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जब सुभाष घई ने दिलीप कुमार के साथ लाकर वो कर दिखाया, जो इंडस्ट्री 30 सालों में न कर पाई

1990 का दशक आते-आते सुभाष घई अपने दौर के दिग्गज निर्देशकों में गिने जाने लगे थे. बड़े से लेकर छोटे, सभी तरह के स्टार्स के साथ उन्होंने काम कर रखा था. मगर अभी वो इतने बड़े नहीं हुए थे कि इंडस्ट्री के दो लीजेंड्स को एक फिल्म में  साथ ला सकें. ऐसा फिल्म इंडस्ट्री में कई लोगों का सोचना था. उन्हीं दिनों सुभाष घई दिलीप कुमार और राज कुमार के साथ एक फिल्म प्लान कर रहे थे. वो दो सुपरस्टार, जो 32 साल पहले एक-दूसरे के साथ काम न करने की कसम खा चुके थे. सुभाष घई ने न सिर्फ इन्हें साथ काम करने के लिए मनाया, बल्कि सिर्फ 11 महीने में फिल्म पूरी भी कर ली. फिल्म थी ‘सौदागर’, जो 9 अगस्त, 1991 को रिलीज़ हुई थी.

सुनने में तो ये कहानी और इस फिल्म के बनने के पीछे की कहानी, दोनों ही बड़ी साधारण लगती है. मगर जब आपको ये पता चलेगा कि सुभाष घई इन दोनों स्टार्स को साथ कैसे लाए, क्या दिक्कत थी दोनों को साथ काम करने में, शूटिंग के पहले ही दिन राज कुमार फिल्म क्यों छोड़ने लगे और जबदस्त हिट हुआ गाना ‘ईलु-ईलु’ का आइडिया कहां से आया, तो या तो हंसते-हंसते आपके पेट में बल पड़ जाएंगे या फिर आपके होश फाख्ता हो जाएंगे. ‘सौदागर’ जैसी कल्ट फिल्म के बनने के पीछे के किस्से विस्तार से नीचे पढ़िए.

1.) सुभाष घई ने फिल्म ‘सौदागर’ में राज कुमार और दिलीप कुमार को एक साथ लाकर वो काम कर दिया था, जो पिछले 32 साल में किसी ने ट्राय भी नहीं किया था. लेकिन इनके बीच ये दिक्कतें आई क्यों थी? हुआ क्या कि एस.एस. वसन की 1959 में आई फिल्म ‘पैगाम’ में ये दोनों कलाकार साथ काम कर रहे थे. फिल्म में राज कुमार दिलीप कुमार के बड़े भाई का रोल कर रहे थे. एक सीन में उन्हें दिलीप कुमार को थप्पड़ मारना था. शूट के दौरान राज कुमार सीन में इतने घुस गए कि सचमुच का एक जोरदार तमाचा दिलीप कुमार के गाल पर रसीद कर दिया. दिलीप कुमार भी तब बड़े स्टार. ले लिया ऑफेंस. और तय किया कि राज कुमार के साथ काम नहीं करेंगे. राज कुमार भी ‘आई डोंट गिव अ डैम’ वाले अप्रोच के आदमी थे. उन्हें कोई फर्क ही नहीं पड़ा.

फिल्म 'पैगाम' के एक सीन में राज कुमार और दिलीप कुमार. इस फिल्म को रामानंद सागर ने लिखा था. बाद में उन्होंने ही 'रामायण' पर टीवी सीरीज़ बनाया, जो काफी पॉपुलर रहा था.
फिल्म ‘पैगाम’ के एक सीन में राज कुमार और दिलीप कुमार. इस फिल्म को रामानंद सागर ने लिखा था. बाद में उन्होंने ही ‘रामायण’ टीवी सीरीज़ बनाई, जो काफी पॉपुलर रही थी.

