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बिना डिग्री वाले इन इंजीनियर्स ने हमारी गृहस्थी बचा ली!

आज इंजीनियर्स डे है. इंजीनियर्स पर निबंध लिखना है. गुरु जी ने बोला है. इंजीनियर बहुत सहनशील जानवर होता है. उसे बॉस दिन भर ऑफिस में घिसने के बाद रात 11 बजे फोन करके आउट ऑफ सिटी भेज दे तो उफ नहीं करता. ऐसे मौकों पर गधे का भी दुलत्ती मारने का मन करता है लेकिन इंजीनियर कभी बॉस की अवहेलना नहीं करता. अब देखो गुरु जी ने तो निबंध लिखने को कहा है लेकिन उसमें बोर हो जाओगे. हर घर में एक इंजीनियर बैठा है, इतने निबंध कहां से लाऊं. खैर, इंजीनियर्स मुख्यत: तीन प्रकार के होते हैं.
1. डिग्री वाले इंजीनियर्स
2. विश्वकर्मा पूजा वाले इंजीनियर्स
3. हुनर वाले इंजीनियर्स

हम सिर्फ हुनर वाले इंजीनियर्स की विवेचना करेंगे. क्योंकि इन्हें खुद पता नहीं होता कि ये इंजीनियर हैं. इसीलिए कभी विश्वकर्मा पूजा नहीं करते और डिग्री तो कभी मिलने से रही. लेकिन इनके बिना हमारा जीवन मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है. आपके पास भी ऐसे इंजीनियर्स होंगे, उनको मार्क कर लो और उनकी कद्र करो.

1. चाकू से मोबाइल खोलने वाले

मोबाइल का पोस्टमार्टम करने के बाद बिना डिग्री का इंजीनियर
मोबाइल का पोस्टमार्टम करने के बाद बिना डिग्री का इंजीनियर

इंडिया डिजिटल हो ही चुका है. हर हाथ तरक्की हर हाथ मोबाइल है. लेकिन गांव में मोबाइल बिगड़ जाता है तो उसे दुकान पर नहीं ले जाते. घर में ही उसका पोस्टमार्टम करते हैं. चाकू की नोक से उसके स्क्रू खोलते हैं. कुछ और क्रियेटिव होते हैं. वो साइकिल की तीली पीटकर स्क्रूड्राइवर बनाते हैं. एक चीज याद रखें. बैट्री निकालकर उसमें कागज फंसाने वाले इंजीनियर नहीं होते.

2. लट्ठ से फ्यूज जोड़ने वाले

कटियाबाज से लोहा सिंह
कटियाबाज से लोहा सिंह

ऐसा नहीं है कि इनके पास सीढ़ी नहीं होती. होती है और खंभे के ऊपर तक होती है. लेकिन खंभे पर तारों में बिजली कब रेंग जाए इसका पता नहीं होता. इसलिए वो लाठी से ट्रांसफॉर्मर का फ्यूज तक जोड़ देते हैं. हमारे गांव में एक जने इसी चक्कर में चिपक गए थे क्योंकि लाठी भीगी थी. उनको मौत के मुंह से वापस खींच लिया गया था.

3. फ्यूज बल्ब में रोशनी लाने वाले

फोटो में लाल तीर का निशान जिस तार की तरफ इशारा कर रहा है उसे घूरते रहें और जादू देखें
फोटो में लाल तीर का निशान जिस तार की तरफ इशारा कर रहा है उसे घूरते रहें और जादू देखें

इन इंजीनियर्स को शायद आपने नहीं देखा होगा लेकिन ये होते हैं. बल्ब अगर फिलामेंट टूटने की वजह से फ्यूज होता है तो ये उसे हिलाते हैं. अगर इस हिलाने की प्रोसेस में फिलामेंट अपनी जगह सेट हो जाता है तो कुछ दिन और जलने के लिए बल्ब तैयार हो जाता है.

4. साइकिल की रिम से एंटीना बनाने वाले

ये कबूतरों का पंचायत घर नहीं है
ये कबूतरों का पंचायत घर नहीं है

हालांकि अब इन इंजीनियर्स का काम खत्म हो गया है और प्रमोट भी हो गए हैं. अब ये लोग सीडी प्लेयर का लेंस बदलते हैं. साइकिल की रिम से टीवी का एंटीना तब बनता था जब डिश टीवी और टाटा स्काई नहीं आया था.

5. बाइक मिस्त्री

प्लग से बाइक की आत्मा में उतरता इंजीनियर
प्लग से बाइक की आत्मा में उतरता इंजीनियर

इनके पास भी कोई डिग्री नहीं होती. इनके करियर का शुभारंभ प्लग साफ करने से होता है. उसी दिन इनको आत्मज्ञान हो जाता है कि इनका जन्म तो गाड़ियां रिपेयर करने के लिए हुआ है.

6. नल खोलने वाले

देश विदेश में हैंड पंप रिपेयरिंग के लिए फेमस इंजीनियर
देश विदेश में हैंड पंप रिपेयरिंग के लिए फेमस इंजीनियर

इनका रहना हर घर में अति आवश्यक मोस्ट इंपॉर्टेंट जरूरी है. क्योंकि अगर ये नहीं होंगे तो हैंडपंप में गिरा हुआ वॉशर कौन बदलेगा?
बिना डिग्री वाले इंजीनियर्स की बात हो ही रही है तो बिहार के लौंगी भुइयां की कहानी भी जान लीजिए जिन्होंने 30 साल की मेहनत से पहाड़ को काटकर नहर निकाल दी है.

 


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