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‘ओमेर्टा’ की 15 बातें: हंसल मेहता की ये फिल्म देखकर लोग बहुत गुस्सा हो जाएंगे

साल 2018 की ये बहुत उत्तेजक फिल्म मानी जा रही है. विषय भी ऐसा है जो अब तक इंटरनेशनल फिल्मों में ही ज्यादातर आज़माया गया है.

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डायरेक्टर हंसल मेहता की ये फिल्म 20 अप्रैल को नहीं, अब 4 मई को रिलीज होगी. ‘ओमेर्टा’ आतंकवादी मानसिकता के अंदर जाती है और सच्ची घटनाओं से होकर गुजरती है. इसलिए फिल्म में हिंसा है और गालियां हैं. कुछ दृश्य दहशत पैदा करने वाले हैं. अब मेकर्स नहीं चाहते थे कि सेंसर बोर्ड इन्हें फिल्म में से हटाए, इसलिए बिना कट्स के पास करवाने के लिए वे दो हफ्ते इंतजार करेंगे. आइए जानते हैं इस बहु-प्रतीक्षित फिल्म के बारे में सबकुछ इन 15 बातों में.

1. फिल्म के नाम ‘Omerta’ के साथ उसका सह-वाक्य भी पढ़ा जाना चाहिए ‘A Brief History of Terrorism.’ यानी ‘आतंकवाद का संक्षिप्त इतिहास.’ ये फिल्म आतंकवाद और आतंकवादी के पैदा होने की प्रक्रिया पर खास ध्यान देगी, न कि टेरेरिज़्म के स्टीरियोटाइप्स पर.

2. ‘ओमेर्टा’ एक इटैलियन शब्द होता है जो अपराधियों और माफिया लोगों के बीच एक-दूसरे को लेकर वफादार रहने की एक सौगंध होती है. कि कोई कभी एक-दूसरे के अपराधों को लेकर पुलिस से कोई सहयोग नहीं करेगा.

3. अहमद ओमर सईद शेख़ की असल कहानी पर ‘ओमेर्टा’ बनी है. उसने 2002 में वॉल स्ट्रीट जर्नल के पत्रकार डेनियल पर्ल को पाकिस्तान में किडनैप करवाया और उनकी हत्या कर दी गई थी. उसी साल अदालत ने ओमर को मौत की सज़ा सुनाई लेकिन 15 साल बाद भी उसे फांसी नहीं दी जा सकी है और वो आज भी जिंदा है. ओमर की कहानी अविश्वसनीय है. पाकिस्तान मूल का ओमर लंदन में पैदा हुआ. लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में एडमिशन हुआ. लेकिन ये पढ़ाई छोड़ दी. वहां से वो चरमपंथ के रास्ते निकल गया.

पाकिस्तानी अदालत में पेशी पर जाते हुए ओमर शेख. (फोटोः avaz.ba)
पाकिस्तानी अदालत में पेशी पर जाते हुए ओमर शेख. (फोटोः avaz.ba)

1999 में जब इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट 814 को हाइजैक करके कंधार ले जाया गया था और हरकत-उल-मुजाहिदिन के जिन तीन आंतकियों को भारतीय जेलों से छुड़वा लिया गया था उनमें से एक ओमर भी था. बाद में सितंबर 2001 में अमेरिका में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में विमानों के जो हमले हुए उनमें भी ओमर का नाम आया.

4. ओमर के बारे में कहा जाता है कि वो एक ब्रिटिश इंटेलिजेंस ऑफिसर था जिसे ओसामा बिन लादेन और अन्य इस्लामी आतंकी समूहों के अंदर तक पहुंचाने के लिए ब्रिटेन और अमेरिका की एजेंसियों ने यूज़ किया. पाकिस्तान की ISI से भी उसके संबंध बताए जाते हैं. पाकिस्तान के पूर्व-राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ ने  अपनी आत्मकथा ‘इन द लाइन ऑफ फायर’ में ओमर के डबल एजेंट होने का ज़िक्र किया है.

