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PDDU जंक्शन की अपार सफलता के बाद अब गांवों के नाम की घर वापसी

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पहले ये फोटो देखिए. ये राजस्थान के भरतपुर जिले के एक गांव की तस्वीरें हैं. यहां बहुत ‘जोरदार’ विकास हुआ है. सड़क टूट चुकी है. चौमासे में ही नहीं, पूरे 12 महीने यहां कीचड़ और पानी भरा रहता है. गांव वालों का कहना है कि कई बार शिकायत की है लेकिन सुनवाई नहीं हुई. ऐसे रास्ते की वजह से परेशानी हो रही है लेकिन सरकार को अभी फुरसत कहां. वो मसरूफ है गावों की ‘घर वापसी’ में.

शायद सीएम की विकास गौरव यात्रा यहां भी पहुंचे जिससे इन गांव को भी विकास के दीये की रोशनी मिले.
सीएम की विकास गौरव यात्रा यहां भी पहुंचे जिससे इन गांव को भी विकास के दीये की रोशनी मिले.

सीएम वसुंधरा राजे अपने ‘सुशासन’ की गौरव यात्रा निकाल रही हैं. इसके अलावा सूबे में कूट-कूटकर ‘गौरव’ भरने के लिए एक और काम राजस्थान सरकार कर रही है. राजस्थान के हिंदू बाहुल्य गांवों की ‘घर वापसी’ करवाई जा रही है. कम से कम नाम के मामले में. माने जिन गांवों के नाम ‘मुस्लिम’ लगते हैं पर उनमें रहने वाले अधिकतर हिंदू हैं उनके नाम बदल कर ‘हिंदू’ समझे जाने वाले नाम रखे जा रहे हैं.

राजस्थान सरकार के राजस्व विभाग की सिफारिश पर केंद्र सरकार ऐसे करीब 15 गांवों के नाम बदलने की प्रक्रिया शुरु कर चुकी है. सरकार कह रही है कि ग्राम पंचायत की सिफारिश पर ये किया जा रहा है. गांव के लोग इसकी लंबे समय से मांग कर रहे थे लेकिन सुनवाई अब जाकर हुई है.

वसुंधरा राजे अपनी चुनावी सुशाशन गौरव यात्रा पर निकली हैं.
वसुंधरा राजे अपनी सुशाशन गौरव यात्रा पर निकली हैं.

अब उदाहरण देख लीजिए किसका नाम क्या कर रहे हैं-

बाड़मेर जिले के गांव ‘मियां का बाड़ा’ का नाम ‘महेश नगर’ किया जा रहा है. ज़िले के कलेक्टर हर जगह गांव के नाम वाले साइन बोर्ड बदलवा रहे हैं. स्कूल से लेकर पंचायत भवन तक सभी सरकारी इमारतों के नामों को नए सिरे से लिखवाया जा रहा है. तर्क है कि मियां का बाड़ा गांव से ऐसा लगता है कि मुसलमानों का गांव है जबकि गांव में मुस्लिमों के तीन ही घर हैं. यहां के सरपंच हनुवंत सिंह का कहना है कि मुगल काल में गांव का नाम महेश नगर था जिसे बदलकर मियां का बाड़ा कर दिया गया था. दस साल पहले हमने मारवाड़ राजघराने से दस्तावेज निकालकर राजस्थान सरकार को दिए थे पर अब जाकर हमारी मांग पूरी हुई है.

मियां का बाड़ा अब महेश नगर हो गया है.
मियां का बाड़ा अब महेश नगर हो गया है. (फोटो- सोशल मीडिया)

सरपंच साहब जैसे ही विचार राजस्थान सरकार के राजस्व राज्यमंत्री अमराराम के भी हैं. उन्होंने कहा कि मियां का बाड़ा में तीन ही मुस्लिम परिवार रहते हैं. ऐसे में इसका नाम मियां का बाड़ा क्यों रखा जाए. इसलिए इसका नाम बदला गया है.

