Submit your post

Follow Us

भारत ने रूस से कहा- सौ साल पहले हमें तुमसे प्यार था, आज भी है और कल भी रहेगा

4 अक्टूबर को 19वें इंडिया-रशिया सम्मेलन में हिस्सा लेने पुतिन भारत आए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भींचकर उन्हें गले लगाया. पुतिन और मोदी की पहचान नई है, मगर भारत और रूस में काफी पुरानी दोस्ती है. उनका यूं गले मिलना उसी पुरानी दोस्ती का गले लगना था.  5 अक्टूबर को भारत और रूस के बीच कई मुद्दों पर समझौता करने के बाद पुतिन वापस लौट गए. दो दिन की उनकी इस यात्रा का सबसे चर्चित पॉइंट थी 40,000 करोड़ की S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम डील. पुतिन के इस भारत दौरे में क्या कुछ हुआ, इसमें क्या खास है, इन सबका मोटा-मोटी ब्योरा हम यहां दे रहे हैं आपको.

1. मोदी और पुतिन की इस साल ये तीसरी मुलाकात है. मई में मोदी सोची जाकर पुतिन से मिले थे. दोनों फिर जुलाई में मिले दक्षिण अफ्रीका में हुए ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान. तब पुतिन ने मोदी को रूस आने का न्योता दिया था. पिछले कुछ बरस से भारत लगातार अमेरिका के पाले में जाता दिख रहा था. उसके और रूस के बीच पहले जैसी नजदीकी नहीं रही थी. भारत को अमेरिका के ज्यादा करीब जाते देखकर रूस खुश नहीं था. इसीलिए रूस में लोग पुतिन की इस भारत यात्रा को दोनों देशों की दोस्ती का लिटमस टेस्ट मान रहे थे.

2. भारत ने पुतिन को एक स्पेशल तोहफा भी दिया. भारत में बना एक मिग-21 विमान. भारत ने सोवियत से 1200 से भी ज्यादा मिग विमान खरीदे हैं. पहली खरीद हुई थी 1964 में. माने जब हमें चीन से हारे हुए दो साल हो गए थे. अमेरिका और ब्रिटेन ने भारत को लड़ाकू विमान बेचने से इनकार कर दिया था. तब सोवियत ही था, जिसने भारत की रक्षा जरूरतों को समझते हुए उसे ये विमान बेचे थे. मिग-21 से जो शुरुआत हुई, वो रक्षा सहयोग आज आधी सदी बाद भी जारी है. भारत के पास हथियारों का जो जखीरा है, उसका 60 फीसद से ज्यादा रूस का ही बनाया हुआ है. भारत को हथियार बेचने में रूस अभी भी पहले नंबर पर है. इसी पुरानी दोस्ती को याद करते हुए पुतिन को मिग-21 विमान का तोहफा दिया गया. इस फाइटर जेट से जुड़ी एक अजीब बात ये है कि इसे बनाने वाले रूस के पास आज एक भी मिग-21 नहीं है. भारत का दिया ये विमान रूसी वायु सेना का इकलौता मिग-21 होगा.

भारत ने अपनी दोस्ती की निशानी के तौर पर रूस को एक मिग-21 विमान दिया है.
NATO फौज मिग-21 को फिशबेड के नाम से बुलाती थी. 1959 से 1985 के बीच सोवियत ने करीब 10,645 मिग-21 बनाए. बाद में भारत को उसने इसकी टेक्नॉलजी ट्रांसफर की. फिर भारत भी इसे बनाने लगा. चीन ने भी इसे खूब बनाया और उड़ाया. कहते हैं कि इन सारे मिग-21 विमानों को जोड़ा जाए, तो सुपरसॉनिक एयरक्राफ्ट के इतिहास में इससे ज्यादा कोई फाइटर जेट बना ही नहीं. 

