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बॉलीवुड की आइकॉनिक मां रीमा लागू को इन 8 बातों में याद करें

'हम आपके हैं कौन', 'वास्तव', 'जिस देश में गंगा रहता है' और 'हम साथ-साथ हैं' जैसी फिल्मों की यादगार अभिनेत्री रीमा लागू के निधन को आज, 18 मई को एक वर्ष हो गया है. वे 59 वर्ष की थीं. उनको ट्रिब्यूट.

#1. उनके बच्चों के रोल में जाने गए हीरो

पिछले बीस-पच्चीस साल में हमने जो भी सुपरस्टार एक्टर देखे हैं उनके करियर में रीमा लागू का बड़ा योगदान रहा. उनकी फिल्म में इमोशनल कनेक्ट तभी बनता था जब मां के रोल में रीमा होती थीं. कहने को वो छोटे रोल होते लेकिन दर्शक के मन में हीरो की एक बड़ी पहचान उसकी मां से बनती थी. उन्होंने जो फिल्में कीं उनका नाम लेने से आंखों में रीमा के कैरेक्टर तैर जाते हैं. जितना रीमा को किसी स्टार की मां के रोल में याद किया जाता है, उतना ही उस स्टार को उनके बच्चे के रोल में.

फिल्म मैंने प्यार किया में सलमान, रीमा लागू और भाग्यश्री. (फोटोः राजश्री)
फिल्म मैंने प्यार किया में सलमान, रीमा लागू और भाग्यश्री. (फोटोः राजश्री)

ये शुरुआत 1989 में हुई जब वे सिर्फ तीस-इकत्तीस साल की थीं और सूरज बड़जात्या की ‘मैंने प्यार किया’ में सलमान के कैरेक्टर प्रेम की मां का रोल किया. बाद में ‘साजन’ (1991), ‘जुड़वा’ (1997), ‘हम साथ साथ हैं’ (1999) में दोनों मां-बेटे के रोल में दिखे.

1999 में आई डायरेक्टर महेश मांजरेकर की गैंगस्टर ड्रामा ‘वास्तव’ में रीमा द्वारा निभाया मां का वो कैरेक्टर न भूला जा सकेगा जिसमें वो अपने ही हाथ से अपने बेटे रघु को आखिर में मोक्ष देती है. यहां उनके बेटे के रोल में संजय दत्त थे.

फिल्म वास्तव में संजय दत्त और रीमा लागू.
फिल्म वास्तव में संजय दत्त और रीमा लागू.

अक्षय कुमार और सैफ अली खान की मां का रोल उन्होंने 1994 में आई फिल्म ‘ये दिल्लगी’ में किया था. इसी साल ‘दिलवाले’ सिनेमाघरों में उतरी थी जिसमें रीमा के बेटे का रोल अजय देवगन ने किया था जिसके किरदार को प्यार करने की ये सजा मिलती है कि उसे पागलखाने में बंद कर दिया जाता है. 1996 में रिलीज हुई ‘प्रेम ग्रंथ’ में तो रीमा ने उम्र में पांच छह साल बड़े ऋषि कपूर की मां का रोल किया जो अपने पुजारी पति की इच्छा के खिलाफ बेटे के प्रेम में उसका समर्थन करती है.

गोविंदा के साथ भी रीमा की दो फिल्में याद रहती हैं. पहली 1997 में आई ‘दीवाना मस्ताना’ जिसमें वे बालकबुद्धि बुन्नू की मम्मी बनी थीं और तीन साल बाद आई ‘जिस देश में गंगा रहता है’ में गंगा की मां लक्ष्मी. रीमा की अदाकारी में कितने ताकतवर भाव होते थे वो इसी फिल्म के एक सीन में देखें.

#2. हीरोइन्स की मां क्यों भूल जाते हैं हम

पुरुष प्रधान फिल्म उद्योग में फिल्मों पर लिखने वाले लोग भी कैसे प्रभावित रहते हैं इसे यूं जाना जा सकता है कि रीमा जी को सलमान और शाहरुख की मां बनने के लिए जाना जाता है और ‘हम आपके हैं कौन’ को याद किया जाता है लेकिन अचरज की बात है कि उस फिल्म में वे सलमान की मां नहीं बनी थीं. उस फिल्म में वे माधुरी दीक्षित की मां बनी थीं.

हम आपके हैं कौन में रीमा और माधुरी. (फोटोः राजश्री)
हम आपके हैं कौन में रीमा और माधुरी. (फोटोः राजश्री)

इसी तरह ‘कुछ कुछ होता है’ भी दूसरी ऐसी फिल्म है जिसमें रीमा और सलमान ने साथ काम किया है लेकिन इसमें भी रीमा काजोल की मां बनी थीं. लेकिन हम हीरोइन की मां के रूप में चीजों को इंटरप्रेट नहीं करते. इसी तरह ‘रंगीला’ में उन्होंने उर्मिला की आई का रोल किया था जिसमें आमिर भी थे. और तो और जब उन्होंने ‘मैंने प्यार किया’ में प्रेम की मां के रोल के साथ ये शुरुआत नहीं की थी इससे भी पहले 1988 में फिल्म ‘कयामत से कयामत तक’ में उन्होंने जूही चावला की मां की भूमिका की थी.

