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सरकार भले दे लेकिन सवर्ण ले नहीं पाएंगे आरक्षण!

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सवर्णों को 10 परसेंट आरक्षण मिलने वाला है. सरकार ये बिल पेश करने वाली है. लेकिन कुछ हो न हो, गलबजी शुरू हो गई है. कोई इसको मास्टर स्ट्रोक कह रहा है. कोई हार के डर से लिया गया फैसला बता रहा है. कोई मंदिर न बनवा पाने का डैमेज कंट्रोल बता रहा है. जित्ते मुंह उत्ती बातें हैं. लेकिन कुछ फैक्ट्स हम बताने वाले हैं, ये आपको कोई नहीं बताएगा. कसम से बता रहे हैं कोई नहीं बताएगा. अगर कोई बताए तो दूसरी तरफ मुंह कर लेना.

1.

भले ये बिल सरकार ने अब पेश करने का प्लान बनाया हो लेकिन सवर्णों को आरक्षण हमारी प्राचीन परंपरा का अंग है. आर्थिक आधार पर पहली बार आरक्षण सुदामा को मिला था.

आरक्षण का लाभ मिलने से पहले सुदामा
आरक्षण का लाभ मिलने से पहले सुदामा

2.

सरकार कितनी भी कोशिश कर ले लेकिन सवर्ण खुद आरक्षण नहीं ले पाएंगे. या यूं कहो कि लेने नहीं जाएंगे. अभी तक तो तमाम लोगों ने ‘आरक्षण मुक्त भारत’ की कवर पिक नहीं हटाई है. जिस आरक्षण का जीवन भर विरोध किया वो कैसे ले लेंगे?

आरक्षण हटाओ देश बचाओ
आरक्षण हटाओ देश बचाओ

3.

कुछ डायलॉग्स- बहाने हमेशा के लिए विलुप्त हो जाएंगे. जैसे:

और बनवाओ पुल आरक्षण वालों से- जब कहीं कोई पुल गिर जाता है तो सबसे पहले आरक्षण वाले इंजीनियर लपेटे जाते हैं. अब बराबरी की वजह से ये जुमला गमले में धर दिया जाएगा. आरक्षण वाले डॉक्टर का ताना भी खत्म समझो.

और बनवाओ
और बनवाओ

अगर आरक्षण न होता तो- ये अब तक बिना आरक्षण वाले धड़ल्ले से इस्तेमाल करते थे. अगर आरक्षण न होता तो पास हो जाता, तोप दाग देता, ओजोन लेयर का छेद रफू कर देता, अमेरिका को हिंद महासागर में डुबा देता, ये सब डायलॉग्स अब नहीं चलेंगे.

अरे ये तो आरक्षण वाले हैं- साथ पढ़ने लिखने बैठने वाले दोस्त भी ये ताना मारने में बाज़ नहीं आते थे. अब ये कोई नहीं कहेगा.

4.

आरक्षण फिल्म का सीक्वल आएगा. अब चूंकि व्यवस्था बदलने वाली है. अगर बिल पास हो जाता है तो प्रकाश झा तुरंत सीक्वल बना डालेंगे. क्योंकि सीजन ही सीक्वल और बायोपिक्स का चल रहा है.

तैयार हो जाइए देवियों और सज्जनों
तैयार हो जाइए देवियों और सज्जनों

5.

अमेरिका, सऊदी जैसी जगहों को टैलेंट का संकट- इन सब जगहों पर टैलेंट का पड़ जाएगा टोंटा क्योंकि अपने यहां सबका लग रहा है कोटा. यहां से सवर्ण इंजीनियर डॉक्टर बनकर लोग हवाई जहाज में बैठकर निकल जाते थे. काहे कि यहां नौकरी का संकट रहता था, आरक्षण की वजह से. अब वो तरसेंगे क्योंकि यहां…

इन प्वाइंट्स के अलावा भी बहुत कुछ होगा. अब जोक्स की दुनिया बदल जाएगी. होगा ऐसा कि धोती कुर्ता पहने पंडिज्जी कहीं पूजा करा रहे होंगे और उनको जजमान उपहार स्वरूप सरकारी नौकरी दे देगा. देश में जनरल के नाम पर सिर्फ इलेक्शन और ट्रेन में डिब्बे बचेंगे. कैटेगरी का कोई खास मतलब रह नहीं जाएगा.

अगर अभी तक आप कनफ्यूज हैं कि हम क्या कहना चाहते हैं तो टेंसन मत लीजिए. आरक्षण पर चौड़े होने से बेहतर है जाति को किनारे कीजिए. वही सबसे बड़ी दिक्कत है.


पूरा मैटर जानने के लिए वीडियो देखो:

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Satire: less known facts about Reservation for upper castes

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