3. इस मीटिंग का सबसे हाई पॉइंट है S-400 मिसाइल सिस्टम की खरीद. इसे दुनिया के सबसे विकसित मिसाइल डिफेंस सिस्टम्स में गिना जाता है. अमेरिका ने भारत को ये डील करने से बार-बार रोका. चेतावनी भी दी. भारत ने साफ कहा कि वो अपने रिश्ते अपने हिसाब से चलाना चाहता है. ये मिसाइल सिस्टम भारत की जरूरत है. भारत अपनी तैयारी दो मोर्चों के हिसाब से रखता है. एक तरफ पाकिस्तान, दूसरी तरफ चीन. भारत को ये देखना होता है कि अगर दो मोर्चों पर लड़ाई छिड़ जाए, तो क्या वो इसे संभाल पाएगा? इसलिए आधुनिक से आधुनिका हथियार चाहता है.

 S-400 दुनिया के सबसे अडवांस्ड मिसाइल डिफेंस सिस्टम्स में से एक है. रूस ने इसे सीरिया में भी तैनात किया था. चीन ने भी रूस से ये सिस्टम खरीदा है (फोटो: Getty)
S-400 दुनिया के सबसे अडवांस्ड मिसाइल डिफेंस सिस्टम्स में से एक है. रूस ने इसे सीरिया में भी तैनात किया था. चीन ने भी रूस से ये सिस्टम खरीदा है (फोटो: Getty)

4. भारत और रूस के इस रक्षा सौदे से अमेरिका के CAATSA कानून का उल्लंघन हुआ है. इस कानून का पूरा नाम है- काउंटरिंग अमेरिकाज़ अडवर्सरीज़ थ्रू सेंक्शन्स ऐक्ट. अडवर्सरीज़ का मतलब होता है दुश्मन. नाम से ही जाहिर है कि इस कानून की मदद से अमेरिका अपने दुश्मन देशों से निपटने के लिए उनपर प्रतिबंध लगाता है. बस उस देश पर नहीं, बल्कि उसके साथ कोई बड़ी डील, बड़ा व्यापार करने वाले देशों पर भी सेंक्शन्स लगाता है. रूस इस कानून की जद में इसलिए आता है कि अमेरिका ने उसपर प्रतिबंध लगाए हुए हैं. रूस पर इल्जाम है-

क्रीमिया पर कब्जा किया
अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में गड़बड़ी पैदा की
साइबर अटैक किया
मानवाधिकार उल्लंघन किया
केमिकल हथियारों का इस्तेमाल किया

5. ये CAATSA कानून रूस के अलावा ईरान और उत्तर कोरिया के साथ डीलिंग पर भी लागू होता है. चूंकि भारत ने रूस से इतना बड़ा रक्षा सौदा किया है, तो वो भी इस कानून के लपेटे में आता है. हालांकि अमेरिका ऐसा करके भारत से अपने रिश्ते नहीं बिगाड़ना चाहता. US के सेक्रटरी ऑफ स्टेट माइक पोम्पियो कह चुके हैं कि वॉशिंगटन भारत जैसे ‘करीबी सहयोगी’ पर प्रतिबंध नहीं लगाना चाहता. उन्होंने तो ये भी कहा कि अमेरिका ‘समझता है’ कि भारत और रूस पुराने दोस्त हैं.

6. भारत और रूस के बीच डिफेंस, न्यूक्लियर ऐनर्जी, प्राकृतिक गैस, अंतरिक्ष, रेलवे, अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में कई समझौते हुए. दोनों देशों के बीच आतंकवाद के मसले पर आपसी सहयोग को लेकर भी समझौता हुआ. दोनों देशों के बीच सेना के स्तर पर सहयोग बढ़ाने का भी समझौता हुआ. हां, जैसा भारत और अमेरिका के बीच LEMOA और COMCASA  जैसा स्पेशल अग्रीमेंट हुआ है, वैसी कोई चीज फिलहाल यहां नहीं हुई है.