2.)दोनों ने 32 साल से साथ काम नहीं किया था. बहुत सारे लोगों ने घई को समझाया कि इस पचड़े में न पड़ें. लेकिन घई ठहरे घई, कहा एक बार ट्राय करना तो बनता है. सबसे पहले वो पहुंचे दिलीप कुमार के घर. कहानी वगैरह सुना दी. दिलीप कुमार को स्क्रिप्ट पसंद आई. उन्होंने फिल्म करने के लिए हां कर दिया. वो पहले भी सुभाष घई के साथ ‘विधाता’ (1982) और ‘कर्मा’ (1986) जैसी फिल्मों में काम कर चुके थे. जब घई वहां से निकलने लगे, तब दिलीप कुमार ने उनसे पूछा- ‘सुभाष इस फिल्म में दूसरे दोस्त का रोल कौन कर रहा है?’ घई ने पहले अपनी कार में बैठकर दरवाजा बंद किया, फिर कहा ‘राज कुमार’. जब तक दिलीप कुमार कुछ कहते, घई जा चुके थे. अगले 4-5 दिन वो दिलीप कुमार से नहीं मिले.

इसके बाद घई पहुंचे राज कुमार के पास. राज कुमार शाम को ड्रिंक्स पर बैठे थे. उनका स्कॉच प्रेम जगजाहिर था. सुभाष घई अभी उस एक्टर के सामने खड़े थे, जिसने ‘जंजीर’ फिल्म सिर्फ इसलिए छोड़ दी क्योंकि डायरेक्टर प्रकाश मेहरा बालों में चमेली का तेल लगाते थे. सुभाष घई ने उन्हें फिल्म का बेसिक कॉन्सेप्ट सुनाया और उनका डिसीज़न पूछा. राज कुमार ने कहा- ‘बिलकुल करेंगे! आप टैलेंटेड डायरेक्टर हैं और हम भी टैलेंटेड एक्टर हैं.’ उनका अगला सवाल था कि ये फिल्म में वो दूसरा रोल कौन कर रहा है. घई काफी समय से इंडस्ट्री का हिस्सा थे. उन्हें पता था कि किससे क्या कहना है और कैसे मनाना है. घई ने कहा- ‘अब आपके साथ तो कोई बड़ा एक्टर नहीं कर सकता. दिलीप कुमार है न, वो कर लेगा.’ राज कुमार ने हाथ में स्कॉच का गिलास उठाते हुए कहा- ‘जानी, इस हिंदुस्तान में अपने बाद हम किसी को एक्टर मानते हैं, तो वो दिलीप कुमार को मानते हैं. हमारे सामने जब दिलीप कुमार आएगा, तो जलवा तो आएगा.’ अब भाई साब इस तरह से ‘सौदागर’ के दो मेन लीड फाइनल हो गए.

फिल्म 'सौदागर' का पोस्टर.
फिल्म ‘सौदागर’ का पोस्टर.

3.) फिल्म की शूटिंग शुरू हुई. दिलीप कुमार के साथ पहले ही सीन के बाद राज कुमार फिल्म छोड़कर जाने लगे. कारण ये था कि दिलीप कुमार की बोली थोड़ बिहारी टाइप थी, जबकि राज कुमार के डायलॉग खड़ी हिंदी में थे. राज कुमार अपनी स्टाइलिश डायलॉग डिलीवरी के लिए जाने जाते थे. रौला था उनका. उन्होंने सुभाष घई को इस बात के लिए बहुत झाड़ा और कह दिया वो इस फिल्म में काम नहीं करेंगे. घई बताते हैं कि इतने दिनों में उन्होंने स्टार्स को मैनेज करना सीख लिया था. वो दो घंटे तक राज कुमार की मनुहार करते रहे. लेकिन बात न बनती देख उन्होंने एक पैंतरा आजमाया. इसे कहते हैं ईगो मसाज. उन्होंने राज कुमार से कहा कि दिलीप कुमार का किरदार गरीब है, इसलिए उनके किरदार के लिए वो भाषा रखी गई है. आप तो जमींदार परिवार से हैं, ऐसी भाषा में बात करना आपको शोभा नहीं देगा. तिकड़म काम कर गई और राजकुमार ने इसके बाद आगे की शूटिंग की. घई ने ये काम पूरी फिल्म की शूटिंग के दौरान दोनों ही कलाकारों के साथ किया और 11 महीने में फिल्म पूरी भी कर दी.

