Submit your post

Follow Us

चोरी हुई साइकल ने बना दिया अली को सदी का सबसे महान बॉक्सर

साल था 1954. बारह साल का एक लड़का. जिसकी साइकल चोरी हो गई थी. वो रिपोर्ट लिखवाने थाने पहुंचा. उसे जो पुलिस वाला मिला, उसका नाम था जॉय मार्टिन. जॉय की अलग ही कैसेट चल रही थी. उसने जब लड़के की कद-काठी देखी तो कहा. कहां पुलिस-थाने के फेर में पड़े हो. तुम्हारी जैसी लंबाई-चौड़ाई है. तुम्हें तो खुद ही चोर से निपट लेना चाहिए था. मार्टिन खुद बॉक्सिंग ट्रेनर थे. उनने लड़के को बॉक्सिंग सीखने को कहा और खुद सिखाने को तैयार हो गए. लड़के ने भी हामी भर दी.

वही लड़का. सन 1964. 22 साल की उम्र. सोनी लिस्टन को हराकर वर्ल्ड हैवीवेट चैंपियन बन गया, बहुत बड़ा उलटफेर था ये. हराने वाले लड़के का नाम था कैशियस मारक्लस क्ले.  पंचलाइन मारी. ‘फ्लोट लाइक अ बटरफ्लाई, स्टिंग लाइक अ बी’. जीतने के बाद बोले- आई एम द ग्रेटेस्ट. इसके कुछ ही टाइम बाद डेट्रॉएट में वालेस डी फ्रैड मुहम्मद के पास गए. ‘नेशन ऑफ इस्लाम’ ज्वाइन कर अपना नाम बदल लिया. तब से कैशियस मारक्लस क्ले बन गया मोहम्मद अली. हां वही मोहम्मद अली, जिन्हें आप जानते हैं.

जब मार्टिन से बॉक्सिंग सीखनी शुरू की तब बहुत जल्द ही अली दूसरे मुक्केबाजों से आगे निकल गए थे. इससे उनकी पढ़ाई में दिक्कत आने लगी. कुछ ही समय बीते थे और वो ‘केंटुकी गोल्ड ग्लव्ज’ के छः गोल्ड मेडल जीत चुके थे. उनके स्पोर्ट्स में इंटरेस्ट और उनके मेडल्स को ध्यान में रखकर, स्कूल में कम नंबर आने के बाद भी  ग्रेजुएशन में एडमिशन मिल गया. काहे के प्रिंसिपल मानते थे, ये लड़का एक दिन पक्का स्कूल का नाम रोशन करेगा.

अमेरिका और वियतनाम में लड़ाई हो रही थी. लड़ाके चाहिए थे. 1967 में उन्हें भी यूएस मिलिट्री से ज्वाइनिंग ऑफर आ गया. अली ने ज्वाइन करने से मना कर दिया. इसमें उनके कुछ रिलीजियस पंगे थे. सेना को मना किया, वो कैसे बर्दाश्त कर पाती? इसी के चलते अली को गिरफ्तार कर लिया गया. उनका हैवीवेट टाइटल भी छीन लिया गया. उनके मुक्के पर ताला जड़ दिया गया. कानूनी पचड़ों के चलते अली अगले चार साल तक फाइट नहीं कर पाए.

साल 1971, जब सारा रायता सिमटा. तो बैन भी हट गया. कोर्ट ने भी उनके हक़ में फैसला दिया. लड़ाई के लिए बिना लाग-लपेट के मनाकर देने के कारण, वो उन लोगों के हीरो बन गए थे. जो लड़ाई के खिलाफ थे. अली रिंग में लौटे. लौटे तो जैसे बम फटा. कोई लग्गू-भग्गू न लौटा था. ये अली थे. उस रिंग में, जहां वो एक ही साथ सबसे सुंदर और सबसे खूंखार नजर आते थे. साठ के दशक का मोहम्मद अली सत्तर के दशक में भी चैंपियन बन गया.

8 मार्च 1971. जगह थी मेडिसन स्क्वायर गार्डन, शहर न्यूयॉर्क. ‘द रिंग वर्ल्ड हैवीवेट टाइटल’ फाइट शुरू हुई. पहला राउंड, दूसरा राउंड. अली के सामने थे फ्रेजर. पर फ्रेजर दो राउंड नहीं चले. पर अगले राउंड्स में अली पर हावी रहे. तीसरा, चौथा और राउंड दर राउंड गेम पलटा. 14 राउंड हो चुके थे. दोनों में से कोई बॉक्सर हार मानने को तैयार नहीं था. लेकिन, 15वां राउंड पूरी दुनिया को चौंकाने वाला था.

एक के बाद एक 31 फाइट जीतने वाले मोहम्मद अली रिंग में पहली बार चित्त हो गए. यह फ्रेजर की जीत थी. किसी को नहीं लगता था कि अली हार जाएंगे. अली हार चुके थे. 32वीं फाइट में पहली बार. ये सदी के सबसे बड़े खिलाड़ी की हार थी. या इशारा था. ऊपरवाले का. मानो वो भरोसा दिलाना चाह रहा हो कि उसने एक इंसान को ही जमीन पर भेजा है. जो चोट खाता है, जिसे दर्द भी होता है और जो हार भी सकता है. फ्रेजर ने अली को हरा दिया.

