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प्रणब मुखर्जी ने RSS की बेइज्जती के लिए जो किया वो किसी ने नहीं देखा!

प्रणब मुखर्जी. वरिष्ठ कांग्रेसी नेता. पूर्व राष्ट्रपति. पहुंचे RSS यानी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मंच पर. पूरे देश में भूचाल आ गया. कांग्रेस ऐसे बिलबिलाई जैसे संघ ने उसका नेता हथिया लिया. मंच पर जो हुआ सबने देखा. एंट्री लेते हुए प्रणब दा ने संघ के संस्थापक हेडगेवार को भारत मां का वीर सपूत लिख दिया. अब तो और सांस अटक गई. लेकिन मंच पर पहुंचकर प्रणब मुखर्जी ने जो संघ की खिंचाई की है, वो न तो कांग्रेस के समझ में आई न संघ समर्थकों के. इसे कौन सा दांव कहते हैं, हमको नहीं पता. लेकिन वो प्वाइंट्स देख लो जहां प्रणब मुखर्जी ने RSS की इज्जत से खेला.

1.

सबसे पहने न मन की बात, न धन की बात. सीधे भाषण की बात. प्रणब दा ने एक जगह कहा- हमें 1947 में आजादी मिली. सरदार पटेल ने सब रियासतों को मिलाकर एक देश बनाया. 1950 में भारत में संविधान लागू हुआ. जिससे पूरे देश के सभी लोगों को स्वतंत्रता और समानता का अधिकार दिया.

गलत इतिहास से नोट्स लेते प्रणब दा
गलत इतिहास से नोट्स लेते प्रणब दा

इस वक्तव्य में थोड़ी सी प्रॉब्लम है. व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी में पढ़ी ज्यादातर आबादी मानती है कि भारत 16 मई 2014 को आजाद हुआ. जब मोदी जी देश के प्रधानमंत्री बने. उससे पहले के पहले गोरे अंग्रेजों ने लूटा फिर काले अंग्रेजों नें.

2.

एक जगह उन्होंने कहा- कुछ सच्चाई हैं, जो मैंने पिछले 50 सालों में जानी हैं.
ये तथ्य भी पूरी तरह से गलत है. पिछले 70 साल में यहां कुछ हुआ ही नहीं तो ये कैसे जान सकते हैं? जो भी उन्होंने जाना है वो सिर्फ 4 सालों में जाना. उनका ये वक्तव्य सीधे संघ की विचारधारा पर चोट करने वाला है.

3.

जो कहा, वो किस भाषा में कहा ये भी बहुत मायने रखता है. उनका भाषण शुरू होने से पहले ही मोहन भागवत ने लोगों को समझा दिया था कि ये अंग्रेजी में बोलेंगे. कान लगाकर सुनना. ये प्रणब दा की तरफ इशारा था कि संघ के लोग इंगलिश नहीं समझते इसलिए वो भाषण हिंदी में अथवा देववाणी संस्कृत में दें. लेकिन फिर भी प्रणब दा ने उनकी रिक्वेस्ट ठुकरा दी.

प्रणब मुखर्जी से हाथ जोड़कर हिंदी में बोलने की रिक्वेस्ट करते मोहन भागवत
प्रणब मुखर्जी से हाथ जोड़कर हिंदी में बोलने की रिक्वेस्ट करते मोहन भागवत

4.

अब ड्रेस की बात. एक तो प्रणब दा वहां गणवेश पहनकर नहीं गए. धोती टाप कर आ गए. लाठी तक नहीं ला सके अपने घर से. कहते हैं जैसा देस वैसा भेस. लेकिन संघ के मंच पर प्रणब दा ये बात भूल गए.

अपनी ही ड्रेस में पहुंच गए प्रणब दा
अपनी ही ड्रेस में पहुंच गए प्रणब दा

5.

सब लोगों ने संघ प्रणाम किया. प्रणब दा ने नहीं किया. न ही संघ की एंथेम गाई.

6.

मोहन भागवत जब भाषण दे रहे थे तो प्रणब मुखर्जी कभी सिर खुजा रहे थे कभी कुछ पढ़ने की एक्टिंग कर रहे थे. वो पूरे टाइम ये दिखाते रहे कि मोहन भागवत की बातों पर ध्यान देने नहीं आए हैं यहां.

इससे बड़ी बेइज्जती कुछ नहीं
इससे बड़ी बेइज्जती कुछ नहीं

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