Submit your post

Follow Us

वेब सीरीज़ रिव्यू: मुंबई डायरीज़

अमेज़न प्राइम वीडियो पर 26/11 हमले के इर्दगिर्द बनी ‘मुंबई डायरीज़’ सीरीज़ 9 सितम्बर को रिलीज़ हुई है. शो में कुल आठ एपिसोड्स हैं. हमने पूरा शो देख लिया है. कैसा लगा शो, क्या हैं इस सीरीज़ की अच्छी बुरी बातें. इस पर बात करेंगे.

#कहानी उस काली रात की

कहानी शुरू होती है बॉम्बे जनरल हॉस्पिटल से. रोज़ की तरह 26/11 की सुबह भी व्यस्तता का माहौल है. डॉक्टर्स और मेडिकल स्टाफ़ अपनी निजी ज़िंदगियों में भले कितने भी उलझे हों. अस्पताल में आए मरीजों के छोटे से छोटे मसले सुलझाने को हर पल तत्पर हैं. यहां के सबसे काबिल डॉक्टर हैं कौशिक ओबेरॉय. जो पेशेंट्स की जान बचाने के लिए प्रोटोकॉल्स की परवाह नहीं करते. लिहाज़ा इनसे पेशेंट्स तो खुश रहते हैं लेकिन हॉस्पिटल के प्रिंसिपल डॉक्टर मनी सुब्रमण्यम तंग रहते हैं.

कौशिक की सिर्फ प्रोफेशनल लाइफ ही नहीं, पर्सनल लाइफ भी इक्वली उलझी हुई है. इनकी पत्नी हैं अनन्या घोष. ताज पैलेस में काम करती हैं. दोनों का आपसी रिश्ता टूटने की कगार पर है. बॉम्बे जनरल हॉस्पिटल डॉक्टर पारेख ने बनवाया था. आज इनकी पोती दिया पारेख समेत अहान और सुजाता नाम के तीन ट्रेनी डॉक्टर्स डॉ ओबेरॉय के अंडर काम सीखने आए हैं. तीनों के मन में होता है कि रोज़ की तरह एक आम दिन है.

लेकिन शाम होते-होते अस्पताल में मरीजों की संख्या तेज़ी से बढ़ने लगती है. मुंबई में आतंक मचने लगता है. पहले बॉम्बे जनरल हॉस्पिटल में आतंकियों के हाथों घायल हुए आम मरीज़ आना शुरू होते हैं. फ़िर घायल पुलिस वाले. और फ़िर खुद आतंकी. लेकिन डॉ कौशिक ओबेरॉय के लिए ये मायने नहीं रखता कि सामने घायल व्यक्ति कौन है. वो सबको एक समान रखते हैं. आतंक की रात में फर्ज़ और जज़्बात की इसी उधेड़बन को ‘मुंबई डायरीज़’ के आठ एपिसोड्स में समेटा गया है.

ट्रेनी डॉक्टर्स से मिलते डॉक्टर करण.
ट्रेनी डॉक्टर्स से मिलते डॉक्टर करण.

# क्या ख़ास है सीरीज़ में?

डॉक्टर्स के नज़रिए से 26/11 हमले की रात को देखने का अनुभव नया है. ऐसा एक्सपीरियंस आज से पहले किसी फ़िल्म या शो में नहीं मिला है. उस रात असल में अस्पताल में मौजूद डॉक्टर्स, स्टाफ और मरीजों पर क्या बीती होगी, इसका हल्का अनुमान इस शो से हमें लगता है. लेकिन ‘मुंबई डायरीज़’ की सबसे बड़ी खामी है ‘क्रिएटिव लिबर्टी’ नाम के हथियार का बेजा इस्तेमाल. शो में कई हिस्से आते हैं, जो साफ़ तौर पर काल्पनिक प्रतीत होते हैं. रियल इवेंट एक्यूरेसी बहुत कम है. ज्यादातर सिचुएशन्स फिक्शनल हैं. डॉ कौशिक ओबेरॉय का करैक्टर मेन है. तो वो पुलिस के साथ मिलकर आतंकवादियों से बराबर लड़ रहा है. ‘एकदम हीरो की तरह’. ट्रेनी डॉक्टर्स भी फ़िल्मी स्टाइल में क्लाइमेक्स में शो स्टीलिंग सीन्स दे रहे हैं. यहां तक कि मेन आतंकी साकिब (असल में कसाब) को अंत में पुलिस नहीं, बल्कि एक ट्रेनी डॉक्टर चित करती है.

दूसरी ‘मुंबई डायरीज़’ की जो बात खली, वो ये कि किरदारों के नामों में बदलाव. पूरी दुनिया को पता है 26/11 में जो आतंकी पकड़ा गया था उसका नाम कसाब था. लेकिन शो में उसका नाम बदलकर साकिब कर दिया गया है. ऐसे ही ज्यादातर किरदारों के नाम काल्पनिक रखे गए हैं. ये इस शो की ऑथ़े᠎न्टिसिटी में सबसे बड़ा डेंट है.

