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लकी अली के वो पांच गाने, जिन्हें अक्खा इंडिया गुनगुनाता है

साल 1996. इंडियन टेलीविज़न की दुनिया में दूरदर्शन की बादशाहत ख़त्म होकर केबल चैनल्स का दौर शुरू हुआ ही हुआ था. और साथ ही दौर चल पड़ा था म्यूजिक वीडियोज़ का. वो साफ़-सुथरा दौर, जहां गाने के वीडियो में भी एक कहानी होती थी. कम कपड़ों में रैंडम लडकियां स्विमिंग पूल में नहलाने का नाम नहीं था म्यूजिक वीडियो. ऐसे ही एक दिन एक वीडियो दिखाई देने लगा टीवी पर. इजिप्त के पिरामिड, वहीं की लोकल पोशाक पहने हुए एक आदमी और एक पर्दानशीन जिसकी सिर्फ आंखें चमकती थी. साथ ही बेहद पुरकशिश आवाज़ में एक गीत, जिसे सुनने का, सुनते रहने का नशा सा हो गया था. ‘ओ सनम, मुहब्बत की कसम’… अल्बम था ‘सुनो’ और सिंगर थे लकी अली.

लीजिए, पहले रुक कर उसी का मज़ा ले लीजिए:

थोड़े में जान लो लकी अली का बैकग्राउंड

लकी अली हिंदी सिनेमा के मशहूर कॉमेडियन महमूद के बेटे हैं. उनका असल नाम मक़सूद अली है. 19 सितंबर 1958 को उनका जन्म हुआ था. उनकी मां लीजेंडरी एक्ट्रेस मीना कुमारी की बहन थी. लकी ने एक सक्सेसफुल सिंगर होने से लेकर एक ड्रग एडिक्ट होने तक, जीवन का हर रूप देखा है. कहते हैं, उनके पिता ने ‘दुश्मन दुनिया का’ फिल्म की स्क्रिप्ट उन्हीं पर लिखी थी.

1996 में ‘सुनो’ के साथ लकी का सिंगिंग करियर लॉन्च हुआ. उन्हें इंस्टेंट सफलता मिली. बंपर हिट रहा है ये अल्बम. सॉफ्ट आवाजों की भीड़ में उनकी ‘नेज़ल वॉइस’ को भरपूर पसंद किया गया. इस अल्बम ने कई सारे अवॉर्ड जीते. ‘ओ सनम’ गाना हफ़्तों तक चार्ट-बस्टर रहा. आज भी जब बेस्ट इंडी-पॉप गानों की कोई लिस्ट बनती है, इस गाने का ज़िक्र ज़रूर होता है.

लकी अली, इंडी पॉप के शुरूआती दौर के स्टार.
लकी अली, इंडी पॉप के शुरूआती दौर के स्टार.

‘सुनो’ के बाद उनके कुछ और अल्बम्स भी बेहद पॉपुलर रहे. जैसे ‘सिफर’, ‘कभी ऐसा लगता है’, ‘गोरी तेरी आंखें’…

फिल्मों में भी गाया लकी ने. अब तक गा रहे हैं. इम्तियाज़ अली की फिल्म ‘तमाशा’ में उनका गाया ‘सफरनामा’ बहुत पसंद किया गया था. कुछ बेहद पॉपुलर फ़िल्मी गाने भी उनके नाम दर्ज हैं. हृतिक रोशन को इंस्टेंट हिट बनाने में जिस कालजयी गाने का हाथ था, वो लकी अली का ही गाया हुआ है.

‘ऐ मेरे दिल तू गाए जा’…

आज अपन लकी के ऐसे ही 5 बेहतरीन गानों को साथ सुनेंगे.


1.
गाना: गोरी तेरी आंखें कहे 
अल्बम: गोरी तेरी आंखें (2001)

एक सॉफ्ट रोमांटिक गीत. आज भी याद है इसका वीडियो. कब्रस्तान में फूल लेकर पहुंची एक लड़की. जिसकी आंखों के सामने रह-रह कर अपने प्रेमी की यादें कौंध उठती हैं. लकी के साथ इसे कविता कृष्णमूर्ति ने गाया है.


2.
गाना: तेरी यादें आती है
अल्बम: सिफर (1998)

एक और रोमांटिक गाना. ‘सिफर’ उनकी दूसरी अल्बम थी. इसमें भी लकी अली ने अपने पहले अल्बम का जलवा बरकरार रखा. एक शानदार गीत.


3.
गाना: जाने क्या ढूंढता है
मूवी: सुर (2002)

‘सुर’ में लकी अली ने एक्टिंग भी की थी. इस फिल्म का म्यूजिक बहुत ही शानदार था. ख़ासतौर से इसके गानों में वायलिन का इस्तेमाल. लकी की आवाज़ का जादू तो था ही. खुद ही सुन लीजिए.



4.
गाना: क्यों चलती है पवन
मूवी: कहो ना प्यार है (2000)

यूं तो ‘कहो ना प्यार है’ के एक और गाने ‘इक पल का जीना’ ने बहुत सुर्खियां बटोरी लेकिन इस गाने को भी बेहद सराहा गया. झरने सा बहता शांत, सहज गीत, जिसकी धीरे-धीरे लत पड़ जाती है.


5.
गाना: आ भी जा
मूवी: सुर (2002)

इस गाने के पहले सेकण्ड से वायलिन यूं बजता है जैसे कोई हौलनाक चीख़. और फिर आते हैं सहज, सुंदर शब्द. ये बिलाशक लकी अली का गाया सबसे बेहतरीन गीत है. इसे बार-बार सुना जा सकता है. सुना जाता है. आप भी सुनिए.


वीडियो देखें: वो स्वीट फिल्म जिसे ढूंढकर देखा जाना चाहिए

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