ऐसे ही अजमेर जिले के सलेमाबाद गांव का नाम बदलकर श्री निंबार्क तीर्थ कर दिया गया है. यहां के सरपंच रणधीर सिंह ने मीडिया को बताया कि यहां के जागीरदार सलीम खान के नाम पर गांव का नाम पड़ा था लेकिन यहां हिंदुओं का निंबार्क तीर्थ होने की वजह से बहुत सालों से इसका नाम बदलने की मांग हो रही थी. यहां पर मात्र एक मुस्लिम परिवार है. राजस्थान के शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी ने तो भारत सरकार के सहमति के पहले ही यहां के स्कूल के नाम में निंबाकाचार्य जोड़ दिया है.

राजस्थान के शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी.
राजस्थान के शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी.

अब जिनके नाम बदले जाने की उम्मीद है

राजस्थान की राजधानी जयपुर को बसाने की प्लानिंग करने वाले मिर्जा इस्माइल थे. उन्हीं के नाम पर जयपुर में एक सड़क का नाम मिर्जा इस्माइल रोड है. साथ ही कई गांवों का नाम भी इस्माइलपुर है. झुंझूनू जिले में दो इस्माइलपुर गांव हैं. एक का नाम बदलकर ‘पिचनवा खुर्द’ कर दिया गया है जबकि दूसरे का नाम बदलने की तैयारी है. चित्तौड़गढ़ के मंडफिया गांव का नाम बदलकर ‘सांवलियाजी’ करने की मांग की जा रही है. यहां सांवलियाजी का मंदिर है. चित्तौड़गढ़ के ही मोहम्मदपुरा का नाम ‘मेडी का खेड़ा’, नवाबपुरा का नाम ‘नईसरथल’, रामपुर-आजमपुर का ‘सीताराम जी का खेड़ा’ रखना प्रस्तावित है.

पहले जाति के नाम पर नाम बदल दिए थे

राजस्थान में इससे पहले धर्म ही नहीं, जातियों के नाम पर भी गांवों के नाम बदले गए हैं. इसके लिए वहां की पंचायत सिफारिश करती है. जैसे जालौर के नरपाड़ा गांव का नाम ‘नरपुरा’, मेडा ब्राह्मण का नाम ‘मेडा पुरोहितान’, नवलगढ़ के डेवा की ढाणी के का नाम ‘गिरधारीपुरा’ किया गया.

जयपुर की फेमस एम आई रोड.
जयपुर की फेमस एम आई रोड.

नाम बदलो, काम नहीं

राजस्थान सरकार के राजस्व विभाग के सबरजिस्ट्रार सुरेश सिंधी का कहना है कि एक पूरी प्रक्रिया अपनाकर ही नाम बदला जाता है. पहले पंचायत अपने दावे के लिए सबूत पेश करती है या फिर नाम बदलने के लिए सर्वसम्मति से एक सिफारिश तैयार करके राजस्व विभाग को भेजती है. इसकी पुष्टि कर राज्य सरकार केंद्र को भेजती है. केंद्र की इजाज़त के बाद ही नाम बदले जाते हैं. हमने कई नाम बदल दिए हैं और कई प्रक्रिया में हैं.

माने सरकार के पास अपने फैसले के लिए एक लॉजिक है (जो कि हमेशा ही होता है). सो वसुंधरा सरकार से एक सवाल जयपुर के रामगंज के बारे में किया जा सकता है. यह मुस्लिम बाहुल्य इलाका है. इस आधार पर क्या राज्य सरकार रामगंज का नाम इसी उत्साह के साथ बदलेगी? क्या तब ये नहीं कहा जाएगा कि राज्य की सांस्कृतिक पहचान मिटाने की कोशिश की जा रही है?

संविधान में भारत को एक धर्म निरपेक्ष राष्ट्र माना गया है. सरकार की यह जिम्मेदारी होती है कि राज्य के किसी भी नागरिक में धर्म के आधार पर अंतर न करे. लेकिन राजस्थान की सरकार गांवों के नाम में ही धर्म की तलाशने में लगी है. खैर, अब ये तो चुनाव में ही पता चलेगा कि इस नाम परिवर्तन का क्या ‘फर्क’ पड़ता है.


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Rajasthan government is changing names of Hindu dominated villages with ‘Muslim names’ to ‘Hindu names’

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