ये सदी की बेस्ट फाइट थी. इसके बाद दोनों बॉक्सर अस्पताल में भर्ती हुए. हालांकि मोहम्मद अली ने इस हार का बदला भी लिया था. तीन साल बाद. साल 1974. जनवरी की 28 तारीख. 12 राउंड तक चली फाइट में अली ने फ्रेजर को धूल चटा दी.

1981 की बात है. जनवरी की 19 तारीख थी, लॉस एंजेल्स की एक बिल्डिंग की नौवीं मंजिल से एक आदमी कूदकर मरने की तैयारी में था. उसकी मानसिक हालत कतई गड़बड़ थी. उसे बचाने को तब कोई नहीं था. पुलिस भी नहीं. ऐसे में उसे मोहम्मद अली ने बचाया, उससे बात की . उसे भाई पुकारा, और उसे अंदर आने के लिए राजी कर लिया. जान बच गई उसकी. अली ऐसे भी थे.

6 फीट और 3 इंच के अली ने 61 फाइट्स में 56 जीतीं. इनमें से 37 में सामने वाले को  नॉकआउट में हराया. पूरी जिंदगी में सिर्फ पांच बार हारे. उनका 61वां मैच, ट्रेवर बैरबिक के साथ था. वो खेले और हार गए. साल 1981 का वो मैच उनका आखिरी मैच था. अली ने रिटायरमेंट ले लिया. रिंग में चोटें लगी तो उसका असर भी हुआ. अली उन चोटों के कारण पार्किन्सन रोग का शिकार हो गए. इलाज के दौरान ही 3 जून साल 2016 को अमेरिका के अस्पताल में उनकी मौत हो गई.


इस स्टोरी में इनपुट दी लल्लनटॉप में इंटर्न रहे रमन जायसवाल ने दिए थे.


‘ब्लैक ब्रैडमैन’ कहे जाने वाले जॉर्ज हैडली ऐसे देश में पैदा हुए जहां क्रिकेट मजदूरों ने शुरू किया था

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

पोस्टमॉर्टम हाउस

Malik ट्रेलर में फहाद फाज़िल की क्रूरता देख खौफज़दा हो जाएंगे

Malik ट्रेलर में फहाद फाज़िल की क्रूरता देख खौफज़दा हो जाएंगे

ये आदमी सही काम, गलत तरीके से करता है. 'मलिक' ट्रेलर की खास बातें पढ़ते चलिए.

फिल्म रिव्यू: द टुमॉरो वॉर

फिल्म रिव्यू: द टुमॉरो वॉर

'एवेंजर्स' वाले क्रिस प्रैट क्या इस बार दुनिया को बचा पाए?

फिल्म रिव्यू- कोल्ड केस

फिल्म रिव्यू- कोल्ड केस

हर फिल्म को देखने के बाद एक भाव आता है, जो आपके साथ रह जाता है. मगर 'कोल्ड केस' को देखने के बाद आप श्योर नहीं हो पाते कि वो भाव क्या है.

वेब सीरीज़ रिव्यू: ग्रहण

वेब सीरीज़ रिव्यू: ग्रहण

1984 के सिख दंगों पर बनी ये सीरीज़ आज भी रेलवेंट है.

मूवी रिव्यू: जगमे थंदीरम

मूवी रिव्यू: जगमे थंदीरम

धनुष की जिस फिल्म को लेकर इतना हाईप था, वो आखिर है कैसी?

मूवी रिव्यू- शेरनी

मूवी रिव्यू- शेरनी

जानिए 'न्यूटन' फेम अमित मसुरकर और विद्या बालन ने साथ मिलकर क्या बनाया है!

मूवी रिव्यू: स्केटर गर्ल

मूवी रिव्यू: स्केटर गर्ल

फिल्म को देखकर दिमाग नहीं घूमेगा, बस बिज़ी लाइफ में ठहराव महसूस होगा.

वेब सीरीज़ रिव्यू- सनफ्लावर

वेब सीरीज़ रिव्यू- सनफ्लावर

अच्छे एक्टर्स की शानदार परफॉरमेंस से लैस ये सीरीज़ एक सुनहरा मौका गंवाती सी लगती है.

तापसी पन्नू की 'हसीन दिलरुबा' का ट्रेलर तो बहुत जबराट है

तापसी पन्नू की 'हसीन दिलरुबा' का ट्रेलर तो बहुत जबराट है

बड़े दिन बाद मार्केट में मर्डर मिस्ट्री आई है.

सत्यजीत रे की कहानियों पर आधारित सीरीज़ 'रे', जिसमें इंडस्ट्री के कमाल एक्टर्स की ज़बरदस्त भीड़ है

सत्यजीत रे की कहानियों पर आधारित सीरीज़ 'रे', जिसमें इंडस्ट्री के कमाल एक्टर्स की ज़बरदस्त भीड़ है

मनोज बाजपेयी, के के मेनन, गजराज राव, अली फ़ज़ल, क्या-क्या नाम गिनाएं!