राज कुमार ने इस फिल्म में राजेश्वर सिंह उर्फ राजू नाम के एक जमींदार का रोल किया था.
राज कुमार ने इस फिल्म में राजेश्वर सिंह उर्फ राजू नाम के एक जमीनदार का रोल किया था.

4.) इस फिल्म से नेपाल से आई एक लड़की मनीषा कोईराला अपना डेब्यू कर रही थीं. उन्होंने तीन फिल्में साइन कर ली थीं, लेकिन शूटिंग पहले ‘सौदागर’ की शुरू हो गई. आते ही मीडिया और मनीषा के बीच कुछ खटपट हो गई. उनके बारे में कई अखबारों में कुछ उल्टा-पुल्टा छपा था. वो इस बात से गुस्सा थीं. फिल्म की रिलीज़ के समय इस बात को लेकर घई की भी मनीषा से झड़प हो गई. घई चाहते थे कि फिल्म की पब्लिसिटी के लिए मनीषा मीडिया से बात करें. लेकिन वो ऐसा करने को तैयार नहीं थीं. इसी दौरान घई ने मनीषा की फैन फॉलोइंग को लेकर एक तंज कस दिया. होते-होते ये बात बहस में तब्दील हो गई. इतनी गहमाहमी के बाद मनीषा वो इवेंट बीच में ही छोड़कर अपनी मां के साथ निकल गईं.

फिल्म के एक सीन में विवेक मुशरान के साथ मनीषा कोईराला. फिल्म में मनीषा ने राज कुमार की पोती राधा का रोल किया था
फिल्म के एक सीन में विवेक मुशरान के साथ मनीषा कोईराला. फिल्म में मनीषा ने राज कुमार की पोती राधा का रोल किया था

5.)इस फिल्म का म्यूज़िक भी बहुत पसंद किया गया था. लेकिन इस एल्बम का एक गाना था, जो हर सिनेमाप्रेमी की जुबान पर चढ़ा हुआ था. गाने का नाम था- ‘ईलु-ईलु’. जितने मजेदार इस गाने के बोल हैं, उससे भी ज़्यादा मजेदार इसके बनने का प्रोसेस था. लेकिन सबसे बताते हैं कि ये ‘ईलु-ईलु’ आया कहां से. सुभाष घई ने अपने एक इंटरव्यू में बताया कि जब वो पुणे के फिल्म एंड टेलीविज़न इंस्टिट्यूट (FTII) में पढ़ रहे थे, तब उनकी रिहाना नाम की एक लड़की से मुलाकात हुई थी. इस लड़की का घर भी इंस्टिट्यूट वाली गली में ही था. रिहाना के दादा और पापा से नज़र बचाकर वो एक दूसरे को लव लेटर लिखते थे. इसमें आखिर में वो ‘ईलु-ईलु’ लिखते थे.

यही किस्सा सुभाष घई ‘सौदागर’ के लिरिसिस्ट आनंद बख्शी को सुना रहे थे. आनंद ने चिढ़कर पूछा- ‘ये ईलु-ईलु क्या है?’ तब सुभाष घई ने बताया कि इस ‘ईलु-ईलु’ को अंग्रेजी में लिखेंगे, तो ये होगा ILU. यानी आई लव यू. ये सुनते ही बख्शी ने कहा कि हमें गाने का मुखड़ा मिल गया. और बन गया गाना ‘ये ईलु ईलु क्या है?’ इस गाने को फिल्म में एक्टर विवेक मुशरान और मनीषा कोईराला पर फिल्माया गया था.

वो गाना आप यहां सुन सकते हैं:


 

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