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दिवाली पर अस्थमा वाली प्रियंका ने अपनी शादी में पटाखे क्यों फोड़े

प्रियंका चोपड़ा की शादी हो गई है. जोधपुर के उम्मेद भवन पैलेस में. 1 दिसंबर, 2018 को. यूं अब ये खबर बासी है. प्रियंका की शादी पर आपने दुनिया जहान में बहुत कुछ पढ़ा, सुना-देखा होगा. सिर्फ एक बात छोड़कर. और वो है प्रियंका की सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग.

दरअसल, पीसी की शादी के फ़ोटोज़ के साथ उम्मेद भवन में की गई आतिशबाज़ी की तस्वीरें भी इन दिनों वायरल हैं. क्या नज़ारा था?  चारो तरफ रोशनी, चमक-दमक और धूमधड़ाका. बेशक इसके बाद उम्मेद भवन के आस-पास धुंध, सल्फर और कार्बन डाई ऑक्साइड फैल गए. एक तरफ प्रियंका की विदाई के फुट प्रिंट्स और दूसरी तरफ कार्बन के.

लेकिन क्या हो गया इतना रोना क्यूं?  हमारा इतना स्यापा क्यूं? जबकि शादी ज़िंदगी में एक बार होती है. तो कुछेक हज़ार पटाखे फोड़ भी दिए तो क्या?

शायद हमें या उन सोशल मीडिया के बंदों को इतनी प्रॉब्लम होती भी नहीं, अगर प्रियंका का एक महीने पहले का वो वीडियो न देखा होता, जिसमें प्रियंका लोगों को अपनी अस्थमा की बीमारी के चलते दिवाली पर पटाखे न चलाने की रिक्वेस्ट करती दिखती हैं. वो कहती हैं –

प्लीज़ मेरी सांसें बेरोक रखिए. दिवाली पे पटाखे स्किप कीजिए. दिवाली को रोशनी, लड्डू और प्रेम का त्योहार बनाइए न कि प्रदूषण का. पटाखों का इस्तेमाल कम कीजिए, जिससे कि आप सब, मेरी तरह अस्थमा के रोगी और सारे जानवर. हर कोई त्योहार का आनंद ले सके. दिवाली की शुभकामनाएं.

इस सबको देख-पढ़ चुकने के बाद लगातार दो मुहावरे ज़ेहन में आते हैं. एक हिंदी का –

पर उपदेश कुशल बहुतेरे.

और दूसरा अंग्रेज़ी का –

चैरिटी स्टार्टस फ्रॉम होम.

हमें इस हिपोक्रेसी के बारे में कुछ नहीं कहना. लेकिन ट्विटर पर लोग बहुत कुछ रहे हैं. ये सारे ट्वीट्स हमने किए हैं.

कुछ लोग प्रियंका के बचाव में कह रहे हैं कि वो दुल्हन थी. उसे क्या पता इंतजाम क्या हुए हैं और कैसे हुए हैं. उसने तो शायद खुद भी नहीं देखी होगी आतिशबाज़ी. तो इसके जवाब में मैं एक छोटा सा उदाहरण देना चाहूंगा. मुझे न नॉन वेज से दिक्कत है न इसे खाने वालों से लेकिन मैं खुद नहीं खाता और इसका शाकाहार का जितना हो सके समर्थन भी करता हूं. अपनी शादी में मुझे नहीं पता था कि मम्मी-पापा क्या इंतजाम कर रहे हैं, कैसे कर रहे हैं, लेकिन मेरी एक रिक्वेस्ट थी कि शादी में नॉन वेज नहीं बनना चाहिए प्लीज़. बस सारी चीज़ें ‘टेकन केयर’ हो गईं. यही छोटा सा काम प्रियंका चोपड़ा भी कर सकती थीं. तब जबकि उनकी एक रिक्वेस्ट उम्मेद भवन तो क्या पूरे जोधपुर के लिए सर आंखों पर होती. और ये सवाल तो है ही कि किसी ने अपनी ख़ुशी के लिए जोधपुर के लोगों के स्वास्थ और जीवन से खिलवाड़ किया.

ये वीडियो सिप्ला नाम की दवाई बनाने वाली कंपनी का था. मुझे लगता है चाहे कितना ही अच्छा मोटिव रहा हो सिप्ला का लेकिन 1 दिसंबर की घटना के बाद उन्हें भी इस बारे में अपना पक्ष रखना चाहिए.

हमने अपने मन में या कुल मिलाकर समाज में, हर चीज़ को सही और गलत के पाले में रख दिया है. पाकिस्तानी का मतलब धोखेबाज, चाइना का मतलब सस्ता माल, और ट्रोलिंग मतलब किसी की बेइज्ज़ती. लेकिन ट्रोलिंग लोगों, खासतौर पर सेलिब्रिटीज़ पर चेक लगाने का कार्य भी बखूबी निभाती है. अतीत में ऐसे उदाहरण देखने मिले हैं. विराट कोहली का मामला अभी इतना पुराना नहीं हुआ है.

यूं ट्रोलिंग कई बार उतनी बुरी भी नहीं लगती. कई लोग ट्रोल हो रहे व्यक्ति के समर्थन में भी आ जाते हैं. हमने भी कई बार ऐसी ट्रोलिंग की जमकर निंदा. लेकिन अबकी बार मामला कुछ अलग लग रहा है.

बाकी आप लोग क्या समझते हैं हमें कमेंट में ज़रूर बताइएगा. और हां –

प्लीज़ कथनी और करनी में साम्य रखिए वरना ये जो पब्लिक है ये सब जानती है!


वीडियो देखें – 

किसान सब सरकारों से इतने नाराज क्यों रहते हैं, जान लीजिए –

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