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सेरेलक बेबी बना पॉर्न स्टार, कूल नहीं कामुकता से भरी है 'क्या कूल हैं हम तृतीय'

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एकता कपूर की दुकान भगवान बालाजी के नाम पर है. उनकी कलाई पर कलावे का थान लिपटा रहता है. मगर फिल्म बनाती हैं, तो स्क्रीन पर लिखा आता है, तुम्हारे घर पॉर्न आ रही है. इतना ही नहीं. पिच्चर में जो पॉर्न एक्ट्रेस है, उसका नाम भी संस्कार है. क्या देश इसे बर्दाश्त करेगा. करे न करे. फिलहाल तो ‘क्या कूल हैं हम- तृतीय’ का ट्रेलर देखा जा रहा है हमककर.

इसलिए नहीं कि इसमें सदी के दो सबसे बड़े सितारे तुषार कपूर और आफताब शिवदासानी हैं. इसलिए भी नहीं कि इसमें ब्लू फिल्मों की शूटिंग के सीन हैं. इसलिए भी नहीं क्योंकि इसमें नारी की सुंदरता को चार चांदों की रौशनी में उघाड़ा गया है. बल्कि इसलिए क्योंकि इसमें हमेशा की तरह साल दो साल के सभी नॉनवेज जोक्स फिट कर दिए गए हैं. घुमा-फिराकर. आखिर सेंसर बोर्ड की मर्यादा भी तो है.

हां, तो फिर शुरू करते हैं.

फिल्म की शुरुआत होती है एक सीत्कार से. वैसी ही, जैसी टाउनहॉल के पास वाले मार्केट में काली पन्नी में लिपटी इंडियन सीडी के पहले सीन में उठती थी. उसके बाद होता है दर्शन. लिंग का. नहीं नहीं, देश की दशा का. देश जो साइज को लेकर परेशान रहता है. इसीलिए तो रोजाना अखबार में वर्धक यंत्र, तेल, पट्टी के ऐड पटे रहते हैं.

फिर खुलती है कहानी. धीरे धीरे नहीं. म्यूजिक और रफ्तार के साथ. दो लौंडे हैं. उनके लिंग विशाल हैं. इसलिए उन्हें पॉर्न फिल्मों में हीरो का काम मिल जाता है. इन फिल्मों का डायरेक्टर है गोविंदा का भांजा. कृष्णा अभिषेक नाम वाला. इस पॉर्न समागम में समलैंगिकों की छवि खराब करने वाले वीजे एंडी भी हैं. क्लीवेज, कमर और नाभि दिखाने के लिए कुछ गौरवर्णा कन्याएं भी.

मगर फिल्म तो ट्विस्ट के सहारे चलती है. तो एकता के प्यारे राजा भइया को हो जाता है प्यार. ईरान की लड़की मंदना से. लड़का कैसे कहे कि मैं विकी डोनर का भइया विकी ड्रिलर हूं. तो फिर झूठ पर झूठ. पॉर्न फिल्मों के सहयोगी कलाकार बन जाते हैं संस्कारी परिवार. मिलते हैं लड़की के पापा से. अब पापा को भी ठरकी दिखाना है. तो एक बूढ़ी औरत की एंट्री करा दी जाती है. कुछ महा चीपड़ जोक्स के लिए पोपट नाम के तोते की ढाल लाई जाती है.

और उसके बाद हस्तमैथुन, मुखमैथुन के रास्ते फिल्म मस्तिष्क मैथुन की राह पर बढ़ती नजर आती है.

मगर फिल्म हरी चटनी समोसा या सोना बेल्ट या यंत्र की तरह लोगों का पोपट नहीं काटती. बीच बीच में बताती जाती है. पॉर्न इज कमिंग होम. हम आपके हैं पॉर्न. इंडियाज फर्स्ट पॉर्न कॉम.

यह देसज लोगों को संभोग से जुड़ी अरबन कूल भाषा भी सिखाती हैं. मसलन उत्सर्जन के लिए आई एम कमिंग नाम के रूपक का चलन. इतना ही नहीं, फिल्म सेहत के प्रति चिंतित है. इसीलिए तुषार कपूर जब लड़की बनते हैं तो सीट्रिक एसिड से सराबोर संतरा नाम के फल का इस्तेमाल करते हैं.

उमेश घडगे फिल्म के डायरेक्टर हैं. घडगे साहब ने संस्कारी सींस में गर्मी लाने के लिए घोड़े का इस्तेमाल किया है. इससे पहले वह डेविड के लिए काम करते थे. डेविड वरुण के पापा हैं और धवन भी हैं.

फिल्म जानती है और जनवाती भी रहती है कि वो फिल्म है. इसलिए दूसरी फिल्मों का बेहिचक रेफरेंस दिया जाता है. यहां रॉक स्टार कॉक स्टार बन जाता है और किक लिक.

तो अगर आपको शालीनता का कंडोम पहने हुए एक सस्ती ब्लू,ग्रीन, येलो, रेड फिल्म देखनी है. तो ये ऑप्शन है. प्रॉड्यूसर को पता है. देश काम की कद्र करता है. पइसा तो वीकएंड पर ही वसूल हो जाएगा. इसलिए वो बना रहे हैं. आप बन रहे हैं.

जो न बनें, वे ध्यान रखें. 22 जनवरी को इस फिल्म के साथ ही एयरलिफ्ट भी रिलीज हो रही है. खाड़ी युद्ध के दौरान कुवैत में फंसे भारतीयों को बचाए जाने का एक्शन पैक्ड ड्रामा. बाकी ड्रामा का क्या है. सबकी अपनी अपनी मर्जी. मर्जी का मालिक तो वैसे भी मस्ती बनाता है. चिकनाई युक्त होकर.

क्या कूल हैं हम 3 का ट्रेलर

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