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खुद को 'ऐंटी-बीजेपी' बताए जाने पर शबाना आज़मी ने याद दिलाई पुरानी बात

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बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे. बोल ज़बां अब तक तेरी है. बोल कि सच ज़िंदा है अब तक, बोल जो कुछ कहना है कह ले.

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की एक नज़्म है- बोल. उसी की पंक्तियां हैं ये. फ़ैज़ की इस नज़्म को याद किया है शबाना आज़मी ने. शबाना को ऐंटी-बीजेपी बताकर ट्रोल किया जा रहा है. इसी का जवाब देते हुए शबाना ने फ़ैज़ का लिखा ट्विटर पर पोस्ट किया.

इसके बाद उनका एक और ट्वीट आया. इसमें उन्होंने खुद को ‘ऐंटी-बीजेपी’ बताकर खारिज़ करने वालों के लिए लिखा था-

बात याद्दाश्त में रहे इसलिए बता रही हूं. सफ़दर हाशमी की हत्या पर मैंने कांग्रेस के नेता एच के एल भगत के खिलाफ सार्वजनिक मोर्चा खोल दिया था. मैंने नैशनल टेलिविजन पर इमाम बुखारी को चुनौती दी थी. इसके बाद उन्होंने मुझे नाचनेवाली कहा था. संसद के दोनों सदनों में इस बात की निंदा हुई थी. मैंने तीन तलाक़ और हलाला, इन सबके खिलाफ बार-बार बोला है. तो बताइए, कौन सिलेक्टिव हुआ?

क्या कहा था शबाना ने?
शबाना एक कार्यक्रम में शिरकत करने इंदौर पहुंची थीं. वहां वो असहिष्णुता, मॉब लिंचिंग जैसे मुद्दों पर बात करते हुए बोलीं कि भारत एक आज़ाद मुल्क है. वो जो महसूस करती हैं, वो खुलेआम बोलती रहेंगी. शबाना ने इस प्रोग्राम में जो बातें बोलीं, उसका सार कुछ यूं था-

सरकार की आलोचना करने वाले लोगों को इन दिनों राष्ट्रविरोधी ठहरा दिया जाता है. अपने देश की कमियों के बारे में बात करने में कुछ भी ग़लत नहीं है. क्योंकि इससे तरक्की की, बेहतरी की राह खुलती है. अपने देश की भलाई के लिए ये ज़रूरी है कि हम उसकी कमियों पर भी बात करें. अगर हम ऐसा नहीं करेंगे, तो स्थितियां बेहतर कैसे होंगी? हम गंगा-जमनी संस्कृति में बड़े हुए हैं. हमें मौजूदा हालातों के आगे घुटने नहीं टेकने चाहिए. भारत खूबसूरत मुल्क है. यहां के लोगों को आपस में बांटने की कोशिश इस देश के लिए अच्छी नहीं है. हमें डरना नहीं चाहिए. हमें इस मुल्क से मुहब्बत साबित करने के लिए किसी का सर्टिफिकेट नहीं चाहिए.

गिरिराज ने कहा- शबाना ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ की नई नेता
शबाना की कही इन बातों के आधार पर उन्हें ऐंटी-बीजेपी बताया जा रहा है. केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने उन्हें ‘टुकड़े-टुकड़े’ और ‘अवॉर्ड वापसी’ गैंग की नई नेता बता दिया है. बीजेपी नेता शहनवाज़ हुसैन ने भी उन्हें ‘अवॉर्ड वापसी’ गैंग का हिस्सा ठहरा दिया है.  ट्विटर पर कई कट्टरपंथी उनके लिए बेहूदी टिप्पणियां कर रहे हैं. लोग लिख रहे हैं कि शबाना को बस बीजेपी से ही दिक्कत है. कि उन्हें बीजेपी के खिलाफ बोलने के लिए कोई बहाना चाहिए. इसी के जवाब में शबाना ने लिखा है कि वो पहले भी  सत्ता के खिलाफ बोलती आई हैं. जहां ज़रूरी लगा, स्टैंड लेती आई हैं.

सफ़दर हाशमी की हत्या के बाद शबाना ने क्या किया था?
जिन सफ़दर हाशमी का शबाना ने ज़िक्र किया है, वो बेहतरीन नाटककार थे. कम्युनिस्ट विचारधारा से आते थे. 1 जनवरी, 1989 को साहिबाबाद में ‘हल्ला बोल’ नाम के एक नाटक का मंचन करते समय उनके ऊपर हमला हुआ. अगले दिन अस्पताल में उन्होंने दम तोड़ दिया. हाशमी की हत्या को करीब 10 दिन बीते थे जब नई दिल्ली में 12वें इंटरनैशनल फिल्म फेस्टिवल का आयोजन हुआ. केंद्र में राजीव गांधी की सरकार थी. शबाना प्रोग्राम में पहुंचीं और उन्होंने कांग्रेस की खूब छीछालेदर की. प्रोग्राम में बैठे अंतरराष्ट्रीय फिल्मकारों और प्रतिनिधियों के सामने शबाना ने सफ़दर की हत्या का इल्ज़ाम लगाया कांग्रेस पर. कहा, हम इस सिस्टम के खिलाफ अपना विरोध दर्ज़ करा रहे हैं. ये सिस्टम एक तरफ तो रचनात्मकता को बढ़ावा देने का दावा करता है और दूसरी तरफ सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं की हत्या में मौन सहमति देता है. वहां प्रोग्राम में केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री एच के एल भगत भी मौजूद थे. शबाना जब कांग्रेस सरकार की थू-थू कर रही थीं, तब वो प्रोग्राम दूरदर्शन पर लाइव हो रहा था. शबाना ने जो डैमेज किया कांग्रेस को, वो आने वाले समय में याद रखा जाने वाला था.


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