ओमर (राव) लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स को बीच में छोड़ जब चरमपंथी विचारधारा के संपर्क में आता है और उसका हिस्सा बन जाता है. (फोटोः biff.kr)
ओमर (राव) लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स को बीच में छोड़ जब चरमपंथी विचारधारा के संपर्क में आता है और उसका हिस्सा बन जाता है. (फोटोः biff.kr)

5. डायरेक्टर हंसल मेहता को ये कहानी सबसे पहले एक्टर मुकुल देव ने 2005 में सुनाई थी. फिर 2007 में डायरेक्टर माइकल विंटरबॉटम की फिल्म ‘अ माइटी हार्ट’ रिलीज हुई जिसमें एंजलीना जॉली और इरफान खान ने भी काम किया था. जर्नलिस्ट डेनियल पर्ल की हत्या पर आधारित इस फिल्म को देखने के बाद हंसल ने मन पक्का कर लिया कि वे ओमर पर फिल्म बनाएंगे. मुकुल और उन्होंने मिलकर इसका स्क्रीनप्ले लिखा. हंसल का सोचना था कि इतनी फिल्में आई हैं जिन्होंने टेरेरिज़्म के बुरे असर पर बातें की हैं लेकिन वे दिखाना चाहते हैं कि टेरेरिस्ट लोगों के दिमाग में क्या चलता है, वे बनते कैसे हैं. स्टीरियोटाइप्स के परे.

6. 2013 में रिलीज हुई ‘शाहिद’ वो फिल्म थी जिसने डायरेक्टर के तौर पर हंसल और एक्टर के तौर पर राजकुमार को मुकम्मल पहचान दी. उसके बाद उन्हें मुड़कर नहीं देखना पड़ा. ये फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता और वकील शाहिद आज़मी की ज़िंदगी पर आधारित थी जो आतंकवाद के झूठे आरोपों में जेल में ठूंसे जाने वाले गरीब मुस्लिम युवकों के केस लड़ते थे. हंसल ‘शाहिद’ से पहले ओमर की कहानी पर फिल्म बनाना चाहते थे लेकिन तब उनके पास संसाधन नहीं थे. वे कहते हैं कि ‘शाहिद’ दरअसल ‘ओमेर्टा’ को बनाने की शो-रील थी.

फिल्म 'शाहिद' में ओमर सईद (प्रबल पंजाबी) और शाहिद आज़मी (राव) के किरदार.
फिल्म ‘शाहिद’ में ओमर सईद (प्रबल पंजाबी) और शाहिद आज़मी (राव) के किरदार.

‘शाहिद’ में ओमर का किरदार भी दिखता है जो जेल में शाहिद को बुरे रास्ते पर ले जाने की कोशिश करता है लेकिन शाहिद सच्चाई और अहिंसा का रास्ता लेता है. हंसल हैरान होकर कहते हैं कि शाहिद को मार दिया गया और ओमर आज भी जिंदा है और शायद जेल से छूट भी जाए.

7. ‘ओमेर्टा’ में राजकुमार राव ने ओमर का रोल किया है. 96 मिनट की इस फीचर ड्रामा में उनके अलावा केवल अरोड़ा, राजेश तैलंग और रूपिंदर नागरा अन्य भूमिकाओं में हैं. टिमोथी रायन हिकरनेल इसमें डेनियल पर्ल की भूमिका कर रहे हैं.

न्यू यॉर्क बेस्ड एक्टर हिकरनेल फिल्म में डेनियल के रोल में. ख़ुद डेनियल की फोटो जब वो आतंकियों की गिरफ्त में थे. (फोटोः आईएमडीबी)
न्यू यॉर्क बेस्ड एक्टर हिकरनेल फिल्म में डेनियल के रोल में. ख़ुद डेनियल की फोटो जब वो आतंकियों की गिरफ्त में थे. (फोटोः आईएमडीबी)

8. इसकी कहानी ब्रिटेन और भारत के अलावा ज्यादातर पाकिस्तान में सेट है. हंसल और उनकी टीम को शुरू से स्पष्ट था कि पाकिस्तान में शूटिंग का सोच भी नहीं सकते. क्योंकि ये कहानी ओमर के बारे में है जिसके पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई से भी लिंक हैं. ऐसे में क्रू की जान को खतरा है. इसलिए पंजाब और दिल्ली में पाकिस्तान की सारी लोकेशन फिल्माई गईं. फिल्म की प्रोडक्शन डिज़ाइन नील चौधरी ने की है. सिनेमैटोग्राफर हैं अनुज दीवान.

