक पर किए जादू को दर्शाती हो, लेकिन इसका दिल उनकी रेसिंग ट्रैक से बाहर की दुनिया में बसता है.


#8. स्केटर गर्ल (हिंदी)

डायरेक्टर: मंजरी मैकीजानी

राइटर: मंजरी और विनती मैकीजानी

कहानी: राजस्थान के एक गांव में सेट ये फिल्म कहानी बताती है प्रेरणा की, जिसे अपने पंख मिलते हैं स्केट बोर्ड में. फिल्म में वहीदा रहमान के अलावा कोई बड़ा नाम नहीं था, ये भी एक वजह है कि ये रडार के नीचे से गुज़र गई. स्केटर गर्ल देखकर आपकी बिज़ी जिंदगी में एक भीना भीना ठहराव महसूस होगा. फिल्म के लिए मेकर्स ने असली में गांव में स्केटिंग पार्क बनवाया था, जिसे शूटिंग के बाद वहीं छोड़ दिया था. आज गांव के बच्चे वहां स्केटिंग करते हैं.

कहां देखें: नेटफ्लिक्स


#9. सर एलेक्स फरग्यूसन: नेवर गिव इन (अंग्रेज़ी)

डायरेक्टर: जेसन फरग्यूसन

राइटर: मार्क मनरो

Alex Ferguson
एलेक्स फरग्यूसन की एक फोटो.

कहानी: फुटबॉल क्लब मैनचेस्टर यूनाइटेड के मैनेजर सर एलेक्स फरग्यूसन को क्लब के इतिहास का सबसे महान मैनेजर माना जाता है. 2013 में रिटायर होने तक उन्होंने जितनी ट्रॉफीज़ जीतीं, अभी तक कोई दूसरा मैनेजर उस नंबर को मैच नहीं कर पाया है. इसलिए उनकी कहानी बतानी ज़रूरी थी. ये डॉक्युमेंट्री उनकी लाइफ में आए ट्विस्ट एंड टर्न को ट्रेस करती है, जो किसी हॉलीवुड फिल्म से कम नहीं. ग्रे मूस नाम की स्पोर्ट्स एंटरटेनमेंट वेबसाइट ने फिल्म के लिए लिखा था कि ये आपको इस तरह से इंस्पायर करती है, जितना डिज़्नी की कई फिल्में नहीं कर पाती.


#10. तुनका तुनका (पंजाबी)

डायरेक्टर: गैरी खटराव

राइटर: जे दविन

Tunka Tunka Poster
‘तुनका तुनका’ का पोस्टर.

कहानी: पंजाबी सिंगर हरदीप ग्रेवाल अपने नए गाने के वीडियो के लिए कॉन्सेप्ट खोज रहे थे. जब आइडिया आया तो लगा कि ये तो एक गाने में फिट नहीं बैठ पाएगा, इसलिए ‘तुनका तुनका’ नाम की फिल्म बना डाली. कहानी है एक किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले लड़के की, जो सारी बाधाओं को पार कर प्रोफेशनल साइक्लिस्ट बनना चाहता है. सारी मुश्किलें पार कर साइक्लिस्ट बनने पर पता चलता है कि कैंसर से जूझ रहा है. हरदीप ने ही फिल्म में लीड रोल निभाया है, और उनका फिट साइक्लिस्ट से कैंसर पेशेंट वाला ट्रांसफॉर्मेशन देखने पर भयावह लगता है.


#11. ज़ीरो टू हीरो (चाइनीज़)

डायरेक्टर – राइटर: ची मैन वॉन

Zero To Hero Movie
फिल्म को हॉन्ग कॉन्ग की ओर से ऑस्कर्स में भेजा गया है.

कहानी: सो वा वाई. हॉन्ग कॉन्ग के वो एथलीट, जिन्होंने पैरालिम्पिक गेम्स में अपने देश के लिए पहला गोल्ड मेडल जीता. ‘ज़ीरो टू हीरो’ सो वा वाई के कॉमन मैन से नैशनल हीरो बनने की कहानी है, कि कैसे उन्होंने अपनी फाइनैन्शियल और इमोशनल समस्याओं से उभरकर अपनी जगह बनाई. फिल्म को टिपिकल स्पोर्ट्स बायोग्राफी वाले टेम्पलेट में पेश किया गया, लेकिन फिर भी ये कहानी बासी नहीं लगती. आप सो वा की जर्नी से एक जुड़ाव महसूस करते हैं. ‘ज़ीरो टू हीरो’ को हॉन्ग कॉन्ग की ओर से 94वें ऑस्कर्स की बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म कैटेगरी में भेजा गया है.

कहां देखें: नेटफ्लिक्स


#12. आहा (मलयालम)

डायरेक्टर: बिबिन पॉल सैमुएल

राइटर: टोबित चिरया

कहानी: ज़्यादातर स्पोर्ट्स फिल्में आपको इंस्पायर करने के पर्पज़ से बनाई जाती हैं, लाइफ की झिकझिक से दूर मन को अच्छा महसूस करवाने के लिए बनाई जाती हैं. 19 नवंबर को आई मलयालम फिल्म ‘आहा’ भी कुछ ऐसा ही करती है. क्या है आहा? ये नाम है रस्सा खींच की एक टीम का, ऐसी टीम जो अलग-अलग विचारधारा और अलग-अलग बैकग्राउंड्स से आए लोगों ने मिलकर बनाई है. कोई जातिभेद जैसी जटिल समस्या से लड़ रहा है, तो कोई अपनी किसी आंतरिक कशमकश से.


#13. पेले ( ब्राज़िली-पुर्तगाली भाषा)

डायरेक्टर – राइटर : बेन निकोलस, डेविड ट्राईहॉर्न

कहानी: विश्वभर में फुटबॉल को परिभाषित करने वाले लिजेंड पेले. वो पेले, जिन्हें फुटबॉल एक खूबसूरत खेल लगता था, फिर बाकी दुनिया चाहे उसे कितना भी उग्र समझे. पेले और मैरेडोना की तुलना लगातार होती आई है. मैरेडोना खेल के नियमों को हाशिये पर रखते थे, वहीं पेले अपने साथ गुड बॉय वाली वाइब लेकर चलते थे. उसकी झलक आपको इस डाक्युमेंट्री में भी देखने को मिलेगी. साथ ही देखने को मिलेंगे पेले के करियर के हाइलाइटिंग मैचेज़ और उनके पीछे की कहानी.

Pele Poster
‘पेले’ का पोस्टर.

कहां देखें: नेटफ्लिक्स

इन 13 फिल्मों के अलावा एक और स्पोर्ट्स से जुड़ा प्रोजेक्ट है, जिसे मेंशन किया जाना ज़रूरी है. अमेज़न प्राइम वीडियो पर रिलीज़ हुई सीरीज़, Maradona: Blessed Dream, जो मैरेडोना की लाइफ और करियर के इवेंट्स पर बेस्ड है.


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