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भारतीय टीवी का सबसे घिनहा सीरियल अब नहीं दिखेगा

सोनी टीवी के शो ‘पहरेदार पिया की’ पर चल रहा बवाल अंततः ख़त्म हो गया है. क्योंकि इनफॉर्मेशन और ब्रॉडकास्टिंग मिनिस्ट्री ने अब इस शो को बैन कर दिया है. ऐसा भारतीय टीवी के इतिहास में शायद ही हुआ हो, कि किसी टीवी शो को बैन किया गया हो. टीवी के प्रोग्राम, खासकर डेली सोप घर और परिवार के देखने के लिए बनाए जाते हैं. परंपराओं और संस्कारों को बढ़ावा देने का दावा करते इन सीरियल में बहुत कम ही गुंजाइश होती है कि इनमें बैन करने लायक कुछ मिले.

मगर ‘पहरेदार पिया की’ में दिखाया गया है कि एक 10 साल के बच्चे की शादी 20 साल की लड़की से कर दी जाती है. न ही सिर्फ शो में बाल विवाह दिखाया गया है, बल्कि 10 साल के बच्चे को अपनी पत्नी की मांग में सिंदूर भरते और सुहागरात की रस्म निभाते भी देखा गया था.

शो को देखकर कुछ लोगों को इनफॉर्मेशन और ब्रॉडकास्टिंग मिनिस्टर स्मृति ईरानी को ख़त लिखकर इस शो पर बैन की मांग की थी. जिसे स्वीकार कर लिया गया है.

शो के बारे में 

भारत-पाकिस्तान के बीच संबंधों में आई दरार की वजह से पाकिस्तानी कलाकारों को लेकर काफी हो-हल्ला हुआ और उन्हें इस देश से खदेड़ दिया गया था. उस दौरान जो सबसे बड़ा और विवादित नाम सामने आया था वो था अभिनेता फ़वाद खान का. फ़वाद ने हाल ही में पाकिस्तान में एक शो किया है, जिसका नाम है ‘नम’. यह शो एक ऐसे बच्चे के बारे में है जिसकी शादी पारिवारिक परंपरा के मुताबिक़ उससे बड़ी उम्र की लड़की से कर दी जाती है. हम भले ही पाकिस्तानी अभिनेता या कलाकारों को अपने देश से भगा दें, अपनी इंडस्ट्री में काम न दें. लेकिन उनके आइडियाज को कॉपी करना नहीं छोड़ते हैं. फ़वाद के उस शो के तर्ज़ पर ही भारत में भी एक शो शुरू किया गया था जिसका नाम था ‘पहरेदार पिया का’.

प्रोमोज में क्या था?

प्रोमो में दिखाया जाता है कि एक लड़की को 8-10 साल के एक बच्चे के साथ ब्याह दिया जाता है. उस सीन से पता लगता है कि उस लड़की को बच्चे की देखभाल के लिए लाया गया है. ये लड़की अपने पति की पहरेदार बन कर आई है और उसको सभी तरह की समस्याओं से बचाकर रखने का संकल्प लेती है. इस शो के लीड किरदार रतन और दिया का रोल क्रमशः अफ़ान खान और तेजस्वी प्रकाश निभा रहीं हैं.

दिक्कत कहां आ रही है?

सबसे पहली दिक्कत तो ये है कि ये बड़ा ही असहज लग रहा है कि एक 10 साल के बच्चे की शादी 18 साल की लड़की के साथ कर दी जाती है. हमने भारत में पहले भी बालिका वधू जैसे शो देखा है जो बाल विवाह को ख़त्म करने की बात करती हैं. लेकिन ये शो उससे भी एक कदम आगे है, क्योंकि इसमें एक बच्चे और एक बड़ी लड़की की शादी दिखाई गई है. और ऊपर से इसका टेलिकास्ट भी एक ऐसे चैनल पर होने वाला है जिसे बड़ी संख्या में लोग देखते हैं. भई आप किसे और क्या दिखाना चाहते हैं? आजकल इंडियन यूथ जो इतने विदेशी टीवी शोज देख रहा है ना, इसी वजह से. इंडिया में जब तक ऐसे शोज बनते रहेंगे तब तक हमें विदेशी टीवी शोज का मुंह ही ताकना पड़ेगा.

