Submit your post

Follow Us

महाराणा प्रताप के 7 किस्से: जब वफादार मुसलमान ने बचाई उनकी जान

38.30 K
शेयर्स

महाराणा प्रताप अकबर के खिलाफ लड़े और सैन्य लिहाज से कमजोर होने के बाद भी सिर नहीं झुकाया. जितने किस्से उनके मशहूर हैं, उतने ही उनके घोड़े ‘चेतक’ के हैं. कई किवदंतियां भी सुनाई जाती हैं. हमारे एक मास्टर साहब तो राणा प्रताप को पढ़ाते हुए भावुक हो जाते थे. बताते थे कि राणा दोनों हाथों में भाले लेकर विपक्षी सैनिकों पर टूट पड़ते थे. हाथों में ऐसा बल था कि दो सैनिकों को एक साथ भालों की नोंक पर तान देते थे. यह भी कहा जाता है कि मेवाड़ में लोग सुबह उठकर देवी-देवता को नहीं, राणा को याद करते हैं.

ऐसे महाराणा प्रताप के कुछ किस्से सुनिए.

1. वफादार मुसलमान ने बचाई थी महाराणा की जान

1576 में महाराणा प्रताप और अकबर की सेना के बीच यह युद्ध हुआ. अकबर की सेना को मानसिंह लीड कर रहे थे. बताते हैं कि मानसिंह के साथ 10 हजार घुड़सवार और हजारों पैदल सैनिक थे. लेकिन महाराणा प्रताप 3 हजार घुड़सवारों और मुट्ठी भर पैदल सैनिकों के साथ लड़ रहे थे. इस दौरान मानसिंह की सेना की तरफ से महाराणा पर वार किया जिसे, महाराणा के वफादार हकीम खान सूर ने अपने ऊपर ले लिया और उनकी जान बचा ली. उनके कई बहादुर साथी जैसे भामाशाह और झालामान भी इसी युद्ध में महाराणा के प्राण बचाते हुए शहीद हुए थे.


2. हवा से बात करता घोड़ा चेतक

चेतक महाराणा का सबसे प्रिय घोड़ा था. हल्दीघाटी में महाराणा बहुत घायल हो गये थे, उनके पास कोई सहायक नहीं था. ऐसे में महाराणा ने चेतक की लगाम थामी और निकल लिए. उनके पीछे दो मुग़ल सैनिक लगे हुए थे, पर चेतक की रफ़्तार के सामने दोनों ढीले पड़ गए. रास्ते में एक पहाड़ी नाला बहता था. चेतक भी घायल था पर छलांग मार नाला फांद गया और मुग़ल सैनिक मुंह ताकते रह गए. लेकिन अब चेतक थक चुका था. वो दौड़ नहीं पा रहा था. महाराणा की जान बचाकर चेतक खुद शहीद हो गया.


3. भाई शक्ति सिंह विरोधी हो गए थे, फिर प्रेम जाग गया

हल्दीघाटी के बाद महाराणा जब बचकर कुछ दूर पहुंच गए उसी समय महाराणा को किसी ने पीछे से आवाज लगाई- “हो, नीला घोड़ा रा असवार.” महाराणा पीछे मुड़े तो उनका भाई शक्तिसिंह आ रहा था. महाराणा के साथ शक्ति की बनती नहीं थी तो उसने बदला लेने को अकबर की सेना ज्वाइन कर ली थी और जंग के मैदान में वह मुगल पक्ष की तरफ से लड़ रहा था. युद्ध के दौरान शक्ति सिंह ने देखा कि महाराणा का पीछा दो मुगल घुड़सवार कर रहे हैं. तो शक्ति का पुराना भाई-प्रेम जाग गया और उन्होंने राणा का पीछा कर रहे दोनों मुगलों को मारकर ऊपर पहुंचा दिया.


4. सारी की सारी जनता थी राणा की सेना

राणा प्रताप का जन्म कुम्भलगढ़ के किले में हुआ था. ये किला दुनिया की सबसे पुरानी पहाड़ियों की रेंज अरावली की एक पहाड़ी पर है. राणा का पालन-पोषण भीलों की कूका जाति ने किया था. भील राणा से बहुत प्यार करते थे. वे ही राणा के आंख-कान थे. जब अकबर की सेना ने कुम्भलगढ़ को घेर लिया तो भीलों ने जमकर लड़ाई की और तीन महीने तक अकबर की सेना को रोके रखा. एक दुर्घटना के चलते किले के पानी का सोर्स गन्दा हो गया. जिसके बाद कुछ दिन के लिए महाराणा को किला छोड़ना पड़ा और अकबर की सेना का वहां कब्ज़ा हो गया. पर अकबर की सेना ज्यादा दिन वहां टिक न सकी और फिर से कुम्भलगढ़ पर महाराणा का अधिकार हो गया. इस बार तो महाराणा ने पड़ोस के और दो राज्य अकबर से छीन लिए.


