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'गो कोरोना गो' वाले रामदास आठवले की कही आठ बातें, जिन्हें सुनकर दिमाग चकरा जाए

नरेंद्र मोदी जी के साथ दोस्ती करने की मेरे पास है कला,

इसलिए कांग्रेस को छोड़कर मैं बीजेपी की तरफ चला

आप लोगों (कांग्रेस) ने मुझे दिया था कई बार धोखा,

लेकिन नरेंद्र मोदी जी ने दे दिया मुझे मंत्री पद का मौका

– रामदास आठवले (जून, 2019)

अटल जी की सरकार बहुत है चालू

इस सरकार के विरुद्ध मैं क्या-क्या बोलूं

अटल जी आपके पास होगा डीएमके का बालू

मगर हमारे पास है मजबूत आरजेडी का लालू

देश बचाने की जिम्मेदारी मैं किस पर डालूं

आडवाणी तो हैं आपसे भी बहुत चालू

– रामदास आठवले (अगस्त, 2003)

ये दो तरह की तुकबंदियां हैं, ‘प्रखर कवि राजनेता’ रामदास आठवले की, जो उन्होंने अलग-अलग ‘कालखंड’ में संसद में कही हैं. ‘गो कोरोना गो’ का कालजयी नारा जन-जन तक पहुंचाने वाले आठवले की ये ‘रचनाएं’ महज तुकबंदियां नहीं, उनका पूरा सार हैं. उन्हीं के शब्दों में ‘हवा के साथ बहने’ की उनकी बारीक कला यहीं से पता चल जाती है. आप कॉन्ट्रास्ट देखिए. एक में वो मोदी के कसीदे पढ़ रहे हैं और आज उनकी सरकार में मंत्री हैं. दूसरी तुकबंदी में उसी पार्टी के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के ख़िलाफ़ मोर्चा खोले हुए हैं.

आठवले की पार्टी है रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले). उनकी पार्टी एनडीए सरकार में शामिल है. आठवले राज्यसभा सांसद हैं. सामाजिक न्याय और अधिकारिता (राज्य) मंत्री भी हैं. फिलहाल वो फिर चर्चा में हैं. लद्दाख में 15 जून को भारतीय और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई. हमारे 20 जवान शहीद हो गए. आठवले ने चीन का विरोध करते हुए चायनीज फूड का भी विरोध कर दिया.

अपने एक ट्वीट में अपनी फोटो लगाते हुए उन्होंने ट्वीट किया,

चीन धोखा देनेवाला देश है. भारत में चीन की सभी वस्तुओं का बहिष्कार करना चाहिए. चायनीज फूड और चायनीज फूड के होटल भारत में बंद करने चाहिए.

आठवले की खट्टी-मीठी और कड़वी बातें

आठवले के बयान बीच-बीच में चर्चा में आ जाते हैं. यहां तक कि सदन की ‘चर्चा’ में भी. आप यूट्यूब पर रामदास आठवले के संसद के भाषण सुनिए. एक से एक नगीने मिलेंगे. हर भाषण की शुरुआत तुकबंदी से होती है. ये उनका पुराना स्टाइल है. इसके बाद उनके भाषणों में सपाट चेहरे के साथ मजाकिया बातें होती हैं. ठेठ लहजे में व्यंग्य होते हैं. पूरा सदन ठहाके लगाता है. ख़ुद को आंबेडकरवादी कहने वाले आठवले के भाषणों में आंबेडकर और सामाजिक न्याय का खूब ज़िक्र होता है. साथ ही वो अक्सर अपनी पार्टी का ‘स्वर्णिम इतिहास’ याद करते बरामद होते हैं. हालांकि उन्होंने कई ‘आपत्तिजनक’ बातें भी कही हैं.

आगे हम आठवले की कही आठ बातों, वन लाइनर्स और विवादित बयानों के बारे में बताएंगे.

1. 2016 में राज्यसभा में एक चर्चा के दौरान उन्होंने कहा,

हम चुनाव में झगड़ा करेंगे लेकिन हाउस में ज़्यादा झगड़ा मत करो. नारे दो लेकिन डेप्युटी चेयरमैन सर, रोज़ नारे देना ठीक नहीं है क्योंकि मैं नारे दे देकर ही इधर आया हूं. बाहर मैं रोज़ नारे देता था.