9. ‘ओमर्टा’ की एक शुरुआती फोटो नवंबर 2016 में हंसल ने शेयर की थी जब शूटिंग चल रही थी. इसमें ओमर का किरदार कमरे में बैठा नमाज अदा कर रहा है और पीछे दीवार पर ‘9/11 हाइजैक’ लिखा है जिसका इशारा 11 सितंबर 2001 को अमेरिका के ट्रेड टावर्स पर हुए हमले की ओर है जिसके बाद 2003 में अमेरिका ने ईराक पर हमला किया और अल कायदा के प्रमुख ओसामा बिन लादेन को मारने का मिशन शुरू किया. दीवार पर ये भी लिखा होता है, ‘एक अमेरिकी को किडनैप करना.’ और वो किडनैपिंग पत्रकार डेनियल पर्ल की होती है.

बीते साल नवंबर में हंसल मेहता ने फिल्म की ये शुरुआती झलक शेयर की थी.
बीते साल नवंबर में हंसल मेहता ने फिल्म की ये शुरुआती झलक शेयर की थी.

10. राव ने कहा है कि ‘ओमेर्टा’ उनका और डायरेक्टर हंसल का अब तक का सबसे विस्फोटक काम है. हंसल ने भी कहा कि “ये हमारा सबसे परिवर्तनकारी/कट्टर गठजोड़ है.”

11. राजकुमार ने ये भी कहा कि उनके निभाए सबसे जटिल किरदारों में से एक ‘ओमेर्टा’ में है. फिल्म में एक सीन है जिसमें ओमर शेख़ को पुलिस रिमांड पर लेती है. उसे उल्टा लटका दिया जाता है. फिर ओमर के कैरेक्टर को पीटा जाना था. इसके लिए राजकुमार ने पुलिस का रोल कर रहे एक्टर्स से कहा कि उन्हें सच में उतनी ही बर्बरता से पीटे. उन्होंने कहा कि वे चाहते थे सीन बिलकुल असली लगे. वे इस दर्द को महसूस करना चाहते थे क्योंकि इसी दर्द की वजह से ओमर मानसिक रूप से बहुत ताकतवर महसूस कर पाया. हंसल को उनका ये तरीका पसंद नहीं था पर उन्होंने सहमति दी और सीन ऐसे ही फिल्माया गया.

राजकुमार राव ओमर के किरदार में. (फोटोः ट्विटर/biff.kr)
राजकुमार राव ओमर के किरदार में. (फोटोः ट्विटर/biff.kr)

12. इस फिल्म के पीछे के विचार हंसल ने बताए हैं. उन्होंने एक इंटरव्यू में इस पर कहा, “हम हिंसा और चरमपंथ को एक नजरिए से देखते हैं लेकिन हम उसे समझते नहीं हैं. शहरों पर बम गिरा दिए जाते हैं और कभी उसकी असल तस्वीर दुनिया नहीं समझती कि ओमर जैसे लोग बनते कैसे हैं? पढ़े-लिखे, शिक्षित लड़के जो सिर्फ अन्याय से लड़ने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन शैतान बन जाते हैं. ये कहानी उसी शैतानियत को देखने की कोशिश है लेकिन उसे जज न करते हुए.” उन्होंने कहा है कि वे इस कहानी को कहते हुए ओमर का या किसी और का पक्ष नहीं लेते. पक्ष लेना क्यों जरूरी है? बुराई एक ऐसा इमोशन है जो बहुत स्टीरियोटाइप्ड हो गया है.

उन्होंने कहा, “मैं एक इंसान के तौर पर बुराई को कैसे देखूं? उसी जगह से मैंने एक बहुत महत्वपूर्ण जर्नी देखनी शुरू की. मैं गांधी के देश से आता हूं. जिनकी पूरी जर्नी एक निजी अन्याय से शुरू होती है. उनको उसका प्रतिकार करने का एक रास्ता मिल जाता है. लेकिन ओमर जैसे यंग लड़के जब प्रतिकार का रास्ता चुनते हैं तो वो उस जाल में फंस जाते हैं जो आसान है. वो एक ऐसी व्यवस्था है जो उस जैसे नौजवानों को पैदा करती है. इसका दस्तावेजीकरण करना बहुत जरूरी था. यही व्यवस्था एक शाहिद आज़मी पैदा करती है और इसी से दस ओमर पैदा होते हैं.”

