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'घूंघट की आड़ में दिलबर नहीं, मैं केजरीवाल बोल रहा हूं'

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घूंघट की आड़ में दीदार दिलबर का होता है. लेकिन अगर यही दीदार पिछवाड़े की तरफ से हो और मफलर से कुछ इंच ऊपर टन्न सी मूंछों के दिखने का डर रहे तो ये अखरता है. लगता है कहीं ‘वो’ तो नहीं.

एक बड़ा ODD सा ऐड आया है. अच्छे से ODD-EVEN फॉर्मूले पर. दिल्ली के सीएम पीठ दिखाते हुए दिख रहे हैं. सामने दिखते हैं पौधे. बकौल लल्लन, ‘मफलरिया मैन को लगी थी मुतास. सामने था पेड़. गडकरी का यूरिया फॉर्मूला इनको पहले से ही खांसी वाली गर्दन में कंठस्थ था. तो बस सींच दिए. आशुतोषवा कैमरा ऑन करके उसी की रिकॉर्डिंग करवा लीहिस. और बोला- शक्ल न दिखाओ बे. वरना सुप्रीम कोर्ट पेल देगी. और नतीजतन, बना ये ऐड’ रही बात नियम की तो बकौल चिरकू गुरु ये उस चिड़िया का नाम है, जो जब खुद पर हगने लगे तो उड़ा देनी चाहिए.

केजरीवाल ऐड में अपना नाम बताते ही ये रिक्वेस्ट करते हैं कि एक मिनट बात करनी है, फोन न काटना. अब इसके दो मतलब हैं. केजरीवाल नाम सुनते ही लोग फोन काट देते हैं. या फिर केजरीवाल की कॉल रेट मिनट वाली है और वो रोमिंग पर गए हुए हैं. लेकिन आम आदमी जब बड़ा हो जाता है तो वो सब भूल जाता है. तभी को केजरीवाल की कॉल एक मिनट से करीब 20 सेकेंड ज्यादा खिंच जाती है. लिखवा लो, कांग्रेस-बीजेपी मिलकर ऑडिटिंग करवाएंगी, इस बढ़े हुए खर्च की.

kejriwal on odd even

केजरीवाल का ऐड इंस्टाग्राम से रंगीन करा हुआ लगता है. जिससे पक्का ‘क्यों आगे पीछे डोलते हो भंवरे की तरह’ टाइप मूड बनाने की कोशिश की गई.  केजरीवाल कहते हैं सिविल डिफेंस, ट्रैफिक पुलिस और वॉलेंटियर बढ़िया काम कर रहे हैं. लेकिन केजरीवाल उन लोगों को भूल गए, जिनको सड़क पर लाने के लिए केजरीवाल जिम्मेदार हैं. दलाल मीडिया. अब दिल्ली में चौराहों पर भिखारी, ट्रैफिक पुलिस, AAP के वॉलेंटियर्स  के साथ टीवी पत्रकार भी पाए जाते हैं. अगेन बकौल लल्लन, ‘डीजल गाड़ियों के चक्कर में चैनल वालों की अंदर की ‘गैस’ निकली जा रही है. पर इस पॉल्यूशन को कोई ससुर पकड़ नहीं पाएगा.’

एक बंदा ODD वाले दिन EVEN नंबर की कार के साथ रेड लाइट पर दिखा. वॉलेंटिएर ने फूल पकड़ाया और बताया कि आप गलत गाड़ी लेकर आ गए हैं. बंदा लौटा और कुछ देर बाद मोटर साइकिल लेकर आ गया. वॉलेंटिएर ने कहा- मेरी आंखों में आंसू आ गए.

ऐड की इस लाइन का जवाब लल्लन देते हैं,  ‘अबे ई मुहब्बत या इमोशनल वाले आंसू नहीं हैं. वॉलेंटिएर कराह रहा था. कार वाला बंदा जब बाइक लाकर रेडलाइट पर लौटा तो  पीछे की सीट पर बैठी थी गुलाब का फूल लिए उसकी गर्लफ्रेंड. वॉलेंटिएर का ताजा-ताजा ब्रेकअप हुआ था, बस याद आ गए उसे अपने ‘अच्छे दिन’. रो दिया लौंडा. पर ‘मन की बात’ कोई नहीं समझ सकता. क्या सीएम और क्या पीएम.

केजरीवाल कहते हैं दिल्ली के लोग बहुत अच्छे हैं. ये सुनते ही विनोद कुमार बिन्नी, मुलेठी वाली किरण बेदी, मानहानि वाले अरुण जेटली और जंग वाले नजीब जंग की याद आती है. खुदा करे केजरीवाल की इन अच्छे लोगों से दोस्ती बनी रहे. ये तो मीडिया है जो खुद से कुछ भी जोड़ देती है.
ODD-EVEN का उल्लंघन करने वालों को हाथ जोड़कर रोकने और बिना लड़े टोकने की सलाह अरविंद देते हैं. पर टोकने वालों का दिल्ली में क्या अंजाम होता है. इसके लिए ज्यादा दूर जाने की जरूरत नहीं है मितरों. फाड़ एग्जाम्पल प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव. ऊपर से ’16 दुनी 8 हम हैं जाट’ वाला कल्चर दिल्ली में बहुत है, पिलने का खतरा बहुत रहता है.

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