2. 19 जून, 2019 का आठवले का भाषण बहुत फेमस है. इस पर पीएम मोदी से लेकर राहुल गांधी-सोनिया गांधी खूब हंसे थे. कहना आठवले का,

राहुल जी का बड्डे आज है. कल है क्या? (पीछे से आवाज़- आज है) हां तो ठीक है. मतलब राहुल जी हमारे मित्र हैं. आपको वहां (विपक्ष में) बैठने का मौका मिला, इसके लिए मैं आपको हार्दिक बधाई देता हूं. आपने बहुत कोशिश की. लोकतंत्र में होता है. सत्ता जाती है. फिर आती है. आपकी सत्ता बहुत साल तक रही. जब आपकी सत्ता थी, तब मैं आपके साथ था. चुनाव के पहले कांग्रेस के लोग मुझे बोल रहे थे कि इधर आओ, इधर आओ तो मैंने बोला मैं उधर जाकर क्या करूं? मैंने हवा का रुख देखा था.

ये हिस्सा आप इस वीडियो में 3:17 मिनट से सुन सकते हैं:

3. जनवरी, 2019 में सामान्य वर्ग आरक्षण बिल पर चर्चा के दौरान आठवले ने स्ट्रेट फॉरवर्ड अंदाज़ में कहा,

कांग्रेस के लोग पूछ रहे हैं बिल इतना लेट क्यों लाया? इतना लेट क्यों लाया?

चुनाव नजदीक आ गए हैं तो बिल लाने की आवश्यकता थी. चुनाव जीतने के लिए जो भी करना चाहिए…तुम भी करो, हम भी करते हैं.

4. जुलाई, 2016 में एक बिल पर चर्चा के दौरान कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने राज्यसभा में पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाया. इस पर आठवले ने जो जवाब दिया, उससे पूरे सदन में हंसी भर गई. उन्होंने कहा,

पॉइंट ऑफ ऑर्डर व्यक्त करने का अधिकार सदस्यों को है लेकिन जिसमें पॉइंट ही नहीं है, उस ऑर्डर का क्या मतलब है?

5. 2016 में मोदी सरकार के कैबिनेट विस्तार के दौरान शपथग्रहण में आठवले अपना नाम भूल गए थे. तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उन्हें याद दिलाया. इस वाकये पर आठवले ने संसद में कहा,

मैं मैं हूं, तुम तुम हो. इसलिए जब मैं मंत्री पद की शपथ ले रहा था, तो मैं मेरा नाम नहीं भूल गया था. मुझे मालूम था कि मैं खड़ा हूं तो नाम लेने की क्या ज़रूरत है.

रामदास आठवले सदन में बोलते हैं तो अगल-बगल वाले लोग हंसते रहते हैं. फोटो: RSTV
रामदास आठवले सदन में बोलते हैं तो अगल-बगल वाले लोग हंसते रहते हैं. फोटो: RSTV

6. एक भाषण में आठवले कांग्रेस से कहते हैं,

अगर आप 60 साल सत्ता में रहे हो, हमें 25 साल तो रहने दो.

7. सितंबर, 2018 में रामदास आठवले ने एक विवादित बयान दिया था, जिस पर उन्होंने खेद भी जताया था. उन्होंने कहा था,

मैं पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम से परेशान नहीं हूं क्योंकि मैं मंत्री हूं. मेरा मंत्री पद जाएगा तो हो सकता है, मैं परेशान होऊं.

8. बसपा प्रमुख मायावती पर आठवले ने मई, 2019 में अभद्र टिप्पणी की थी. उन्होंने कहा था,

मायावती, नरेंद्र मोदी की पत्नी के बारे में बोल रही हैं लेकिन फैमिली क्या होती है, ये मायावती को मालूम नहीं है. उन्होंने शादी नहीं की तो उन्हें फैमिली की प्रॉब्लम्स पता नहीं हैं. मायावती जुझारू हैं और उनका आदर है लेकिन वो नरेंद्र मोदी पर जानबूझकर ऐसा हमला करती हैं. 

आठवले के इस बयान पर काफी विवाद भी हुआ था.

आठवले महाराष्ट्र से आते हैं. दलित समुदाय से हैं और बौद्ध धर्म फॉलो करते हैं. वो पहली बार 1998-99 के बीच मुंबई नॉर्थ सेंट्रल सीट से लोकसभा सांसद रहे. इसके बाद 1999 और 2004 में भी उन्होंने लोकसभा चुनाव जीता. 2009 में उन्हें शिरडी सीट से हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद उन्होंने NCP-कांग्रेस गठबंधन का साथ छोड़ दिया. 2011 में उन्होंने अपनी पार्टी RPIA का बीजेपी-शिवसेना के साथ गठबंधन किया और बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (BMC) का चुनाव साथ लड़ा. 2014 में उन्हें राज्यसभा के लिए चुना गया. 2016 में केंद्र सरकार में मंत्री पद मिला. 2020 में उन्हें फिर से राज्यसभा के लिए चुन लिया गया.


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