मोहित रैना ने सदा अभिनय किया है.
मोहित रैना ने सधा अभिनय किया है.

आजकल सीरीज़ में धर्मभेद, जातिवाद, पुरुषवादी सोच को बड़े ट्रांसपेरेंट तरीके से दिखलाया जाने लगा है. ये अच्छी बात है. क्यूंकि असल समाज ऐसा ही है. लेकिन अब इन सब मुद्दों को कुछ मेकर्स फ़ॉर्मूला की तरह भी इस्तेमाल करने लगे हैं. इस सीरीज़ में भी कई जगह इन मुद्दों पर बात होती है. हालांकि ये हकीकत भी हो सकती है. लेकिन 26/11 की टाइमलाइन में बीच-बीच में आते ये सीन्स कुछ फोर्स्ड भी लगते हैं. शो के कुछ एपिसोड्स में एडिटिंग की कमी भी नज़र में आती है. कुछ सीन्स में बैकग्राउंड स्कोर सुनाई देता है लेकिन ख़ास इम्पैक्ट क्रिएट नहीं करता.

# एक्टर्स का काम कैसा है?

मोहित रैना डॉ कौशिक ओबेरॉय के करैक्टर में हैं. मोहित का अभिनय बैलेंस्ड है. हालांकि इस लेवल के टेररिस्ट केऑस में डॉक्टर की बॉडी लैंग्वेज इतनी हिरोइक नहीं होगी. जैसी इनकी थी. लेकिन ये मोहित की नहीं डायरेक्टर की गलती मानी जानी चाहिए. न्यूज़ रिपोर्टर मानसी हिरानी के रोल में हैं श्रेया धन्वंतरी. एक न्यूज़ हंगरी वल्चर टाइप का करैक्टर है. जिसे कोई मरे या जिए, इससे मतलब नहीं है. श्रेया ने एक कनिंग शातिर रिपोर्टर का करैक्टर बढ़िया से पोट्रे किया है.

डॉक्टर चित्रा दास के रोल में हैं कोंकणा सेन शर्मा. घरेलू हिंसा के ट्रॉमा से उबरने की कोशिश कर रही महिला का किरदार है. कोंकणा सेन करैक्टर के साथ पूरा न्याय करती हैं. नताशा भारद्वाज एज़ दिया पारेख, सत्यजीत दुबे एज़ अहान मिर्ज़ा, मृण्मयी देशपांडे एज़ सुजाता. ये तीनों ट्रेनी डॉक्टर्स की भूमिका में थे. तीनों के अभिनय से कोई शिकायत नहीं मिलती.

बॉम्बे जनरल हॉस्पिटल के प्रिंसिपल डॉक्टर मनी सुब्रमण्यम की भूमिका में हैं प्रकाश बेलावादी. मनी सुब्रमण्यम का करैक्टर बहुत ही अच्छा है, जिसे प्रकाश बेलावादी ने पूरी ईमानदारी से निभाया है. कहीं भी वो हल्की सी चूक नहीं करते. ‘एयरलिफ्ट’, ‘मद्रास कैफ़े’ जैसी कई फिल्मों में भी प्रकाश का काम सराहनीय रहा है. स्पेशल मेंशन एक्टर संदेश कुलकर्णी का. संदेश शो में एसीपी महेश तावड़े के रोल में हैं. इनकी एंट्री आधे शो के बाद होती है लेकिन अपने सीमित स्क्रीनटाइम में भी संदेश ने कमाल की परफॉरमेंस दी है. उम्मीद करते हैं आगे और भी शोज़ और फिल्मों में संदेश कुलकर्णी दिखाई दें.

एसीपी महेश तावड़े के किरदार में अभिनेता संदेश कुलकर्णी
एसीपी महेश तावड़े के किरदार में अभिनेता संदेश कुलकर्णी

# डायरेक्शन और राइटिंग ने क्या कमाल दिखाया?

‘मुंबई डायरीज़’ को डायरेक्ट किया है निखिल अडवाणी और निखिल गोंसाल्विस ने. निर्देशन के मामले में ये शो कमज़ोर पड़ता है. ऐसे कई सीन्स हैं, कई एक्टर्स हैं जिन्हें सही निर्देशन मिला होता तो शो और काफ़ी बेहतर हो सकता था. शो का स्क्रीनप्ले लिखा है यश, निखिल गोंसाल्विस और अनुष्का मेहरोत्रा ने. इन राइटरों का असल वाकयों से ज्यादा कहानी में कल्पना का भराव निराशाजनक है. सीरीज़ में डायलॉग्स लिखे हैं संयुक्ता चावला शेख ने. संयुक्ता के लिखे कुछ डायलॉग्स अच्छे हैं. जैसे,

“हम मेडिकल प्रोफेशनल्स हैं. हम किसी की फितरत देख कर नहीं, उसकी नब्ज़ देखकर इलाज करते हैं.”