ओमर (राव) कैसे धार्मिक कट्टरपंथ में घुसता चला गया ये फिल्म में दिखेगा. (फोटोः biff.kr)
ओमर (राव) कैसे धार्मिक कट्टरपंथ में घुसता चला गया ये फिल्म में दिखेगा. (फोटोः biff.kr)

13. राजकुमार ने अपने किरदार के बारे में कहा है “एक्टर होने के नाते हमें कैरेक्टर की सोच में, उसके व्यक्तित्व में घुसना औऱ जीना पड़ता है. लेकिन मैं ओमर की विचारधारा में यकीन नहीं रखता हूं. ये लोग जो भी कर रहे हैं मैं उसकी कठोरता से निंदा करता हूं. इनकी हिंसा की. लेकिन अगर मैं एक कैरेक्टर प्ले कर रहा हूं तो मुझे उसमें विश्वास करना ही पड़ेगा.”

14. ओमर सईद के कैरेक्टर में घुसते हुए राजकुमार को शॉकिंग अनुभव हुआ. अपने कैरेक्टर की तैयारी के लिए वो रोज़ सुबह उठकर बीबीसी सुनते थे ताकि ओमर का ब्रिटिश एक्सेंट हासिल कर सकें. उसी दौरान पैरिस में आतंकी हमला हुआ और ब्रेकिंग न्यूज़ आई. तब तत्क्षण राजकुमार ने मन ही मन बोला, “Well Done!” यानी शाब्बाश! उसके बाद राजकुमार एकदम से चौंके और तुरंत खुद से कहा, “नहीं! ये नहीं चलेगा! ये गलत है! और तुम इस तरह से नहीं सोच सकते हो.” लेकिन फिर कहीं न कहीं वे खुश भी थे इस बात से कि वो ओमर के कैरेक्टर वाले स्पेस में जीने लगे थे.

शाहिद आज़मी और ओमर सईद शेख. दोनों व्यवस्था और अन्याय की वजह से हिंसा को मोड़ तक पहुंचे लेकिन शाहिद वहां से लौट आए और ओमर उसके एक्सट्रीम में चला गया.
शाहिद आज़मी और ओमर सईद शेख. दोनों व्यवस्था और अन्याय की वजह से हिंसा को मोड़ तक पहुंचे लेकिन शाहिद वहां से लौट आए और ओमर उसके एक्सट्रीम में चला गया. इन्हीं दोनों ध्रुवों पर हंसल ने दो फिल्में बनाईं – ‘शाहिद’ (2013) और ‘ओमेर्टा’ (2018).

15. ‘ओमेर्टा’ को देखने के बाद लोग बहुत ज्यादा गुस्सा हो जाएंगे. ऐसा डायरेक्टर हंसल का कहना है. उन्होंने कहा है, “ये फिल्म पश्चातापहीन राजनीतिक हत्याओं के बारे में है. इसमें उन लोगों और संस्थानों का सीधा नाम लिया गया है जिनकी वजह से इस तरह का चरमपंथ पैदा होता है. ये फिल्म देखकर लोग गुस्सा होंगे और रिएक्ट करने से रोक नहीं पाएंगे खुद को. ओमेर्टा देखने के बाद एक गुस्सैल डिबेट शुरू होगी. मैं लोगों को उत्तेजित करना चाहता हूं ताकि वे सोचें और डिबेट करें और मौजूदा व्यवस्था को चेंज करें. इस मसले का जवाब वो नहीं हो सकता जो अमेरिका के नए राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप सुझा रहे हैं. कि जाकर अफगानिस्तान पर बम गिरा दो. उससे तो और ज्यादा ओमर सईद पैदा होंगे.”

फ़िल्म का ट्रेलर ये रहा:


(Article first published on October 17, 2017.)

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