7. 2016 में भारत और रूस के बीच चार फ्रिगेट स्टेल्थ युद्धपोतों को लेकर समझौता हुआ था. इससे जुड़ी डील भी हुई इस बार. इन ‘क्रिवाक क्लास’ फ्रिगेट्स में से दो रेडिमेड लेंगे हम रूस से. उन्हें बनाएगी रूस की यानतार शिपयार्ड कंपनी. बाकी दो ‘मेक इन इंडिया’ के तहत भारत में बनेंगे. इसे बनाने का जिम्मा मिला है गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) को. टेक्नॉलजी और डिजाइन जैसी चीजें रूस ही देगा हमको. ये तकरीबन 200 अरब की डील है. नेवी के पास पहले ही छह क्रिवाक-III फ्रिगेट्स हैं. वो इनकी परफॉर्मेंस से काफी खुश थी.

8. क्रिवाक क्लास के जहाज सबसे पहले 70 के दशक में सोवियत नौसेना का हिस्सा बने. फिर इन्हें अपग्रेड किया जाता रहा. एक वक्त था जब क्रिवाक III क्लास के जहाज बस केजीबी के बॉर्डर गार्ड्स ही इस्तेमाल करते थे. ये सोवियत नौसेना की भी पहुंच से बाहर थे. 1997 में भारतीय नौसेना ने पहली बार रूस से क्रिवाक III जहाज़ खरीदा. इसकी चौथी जनरेशन ‘क्रिवाक IV क्लास’ भी है. इनमें कोल्ड वॉर खत्म होने के बाद विकसित किए गए मॉडर्न सेंसर्स और हथियार लगे हैं.

िुिु
ये क्रिवाक क्लास फ्रिगेट्स हैं. भारत के सामने अपनी नौसेना को मजबूत करने की चुनौती है. चीन ने पिछले एक दशक में अपनी नौसेना करे अंदर बहुत ज्यादा पैसा खर्च किया है. हमारी नेवी उसके मुकाबले पसंगाभर भी नहीं आती. 

9. इस क्रिवाक-क्लास फ्रिगेट्स डील की एक दिलचस्प कहानी है. असल में भारत चाहता था कि चारों क्रिवाक-क्लास युद्धपोत भारत में बनाए जाएं. मगर तब तक हुआ क्या कि इन्हें बनाने वाली कंपनी यानतार रूसी नौसेना के लिए दो क्रिवाक III बनाना शुरू कर चुकी थी. लेकिन इसके बाद रूस के पास फंड की कमी हो गई. तब भारत ने इन दोनों को खरीदकर रूस की मदद की.

10. भारत और रूस के बीच हुई द्विपक्षीय बातचीत में अंतरिक्ष सहयोग से जुड़े समझौते भी हुए. अंतरिक्ष के क्षेत्र में भी भारत और रूस पुराने सहयोगी हैं. भारत के राकेश शर्मा रूस के सोएज़ टी-11 स्पेसक्राफ्ट में ही अंतरिक्ष गए थे. भारत के दो सबसे शुरुआती उपग्रहों- आर्यभट्ट और भास्कर को सोवियत ने ही लॉन्च किया था. भारत अब चंद्रयान-2 भेज रहा है चांद पर. पहले इसे अक्टूबर में लॉन्च होना था, मगर अब इसकी तारीख बढ़कर जनवरी 2019 पहुंच गई है. इस मिशन में रूस ने भी मदद की है.  भारत 2022 में अपना पहला मानव अंतरिक्ष मिशन भेजने की तैयारी कर रहा है. इसमें भी रूस भारत का सहयोग करेगा.

11. भारत और रूस के बीच अफगानिस्तान पर भी बातचीत हुई. बीते कुछ वक्त में रूस वहां काफी ऐक्टिव हुआ है. भारत की भी अफगानिस्तान को लेकर अपनी चिंताएं हैं. ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर भी दोनों में बात हुई. ये बातचीत इसलिए बड़ी ज़रूरी थी कि ट्रंप ने ईरान के साथ हुई न्यूक्लियर डील से हाथ खींच लिया था. ईरान पर कई सेंक्शन्स भी लगाए थे. इसके बाद अमेरिका ने ज़िद पकड़ ली थी कि बाकी देश भी ईरान से कट्टी कल ले. अब ईरान भारत और रूस का म्यूचुअल फ्रेंड है. तो वो अमेरिका-ईरान के तनाव से दूर रहकर अपने रिश्ते निभाने का रास्ता तलाश रहा है. इसमें रूस बड़े काम आ सकता है.