जहां तक बात एक महिला के पहरेदार बनने की है, तो उसके लिए उसे बच्चे से शादी करने की क्या जरूरत  है? वो काम तो वो ऐसे ही कर सकती है. इससे तो लोगों में ये संदेश जाएगा कि अगर कोई हाई प्रोफाइल मिनिस्टर या सेलेब्रिटी कुंवारा है तो अपने पहरेदार (बॉडीगार्ड) से शादी करले क्योंकि उसकी उससे बेहतर सुरक्षा शायद ही कोई और कर सकता है.

एक लड़की की मांग में सिंदूर भरते बच्चे की ये विडियो क्लिप बेहद डिस्टर्ब करने वाली है. इस सीरियल में दिखाई जाने वाली ये चीज़ ना सिर्फ गैरकानूनी है बल्कि चाइल्ड एब्यूज के दायरे में भी आ सकती भी है. क्योंकि बच्चे की शादी का फैसला पेरेंट्स द्वारा लिया गया है. क्योंकि भारत में शादी करने की उम्र लड़कियों के लिए 18 साल और लड़कों के लिए 21 साल है.

चाहे कितनी भी बुरी चीज़ हो अच्छी पैकिंग के साथ प्रेजेंट की जाए तो सबको भा ही जाती है. इस शो के मेकर्स भी ऐसा ही कुछ करने की कोशिश कर रहें है. अच्छे-अच्छे कपड़ों और गहनों में पैक करके ये सामाजिक कुरीति जो हमें परोसी जा रही ताकि वो समझ नहीं आए. इस शो के प्रोड्यूसर सुमीत मित्तल ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि ‘पहली बात कि ये एक फिक्शन शो है. ये एक ऐसी लड़की की कहानी है जिसने एक बच्चे या राजकुमार की सुरक्षा के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी है. उसकी सुरक्षा के लिए चौबीसों घंटे उसके साथ रहने लिए उससे शादी भी कर लेती है. वो उसकी पहरेदार है और दोनों का आपसी रिश्ता बहुत पवित्र है.’

एक तरफ जहां वो बता रहे हैं कि ये बाल विवाह के बारे में नहीं है, वहीं दूसरी ओर वो कह रहे हैं उनकी शादी हो गई और उनका रिश्ता बहुत पवित्र है. शायद उनके पवित्रता का पैमाना हमसे थोड़ा अलग है. और इस रिश्ते की पवित्रता से इनका क्या मतलब है, ये एक अलग ही समस्या है. प्रोड्यूसर साहब का एक्स्क्यूज भी उतना ही तर्कहीन है, जितना इस शो का कांसेप्ट.

मित्तल ने ये भी कहा, ”ये एक ऐसी कहानी है जिसमें एक महिला इस पुरुषवादी समाज कि ‘man of the house’ जैसे किसी भी कांसेप्ट को धता बताते हए एक पुरुष के संरक्षक की भूमिका निभाने जा रही है.” लेकिन पहरेदार बनना किस तरह की सामाजिक समानता है. और वैसे भी कोई ‘दोस्ती’ के इरादे से शादी करके अपने रिश्ते को पवित्र नहीं कह सकता.

इंडियन टीवी पहले से से ही बेहद बुरी स्थिति में था और इस शो के साथ वो अपने निचले स्तर तक पहुंच चुका था. प्रोमो में लड़के की पहरेदार अपने पति के लिए करवा चौथ का व्रत कर रही है और स्क्रीन पर नीचे लिखा हुआ आता था कि ‘ये कार्यक्रम किसी भी तरह से बाल विवाह को बढ़ावा नहीं देता’. अब आप खुद ही सोचिए कि ये क्या कहना और करना चाहते हैं?


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