“औरतें मर्दों से बेहतर क्राइसिस हैंडल करती हैं. इसलिए बी अ वुमन एंड डू व्हाटएवर इट टेक्स.”

“अफ़सोस करना ज़रूरी है लेकिन उतना ही ज़रूरी है आगे बढ़ना.”

“हम डॉक्टर्स हैं ह्यूमन बॉडी देखते हैं, ह्यूमन करैक्टर देखना हमारा काम नहीं है.”

सबको इंसानियत की नज़र से देखने वाले डॉक्टर करण.
सबको इंसानियत की नज़र से देखने वाले डॉक्टर करण.

# देखें या नहीं?

‘मुंबई डायरीज़’शो का आईडिया बहुत अच्छा है. लेकिन इसका एग्ज़िक्युशन थोड़ा कमज़ोर है. 26/11 का सटीक चित्रण करने की बजाय शो की कहानी काल्पनिक ज़ोन में पहुंच जाती है. डॉक्टर्स बेशक हीरो होते हैं. इसके लिए उन्हें बुलेटप्रूफ वेस्ट पहनाकर छलांगें लगवाना कतई ज़रूरी नहीं है. किसी भी शो या फ़िल्म में सबसे ज़रूरी फैक्टर होता है एंटरटेनमेंट. इन सारी खामियों पर मिट्टी डल जाती, अगर शो लगातार एंटरटेन करने में कामयाब होता. लेकिन इस मामले में भी मिड एपिसोड्स निराश करते हैं. तो पूरी कहानी का सार ये निकलता है कि ‘मुंबई डायरीज़’ एक एवरेज शो है. जिसका कांसेप्ट तो नया है लेकिन प्रेजेंटेशन पुराना. इसलिए अगर प्राइम वीडियो का सब्सक्रिप्शन है, तो वीकेंड पर देख सकते हैं. अगर नहीं है तो स्पेशल पैसे डालने वाला प्रोडक्ट तो नहीं है.


वीडियो: पाकिस्तानी एक्ट्रेस और बिलाल सईद मस्जिद में डांस वीडियो शूट कर बुरे फंसे

 

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

10 नंबरी

मस्जिद में नाचने के आरोप पर पाकिस्तानी एक्ट्रेस के खिलाफ केस दर्ज

केस की सुनवाई छह अक्टूबर को होगी.

यू-ट्यूबर कैरीमिनाटी पर केस क्यों दर्ज हो गया?

महिलाओं पर अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप लगा है.

'थलाइवी' की रिलीज़ से पहले कंगना ने महाराष्ट्र सरकार से पंगा ले लिया

'थलाइवी', 10 सितंबर को रिलीज़ होने वाली है.

कॉमेडियन कृष्णा ने फिर 'कपिल शर्मा शो' पर आने से मना कर दिया

पहले भी एक बार कृष्णा ने गोविंदा के आने से पहले शूटिंग के लिए मना कर दिया था.

सिद्धार्थ की अंतिम यात्रा पर बदहवास सी दिखीं शहनाज़

'बिग बॉस' के एक्स कंटेस्टेंट रहे राहुल महाजन ने भी शहनाज़ का हाल बताया.

कल रात सोने से लेकर आज सुबह सिद्धार्थ की मौत तक क्या-क्या हुआ?

सिद्धार्थ शुक्ला मामले में पुलिस ये जांच करेगी कि उन्होंने सोने से पहले क्या कोई दवा ली थी?

सिद्धार्थ शुक्ला का 'मौत' पर किया ट्वीट वायरल, ये पांच पुराने ट्वीट अब पढ़ने पर विचलित करते हैं

व्यक्ति चला जाता है, उसकी बातें पीछे रह जाती हैं.

सिद्धार्थ शुक्ला की याद में सलमान ने बस इतना कहा

शहनाज़ गिल ने अधूरी छोड़ दी शूटिंग.

सिद्धार्थ शुक्ला के गुज़रने पर अक्षय कुमार और कपिल शर्मा समेत इन 16 सेलेब्रिटीज़ ने क्या कहा?

सिद्धार्थ के अचानक गुज़रने की खबर से पूरी फिल्म इंडस्ट्री सदमे में है.

शाहरुख खान की एटली डायरेक्टेड फिल्म का सारा तिया-पांचा यहां जानिए

शाहरुख खान-एटली फिल्म की शूटिंग शुरू होने को है. जानिए फिल्म से जुड़ी 4 करारी बातें.