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शॉर्ट फिल्म रिव्यू: पंडित उस्मान

यूट्यूब पर एक नई शॉर्ट फिल्म रिलीज हुई है. पंडित उस्मान. लीड रोल में हैं स्वानंद किरकिरे. उनका साथ निभा रहे हैं कुमुद मिश्रा, अनंत विधात, हीबा शाह और इश्तियाक आरिफ खान.

कहानी क्या है?

कहानी है नौ साल के छोटे से बच्चे की. जिसके पापा का हार्ट ट्रांसप्लांट होता है. और उसके बाद उनके तौर-तरीके और लहजा ही बदल जाता है. दाढ़ी रखने वाला एक मुस्लिम बाल मुंडाकर शिखा रख लेता है. सुबह-सुबह हनुमान चालीसा पढ़ने लगता है. जब उसके घरवालों को ये बदलाव दिखता है, तो सबकी पेशानी पर बल पड़ जाते हैं. मुहिम चलाई जाती है कि भई, जब से दिल बदला, इंसान बदल गया. ऐसे कैसे? पता करो दिल किसका था. पता करने पर जो सच सामने आता है, वो बहुत सरप्राइजिंग नहीं है. लेकिन आपको देखकर अच्छा लगेगा.

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घरवाले उस्मान में आए बदलाव को देखकर चौंक जाते हैं. (तस्वीर: यूट्यूब स्क्रीनशॉट/हमारा मूवी)

ये सारी बातें देखने वाले, और शायद ये आर्टिकल पढ़ रहे हम और आप जैसे लोगों को थोड़ी अजीब लगें. क्योंकि कई स्तरों पर ये स्टीरियोटाइप तोड़ती हैं. लेकिन एक नौ साल के बच्चे को इसमें कुछ गलत नहीं लगता. उसे अपने पापा बिलकुल नॉर्मल लगते हैं. पूरी फिल्म उसी के नज़रिए से चलती है. और ये फिल्म की सबसे खूबसूरत चीज़ों में से एक है.

नाम में क्या रखा है?

पंडित उस्मान. दो ‘अलग’ मानी जाने वाली पहचानों का एक साझा रूप. कॉमेडी ऑफ़ एरर्स की याद दिलाने वाली ये कहानी कई स्तरों पर खुलती है. एक तरफ हिंदू-मुस्लिम के बीच जो फाल्टलाइंस हैं, उसे फिल्म बहुत गहराई से नहीं छूती. लेकिन जितना दिखाती है वो आइडिया देने के लिए काफी है कि डायरेक्टर कहानी के ज़रिए क्या दिखाना चाहता है. एक चलता-फिरता पैराडोक्स जब लोगों के बीच आकर खड़ा हो जाता है, तो लोग कैसे रियेक्ट करते हैं, इसे बेहद हल्के-फुल्के अंदाज़ में दिखाया गया है. कहीं-कहीं पर बेहद ऑब्वियस चीज़ें कही जाती हैं, लेकिन कई बार प्रत्यक्ष का ही सही तरीके से परदे पर प्रमाण देना सबसे जरूरी होता है.

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लोगों को समझ नहीं आता कि इस व्यक्ति से डील कैसे करें. क्या इसका दिल निकाल दें? (तस्वीर: यूट्यूब स्क्रीनशॉट/हमारा मूवी)

फिल्म का तीया-पांचा

फिल्म लिखी, डायरेक्ट और प्रोड्यूस की है अकरम हसन ने. उन्होंने मिड-डे को दिए एक इंटरव्यू में बताया

“मुझे अभी भी याद है कि फिल्म शुरू कैसे हुई थी. मैंने स्क्रिप्ट पूरी कर ली थी और अलग अलग प्रोडक्शन हाउसेज से संपर्क करना शुरू किया. 3 महीने तक इधर-उधर भागने और प्रोडक्शन हाउसेज के चक्कर लगाने के बाद मैंने सोचा कि मैं इसे खुद ही बनाऊंगा. इस मामले में मैं जिसके पास भी गया स्क्रिप्ट लेकर, सभी ने मेरी मदद करने की हामी भरी. एक महीने में ही मेरे पास कुछ बेहद नामी कास्ट और क्रू मिल गए थे.”

2017 में कांसेप्ट के तौर पर उभरी ये फिल्म जनवरी 2018 में तैयार हो गई थी. लेकिन इसे रिलीज होते-होते जुलाई 2020 तक का समय आ गया. फिल्म में एक गाना है खुशामदीद, जो स्वानंद किरकिरे ने ही लिखा और गाया है. म्यूजिक डायरेक्टर शांतनु मोइत्रा हैं (पीके, थ्री इडियट्स वाले).

फिल्म आप यहां देख सकते हैं:

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