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अगर रावण आज के टाइम में होता, तो सबसे बड़ी दिक्कत उसे ये होती

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छुटपन से हर दशहरे पर एक निबंध लिखने को ज़रूर मिलता था. विषय होता था, अपने अन्दर के रावण पर कैसे विजय पाएं. ले दे कर वही दस पांच पॉइंट होते थे जिनको हर बच्चा घुमा कर लिखता था. जैसे जैसे बड़े हुए, दो बातें समझ आईं.

नंबर 1. पूरी रामायण में सिर्फ कुम्भकरण की लाइफ सेट थी.

नंबर 2. बचपन में निबंध लिखने वाले बच्चे बड़े होकर फेसबुक पर आ गए हैं, और हर दशहरे वही निबंध चेपते हैं. अपने अंदर के रावण को मारने वाला. अंदर का रावण बी लाइक: एम आई अ जोक टू यू?

(तस्वीर: पीटीआई)
मुकेश ऋषि रामलीला में रावण का किरदार निभाते हुए. (तस्वीर: पीटीआई)

भारतीय मिथकों के अनुसार चार युग होते हैं. सतयुग. त्रेता युग. द्वापर युग. और कलियुग. कहते हैं कि राम और रावण की जो गाथा है वो त्रेता युग में हुई थी. उसके बाद कृष्ण भी आए. महाभारत भी हो गई. अब कलयुग में हम और आप इंटरनेट पर रावण के मीम्स देख रहे हैं.

हम भी रामराज्य का इंतज़ार करते समय सोच में पड़ गए. अगर कलियुग में रावण यहां होता, तो क्या होता? भारत में तो रहता था नहीं. लंका में रहता था. जब पुष्पक विमान था तब था, अब तो प्लेन, ट्रेन और गाड़ी का ही सहारा लेना पड़ता कहीं भी आने-जाने के लिए. फिर लंका से भारत आने के लिए बिचारे को कितने पापड़ बेलने पड़ते. सबसे पहली बात.

# बिचारे का पासपोर्ट नहीं बनता. दस सिर लेकर कौन-सी फोटो खिंचती है आप ही बताओ? पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, सब के साथ यही दिक्कत. हमारे एक सिर है तो हम शिकायत करते रहते देखो फोटो अच्छी न आई. रावण की सोची कभी आपने? नो. यू ओनली थिंक अबाउट योरसेल्फ.

 

# गाड़ी में बैठ नहीं पाता. प्लेन में एक्स्ट्रा सीटें बुक करनी पड़तीं. सबसे पहले चढ़ना और सबसे बाद में उतरना पड़ता. अब हर जगह रथ तो मिलेगा नहीं.

 

# रोड पर दुपहिया चलाता तो बाइक पर लिखा होता- जगह मिलने पर पास दिया जाएगा. दोनों तरफ उसके पीछे जाम लगता. दस सिर, दो कान, पीछे वालों का हॉर्न भी नहीं सुन पाता.

 

# खुदा न खास्ता रावण ने रोड पर उतरने की ठान ली भारत में, तो बेचारा जरूर फंस जाता. दस सिरों के लिए दस हेलमेट. और अगर न लगाया तो चालान. इतने चालान भरने पड़ते कि सोने की लंका बिक जाती, पर चालान ख़त्म न होते.

 

# सिनेमा हॉल में दस टिकट कटाने पड़ते. और सबसे ज्यादा दिक्कत थ्री-डी फिल्में देखने में होती. जब तक वो चश्मा लगाता, आधी फिल्म निकल जाती. बाकी कोक-पेप्सी और पॉपकॉर्न का तो हम सोच भी न रहे. लंका तो पहले ही बिक गई चालान भर-भर के.

 

# रावण को इयरफोन/हेडफोन लगाने का सुख नहीं मिल पाता. तार ही नहीं पहुंचती. आप कहोगे हां तो क्या, एप्पल के इयरपॉड लगा लेता. तो लगा ले. गुमा दे. झेल ले नुकसान. पैसे उसके, वो जाने. एक सिर वालों से तो मैनेज होते न हैं, दस सिर वालों से कराएंगे.

 

# किलो के हिसाब से टूथपेस्ट इस्तेमाल करता हर सुबह. इतने टूथपेस्ट में नमक डालने के लिए दांडी यात्रा निकालनी पड़ जाती.

 

# किसी भी टीवी डिबेट के पैनल में फिट नहीं होता. अपने-आप में पूरा पैनल होता रावण. उनके दस सिरों में ही बहस होती, कि पहले कौन बोलेगा. एंकर से ज्यादा चीखम-चिल्ली तो रावण अकेला कर लेता.

 

#नेटफ्लिक्स पर बहुत चूना लगता बिचारे को. एक बार में चार यूजर ही देख सकते हैं. बाकी के छह सिर क्या करते? यही नहीं, अगर रावण चश्मा लगाता तो कितनी दिक्कत होती. लेंसकार्ट से चश्मे और लेंसेज ऑर्डर कर कर के उसका बजट बिगड़ जाता.

 

रावण अगर आ भी जाता, बेचारा दस सिर लेकर कहां जाता. उससे भी बड़ा सवाल ये, कि क्या फेसबुक और टिकटॉक पर वो एक अकाउंट बनाता, या दस?


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