#3. हालांकि उन्हें ये आइडेंटिटी पसंद नहीं थी

रीमा का एक इंटरव्यू में परिचय जब दिया जाने लगा कि श्याम की मां, सलमान की मां तो उन्होंने टोक दिया था. उन्होंने बोला, “यही मेरी एकमात्र पहचान नहीं है न! आपने मेरा दूसरा भी बहुत सारा काम देखा होगा ना. तो फिर उसके बारे में भी बात करिए. उसी के बारे में बात करिए.”

#4. सलमान खान की वे फेवरेट थीं

हम साथ साथ हैं में रीमा और सलमान. (फोटोः राजश्री)
हम साथ साथ हैं में रीमा और सलमान. (फोटोः राजश्री)

परदे पर जितनी एक्ट्रेस ने भी सलमान खान की मां का रोल किया है उनमें रीमा उनकी फेवरेट थीं. ये सलमान ने खुद कहा था.

#5. शाहरुख खान उनके लिए लड़का था

रीमा ने ‘यस बॉस’ (1997) और ‘कल हो न हो’ (2003) में शाहरुख की मां की भूमिकाएं की थीं. पूरी दुनिया के लिए चाहे वे सुपरस्टार हैं लेकिन रीमा के लिए लड़का ही थे. वे शाहरुख के काम की बहुत तारीफ करती थीं. उन्होंने इस बारे में कहा था, “मुझे शाहरुख की इंटेंसिटी बहुत पसंद है. काम को लेकर उसकी संजीदगी बहुत है. पैशन बहुत है उस लड़के में. वो हर कैरेक्टर वो बखूबी निभाता है.”

#6. उनकी वो हिंदी फिल्में जो देखीं नहीं होंगी, पर देखनी चाहिए

रुई का बोझ में रीमा और पंकज कपूर.
रुई का बोझ में रीमा और पंकज कपूर.

रूई का बोझ – 1997 में आई ये फिल्म बुजुर्गवार किसन साह की कहानी थी जो बुढ़ापे में अपने सबसे छोटे बेटे रामशरण के साथ रहने आए हैं और एडजस्ट करने में दिक्कत होती है. इसमें उनकी बहू का रोल रीमा ने किया था. बहू और ससुर में खटपट भी होती है, लड़ाईयां भी होती हैं. आखिर में हम सीखते हैं कि कैसे रिश्तों का निभाने का सबसे अच्छा तरीका है कि थोड़ा कम देखा जाए और थोड़ा कम सुना जाए. इसमें रीमा के साथ ससुर की भूमिका पंकज कपूर ने की थी. पति के रोल में रघुबीर यादव थे. अद्भुत फिल्म.

रिहाई के एक दृश्य में रीमा.
रिहाई के एक दृश्य में रीमा.

रिहाई – महिला सशक्तिकरण और फेमिनिज़्म पर हिंदुस्तान में जितनी ताकतवर फिल्में बनी हैं इसमें सबसे ऊपर ये नजर आती है. डायरेक्टर अरुणा राजे की ये प्रस्तुति 1988 में ही आ गई थी. ये कहानी ऐसे गांव की थी जिसमें मर्द काम करने बंबई जैसे शहरों में गए हुए हैं और पीछे औरतें साल-साल भर अकेली उनका इंतजार करती हैं. वे शहर में अपनी शारीरिक जरूरतें पूरी कर लेते हैं लेकिन औरतें गांव में बेचैन रहती हैं. ऐसे में गांव में आने वाले एक युवक से औरतें संबंध बनाती हैं. इन्हीं में से एक स्त्री का रोल रीमा ने किया था. अंत में जब पुरुष लौटते हैं और एक महिला प्रेग्नेंट होने के बाद भी बच्चा गिराने को राजी नहीं होती तो पंचायत बैठती है. और यहां पर सब औरतें मर्दों के खिलाफ उठ खड़ी होती हैं और मर्दों को अपना मुंह बंद करना पड़ता है.

#7. रीमा सलमान के बारे में क्या सोचती थीं

कई फिल्मों के अपने को-एक्टर सलमान के साथ जुड़ाव पर रीमा ने कहा था, “हम दोनों का करियर साथ साथ ही शुरू हुआ था. और हमारा एक अलग ही रिश्ता बनता गया. हम फैमिली फ्रेंड्स जैसे हैं. और उसने अभी तक वो बात कायम रखी है. इसलिए मुझे सलमान से बहुत लगाव है.” सलमान की कौन सी बात उन्हें बहुत अच्छी लगती है इस पर रीमा ने कहा, “उसकी मुस्कान मुझे अच्छी लगती है. मुझे हमेशा लगता है कि आपकी स्माइल आपके व्यक्तित्व का आइना होती है. वो बहुत ही मासूम और अच्छे दिल वाला आदमी है. वो उसकी मुस्कान में नजर आता है.”

#8. उनका सबसे फ्रैंक और यादगार इंटरव्यू

पिछले साल जुलाई में एक ऑनलाइन चैट शो ‘कास्टिंग काउच विद अमय एंड निपुन’ में वे नजर आईं थी. मराठी भाषा वाला ये शो जैक गैलिफियानाकिस के ‘बिटवीन टू फर्न्स’ की तर्ज पर बना है जिसमें फॉर्मेट अलग सा फनी रखा गया है. वैसे उन्होंने ज्यादा इंटरव्यू दिए नहीं लेकिन ये है जिससे हम रीमा लागू को याद रखना चाहेंगे.


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