5. घास की रोटियां

जब महाराणा प्रताप अकबर से हारकर जंगल-जंगल भटक रहे थे एक दिन पांच बार भोजन पकाया गया और हर बार भोजन को छोड़कर भागना पड़ा. एक बार प्रताप की पत्नी और उनकी पुत्रवधू ने घास के बीजों को पीसकर कुछ रोटियां बनाईं. उनमें से आधी रोटियां बच्चों को दे दी गईं और बची हुई आधी रोटियां दूसरे दिन के लिए रख दी गईं. इसी समय प्रताप को अपनी लड़की की चीख सुनाई दी. एक जंगली बिल्ली लड़की के हाथ से उसकी रोटी छीनकर भाग गई और भूख से व्याकुल लड़की के आंसू टपक आये. यह देखकर राणा का दिल बैठ गया. अधीर होकर उन्होंने ऐसे राज्याधिकार को धिक्कारा, जिसकी वज़ह से जीवन में ऐसे करुण दृश्य देखने पड़े. इसके बाद अपनी कठिनाइयां दूर करने के लिए उन्होंने एक चिट्ठी के जरिये अकबर से मिलने की इच्छा जता दी.


6. अकबर भी तारीफ किए बिना नहीं रह सका

जब महाराणा प्रताप अकबर से हारकर जंगल-जंगल भटक रहे थे. अकबर ने एक जासूस को महाराणा प्रताप की खोज खबर लेने को भेजा गुप्तचर ने आकर बताया कि महाराणा अपने परिवार और सेवकों के साथ बैठकर जो खाना खा रहे थे उसमें जंगली फल, पत्तियाँ और जड़ें थीं. जासूस ने बताया न कोई दुखी था, न उदास. ये सुनकर अकबर का हृदय भी पसीज गया और महाराणा के लिए उसके ह्रदय में सम्मान पैदा हो गया. अकबर के विश्वासपात्र सरदार अब्दुर्रहीम ख़ानख़ाना ने भी अकबर के मुख से प्रताप की प्रशंसा सुनी थी. उसने अपनी भाषा में लिखा, “इस संसार में सभी नाशवान हैं. महाराणा ने धन और भूमि को छोड़ दिया, पर उसने कभी अपना सिर नहीं झुकाया. हिंदुस्तान के राजाओं में वही एकमात्र ऐसा राजा है, जिसने अपनी जाति के गौरव को बनाए रखा है.” उनके लोग भूख से बिलखते उनके पास आकर रोने लगते. मुगल सैनिक इस प्रकार उनके पीछे पड़ गए थे कि भोजन तैयार होने पर कभी-कभी खाने का अवसर भी नहीं मिल पाता था और सुरक्षा के कारण भोजन छोड़कर भागना पड़ता था.


7. महाराणा प्रताप की थीं 11 बीवियां

महाराणा प्रताप की कुल 11 बीवियां थीं और महाराणा की मृत्यु के बाद सबसे बड़ी रानी महारानी अजाब्दे का बेटा अमर सिंह प्रथम राजा बना.


ये भी पढ़ें :

सच जान लो : हल्दीघाटी की लड़ाई हल्दीघाटी में हुई ही नहीं थी

आज अकबर की बरसी है, लेकिन क्या आपको पता है कि बीरबल की मौत कैसे हुई थी

जानते हो, अपने अंतिम दिन में क्या करने लगे थे बादशाह अकबर?

वीडियो में देखिए AMU में बाब-ए-सैयद के अंदर का माहौल जहां पुलिस तक नहीं पहुंची

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें
remembering indian legend maharana pratap on his birth anniversary and things to know about him

पोस्टमॉर्टम हाउस

भारत: मूवी रिव्यू

जैसा कि रिवाज़ है ईद में भाईजान फिर वापस आए हैं.

बॉल ऑफ़ दी सेंचुरी: शेन वॉर्न की वो गेंद जिसने क्रिकेट की दुनिया में तहलका मचा दिया

कहते हैं इससे अच्छी गेंद क्रिकेट में आज तक नहीं फेंकी गई.

मूवी रिव्यू: नक्काश

ये फिल्म बनाने वाली टीम की पीठ थपथपाइए और देख आइए.

पड़ताल : मुख्यमंत्री रघुवर दास की शराब की बदबू से पत्रकार ने नाक बंद की?

झारखंड के मुख्यमंत्री की इस तस्वीर के साथ भाजपा पर सवाल उठाए जा रहे हैं.

2019 के चुनाव में परिवारवाद खत्म हो गया कहने वाले, ये आंकड़े देख लें

परिवारवाद बढ़ा या कम हुआ?

फिल्म रिव्यू: इंडियाज़ मोस्ट वॉन्टेड

फिल्म असलियत से कितनी मेल खाती है, ये तो हमें नहीं पता. लेकिन इतना ज़रूर पता चलता है कि जो कुछ भी घटा होगा, इसके काफी करीब रहा होगा.

गेम ऑफ़ थ्रोन्स S8E6- नौ साल लंबे सफर की मंज़िल कितना सेटिस्फाई करती है?

गेम ऑफ़ थ्रोन्स के चाहने वालों के लिए आगे ताउम्र की तन्हाई है!

पड़ताल: पीएम मोदी ने हर साल दो करोड़ युवाओं को रोजगार देने की बात कहां कही थी?

जानिए ये बात आखिर शुरू कहां से हुई.

मूवी रिव्यू: दे दे प्यार दे

ट्रेलर देखा, फिल्म देखी, एक ही बात है.

क्या वाकई सलमान खान कन्हैया कुमार की बायोपिक में काम करने जा रहे हैं?

बताया जा रहा है कि सलमान इसके लिए वजन कम करेंगे और बिहारी हिंदी बोलना सीखेंगे.