हैदराबाद हाउस में हुई प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद मोदी और पुतिन ने साझा बयान जारी किया (फोटो: रॉयटर्स)
हैदराबाद हाउस में हुई प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद मोदी और पुतिन ने साझा बयान जारी करते हुए (फोटो: रॉयटर्स)

केजीबी का जासूस पुतिन कैसे बना रूस का सबसे बड़ा नेता?

पुतिन से 39 हजार करोड़ रुपए का मिसाइल सिस्टम लेंगे पीएम मोदी

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

पोस्टमॉर्टम हाउस

वेब सीरीज़ रिव्यू- अनपॉज़्ड: नया सफर

वेब सीरीज़ रिव्यू- अनपॉज़्ड: नया सफर

इस सीरीज़ की सभी 5 कहानियों में एक चीज़ कॉमन है- सबकुछ बेहतर हो जाने की उम्मीद.

'रॉकेट बॉयज़' में क्या ख़ास है, जो दो महान वैज्ञानिक विक्रम साराभाई और होमी भाभा की कहानी दिखाएगी?

'रॉकेट बॉयज़' में क्या ख़ास है, जो दो महान वैज्ञानिक विक्रम साराभाई और होमी भाभा की कहानी दिखाएगी?

ट्रेलर आया है, जिसमें एक बड़े वैज्ञानिक का कैमियो भी है.

मूवी रिव्यू: 36 फार्महाउस

मूवी रिव्यू: 36 फार्महाउस

अगर Knives Out को बहुत ही बुरे ढंग से बनाया जाए, तो रिज़ल्ट ’36 फार्महाउस’ जैसी फिल्म होगी.

वेब सीरीज़ रिव्यू- ये काली काली आंखें

वेब सीरीज़ रिव्यू- ये काली काली आंखें

'ये काली काली आंखें' में आपको बहुत सी ऐसी चीज़ें दिखेंगी, जो आप पहले देख चुके हैं. बस उन चीज़ों के मायने, यहां थोड़ा हटके हैं.

वेब सीरीज रिव्यू: ह्यूमन

वेब सीरीज रिव्यू: ह्यूमन

न ही इसे सिरे से खारिज किया जा सकता है, न ही इसे मस्ट वॉच की कैटेगरी में रखा जा सकता है

साउथ इंडिया के 8 कमाल एक्टर्स, जो हिंदी सिनेमा में डेब्यू करने वाले हैं

साउथ इंडिया के 8 कमाल एक्टर्स, जो हिंदी सिनेमा में डेब्यू करने वाले हैं

अब इनकी हिंदी डब फिल्में खोजने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी.

वेब सीरीज़ रिव्यू: हम्बल पॉलिटिशियन नोगराज

वेब सीरीज़ रिव्यू: हम्बल पॉलिटिशियन नोगराज

अगर पॉलिटिकल कॉमेडी से ऑफेंड होते हैं, तो दूर ही रहिए.

वेब सीरीज़ रिव्यू: कौन बनेगी शिखरवटी

वेब सीरीज़ रिव्यू: कौन बनेगी शिखरवटी

नसीरुद्दीन शाह, रघुबीर यादव और लारा दत्ता जैसे एक्टर्स लिए लेकिन....

वेब सीरीज़ रिव्यू- क्यूबिकल्स 2

वेब सीरीज़ रिव्यू- क्यूबिकल्स 2

Cubicles 2 एक सपने के साथ शुरू होती है. और इसका एंड भी बिल्कुल ड्रीमी होता है. एक ऐसा सपना, जिसके पूरे होने की सिर्फ उम्मीद और इंतज़ार किया जा सकता है.

वेब सीरीज़ रिव्यू: कैंपस डायरीज़

वेब सीरीज़ रिव्यू: कैंपस डायरीज़

कैसा है यूट्यूब स्टार्स हर्ष बेनीवाल और सलोनी गौर का ये नया शो?